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तू भी आशिक़ है

कुछ पल होते हैं 
दिल में संजोने के लिए,
किस और से जिंदगी तू 
मुस्कुराहट को भेजती है|


टूटे हुए तारे को
संभालने का हुनर 
है तेरी बहती हवा मैं,
किस ओर  से जिंदगी तू 
परिंदों को भेजती है|

शिकायत  किस पल के लिए रखूँ
दर्द को सहलाना तेरी ख़ासियत है
किस ओर से जिंदगी तू
खुशियों को भेजती है|
  

हूँ मैं खबरदार,
कि कल फिर तू 
मुज़े मैदान में बुलाएगी,
हूँ मैं तैयार 
कि कल फिर तू
तूफ़ानो को बुलाएगी|


है आशिक़ तू मेरे समंदर की
शायद  इसलिए  मैं, तेरी 
ज़िंदगी का हूँ कायल|


दिल मैं है इश्क़ तेरा,
एक और नब्ज़ मेरी तेरे नाम,
की आज के लिए,
एक और वक़्त तेरे नाम|


साथ तेरे हूँ मैं,
जिस भी ओर जिंदगी तू 
मुझे बुलाएगी||

……अपूर्व

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