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Archive for June 6th, 2010

तू भी आशिक़ है

कुछ पल होते हैं 
दिल में संजोने के लिए,
किस और से जिंदगी तू 
मुस्कुराहट को भेजती है|


टूटे हुए तारे को
संभालने का हुनर 
है तेरी बहती हवा मैं,
किस ओर  से जिंदगी तू 
परिंदों को भेजती है|

शिकायत  किस पल के लिए रखूँ
दर्द को सहलाना तेरी ख़ासियत है
किस ओर से जिंदगी तू
खुशियों को भेजती है|
  

हूँ मैं खबरदार,
कि कल फिर तू 
मुज़े मैदान में बुलाएगी,
हूँ मैं तैयार 
कि कल फिर तू
तूफ़ानो को बुलाएगी|


है आशिक़ तू मेरे समंदर की
शायद  इसलिए  मैं, तेरी 
ज़िंदगी का हूँ कायल|


दिल मैं है इश्क़ तेरा,
एक और नब्ज़ मेरी तेरे नाम,
की आज के लिए,
एक और वक़्त तेरे नाम|


साथ तेरे हूँ मैं,
जिस भी ओर जिंदगी तू 
मुझे बुलाएगी||

……अपूर्व
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एक मिट्टी और एक क्यारी

एक पल के बाद,
बिछड़ी उंगली से दूर,
खड़ा एक समंदर, आज बरसने को आया,
खड़ा एक क्यारी के पास,
एक बादल मेरे हृदय के पास आया.
सोच कर चला था, थोड़े आँसू बाँटेगा
दिल में था कुछ पल दर्द के, साथ मेरे काँटेगा.
नज़ारा था लेकिन कुछ खिला ख़िला,
आँसू नही, कुछ पल की थी हँसी, 
तैरती मिट्टी की खुश्बू,
और खिलखिलाते कुछ पल|
थी नही ज़रूरत आँसुओं की
बस कुछ बूँदो का इंतज़ार था 
लेकिन दिल कहाँ मानता है,
दर्द हो जितना, खुशियों में बह जाता है|
माँगने को बहुत है लेकिन,
आज का दिन, 
है खूबसूरत, 
ए दिल यह पल यहीं 
दिल में बसा ले,
बरस तू दिल को खोल,
की आज मैं भी साथ,
तेरी हँसी के हूँ तैरने वाला,
कि दर्द तो हिस्सा है पल-पल की ज़िंदगी का
इस हँसी को समंदर 
दिल में समा ले||
……अपूर्व
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