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जवाबों से दूर

January 11th, 2011
मैं कौन हूँ,
है किस मोड़ पर समंदर,
पूछ न मुझसे,
मैं खुद अब रास्तों को नही पहचानता|
किस मोड़ पर हूँ खड़ा,
किस ज़मीन पर हैं मेरे कदम,
किस ओर है मंज़िल  का सफ़र,
पूछ न मुझसे,
मैं खुद अब रास्तों को नही पहचानता|
लेकिन अगर बाँटने की है हसरत,
कुछ पल, और कुछ खुशियाँ,
हाँ, तो मैं तैयार हूँ,
मेरे बस्तो में भरी 
हर मुस्कुराहट का तू हकदार है
लेकिन कोई सवाल ना करना,
मैं हूँ बेख़बर,
पूछ न मुझसे,
मैं खुद अब रास्तों को नही पहचानता|
….अपूर्व
जवाबों से दूर


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