Posted in Blogs on 01/22/2012 11:57 am by Baldeo Pandey
” भारत दुनिया का सबसे बड़ा अध्यात्मिक देश माना जाता रहा है, आत्मा, परमात्मा , पुण्य-पाप, मुक्ति,पुनर्जन्म, सेवा, संस्कार, माया, सृष्टि इत्यादि जैसे दार्शनिक अवधारणाओं का विस्तार से वर्णन हमारे समाज में मिलता हैं. लेकिन अगर कोई जरुरतमंद मिले , तो अक्सर हम जाति, क्षेत्र, रंगरूप, भाषा, सम्प्रदाय इत्यादि को ध्यान में रखकर अपना रवैया तय करते हैं.आमतौर पर हमलोग - गरीब, गैर- जातीय - सांप्रदायिक- भाषी- क्षेत्रीय और अजनबी के प्रति उदासीन और असंवेदनशील होते हैं. परन्तु, सत्संग इत्यादि प्रयोजनों पर, हमें जरूर मानवीयता का श्मशानबोध होता है. “
Posted in Blogs on 10/23/2011 11:03 am by Baldeo Pandey
गाँवों की अपनी पहचान और प्रभाव है. समय के साथ, गाँवों में भी काफी परिवर्त्तन हुए हैं. परिवर्त्तन , कुछ सकारात्मक, तो कुछ नकारात्मक. हमलोग संक्रमण काल में जी रहे हैं, जहाँ विश्वभर में राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक बदलाव की हवाएं चल रहीं हैं. भारतीय गाँव भी इस गतिशील प्रक्रिया का गवाह और पात्र है. वैश्विक आर्थिक मंदी के दौर में भी, भारत अगर मजबूती से टिका है, तो यह है हमारी गंवई जीवन शैली , जिसमें बचत की परंपरा हमारी जीवन पद्धति का अभिन्न अंग है. श्री अन्ना हजारे ने भारतीय मौलिक सोच को लेकर, समय, प्रकृति और जन के अनुरूप ग्राम व्यवस्था की बात कर रहे हैं. अन्ना ने इसे चिरतार्थ कर के दिखाया भी है और अनवरत प्रयासरत भी है. विकास कभी भी गाँव और शहर के बीच टकराव उत्पन करके नहीं किया जा सकता , क्योंकि ये दोनों एक दूसरे के पूरक हो सकते हैं, प्रतियोगी कतई नहीं. सारे भारतीय गाँवों का मिजाज और अंदाज एक जैसा ही जीवंत , सौम्य और निर्दोष है. भारतीय स्वालंबन में, गाँव मूल में है और रहेगें, हमारी राष्ट्रीय शाश्वत पहचान भी यही है.
Posted in Blogs on 08/28/2011 10:57 pm by Baldeo Pandey
Although we are celebrating the Annas’ Victory as a Democratic Victory, but still I think that we, the majority of Indians are living with a hypocritical medieval mindset where we don’t accept other willingly at the basis of religion, caste, statehood, language & culture. We are still immature as a nation which would be having a common character in words and deeds. The superficial expression of emotions would be short lived, but accepting one another holistically will define a true India & Indian. I am hopeful in this transition, we will evolve as a just and rational nation with new generations in coming days.
Posted in Blogs on 08/26/2011 08:17 pm by Baldeo Pandey
“Just wait; it is the culmination moment of Anna Anadolan. India will usher in a fresh Socio-political consciousness and change. It would not bring a drastic change in corrupt Indian scenario in few days, but definitely its success will reinforce the belief in social movements in creating a favourable and more honest way of living. It will further enhance participative democracy and governance.”
Posted in Blogs on 08/21/2011 10:40 am by Baldeo Pandey
जब हम विकास की बातें करते हैं, तो क्या हमारे पिछड़ते गाँव और लोग ध्यान में रहते हैं.जहाँ गरीब और गरीब और छोटे किसान , भूमिहीन मजदूर होते जारहे हैं. मॉल और अन्य बाजार तन्त्र ही विकास के रूप में देखे जारहे हैं. लोगों की क्रय शक्ति और रसोई में राशन की क्या अवस्था है? किसको इसकी चिंता है? जहाँ शहरी “बेईमान बुद्धिजीवी” गरीबी और लाचारी का रसास्वादन करते हैं, वहाँ नक्सली आन्दोलन का सूत्रपात को अप्रासंगिक कैसे कहा जा सकता है?
Posted in Uncategorized on 08/16/2011 09:14 pm by Baldeo Pandey
”The walls of Tihar Jail are not strong enough to hold or keep captive ‘the conscience of Indians’ in symbol of Shri Anna Hazare. It is the beginning of victory of democracy.”
Posted in Uncategorized on 08/15/2011 06:12 pm by Baldeo Pandey
सन्नाटे में ठिठकी,
दबे पैर बढ़ती,
दीये की तरफ…..
समय के बीतने से,
नहीं मिटी, उसकी टीस….
बरसों से पाल रखी है…
दर्द,
जिंदगी से उलाहना….
पार कर लेना चाहती है…..
लक्ष्मण रेखा,
समाज की लक्ष्मण रेखा….
शिष्टता और सम्मान की बलि वेदी पर….
चढ़ती रही है…..
उसकी चाहतें,
उड़ान के सपनें,
आज भी बेचैन है….
एक उन्मुक्त उड़न के लिए,
अस्तित्व,
अस्मिता और
ठंडी बयार के लिए…..
काश!
दो शब्दों पंख लग जातें…
सोन चिड़ियाँ को आज….
Posted in Uncategorized on 08/15/2011 02:54 pm by Baldeo Pandey
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष डॉ. टीडीएस आलोक का रविवार को निधन हो गया। अपने सरल स्वभाव के धनी डॉ. आलोक की साहित्य में खास रुचि थी।पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। डॉ. आलोक मेरे और मेर पत्नी शचि भारद्वाज पाण्डेय के शिक्षक और मेरे एक साहित्यिक मित्र भी थे । हमें इनका असीम प्रेम और आशीर्वाद हमेशा मिलता रहा है । प्रभु इनकी आत्मा को शांति प्रदान करें ।