तू भी आशिक़ है
June 6th, 2010
कुछ पल होते हैं
दिल में संजोने के लिए,
किस और से जिंदगी तू
मुस्कुराहट को भेजती है|
टूटे हुए तारे को
संभालने का हुनर
है तेरी बहती हवा मैं,
किस ओर से जिंदगी तू
परिंदों को भेजती है|
शिकायत किस पल के लिए रखूँ
दर्द को सहलाना तेरी ख़ासियत है
किस ओर से जिंदगी तू
खुशियों को भेजती है|
हूँ मैं खबरदार,
कि कल फिर तू
मुज़े मैदान में बुलाएगी,
हूँ मैं तैयार
कि कल फिर तू
तूफ़ानो को बुलाएगी|
है आशिक़ तू मेरे समंदर की
शायद इसलिए मैं, तेरी
ज़िंदगी का हूँ कायल|
दिल मैं है इश्क़ तेरा,
एक और नब्ज़ मेरी तेरे नाम,
की आज के लिए,
एक और वक़्त तेरे नाम|
साथ तेरे हूँ मैं,
जिस भी ओर जिंदगी तू
मुझे बुलाएगी||
……अपूर्व