“कल तक जो चेहरा मुझसे था अजनबी
बन गया जाने कैसे मेरी ज़िंदगी
बनके लहू नसों में बहने लगा
रूह बनकर ज़िस्म में रहने लगा
हर घड़ी जो ख्वाबों में साथ थी
वो तुम ही तो थी मेरी ज़िंदगी
तेरे साथ चलना है अब उम्र भर
खुशियों की बगिया हो या हो कांटो की डगर
पाकर तुझे झूमने लगी ज़िंदगी
अंधेरी राहों में जैसे हो गयी रोशनी
लेकर बहारें साथ अपने आई हो तुम
होने लगा किस्मत पे अपने यकीन
तेरा साथ मिले हर जन्म ये दुआ है मेरी
तू वजह जीने की, तू ही मेरी ज़िंदगी
अब ना होना मुझसे तू कभी अजनबी
तू एहसास मेरा, तू ही ‘प्रीत’ है मेरी”
SHWETA***
Kya mangu khuda Se tumhe pane k bad,
kiska karu intezar tere aane k bad,
kyo dosto k liye jaan dete hai
log,mujhe malum hua tumhe dost banane k bad..