Posted in Uncategorized on 04/29/2012 07:41 am by Baldeo Pandey
ओशो रजनीश आधुनिक विश्व के सर्वश्रेष्ठ दार्शनिकों में से एक है, जिनका मूल्यांकन करने की क्षमता और समझ विरले लोगों में ही होगी. इन्होने केवल आध्यात्मिकता की ही बात नहीं कि अपितु अनेक मिथकों और पाखंडों का भी पर्दाफाश किया और समग्रता में जीवन के अन्तरंग और संवेदनशील यथार्थों का भी बेबाक समीक्षा और विवेचना की. तथाकथित बुद्धिजीवी ओशो के कुछेक स्पष्टतावादी दृष्टिकोण से डरकर, उनके नाम के भूत से भी आक्रांत होकर जनसमूह कें इनकी भर्त्सना करते नहीं थकते, लेकिन इन्ही लोगों की आत्मा ओशो की लोहा मानती है. आने वाला वक्त ही ओशो के साथ न्याय कर पायेगा , हालांकि ओशो की मौलिक चिंतन ने बहुतेरों को उद्वेलित करता रहा है. ओशो से सबसे ज्यादा यथास्थितिवादी और धर्म के ठेकेदारों को अपनी महंती और दुकानदारी को लेकर डर है.
Posted in Uncategorized on 08/16/2011 09:14 pm by Baldeo Pandey
”The walls of Tihar Jail are not strong enough to hold or keep captive ‘the conscience of Indians’ in symbol of Shri Anna Hazare. It is the beginning of victory of democracy.”
Posted in Uncategorized on 08/15/2011 06:12 pm by Baldeo Pandey
सन्नाटे में ठिठकी,
दबे पैर बढ़ती,
दीये की तरफ…..
समय के बीतने से,
नहीं मिटी, उसकी टीस….
बरसों से पाल रखी है…
दर्द,
जिंदगी से उलाहना….
पार कर लेना चाहती है…..
लक्ष्मण रेखा,
समाज की लक्ष्मण रेखा….
शिष्टता और सम्मान की बलि वेदी पर….
चढ़ती रही है…..
उसकी चाहतें,
उड़ान के सपनें,
आज भी बेचैन है….
एक उन्मुक्त उड़न के लिए,
अस्तित्व,
अस्मिता और
ठंडी बयार के लिए…..
काश!
दो शब्दों पंख लग जातें…
सोन चिड़ियाँ को आज….
Posted in Uncategorized on 08/15/2011 02:54 pm by Baldeo Pandey
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष डॉ. टीडीएस आलोक का रविवार को निधन हो गया। अपने सरल स्वभाव के धनी डॉ. आलोक की साहित्य में खास रुचि थी।पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। डॉ. आलोक मेरे और मेर पत्नी शचि भारद्वाज पाण्डेय के शिक्षक और मेरे एक साहित्यिक मित्र भी थे । हमें इनका असीम प्रेम और आशीर्वाद हमेशा मिलता रहा है । प्रभु इनकी आत्मा को शांति प्रदान करें ।
Posted in Uncategorized on 08/13/2011 02:17 pm by Baldeo Pandey
”यह कैसी स्वतंत्रता है , जहाँ आर्थिक गुलामी के आगोश में - करोड़ों भारतीय अमर्यादित जीवन जीने को विवश हैं. दूसरी तरफ लोकतंत्र के ठेकेदार बेशर्मी के साथ लूट खसोट में लगे हैं. और हम अधिकांश भारतीय शुतुरमुर्ग की तरह आँखें बंद किए हुए, किसी महानायक का इंतजार कर रहे हैं .”