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August 8th, 2011 by Khyati Shah Leave a reply »

भीतर इतना अँधेरा क्यूँ है ?
उदासी का यहाँ डेरा क्यूँ है ?
उजाले की चाह में खुद को जलती हूँ
घर में सम्शान का बसेरा क्यूँ है ?

~ख्याति


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