Skip to content


Haslo….

एक अखबार में वधू चाहिए वाले स्तंभ में किसी ने यह विज्ञापन दिया था।
एक होनहार युवक के लिए सुंदर और सुशील वधू चाहिए। 3 सालों का अनुभव जरूरी है।

 

पति-पत्नी में किसी बात पर बहस हो रही थी। हार कर पति बोला: तुम्हारा कुसूर नहीं है। दरअसल , दुनिया की हर औरत शादी के चंद दिन बाद ही अपने पति को दुनिया का सबसे बड़ा बेवकूफ समझने लगती है।
इससे सिद्ध होता है ,’ पत्नी ने कहा , ‘ कि शादी के बाद औरतें अक्लमंद हो जाती हैं।

 

पत्नी- प्रिय कुछ साल पहले तुमने कहा था कि तुम स्वर्ग में मेपे बिना ना रहने के बजाय मेरे साथ नरक में रहना पसंद करोगे।
पति-
बदकिस्मती से मेरी यह इच्छा पूरी हो गई है।

पत्नी ने अपने पति
से शिकायती अंदाज में कहा , ' आप नींद में बहुत बोलते है , कई बार तो मेरी नींद ही खुल जाती है। '
इस पर पति बोलाः
तो क्या मैं नींद में भी बोलूं , तुम्हारी ही सुनता रहूं।

संता और बंता में किसी बात पर झगड़ा हो गया। संता बोला , ‘ तुम अपने आपको क्या समझते हो ? मैं तुमसे अच्छा हूं , मेरे बच्चे तुम्हारे बच्चों से अच्छे हैं , मेरी बीवी तुम्हारी बीवी से अच्छी है…।
हां , और कुछ तो मैं नहीं जानता लेकिन यह जरूर है कि तुम्हारी बीवी मेरी बीवी से अच्छी है ,’ बंता ने जवाब दिया।

पति , पत्नी से : मैं नहीं जानता कि तुम इतनी बेवकूफ कैसे हो और खूबसूरत भी।
पत्नी बोली : मैं समझाती हूं। कुदरत ने मुझे खूबसूरत बनाया , इसलिए तुम मेरी तरफ झुके। कुदरत ने मुझे मूर्ख बनाया , इसलिए मैं तुम्हारी तरफ झुकी।

संता : मैंने अपनी
बीवी को 10वीं करवाई , 12वीं करवाई , बी.ए. करवाई , एम.ए. करवाई , बी.एड. करवाई फिर जॉब लगवाई।
बंता : अब एक अच्छा सा घर देख कर उसकी शादी कर दो।

 

बंता ने अपनी सगाई तोड़ दी , क्योंकि लड़की कुंवारी थी।
बंता बोला : जो आज तक किसी की नहीं हुई , वह मेरी क्या होगी ?

 

 


 

***ASHOK DUBEY***

Posted in Fantasy.

15 comments



Jokes…

संता जी आम के पेड़ पर बैठे थे , तभी उनके जिगरी दोस्त बंता आए और पेड़ पर चढ़ गए।
संता : ऊपर क्यों आए ?
बंता : सेब खाने।
संता : यह तो आम का पेड़ है।
बंता : पता है , तभी तो सेब साथ लाया हूं।


एक गधा : यार , मेरा मलिक मुझे बहुत मारता है।
दूसरा गधा : तो तू भाग क्यों नहीं जाता ?
पहला गधा : भाग तो जाता , पर यहां फ्यूचर बड़ा ब्राइट है।
दूसरा गधा : सो कैसे ?
पहला गधा : मलिक की खूबसूरत बेटी जब शरारत करती है तो मालिक कहता है , तेरी शादी गधे से कर दूंगा …!’
बस इसी उम्मीद मे बैठा हूं !


 


एक शराबी अखबार पढ़ रहा था। अचानक उसे लगा कि वह चश्मा लगाना भूल गया है।
उसने घर में चश्मा ढूँढ़ना शुरू किया।
उसकी नजर आईने पर पड़ी।
शराबी चिल्लाकर पत्नी से बोला : मेरा चश्मा आईने पर किसने चिपका रखा है ?


ज्योतिषी ने लड़की का हाथ देखते हुए बताया :
तुम्हारी शादी एक ऐसे नौजवान से होगी , जो खूबसूरत और पैसे वाला होगा।
लड़की खुशी से बोली : अच्छा ! अब मुझे यह बता दीजिए कि मैं अपने मौजूदा पति से छुटकारा कैसे पा सकती हूं।


दिल्ली में एक ही बाइक पर 3 लोग बिंदास चले जा रहे थे।
ट्रैफिक पुलिस के सिपाही ने उन्हें रुकने के लिए हाथ दिया।
उनमें से एक बोला : यहां तो पहले ही 3 लोग बैठे हे तुम कहां बैठोगे ?


संता बंता से : मेरी भगवान से एक ही प्रार्थना है कि वह तुम जैसा दोस्त हर किसी को दे।
बंता : क्यूं ?
संता : क्योंकि यह सज़ा मैं अकेला नहीं भुगतना चाहता।


मरीज नर्स से : तुमने मेरा दिल चुरा लिया है।
नर्स ने कहा : (मुस्कुराते हुए) चल बेवकूफ हमने तो किडनी निकाली है , दिल को तो हाथ भी नहीं लगाया है।

प्रेमी ने प्रेमिका को पहली बार किस किया तो प्रेमिका के छोटे भाई ने देख लिया।
प्रेमी घबरा गया कि कहीं वह जाकर किसी को बता दे।
उसने प्रेमिका से कहा : इसे 5 रुपये दे देता हूं। शायद मान जाए और किसी से कहे !
प्रेमिका ने टोका : 5 रुपये क्यों ? यह काम तो वह शुरू से ही 2 रुपये में करता रहा
है !


संता जी अपनी पत्नी और छोटी बच्ची के साथ खरीदारी करने निकले।
बच्ची ने पपीता देखकर कहा , ‘ पापा पपीता खरीद दीजिए।
संता जी ने कहा , ‘ अरे यह कोई पपीता है , यह तो पपीती है , पपीता तो अपने पंजाब में होता है।
आगे चलकर बच्ची को सन्तरा दिखा। बच्ची ने फिर कहा , ‘ पापा सन्तरा खरीद दीजिए।
संता ने फिर वही दोहराया , ‘ अरे यह कोई सन्तरा है , यह तो सन्तरी है , सन्तरा तो अपने पंजाब में होता है।
कुछ और आगे चलने के बाद बच्ची को केला दिखा। बच्ची ने अब केला खरीदने का आग्रह किया।
संता जी ने फिर वही कहा , ‘ अरे यह कोई केला है , यह तो केली है , केला तो अपने पंजाब में होता है।
इस बार संता की पत्नी आपे से बाहर हो गई। बोली , ‘ चुप रह बेटी ! यह कोई पापा हैं , यह तो पापी हैं , पापा तो अपने पंजाब में हैं।


प्रेमी-प्रेमिका का एक जोड़ा पहाड़ पर चढ़ने के लिए जाता है। चढ़ते - चढ़ते रात हो जाती है , तो दोनों सो जाते हैं।
सोते वक्त शरीफ प्रेमी बीच में एक तकिया रख देता है ताकि कुछ गड़बड़ हो जाए।
अगली सुबह प्रेमी कहता है , ‘ चलो अब सिर्फ 2 घंटे में ही पहाड़ चढना है।
प्रेमिका बोली : क्या खाक पहाड़ चढ़ें , रातभर में एक तकिया तो पार कर नहीं सके पहाड़ क्या खाक चढ़ोगे ?




Posted in Blogs.

7 comments



Some

Posted in Holiday.

2 comments



Faith

Posted in Friends.

3 comments



Love

Posted in Friends.

2 comments



Goodluck

Posted in Love.

1 comment



honey

Posted in Love.

No comments



friendship

Posted in Friends.

2 comments



Indian Game…



भारतीय मुक्केबाजों के घूंसे………..


अस्सी के दशक के बाद से, आज शायद पहली बार ऎसा हुआ है कि क्रिकेट में भारत की जीत फीकी पड़ गई और मुक्केबाजी में भारत की विजय तो छोड़िए, हार ने भी भारतीयों का दिल जीत लिया।



बीजिंग ओलम्पिक में सुशील कुमार ने आज पहले भारत के लिए कांस्य पदक जीता, उनके बाद जितेन्दर कुमार मुक्केबाजी के मुकाबलों में हार गए। लगभग उसी समय दाम्बुला में भारतीय क्रिकेट टीम ने श्रीलंका को दूसरे एकदिवसीय मैच में हराया।


लेकिन आज भारतीयों को क्रिकेट की जीत से ज्यादा गर्व महसूस हो रहा था अपने हारे हुए लाडले मुक्केबाज जितेन्द्र कुमार पर, जो मीडिया की सुर्खियों से दूर, करोड़ों रुपयों के सरकारी इनामात से वंचित, विज्ञापनों की मोटी रकम से अनजान, हरियाणा के भिवानी शहर में अपने दम पर मुक्केबाजी का ऎसा कौशल साध चुका था कि बीजिंग ओलम्पिक में मुक्केबाजी स्पर्धा के क्वार्टरफाइनल तक जा पहुंचा था।


उसके कुछ घंटे बाद ही विजेन्द्र कुमार ने अपने प्रतिद्वंदी को घूंसे मार- मार कर 9-4 से हरा दिया और सेमीफाइनल में पहुंच गए।


ओलम्पिक के लिए गए थे, तब इन मुक्केबाजों का नाम भी नहीं जानती थी आम जनता - क्योंकि न इन्हें मीडिया सिर चढ़ाता था, न नेता इनाम बांटते फिरते थे।


आज आम जनता खुश है कि उसके जैसे गुमनाम खिलाड़ी ही विश्व मंच पर देश के नाम की धूम मचा रहे हैं, और वे खिलाड़ी कहीं नहीं हैं जो "ग्लैमर" के कारण मीडिया की सुर्खियां बने रहते हैं।


बात सिर्फ विजय की नहीं है, बात यह सच कर दिखाने की है, कि भारत की मिट्टी में वह ताकत है कि सुविधा और आडंबर के बिना भी वह दुनिया फतह कर सकती है।


यह विजय हौसला देगी उन तमाम भारतीयों को जो छोटी जगहों में रहते हैं और अपने- अपने क्षेत्र में विश्व विजय के सपने पालते हैं।


उस हौसले को सलाम, उन सपनों को नमन और शुभकामनाएं आम भारतीय को, दुनिया फतह करने के लिए।

Posted in Sports.

1 comment



Manoranjan…


Chodana mat….


मुम्बई के हर सिनेमाघर में, जहां यह फिल्म चल रही है, दर्शक फिल्म खत्म होने पर खड़े होकर तालियां बजा रहे हैं।


आतंकवाद पर आधारित ऎसी फिल्म जो लोगों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दे, जिसे देख कर सिनेमाहॉल से निकलने पर हर हिन्दू, और हर मुस्लिम को, अपनेआप पर, अपने मुम्बई शहर पर और अपने देश पर गर्व हो- वैसी फिल्म है " अ वेन्सडे"।


अगर आप मुम्बई महानगर के बाशिन्दे हैं तो यह फिल्म आपको हंसाएगी, तनाव में लाएगी लेकिन अंत में जब आप सिनेमाघर से बाहर आएंगे तो अपने शहर के सुरक्षित होने का अहसास दिलाएगी।


और अगर आप मुम्बई के बाशिन्दे नहीं हैं, तो भी यह फिल्म आपको अपने भारतीय होने पर गर्व करने पर मजबूर करेगी
आतंकवाद पर "सरफरोश" और "खाकी" जैसी फिल्मों से भी आगे है "अ वेन्सडे"। नसीरुद्दीन शाह को शायद बरसों बाद ऎसी बेजोड़ भूमिका मिली है।


इस फिल्म में न तो राजनेता, न पुलिस अधिकारी और न ही आतंकवादियों को कार्टूननुमा दिखाया गया है। हां टीवी चैनल वाले जरूर बेवकूफ नजर आते हैं लेकिन वह भी वही बेवकूफी है जो वे खुद अपने चैनलों पर दिखाते रहते हैं।


छोड़िएगा मत "अ वेन्सडे" को।


एक निराशाजनक विषय पर ऎसी आशावादी फिल्म बार- बार नहीं बनती।

Posted in Movies.

2 comments