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Archive for March 21st, 2010

नींद नही आगोश

March 21st, 2010 No comments

नींद नही आगोश

 

कहाँ याद तेरी मुज़े
सोने देती है
,

कभी इस ओर, तो  कभी उस पार|

 

आज तू नहीं तो तोड़ा
गम मैं रोज पी लेता हूँ
,

बिना ज़रूरत थोड़ा
लिख लेता हूँ
|

 

नही आज ज़रूरत ज़माने
को मेरे दर्द की
,

बस तेरे दामन को
छू
, थोड़ा जी लेता हूँ|

 

कहाँ नसीब मुज़े
तेरे मन का
,

थोड़ा बहा स्याही, तेरी तस्वीर को छू लेता हूँ|

 

(अब ग़म भी नाकाम है, क़ि मेरी रूह से
वो भी अंजान हैं)

 

क्या है जो हो गया
गम से परे
?

अंजान, तेरी याद को पिरो ख़ुशी लिख लेता हूँ,

 

 

है रात आज फिर क़ायम

तेरी याद को ख्वाब
में लिख लेता हूँ
,

लिख एक कविता तेरे
नाम क़ी
,

समंदर, मैं आज फिर सो लेता हूं

……….अपूर्व

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