rediff.com

Archive

Archive for January 8th, 2011

मैं सिर्फ काग़ज़ नहीं

January 8th, 2011 No comments

कितनी ही बार भूल जाता हूँ
कि हूँ मैं भी
एक मामूली सा इंसान,

कितनी ही बार भूल जाता हूँ
कि हूँ मैं भी
बस मे घूमने वाला एक इंसान,

कितनी ही बार मूंद लेता हूँ
मैं आँखें, भूल कर  कि हूँ मैं भी
रोज़ कमा कर खाने वाला इंसान

कितनी ही बार गाढ़ देता हूँ मैं
सच को, भूल कर कि हूँ मैं भी
खोया हुआ एक आम हिन्दुस्तानी.

लेकिन हर बार मिलता है सुकून,
कुछ मेरी रगों में बहते खून को
कि भूल कर मैं क्या हूँ,
कि भूल कर मैं  क्या था,

लिख रहा हूँ एक कहानी,
जो कहती है,
जिंदगी कोई कितनी भी लिख ले हमारी,
हर मोड़ पर कदम, मेरे हैं,
हाँ!! कदम मेरे हैं|

….अपूर्व

मैं सिर्फ काग़ज़ नहीं

Categories: Born From Obsession, Poetry Tags:
Copyright © 2015 Rediff.com India Limited. All rights Reserved.  
Terms of Use  |   Disclaimer  |   Feedback  |   Advertise with us