



सालों से ठहरा है
क्या पता क्यूँ ?
कहीं कोई गति नज़र नहीं आती
सुना सुना सा है क्यूँ ?
दिन के चारो पहर एक से ही रहे
हवा भी शुष्क है क्यूँ ?
साँसे यूँ तो चलती है !!!
नब्ज़ जमी सी लगे क्यूँ ?
~ख्याति ♥




एक नाम हूँ फकत,
जो कल मिटा जाएगा
एक सोच में जुलस्ती आग हूँ,
जो कल बुज़ जाएगी
एक लहू में बहती याद हूँ,
जो कल थम जाएगी
एक आँखों में चमकता तारा हूँ,
जो कल टूट गिर जायेगा
और तो कुछ नहीं मैं,
कि तेरे ज़हेन में ठहर जायेगा !!!
~ख्याति ♥




एक तस्वीर तस्सव्वुर में उभर आती है…
पास जाऊ के पल में ओजल हो जाती है…
धुंधली सियाह ख़ामोशी मुझमे पिघलती…
कोरे कागज़ पर उतर कविता बन जाती है…
~ख्याति




ला, ज़ाम मैं भी उठा लेती हूँ
अपने ग़म मैं भी डूबा देती हूँ
सनम से शायद शराब वफादार हो !!
चल, दर्द को यूँ मैं भी भुला लेती हूँ
~ख्याति




तुम अपना रास्ता छोडो ऐसा मैंने कहा तो नहीं….
मुझे गुमराह ना कर, बस इतनी सी गुज़ारिश है…..
~ख्याति




तू ज़ख्मों की तलाश ना कर…
हर दाग़ पे तू सवाल ना कर…
जो है नहीं उसकी बात क्यूँ हो ?
बिना मतलब खरोंचा ना कर…
~ख्याति




सवाल कुछ मुझे भी है…
जवाब की आस मुझे भी है…
किस बात पे हूँ बेचैन…
इंतज़ार ख़त का मुझे भी है…
काश जान पाती हाल उनका…
विरह से जलन मुझे भी है…
बिच मौन जुलस्ता रहा…
लफ्जों की तलाश मुझे भी है…
भीतर दूरियाँ खलती रही…
एक नज़र की प्यास मुझे भी है…
~ख्याति




तेरी हर निशानी मिटादी मैंने
पर खुद को कहाँ मिटा पाई
ज़बान तो खामोश हो गई
भीतर लिखा तेरा नाम कहाँ मिटा पाई
मुह मोड़ना अच्छे से सिख लिया मैंने
पलकों तले से तेरा चहेरा कहाँ मिटा पाई
यादें नश्तर बन चुभती रही है
मेरी साँसों में घुली तेरी साँसें कहाँ मिटा पाई
खुद की तलाश में भटकती रही
मुझमे बसा तेरा अक्स कहाँ मिटा पाई
हाँ अब मुझमे तेरा इंतज़ार नहीं
राह पर बिछी नज़रें कहाँ मिटा पाई
~ख्याति




ऐ चाँद
माहरा सन्देश माहरे साजन तक पहुंचा दे
उनकी याद मोहे पल पल रुलावे,
फागनियो मोहे बड़ो फीको सो लागे,
लाल गुलाल माहरो मन सुल्गावे,
केसरियो केसुड़ो तन मा आग लगावे,
ताहरी याद मोहे पिली कर जावे
नैन बहे अंगिया गीली हो जावे
होली के रंग माहरा अंग जलावे
साजन गर ताहरो हाल भी हो माहरे जैसो
अबील से तू चाँद को रंग दीजो
चाँद को और खिला निखरा पाके समज जाणु सु
चाँदनी चुनर ओढ़ ताहरे प्रेम से मैं रंग जाऊ सु
~ ख्याति




मैं और तुम
साथ ही तो थे
बिच हमारे
गहरा सन्नाटा
साँसों का टकराना
एकदूजे में घुलना
नज़रों का मिलना
पलके जुकाकर नज़रे चुराना
कुछ गर्माहट सी थी
बगैर बात कोई बात थी
चुप मैं थी
चुप तुम भी थे
छुपाना भी था
अनकही जतानी भी थी
कहूँ ना-कहूँ की कशमकश
ये सन्नाटा और भी घना होता…
एक साथ तेरा-मेरा होना
सन्नाटा निगल गया
निशब्द से हम
तन्हाई चुभने लगी
~ख्याति


More Options ...
Categories
Tag Cloud
Blog RSS
Comments RSS

Void « Default
Life
Earth
Wind
Water
Fire
Light 