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Archive for the ‘Poetry’

Ye vo mukam nahi

June 24, 2012 By: archana dubey Category: Poetry

lagta hai ye vo mukam nahi
Ye vo jagah bhi nahi….
Ye vo jajbaat bhi nahi aur
Ye vo shaksh bhi nahi………….
Ki jaha dhaherne ko man kare
Ki jaha chune ko man kare
Thodi si dhup hi sahi
aag se to behtar hai
jal ker khak to na honge
kyoki abhi Ye vo mukam nahi…………

March 27, 2012 By: archana dubey Category: Poetry

खुद से ही भागती फिरती रही

 सब से यूँ घुलती मिलती रही 
उन बवंडर और भवरों मे फंसी 
 सांसो मे एक राज दबाती रही 
 गहराई से डर कही जोर से हंसी 
तो कही बस मुस्कुराती रही 
खुद को ना देख लूँ कही
डर के आइने से झिझकती रही 
 स्याह काली ही निखर के आती है
और रंग कहा उतने उभर पाते है
दे दिया तुम्हे बस यही रंग,पाती
सब रंग बाकि लिए मै जीती रही
बद से कभी किसी को प्यार हुआ भला 
बेरंग कहा किसी को भाते है 
 ये कला सीख ली अब तो 
 अब हम भी दिल बहलाते है 
 खुद से ही भागती फिरती 
सब से यु घुलती मिलती रही 

काश वो स्वप्न ही होते

January 17, 2012 By: archana dubey Category: Poetry

काश वो स्वप्न ही होते
कम से कम आशाये ना होती
एक समय से शुरु और ख़त्म होते
उम्मीदे  ना होती की कुछ मेरी सुने
और कुछ अपनी  कहे 
कुछ जवाब दे और कुछ प्रश्न करे
कुछ बांटे और कुछ बाते करे 
कभी गुस्सा हो और कभी मनाए
काश वो स्वप्न ही होते 
अपनी तरह ही उन्हें मानती
हर बात कहती और समझती
मुझे यु गलत ना समझते 
क्योकि मेरा दिलो दिमाग 
उनका ही होता पूरी रात 
बहुत कुछ बोलना ना पड़ता
वो जानते की मै क्या हू
और क्या चाहती हू 
काश वो स्वप्न ही होते
मेरे अहसास से शुरु और खत्म होते
कभी शक शुबह ना होते
बस दिल की गहराई से जीते
साथ साथ दिन रात 
यु मेरे पीछे  पड़ परेशां ना करते 
ना दिल तोड़ते ना मन मारते मेरा 
काश वो स्वप्न ही होते 
जानना चाहते मेरी आरजू भी 
मेरे जुनू मे हमनशी होते
ना छिपाते कोई बात कभी 
ना कभी दुनियादारी दिखाते 
क्योकि दुनिया के लिए तो हम साथ नहीं  
जब छिपाते कुछ यु भीतर 
उनकी परतो मे घुस मन जान जाती 

काश वो स्वप्न ही होते…….

Chand ka asar

January 12, 2012 By: archana dubey Category: Poetry

लगता था उनकी नज़रो से नज़रे मिली हो जैसे 

चाँद  जब  छत से  नज़र आता था

ढूढ़ते थे चाँद को जब उन्हें देखने का मन करता था 

और वो अक्सर तड़पाता था, गायब हो जाता था

वो काले सफ़ेद बदलो मे छुपता और निकलता था


बेबसी मे दिन गुजरते थे रात का इंतजार होता था

उनसे तो दूरी है चाँद मे आस नज़र आती थी

पर वह भी बेपरवाह था उनकी तरह

अपनी ही धून गाता था,खुदी मे रहता था 


जब दिल ने हताश हो, दूरियों से हार कर

फासले रखने की सोची,  चाँद से भी वास्ता न रहा 

पर ,अब चाँद नज़र आता है जब मै काले बदलो  को ढूढती हू 

सुबह सूरज को देखना चाहा तो  चाँद पीछे था  

ज्यो कहता हो मै अब भी हूँ दिल में तेरे

और कितना भरम कितना झूठ  कहोगी खुद से

मै साया हू कभी डूबता नहीं 

तेज़ रौशनी से कब तक छुपाओगी मुझे 

घूमता  हू तेरे अंदर बाहर, चाहे दिखू ना दिखू  

सांस हूँ  कोई  खुशबू नहीं कि कभी हूँ कभी नहीं 


ये तो गुनाह ही हुआ जो उन्हें चाँद से जोड़ दिया

वो तो गए हमे यादो के संग छोड़ दिया 

ये जो तन्हाई है वो चाँद कि रोशनी में

कई बार नहाई है मेरे अश्को संग 

नज़र चुराते है जो आँख भर आई है 

चाँद मे अब उनकी गहराई जो नहीं 

पर चाँद उन्हें भी तडपाना कभी मेरी तरह

जुदाई कि चुभन उन्हें भी मिले कभी मेरी तरह 


Chand Naraz hai !

November 29, 2011 By: archana dubey Category: Poetry


आकाश हमने छाना था आज भी

मायूस मगर मन कहा माना है

चाँद नाराज है लगता है

आज भी कही दूर वो निकलता है

 

हर तारे से शिकायत की हमने

अंधियारे मे भी बहुत भटके हम

हर भाव मे खुदी को कोसते रहे हम

हर उम्मीद से उसे ढूंढ़ते रहे हम

 

पर  चाँद नाराज है लगता है

आज भी कही दूर वो निकलता है

आसमा की सीमाओ से बहुत परे

नज़रो की पहुच नहीं जहा मेरी

 

यु तो बहुत व्यस्त समय कटता है

उजालों से कायदा हमें मिलता है

पर अंधेरो से दोस्ती रही सदा

क्योकि रात मे ही तो चाँद निकलता है

 

जब दिन भर तपे उस अगन मे

चाँद ही तो ठंडी बयार लाता है

काली अमावस मे मन भर आता है

चाँद जो छोड़ चला जाता है

पर आज तो अमावस भी नहीं

 

तारो से दामन सजा जो गगन इतराता है

हमें तो बस चाँद ही नज़र आता है

पर वो नाराज़ है लगता है बिना गुनाह सजा देता है

दिल को अमन नहीं तसल्ली तो दे दो

चाँद क्यों नहीं इसकी वजह तो दे दो


 

पर  चाँद नाराज है लगता है

आज भी कही दूर वो निकलता है

Do you know how it feels???

November 29, 2011 By: archana dubey Category: Poetry


It’s not a fire, it’s not a thirst


It’s not a hunger, it’s not an anger


It’s just a thought, which keeps you around?


It’s just a thought which puts me upside down


Do you know how it feels


When my heart can’t feel you


Do you know how it feels


When my vibes gets nothing back


Do you know how it feels


When I realize it’s nothing for you


 


It’s not a fire, it’s not a thirst


It’s not a hunger, it’s not an anger


It’s just a thought of being around you


To pull you over, to push you apart


To bite you hard, to kiss you a lot


It’s just a thought to punish you hard…


Do you know how it feels


When you are not there with me


Sometimes the words are not enough


The soul needs you, yes only you.

Vyast Panno ki kahani

November 28, 2011 By: archana dubey Category: Poetry


व्यस्त पन्नो की कहानी,उनकी अपनी  और सबकी

दौड़ती है जिंदगी ये, हर दिशा मे तेजी से ये

भीड़ मे मै  भीड़ थी औ, भीड़ मे संकीर्ड थी मै

वो अकेला है लगा पर, साथ किसको चाहिए अब

व्यस्त पन्नो की कहानी,उनकी अपनी  और सबकी

 

जिंदगी जीती रही मै, सांसो मे मरती रही मै

गहरे कुओ और बावड़ी मे, डूबती उतरती रही मै

भावना के भाव देखू, इतना भी अब कब समय है

व्यस्त पन्नो की कहानी,उनकी अपनी  और सबकी

 

नज़र को अंदाज़ दे दू, जुल्फ को बयार दे दू

उंगलियों से तितलियों को,पकडू छोडू, छोडू पकडू

मन का व्यवहार बदला,अब नहीं वो बोलता है

छोटी छोटी स्मिता से,काम अब चलता नहीं जो

 व्यस्त पन्नो की कहानी,उनकी अपनी  और सबकी

 

पत्र को एक माह  लगते, तब तलक हम थे तरसते 

आवाज सुनाने को तड़पते, नोट तब होते नहीं थे

आज सिक्को मे हो बांते, पर नहीं वो और नहीं हम


व्यस्त पन्नो की कहानी,उनकी अपनी  और सबकी

September 19, 2011 By: archana dubey Category: Poetry


जब अकेले  खड़ी हो  खुद से बाते करती हू
सब  से दूर हो खुद के पास हो जाती हू
वो कहती है कि कितनी फ़िक्र थी तुम्हे सब की
मेरी आवाज भी सुनी नहीं तुमने कभी
दुसरो के जज्बात मे ही खत्म हो जाती थी मै कही
खुद कि भावना से दूरी बनाती जाती थी
आज मुझसे बातें करती है, वो थकती नहीं
ये अकेली शाम अब यु खटकती नहीं

Gazal najar aati hai

August 13, 2011 By: archana dubey Category: Poetry

उनकी झुकती आँखों मे हया नज़र आती है
उनकी बेबाकी मे भी इक अदा नज़र आती है
ये आलम  है दर्दे दिल का
हर तरफ इश्क हर तरफ ग़ज़ल नज़र आती है

Dard

August 13, 2011 By: archana dubey Category: Poetry

दर्द दिखता नहीं
दर्द का आभास होता है
दर्द जिसे होता है
बस उसे ही अहसास होता है
वो कहते है की वो महसूस करते है
उनकी इनायत है की वो कोशिश करते है
हम से यु  करीबी  महसूस करते है
पर दर्द जिसे होता उसे ही सहना होता है
ये उसी की तक़दीर होता है


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