आज एक नेशनल न्यूज़ चैनल की खबर ने मुझे जन्जोड़ कर रख दिया है.
” कानपुर शहर में आज एक नवजात बच्ची को कूड़े के ढेर में रोते हुए पाया गया जिसे कुत्ते नोच रहे थे और ठंड से बच्ची का बुरा हाल था. “
सच
कहूँ तो अब ऐसी खबरें जैसे आम होती जा रही है. आये दिन अखबारों में हम
नवजात शिशु को तरछोड़े जाने की खबर पढ़कर भूल भी जाते है. पर आज पता नहीं
क्यूँ मेरे अंदर इंसान जाग गया !!! और मुझे इस खबर ने काफी उपसेट कर दिया.
क्या कारण हो सकते है ?
१) बिन-बियाही माँ /अनचाहा माँ बनना
२) बच्ची का लड़की होना
३) बलात्कार के फल स्वरुप पैदा हुआ बच्चा
यूँ तो ऐसे कारण हम जानते ही है. आसानी से बोल भी देते है की झरुर कुछ ऐसे हालत रहे होंगे तभी…………..
सिर्फ कारण का जानना काफी नहीं. कही ना कही इस का निवारण भी तो करना होगा. कब तक हम खबरों को अनदेखा करते रहेंगे ?
मैं
खुद एक औरत होने के नाते इतना तो कह सकती हूँ की किसी भी औरत के लिए अपना
बच्चा यूँ छोड़ना आसान नहीं. कही कोई मज़बूरी उस पर इस कदर हावी हुई होगी.
और कई किस्सों में माँ को तो बच्चा मरा हुआ पैदा हुआ था यही कहा जाता
होगा. वो जानती भी न होगी की जिस बच्चे को उस ने नौ महीने अपनी कोख में
अपना खून दिए सींचा है उस के पैदा होते ही क्या हाल कर दिए गए है !!!
ऐसे में हम ज़िम्मेदार किसे कहेंगे ? वो माँ मजबूर क्यूँ हुई की उसे अपने नवजात शिशु को यूँ तरछोडना पड़ा ?
क्या आप को कहीं बदलाव की जरुर नहीं नज़र आती ? या आज फिर एक खबर देखकर फिर से अन-देखि कर दी जाएगी ?
यूँ तो ऐसी खबर मिलते ही हम अक्सर माँ को बदचलन आवारा और ना जाने क्या क्या कह अपना पीछा छुड़ा लेने में माहिर हो गए है !!!
गर प्रेमी ने धोखा दिया तो कहेंगे…. ” आवारा शादी से पहले ही मुह काला कर आई है ” …..
जैसे
प्यार करना पाप हो गया और नैतिक मूल्यों को निभाने का ज़िम्मा सिर्फ औरत का
ही है…!!! क्यूँ ? सारा दोष औरत पे क्यूँ डाल दिया जाता है ? गर लड़की
चाहे तो भी अकेले बच्चा पाल ना सके ऐसे हालात समाज के नाम पर बना दिए जाते
है. ऐसे में वो क्या करे ? कहाँ जाये ? क्या रास्ता छोड़ते है हम उस के
लिए…. आत्महत्या करो या फिर अबोर्ट करवा लो वो भी अगर मुमकिन ना हो तो
यूँ बच्चे को तरछोड दो !!!
और
एक कारण — बच्ची का लड़की होना !!! आज भी समाज में संतान हो तो लड़का…
पुत्र ही कुलदीपक और ना जाने क्या क्या कहा जाता है. भले ही कैसा भी नकारा
निकले पर लड़का लड़का ही है !!! और लड़की हुई तो मुह बिगाड़ा जाता है.
गवर्मेंट ने भले ही गर्भ-परिक्षण और गर्भपात को निषेध करार कर दिया हो पर
हम सब जानते ही है की हर गाँव शहर में आज भी गर गर्भ-परिक्षण होते है और
बड़ी ही आसानी से गर्भपात भी करवा दिए जाते है.
( कुछ दिन पहले ही उस पर इस विषय पर एक गुजराती कहानी पढ़ी थी “Cannibal” by Mukul Jani )
और
अगर किसी कारण वश लड़की पर लड़की होती है तो यूँ कूड़ा समज तरछोड़ दिया जाता
है !!! माँ को शायद पता भी ना हो और गर पाता भी हो तो वो बेचारी औरत…
कहाँ हमने उसे उस लायक छोड़ा ही है की वो गर्व से लड़की को घरवालो के
नाचाहते हुए भी पाल सके !!!
गर
बलात्कार के फल स्वरुप बच्चा पैदा होता है. — अक्सर ऐसी खबर समाज के डर
से छिपाई जाती है. कहीं लड़की बदनाम ना हो जाये. और जो दोषी है वो खुल्ले
आम घूमता है !!! लड़की को समाज ऐसी घिनौनी नज़र से देखता है जैसे अपराधी वही
हो !!!
” ये लड़की की जात है… ‘कुलड़ी’ जैसे एक बार use हो जाये फिर किस काम की… बेचारी अब कौन हाथ थामेगा भी ? ”
और
यूँ लड़की को इस हद तक कमज़ोर बना दिया जाता है की चाह कर भी वो कहाँ जी
पाती ही है. जीवनभर का दाग जैसे भीतर लिए आखरी साँस तक लड़ती है. क्यूँ ?
उसे इतना कमज़ोर कौन बानाता है? हमारा समाज ही तो !!! क्यूँ उसे वही मान
इज्ज़त नहीं दिए जाते ? क्यूँ उसके बच्चे को नाजाइज़ करार कर बुरी नज़र से
देखा जाता है ? माँ कभी कमज़ोर नहीं होती. उस के लिए जैसे भी हुआ हो उस का
बच्चा जान से प्यारा ही होता है. फिर क्यूँ समाज इतना मजबूर करता है की
माँ को अपना बच्चा यूँ छोड़ना पड़े ?
कहीं
ना कहीं ऐसे हादसों के पीछे हमारा खोखला समाज ही है. आज खबर पढ़ते ही खूब
चर्चा होगी ना जाने कितनी ही थू थू करेंगे और फिर वही रफ़्तार… सब भूल
जायेंगे. हमारा नजरिया कब बदलेगा ?
~ ख्याति शाह