“” प्रेमी - प्रेमिका “” मैं जुगनू तो तुम ज्योति हो, मैं तांबा तो तुम मोती हो,
कैसे मिलन हो रानी तुमसे, मैं जगू तो तुम सोती हो ,
मैं ठेला तो तुम गाड़ी हो , मैं फटी पैंट तुम सारी हो ,
तुम सुंदर फूल मैं कांटा हूँ,तुम मधुर स्पर्श मैं चाँटा हूँ,
मैं गरीब देश का हूँ किशान, तुम किसी अमीर की पोती हो,,
कैसे मिलन हो रानी तुमसे, मैं जगू तुम सोती हो||
मैं चकोर तुम चन्दा हो, मैं बोझ तुम कंधा हो,
मैं तबला तुम सारंगी हो, मैं खरबूजा तुम नारंगी हो,
ये कैसी बिडंबना जीवन की , मैं रोता तुम हंसती हो ,
कैसे मिलन हो रानी तुमसे, मैं जगू तुम सोती हो ||
मैं दरिया तुम सागर हो,मैं बूँद-2 तुम गागर हो ,
मैं निर्बल तुम रणचंडी हो, मैं ठेला तुम मंडी हो,
मैं बस में हूँ तुम रेल में हो, मैं पॅसेंजर तुम मेल में हो,
मैं एक अज़ान सा रही हूँ, तुंजनी-मानी हस्ती हो ,
कैसे मिलन हो रानी तुमसे , मैं जागू तुम सोती हो||
मैं बत्तेर तुम तितर हो, मैं बाहेर हूँ तुम भीतर हो,
मैं चिता तुम शेरनी हो,मैं तोता तुम मोरनी हो ,
मैं धरती पर तुम वायुयान में, कितनी अच्छी लगती हो,
कैसे मिलन हो रानी तुमसे , मैं जागू तुम सोती हो||
मैं पगडंडी तुम रास्ता हो, मैंफूल तुम गुलदस्ता हो,
मैं साईकल तुम स्कूटर हो, मैं रिक्शा तू मोटर हो,
मैं नीचे धरती पर बैठा , तुम उँची कुर्सी पर होती हो,
कैसे मिलन हो रानी तुमसे , मैं जागू तुम सोती हो||
मैं मक्खी तुम मधुमक्खी हो,मैं कसैला हूँ तुम खट्टी हो,
मैं बगुला तुम राजहंस हो, मैं सैनिक तुम रजबांश हो ,
मैं खड़ा हुआ गमले में पौधा ,तुम तितली बन इतराती हो,
कैसे मिलन हो रानी तुमसे , मैं जागू तुम सोती हो||
kaise milan ho rani. bahut achche anil bhai
you write very good you write always like this…