anjupangty's blog http://blogs.rediff.com/anjupangty Broadcasting my thoughts Fri, 08 Apr 2011 06:38:17 +0000 http://wordpress.org/?v=2.7.1 en hourly 1 ek aas……….. http://blogs.rediff.com/anjupangty/2011/04/08/65/ http://blogs.rediff.com/anjupangty/2011/04/08/65/#comments Fri, 08 Apr 2011 06:36:48 +0000 Anju Pangty http://blogs.rediff.com/anjupangty/?p=65

 

एक आस…………..

कैसे कैसे पल जी लेते है हम
कैसी कैसी यादें सी लेते है हम
सपनों के धागे अक्सर होते हैं नम 
फिर भी लड़ियाँ पिरो लेते है हम 
 
कई दर्द  अपने कभी पराए
चुप रहकर अक्सर सह लेते है हम 
दर्द पी जाना और सह जाना
आस के बंधन से जैसे मुक्त हो जाना 

धागे नम भी हो जाए तो क्या 
स्वप्न फिर भी बुन लेते हैं हम
एक डोर से जुड़ते कई रंग 
कुछ पक्के कुछ कच्चे रंग

स्नेह की धार कुछ आर पार 
कुछ सौंधी मिट्टी से रिश्ते  
कुछ बिखरे बिखरे से पत्ते
गिरते जाते पर शाख एक

पल पल दे जाते सीख कई
कुछ अधूरे कुछ पूरे पूरे
कुछ पाना तो कुछ खोना भी
जग मे ऐसे ही जीना भी……
                                      
अंजू 

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Zindagi http://blogs.rediff.com/anjupangty/2011/03/20/zindagi/ http://blogs.rediff.com/anjupangty/2011/03/20/zindagi/#comments Sun, 20 Mar 2011 11:05:42 +0000 Anju Pangty http://blogs.rediff.com/anjupangty/?p=62 जिंदगी……….
जिंदगी……….
जिंदगी हर मोड़ पर इक अजनबी सी लगी मुझे
हर पल साथ है फिर भी पराई सी लगी मुझे
पास आकर जब भी दूर होता गया वो पल
जिंदगी तेरी हर बात बेमानी सी लगी मुझे
सपनो की बात में सच को छू गया ये मन
सच सामने से गुज़रा तो बेगाना सा लगा मुझे
अपनों के साथ भी पराया सा सच
करीब आया तो पहेली सा लगा मुझे
मन के एक कोने में भटका हुआ सा मैं {अहम्}
कोशिश जब भी हुई बिखरा गया मुझे
रास्तों को तलाश रही मंजिलों की
अपनी ही तलाश में भटक गया मैं {अहम्}
अपनी भी अजीब ज़िद कि छू न सकू कभी तुझे
जाने क्यों तेरे होने का अहसास जगा गया मुझे
ए जिंदगी तू कितनी भी दूर चली जाए मगर
हरदम तेरे पास आने का इंतज़ार है मुझे …..

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kolahal http://blogs.rediff.com/anjupangty/2010/04/25/kolahal/ http://blogs.rediff.com/anjupangty/2010/04/25/kolahal/#comments Sun, 25 Apr 2010 12:47:32 +0000 Anju Pangty http://blogs.rediff.com/anjupangty/?p=57 एक अजीब से कोलाहल के साथ  जीते जीते 
जाने कब ज़िंदगी शोर की आदि हो जाती है 
पता ही नहीं चलता…….
खामोशियों से जब भी हो सामना 
शोर कब तनहाई मैं सिमट जाता 
पता ही नहीं चलता…….
एक अजब सी तलाश  की ख्वाहिश मैं 
किस तरह से ज़िंदगी ढ्ल  जाती है 
पता ही नहीं चलता……
अपने ही आस पास कौन बिखरता है 
कितने बिखर के संवर जाते   है
पता ही नहीं चलता……….
कल की आंधी मैं कौन खो जाएगा 
कल के तूफान मैं कौन बच जाएगा
पता ही नहीं ……
फिर भी एक स्याह  दरख़्त  के तले
छाँव की मरीचिका की आस कैसी 
पता चले भी तो कैसे….
पर एक सन्नाटे के बीच भी
कोलाहल की चकाचौंध मैं
जी ही लेते हैं………
जीवन की राहें  कुछ ऐसी ही
जो मिल जाए सो  मिल जाए
जो खो जाए सो खो जाए
फिर पता चले ना चले……..
                                    anju

                                    

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अहसास http://blogs.rediff.com/anjupangty/2010/02/04/a-aaaa-2/ http://blogs.rediff.com/anjupangty/2010/02/04/a-aaaa-2/#comments Thu, 04 Feb 2010 09:07:04 +0000 Anju Pangty http://blogs.rediff.com/anjupangty/?p=46

http://datastore.rediff.com/h5000-w5000/thumb/596764705B5E6771/zl7uk57ymdanzy88.D.0.mount14_1600x1200.jpgअहसास 


कुछ भाव ह्रदय में बसते हैं 


जो बेहद कोमल होते हैं


अधरों पे जब ख़ामोशी हो 


तब आँखे बोला करती हैं


कहना चाहे जब बाते मन 


वो मन में ही रह जाती हैं 


अपने ही दर्द में जी कर के


अक्सर खुद से लड़ पड़ती हैं


 


कुछ अंतर्मन की पीडाएं 


अपने ही संग तो बांटे थे


मुश्किल बस इतनी सी ही थी


खुद अपनेआप  समझ सके


 


काँटों की चुभन से वाकिफ़ हैं 


फूलों का कभी पता चला


जो दामन में भर के आये  


संग जीने की आदत सी है
अपनी ही व्यथा में क्यों उलझे
जब दर्द सभी के अपने हैं
जीवन सुख दुःख और धूप छाव
जो पा जाएँ  उसे जी लें हम




  •  

                                         अंजू ……


       


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अहसास http://blogs.rediff.com/anjupangty/2009/12/09/a-aaaa/ http://blogs.rediff.com/anjupangty/2009/12/09/a-aaaa/#comments Wed, 09 Dec 2009 02:57:47 +0000 Anju Pangty

हसास 


कुछ भाव ह्रय में बसते  हैं 




हसास 


कुछ भाव ह्रय में बसते हैं 


 बेह कोमल होते हैं


धरों पे  ामोश हो 


तब आँ'े बोला करत हैं


   


कहना चाहे  बाते मन 


वो मन में  रह ात हैं 


पने र् में कर के


क्सर 'ु से लड़ पत हैं


 


कुछ ंतर्मन  पडाएं 


पने सं? तो बांटे थे


मुश्किल बस इतन  


'ु पनेआप  सम सके


 


काँटों  चुभन से वाकिफ़ हैं 


फूलों का कभ पता चला


  ामन में भर के आये  


सं? ने आत है


                          


पन व्यथा में क्यों उले


र् सभ के पने हैं


वन सु' ुः' "र धूप छाव 


  पा ाएँ उसे लें हम


 


                                              ंू

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Fansle http://blogs.rediff.com/anjupangty/2009/11/11/fansle/ http://blogs.rediff.com/anjupangty/2009/11/11/fansle/#comments Wed, 11 Nov 2009 13:33:08 +0000 Anju Pangty

फांसले……..





फांसले ूर हो ?ए ़मन से आसमान तक
इंसान' कोशिश ने किये है नित नवन सृन……….




'




़मन पे रहकर क्या िलो के फासले हो सके है कम
कितना र् कितना मर्म कितना समे है पनों को हम……..




भोतिक सु' क चाह में ?ुम होते
संवेनहन मशन से बन ?ए है हम…..




'



उान भरने क ंध तलाश में
धरातल को कभ छू सके है हम……



'




एक ब स 'ामोश पे ते ते
'ु को ह हारा हारा सा' पाते है हम………




'




कुछ उम्मे िल में हर पल ?ाते रहे
'कि पन हार को भ त सके हम………



'




पा ाये कितने ह आयाम' हम'
िलों के फासले न हो कभ कम……..'




''''''''''''''''''' ंू…….




'




'




'




'

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http://blogs.rediff.com/anjupangty/2009/10/25/ http://blogs.rediff.com/anjupangty/2009/10/25/#comments Sun, 25 Oct 2009 11:07:29 +0000 Anju Pangty

सुख………..


सुख की क्या परिभाषा है
इसकी न कोई भाषा है
ये एक अनुभव का राग है
भावनाओं का अनुराग है

 

इसको पाया अक्सर मैंने
एक आंसू  में मुस्कान भरकर
एक दर्द का मर्म  बांटकर
एक उदास दिल में आस की लौ जगाकर

सुख बिखरा जब मेरे आँगन
फिर मन भटके क्यों व्याकुल
क्यों न समेटूं अपने आँचल
भर लूं इससे अपना जीवन


हर एक में बसा सुख अपार
ढूंढता फिर मन क्यों हो न निसार
कुछ अपने को भी समझ सके
कुछ दर्द किसी का बाँट सके

पाना खोना जीवन की रीत
खुश रहना अपनी ही सीख
तृप्त हो सकूं सुख बिखराकर
यही आस हर एक ह्रदय से


                                      अंजू……….

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http://blogs.rediff.com/anjupangty/2009/10/12/ http://blogs.rediff.com/anjupangty/2009/10/12/#comments Mon, 12 Oct 2009 11:49:56 +0000 Anju Pangty

Prakaash…

Deepak ki' jagmag jyoti

Timir ko' harti'' jaati

Nav abha sancharit karti

Samarpan ki seekh de jati

Diya aisa 'prajwalit kare

Jismai bhaav bhara ho

Sneh, maadhurya aur gyaan ka

Har hriday main prasfutit ho prakaash ka nav pallaw

Har aangan ho aalokit

Prem apnepan ki baati se

Dhara ka har chour jagmaga uthe

Har ek ka man' bhara ho roshni se

Kahin'koi na' ho udaas

Har chehra dipit ho aalok se

Sarvatra prasarit ho umang, ullaas

Aise hi ho sabhi ki Deepawali….

- AAP SABHI KO - DEEPAWALI - KI -HARDIK-SHUBHKAMNAYEN …………………….Anju..

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http://blogs.rediff.com/anjupangty/2009/09/20/ http://blogs.rediff.com/anjupangty/2009/09/20/#comments Sun, 20 Sep 2009 13:29:39 +0000 Anju Pangty

वंदना ……
शक्ति स्वरूप जगजननी
तेरी ही आराधन में
अर्पण करें सर्वस्व चिंतन
इस देह को मिल जाये संबल
 
तेरे ही वंदन और सुमिरन का 


तू माता तू ही जगतारिणी
मैं अज्ञानी मोह तम में घिरी
अपनी ममता की निर्झर सरिता में
प्रवाहित कर दे अज्ञान का तिमिर


विस्तार कर ऐसा प्रकाश
जिसमें मद, मोह और दंभ का हो नाश
ह्रदय में विस्तृत अन्धकार का हो विनाश
तेरे नाम में ही निहित हो जीवन की आस


हे करुणामयी माँ, कर 
इस जगत का कल्याण
हर व्याकुल ह्रदय में भर दे
अपनी कृपा और शक्ति का वरदान


यही वंदन है,
आराधन है,
सुमिरन है,
और इस ह्रदय का स्पंदन भी है !!!!!!!!!

(REDIFF  के सभी दोस्तों को नवरात्र पर्व की हार्दिक शुभकामनायें इस प्रार्थना के साथ की माँ आप सभी को स्वस्थ प्रसन्न और समृधि प्रदान करे)

 

                                                                              अंजू ……

 

VANDANA……


 


SHAKTI  SWAROOPA  JAGJANNI


TERI    HI    AARADHNA     MAIN


ARPAN  KAREN   SARWASVA  CHINTAN


IS    DEH   KO   MIL   JAYE   SAMBAL


TERAY  HI   VANDAN  AUR  SUMIRAN  KA 


 


TU   MAATA    TU   HI    JAGTAARINI


MAIN  AGYANI   MOH  TAM  MAIN  GHIRI


APNI  MAMTA  KI  NIRJHAR  SARITA  MAIN


PRAVAHIT  KAR  DE  AGYAN  KA  TIMIR


 


 VISTAAR       KAR      AISA           PRAKASH 


JISMAIN  MAD, MOH  AUR  DAMBH  KA  HO  NAASH


HRIDAY MAIN VISTRIT  ANDHKAAR  KA  HO  VINAASH


TERAY   NAAM   MAIN   HI  NIHIT  HO  JEEVAN KI  AAS


 


HE  KARUNAMAYI  MAA,  KAR


IS   JAGAT   KA   KALYAAN


HAR  VYAKUL  HRIDAY  MAIN  BHAR  DE


APNI  KRIPA  AUR  SHAKTI  KA  SANCHHAR


 


YAHI    VANDAN     HAI,


AARADHAN      HAI,


 SUMIRAN         HAI,


AUR   IS   HRIDAY  KA SPANDAN  BHI  HAI    !!!!!!!!!


 


(REDIFF  KE  SABHI  DOSTON  KO  NAVRATRA  PARV  KI HAARDIK  SUBHKAAMAEIN  IS   PRARTHANA  KE  SATH  KI  MAA  AAP   SABHI  KO   SWASTH   PRASNN AUR    SAMRIDHI  PRADAAN  KARE) 


                                                                              anju……


 


 


 


 


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http://blogs.rediff.com/anjupangty/2009/09/14/ http://blogs.rediff.com/anjupangty/2009/09/14/#comments Mon, 14 Sep 2009 07:03:07 +0000 Anju Pangty

हिंदी को सम्मानं ………

हिंदी को सम्मान चाहिए 

नहीं उसे अपमान चाहिए

क्यों  बांधे  एक  पखवाड़े  में

माह  सितम्बर  के  आँचल  में

 

दिवस  मनाते जोर  शोर  से

आयोजन  और  उत्सव  होते

बढ़  चढ़  के  सब  हिस्सा  लेते

वो  दिन  बस  हिंदी  का  होता

 

फिर  कहाँ  वो  बातें  होती

हिंदी  कहीं  दुबक  सी  जाती

अपनों  के  ही  बीच  खड़ी वो

क्यों  अपने  को  पिछड़ा  पाती

 

क्या  इतनी  ही  ज़िम्मेदारी 

क्यों  भूलें  गरिमा  को  सारी

दिवस  मन  लेने  भर से  ही

हिंदी  क्या  गौरवान्वित  होती  ?

 

मैं चाहूँ  हिंदी  का  मान

हिंदी हो हमारा  स्वाभिमान

जिससे  बड़े  हमारी  शान

अपने  देश  की   है  ये  आन

 

आओ  ऐसा  प्रण ले  हम

हिंदी  का  सम्मान  बढाएं

इस  भाषा  से  ज्ञान  बढाएं

स्वयं  का  अभिमान  बढाएं

 

हिंदी  दिवस  तभी  हो  सार्थक

जब  समझे  न  इसे  निरर्थक

क्यों  भूलें  ये  अभिमान  हमारी

जिससे  है  पहचान  हमारी ……………..

                                          अंजू ………………..

 

Hindi ko sammaann………


Hindi ko sammaan chahiye


nahin use upmaan chahiye


kyon baandhe ek pakhware main


maah sitamber ke aanchal main


'


diwas manate zor shor se


aayojan aur utsav hote


bad chad ke sab hissa lete


wo din bas Hindi ka hota


'


phir kahaan wo baaten hoti


Hindi kahin dubak si jaati


apno ke hi beech khadi wo


kyon apne ko pichda paati


'


kya itni hi zimmedari


kyon bhoolen garima ko saari


diwas mana lene bher se hi


Hindi kya gourvaanvit hoti ?


'


main chaahoon Hindi ka maan


hai'jo hamara swabhimaan


jisse bade hamari shaan


apne desh ki hai ye aan


'


aao aisa pran le ham


Hindi ka sammaan badayen


is bhaasha se gyaan badayen


swayam ka abhimaan badayen


'


Hindi diwas tabhi ho saarthak


jab samjhe na ise nirarthak


kyon bhoolen ye abhimaan hamari


jisse hai pahchaan hamaari……….


'''''''''''''''''''''''''''''' anju.


'

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