30 Nov 2009 @ 5:52 PM 
टेकयुग…!!!



क्या ज़माना था…!!!

कभी गली के नुक्कड़ पे

तो कभी चाय की लारी पे

मिले थे दोस्त

वोह कॉलेज की कैन्टीन

मस्ती भरा माहोल

कभी घर की छत पर

मिलके सब करते थे पार्टी

रात के बारह बजे

डोर बेल बजती


बर्थ डे विश करते


खूब हल्लागुल्ला शोर मचाते 

वोह नाईट-वेर में केक-कट करती फोटो !!!

वाह…… कितने मस्ती भरे सुहाने दिन थे



आज ज़माना कितना बदल गया…!!!

चेट रूम में मिलते है दोस्त

दूर देशावर में बैठे


अलग अलग भाषा बोलते


अनजान प्रदेश के

न देखा न कभी मिले हुए

पलभर में मित्र बन जाते है…!!!

साथ बैठ अब चाय-काफ्फी पिने की बात कहाँ रही

वोह पुराने दोस्तों का अता-पाता ही गुम है…!!!

हाँ वो सोसिअल नेट्वोर्किंग साईट पर मिल जाते है…!!


लिफ्ट में मिलते पडोशी को


“कैसे है ?” पूछने ला संबंध भी कहाँ…?

नेट पर अनजान दोस्तों से

“HOW WAS YOUR DAY…?”

रोज़ पूछना चुकते नहीं…!!!

बर्थ डे पर खूब सारे SMS और e-card मिलते है


ये मोबाइल कैलंडर सब याद रखता है…!!!!




ये ज़माना कितना फास्ट है…!!!

नेट पर चेट करते

इटली की छोरी और गुज्जु छोरा

मिले बिन हो गया प्रेम बहुत गहरा

छोरी छप्पन की छोरा सोला बरस का…!!!

“रब ने बना दी जोड़ी………..”


ये ज़माना…………………….……..


पति-पत्नी की अपनी अलग अलग लाइफ है

नाम बदल नेट पर चोरी-छुपे दोनों के प्रेमप्रकरण है

भगवान् भी क्या खिलाड़ी है….!

नेट पर डेट में आमने सामने पति-पत्नी है….!!!

“राम मिलाई जोड़ी……….”


ये ज़माना…………………….………


यहाँ पल में दिल मिलते इ-फूल खिलते

और घड़ीभर में हो जाता इ-ब्रेक अप

सेड सोंग एक पूरा बजा नहीं वहाँ फिर दिल जुड़ जाता…!!!

“छोटी सी Fevi Kwic बस ५ रुपैये में……….”


ये ज़माना कितना फास्ट  है……!!!


कलयुग सतयुग की छोडो बाते हुई पुरानी

समज लो जी इ आया नया टेकयुग…!!!

_______________________khyati...




Tags Categories: Friends Posted By: Khyati Shah
Last Edit: 01 Jan 1970 @ 05 30 AM

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