



एक तस्वीर तस्सव्वुर में उभर आती है…
पास जाऊ के पल में ओजल हो जाती है…
धुंधली सियाह ख़ामोशी मुझमे पिघलती…
कोरे कागज़ पर उतर कविता बन जाती है…
~ख्याति






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