



उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी फिर कुछ खास नहीं कर पाई। फिर कुछ कास इसलिए कहना पड़ता है कि पिछले 18 साल से राज्य में पार्टी का हाल कुछ ऐसा ही है। लेकिन, उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की तरफ से खास ये हुआ कि सोनिया गांधी ने राहुल गांधी को उत्तर प्रदेश में कमान सौंपने के साफ संकेत दे दिए। राहुल ने जमकर मेहनत भी की। लेकिन, कोई जमीनी आधार न बचा होने से इसका परिणाम कुछ नहीं निकला।
अब लोकसभा चुनाव के पहले सोनिया ने एक बार फिर से राहुल’>http://batangad.blogspot.com/2007/09/blog-post_6851.html”>राहुल गांधी को और मजबूत करके उत्तर प्रदेश से ज्यादा से ज्यादा कांग्रेसी संसद में भेजने का जिम्मा सौंप दिया है। राहुल गांधी को ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के महासचिव के साथ ही छात्र और युवा संगठन का जिम्मा दिया गया है। राहुल के साथ के लिए कई नौजवानों को उनके साथ लगाया गया है। लेकिन, उत्तर प्रदेश में असली मुश्किल क्या है ये राहुल गांधी को कांग्रेस महासचिव बनने के बाद अपनी पहली सांगठनिक यात्रा में ही पता चल गया।
सोमवार को राहुल गांधी लखनऊ में प्रेस कांफ्रेंस कर रहे थे। दिल्ली से उनके साथ उत्तर प्रदेश के नए-नवेले प्रभारी दिग्विजय सिंह थे। तो, उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की नई-नवेली अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी लखनऊ में पूरे जोश के साथ उनके स्वागत के लिए थीं। प्रेस कांफ्रेंस शुरू होते ही पत्रकारों ने सवालों की बौछार शुरू की तो, कभी माइक बॉक्स प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी अपनी तरफ खींचकर जवाब देने लगतीं तो, कभी प्रदेश प्रभारी राहुल बाबा को बचाने में अपने वाक कौशल का इस्तेमाल करने लगते।
इसी बीच किसी पत्रकार ने कह दिया कि राहुल गांधी को बोलना नहीं आता क्या। सवाल तो, उन्हीं से किए जा रहे हैं। खिसियाए राहुल ने माइक लेकर कहा कि आप लोगों को क्या लगता है कि मुझे बोलना नहीं आता। अब मैं आप लोगों को बोलकर दिखाता हूं। वैसे तो, रीता जोशी और दिग्विजय सिंह दोनों ही राहुल बाबा के सुरक्षा कवच बनने की कोशिश भर कर रहे थे। लेकिन, कांग्रेस की असली बीमारी यही है। यहां बोलने वाले नेता बहुत ढेर सारे हैं। इतने कि मंच टूट जाते हैं लेकिन, मंच के नीचे नेताओं को सुनने के लिए कार्यकर्ता नहीं मिलते।
कांग्रेस की उत्तर प्रदेश में एक और बड़ी बीमारी है। इस राज्य में कांग्रेस के बहुत बड़े-बडे नेता हैं। हर शहर में ये नेता दूसरी किसी भी पार्टी के नेता से मजबूत हैं। इनके पास कार्यकर्ता भी हैं। लेकिन, वो कार्यकर्ता कांग्रेस के लिए सिर्फ अपने नेताजी को मजबूत करने के लिए काम करता है। अपने नेता को मजबूत करने के इसी चक्कर में अक्सर एक बडे कांग्रेसी नेताजी के कार्यकर्ता दूसरे बड़े कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के साथ भिड़ जाते हैं। ऐसा भिड़ते हैं कि कांग्रेस कमजोरी हो जाती है।
नई-नवेली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी के अपने शहर इलाहाबाद में तो ये आम बात है। विधानमंडल दल के नेता प्रमोद तिवारी, पूर्व जिलाध्यक्ष अशोक बाजपेयी और रीता जोशी के समर्थकों के बीच अकसर किसी राष्ट्रीय नेता के सामने अपनी हैसियत दिखाने के लिए मारपीट हो जाती थी। अच्छा हुआ कि रीता के चिर प्रतिद्वंदी अशोक बाजपेयी अब बसपा में मायावती जिंदाबाद के नारे लगा रहे हैं। और, इलाहाबाद से ही लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी भी कर रहे हैं।
राहुल गांधी को शायद उत्तर प्रदेश में अपनी पार्टी की असली हैसियत का अंदाजा और इसे फिर से मजबूत करने में आने वाली असली मुश्किल भी पता चल गई होगी। इसीलिए जाते-जाते राहुल ने कहा- हमें अपनी पार्टी के भीतरघातियों से सबसे ज्यादा परेशानी हो सकती है। अब अगर ये बात प्रदेश के बड़े कांग्रेसियों की समझ में आती है तो, शायद राहुल की उत्तर प्रदेश योजना लोकसभा चुनावों में कुछ असर कर पाए। क्योंकि, रीता बहुगुणा जोशी और दिग्विजय सिंह लोगों को जोड़ने और राजनीतिक जोड़-तोड़ की बेजोड़ क्षमता तो रखते ही हैं।




पाकिस्तान में मुशर्रफ की तानाशाही चलती है ये, दुनिया जानती है। पश्चिम बंगाल में वामपंथियों का कैडर पिछले 30 सालों से तानाशाही चला रहा है लेकिन, पश्चिम बंगाल सरकार को दुनिया की सबसे ज्यादा समय तक चलने वाली लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार कहा जाता है।
मुशर्रफ ने अभी पाकिस्तान में आपातकाल लगाया है। पश्चिम बंगाल में पिछले 30 सालों से सीपीएम कैडर का अघोषित आपातकाल चल रहा है।
मुशर्रफ दुनिया के सामने पाकिस्तान को बचाने के लिए आपातकाल जरूरी बताते हैं। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्या और सीपीएम महासचिव प्रकाश करात बंगाल के विकास के लिए हर उस व्यक्ति को कुचल देने की हिमायत कर रहे हैं जो, इस रास्ते में रोड़ा बन रहा हो।
मुशर्रफ बेनजीर को वतन लौटने की इजाजत देते हैं लेकिन, पाकिस्तान में आते ही आत्मघाती दस्ते बेनजीर का स्वागत करते हैं। पश्चिम बंगाल में रहकर दुनिया भर में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हल्ला करने वालों को वामपंथी सरकार सर पर बिठाकर उन्हें ट्रेडमार्क की तरह इस्तेमाल करती है लेकिन, अगर बंगाल में सरकारी और लाल झंडा कैडर की काली करतूतों के खिलाफ कोई कुछ बोला तो, मेधे पाटेकर की तरह उसकी कार पर हमला बोल दिया जाता है।
पाकिस्तान में मुशर्रफ ने पहले जेहादियों को पैदा किया। उन्हें भारत के खिलाफ और पाकिस्तान में अपने विरोधियों के खिलाफ इस्तेमाल किया। अब वही जेहादी लाल मस्जिद जैसे कांड कर रहे हैं और मुशर्रफ के लिए ही मुश्किल बन गए हैं। वामपंथी विचारधारा से निकले माओवाद और माओवादियों का इस्तेमाल सीपीएम ने पूरे देश मे अपने विरोध में उठने वाले हर विचार को दबाने में किया। अब जब बंगाल में अपनी जमीन बचाने के लिए किसान माओवादी तरीके अपना रहे हैं तो, करात और दूसरे वामपंथी कह रहे हैं कि ममता बनर्जी वामपंथी सरकार गिराने के लिए माओवादियों का इस्तेमाल कर रही हैं।
पाकिस्तान में कई इलाके ऐसे हैं जहां सेना की भी घुसने की हिम्मत नहीं होती। पाकिस्तान के ऐसे इलाकों में अक्सर जेहादियों की अत्याधुनिक हथियार लहराते टीवी चैनल्स अखबारों में दिखते रहते हैं। पश्चिम बंगाल में हाल और भी खराब है। सीपीएम कैडर के साथ वहां की पुलिस मिली हुई है। बंकर बनाकर सीआरपीएफ के जवानों को घुसने से रोका जा रहा है। सीआरपीएफ को जमीन-रास्ते में जगह-जगह बारूद-बम बिछे मिले हैं।
पाकिस्तान में मुशर्रफ जजों की और उनके बेटे-बेटियों की अश्लील तस्वीरें खींचकर अपने साथ रहने के लिए ब्लैकमेल कर रहे हैं। तो, पश्चिम बंगाल में सरकार के कुकृत्यों पर आंख मूंदे रखने के लिए वामपंथी केंद्र सरकार पर दबाव (परमाणु समझौता, FDI और ऐसे ही दूसरी बातों के जरिए) बनाए रखते हैं। यही वजह है कि सीपीएम कैडर के इतने नंगे नाच के बाद भी केंद्र सरकार ने कोई भी कड़ा कदम नहीं उठाया है। दूसरी कोई सरकार होती तो, राष्ट्रपति शासन के बहाने अब तक कांग्रेस ही वहां राज कर रही होती।
नंदीग्राम में 14 लोगों की हत्या के आंकड़े सरकारी थे। असली आंकड़ा छिपा लिया गया। सीबीआई जांच में ये साबित हो गया था कि सारी हत्याएं सीपीएम कैडर और उसके साथ मिले पुलिस वालों ने की। लेकिन, कुछ नहीं हुआ। सिंगूर में सीपीएम का कैडर एक नाबालिग लड़की के बलात्कार और उसकी हत्या के आरोप में जेल में है।
सीएनएन-आईबीएन और आईबीएन 7 पर एक महिला चीख-चीखकर बता रही थी कि सीपीएम के कैडर ने उसे मारा पीटा और फिर उसके और उसकी बेटियों के साथ बलात्कार किया। उसके बाद वो दरिंदे उसे उठा ले गए और अब तक उसकी बेटियों का पता नहीं हैं। टीवी चैनलों पर नंदीग्राम की हकीकत देखने के बाद मन बहुत ज्यादा खिन्न हो गया है। बस इतना ही कहूंगा कि पाकिस्तान में और पश्चिम बंगाल दोनों ही जगहों पर जितने ज्यादा दिनों तक तानाशाही रहेगी, भारत देश के लिए खतरा उतना ही बढ़ता जाएगा।


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