



असुंदर !!
मैं ?
तुमने अपनी नज़र का आईना दिया
देख मैंने अपने भीतर ही उसे बसा लिया
बार बार खुद को देखती
कहती…
असुंदर !!
हाँ, मैं असुंदर
और कोई आईना कहाँ मुझे रास आया !!
चिड़िया
फव्वारें में भरे पानी में देखती
कूदती फुदकती
चीं चीं कर चहेकती
कैसे कैसे पोज़ देती…
जैसे फोटो-शूट करवा रही हो !!!
और बार बार खुद को देख कहती…
सुन्दर !!
मैं कितनी सुन्दर !!
भीतर लगा
असुन्दरता का आईना
जट से मैंने तोड़ दिया
खुद को आज़ाद कर लिया
मैं
खुद को देखती हूँ
मुस्कुराती हूँ
खिलखिलाती हूँ
थोडा सज-सवंरती हूँ
झरा सी शर्माती हूँ
और खुद से कहती हूँ…
सुन्दर !!!
मैं कितनी सुन्दर !!!
~ ख्याति






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it’s funny in a way..but lovely from every other angle..:)