rediff.com
Home > Navi shuruat > निरंतर

निरंतर

एक दिन मिला वो,
कुछ पल भीगने के बाद.
थोड़ा पसीने में,
थोड़ा बारिश में,
एक दिन मिला मुझे 
कुछ पल भीगने के बाद|



एक मौसम खुश्क,
एक बादल थका,
थोड़ा बरसता, 
थोड़ा चमकता सूरज के साथ,



एहसास हुआ,
ख्याल हुआ,
भीगने का मौसम
रोज़ मेरा भी मुकाम है
डूबने का मौसम जब
रोज़ मेरा भी ख्याल है|



एक पल को रोज़ 
नहाने का क्यों न 
आरमान मैं हो जाउ



काफ़ी हुआ कश्ती का सफ़र,
तैरते हुए कल फिर
रण पार हो जाए|



……………………..अपूर्व
  1. No comments yet.
You must be logged in to post a comment.
Copyright © 2014 Rediff.com India Limited. All rights Reserved.  
Terms of Use  |   Disclaimer  |   Feedback  |   Advertise with us