एक आस…………..कैसे कैसे पल जी लेते है हमकैसी कैसी यादें सी लेते है हमसपनों के धागे अक्सर होते हैं नम फिर भी लड़ियाँ पिरो लेते है हम कई दर्द अपने कभी पराएचुप रहकर अक्सर सह लेते है हम दर्द पी जाना और सह जाना आस के बंधन से जैसे मुक्त हो जाना धागे नम भी हो जाए तो क्या स्वप्न फिर भी बुन लेते हैं हमएक डोर से जुड़ते कई रंग कुछ पक्के कुछ कच्चे रंगस्नेह की धार कुछ आर पार कुछ सौंधी मिट्टी से रिश्ते कुछ बिखरे बिखरे से पत्तेगिरते जाते पर शाख एकपल पल दे जाते सीख कईकुछ अधूरे कुछ पूरे पूरेकुछ पाना तो कुछ खोना भीजग मे ऐसे ही जीना भी…… अंजू
