ज़ख्मो की तू यूँ नुमाइश ना कर
घावों को तू यूँ खुल्ला ना कर
मरहम कोई क्या लगाएगा
जूठी आस लिए खरोंचा ना कर
~ ख्याति ♥
बात बात में तेरी बात निकलती है …
भीतर इतना अँधेरा क्यूँ है ?
उदासी का यहाँ डेरा क्यूँ है ?
उजाले की चाह में खुद को जलती हूँ
घर में सम्शान का बसेरा क्यूँ है ?
~ख्याति
कुछ अनकही
मैं जानती हूँ की तू मेरा नही
पर तेरी याद सिर्फ मेरी है
इस बात से तुम्हें इनकार भी तो नही
जब आईना देखती हूँ
खुद में तुम्हें भी तो पाती हूँ
इस बात से आईने को ऐतराज़ भी तो नही
भले ही लाख दर्द तुमने मुजको दिए
तुम्हें प्यार नही
ये तुम कहते भी तो नही
न सिंदूर बिंदी मंगलसूत्र न मेंदी न फेरे
ये दिल का रिश्ता जन्मजन्मांतर का
ये मानने से तुम मुकरते भी तो नही
तेरे प्यार के दर्द को जब मैं कलम से उतरती हूँ
हर अल्फाज़ से टपकते मेरे आँसू
पीने से तुम चूकते भी तो नही
इश्क़ के मरे दो ~ मैं और तुम
एक होते हुए भी “हम” कहलाते भी तो नही
______________________Khyati…
Har wafaa ko wafaa mile yeh jaruri to nahi
Gam sey marnewale ko kafan kahaan milta hai !!!
______________________________khyati…
Abhi janaazaa uthaa nahi
Ki log kehte hai ki main Zindaa hoon..!
Zindagii ka to main maaraa huaa hoon
Lagataa hai
Kuchh saanso ka hisaab adhuraa hai
Ki log kehte hai ki main Zindaa hoon..!
Apano ne dil pe chalaaye khanjar
Hansii main yun dard chhupaye hue hoon
Ki log kehte hai ki main Zinadaa hoon..!
________________________khyati…
अब इन आँखों ने ख्वाब सजाना छोड़ दिया है…
कहते है मूंडदों की आँखें कोरी होती है…
____________________________khyati…
अपने जीतेजी ही अपनी आँखों का दान करते जाइये.
ताकि आपके बाद आपकी आँखें किसी के सपनों में रंग भर सके.