सालों से ठहरा है
क्या पता क्यूँ ?
कहीं कोई गति नज़र नहीं आती
सुना सुना सा है क्यूँ ?
दिन के चारो पहर एक से ही रहे
हवा भी शुष्क है क्यूँ ?
साँसे यूँ तो चलती है !!!
नब्ज़ जमी सी लगे क्यूँ ?
~ख्याति ♥
सालों से ठहरा है
क्या पता क्यूँ ?
कहीं कोई गति नज़र नहीं आती
सुना सुना सा है क्यूँ ?
दिन के चारो पहर एक से ही रहे
हवा भी शुष्क है क्यूँ ?
साँसे यूँ तो चलती है !!!
नब्ज़ जमी सी लगे क्यूँ ?
~ख्याति ♥