भारत कोच्चि वनडे ऑस्ट्रेलिया से 84 रनों से हार गया। धोनी के सारे धुरंधर फ्लॉप हो गए। नए-पुराने सारे खिलाड़ी फुस्स हो गए। आज धोनी को एक कप्तानी पारी खेलने की जरूरत थी। लेकिन, खुद धोनी भी वो नहीं कर पाए। हां, धोनी के धुरंधर मैदान पर गुस्से में इतने थे जैसे किसी विश्व विजेता को किसी पिद्दी ने ललकार दिया हो। जबकि, सच्चाई यही थी कि सामने कई सालों से निर्विवाद विश्व विजेता ऑस्ट्रेलिया के सामने गलती से 20-20 का विश्व चैंपियन बना भारत था।
ऑस्ट्रेलियाई टीम जब भारत की धरती पर उतरी थी तो, ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पोंटिंग से किसी भारतीय पत्रकार ने अति उत्साह में पूछ लिया कि वो धोनी की यूथ ब्रिगेड को किस तरह से आंकते हैं। रिकी पोंटिंग ने ऑस्ट्रेलिया की पुरानी क्रिकेट स्ट्रैटेजी के तहत जवाब दिया कि भारत की टीम एक 20-20 का विश्व कप जीतकर आई है। जबकि, ऑस्ट्रेलिया की टीम ने जो, क्रिकेट में किया है, उसे करने के लिए भारतीय टीम को अभी बहुत लंबा सफर तय करना है। मैच से पहले विरोधी टीम पर दबाव बनाने के लिए ये ऑस्ट्रेलिया की चिर परिचित रणनीत थी।
वैसे, इस बार भारत के क्रिकेट खिलाड़ी पहले के खिलाड़ियों की तरह चुप नहीं रहे। धोनी की यूथ ब्रिगेड ने मीडिया के जरिए रिकी पोंटिंग को करारा जवाब दिया। लेकिन, मैदान पर उतरते ही सब साफ हो गया। भारतीय टीम के खिलाड़ी गुस्से में कुछ ऐसे ही हो गए थे जैसे, किसी कमजोर को गुस्सा आने पर उसके मुंह से झाग निकलने लगता है। शरीर कांपने लगता है। आंखें चढ़ जाती हैं और शरीर में रही-सही ताकत भी खत्म हो जाती है।
श्रीशांत, हरभजन और टीम के दूसरे खिलाड़ियों को देखकर तो ऐसा ही लग रहा था। श्रीशांत को तो, देखकर कई बार लगा कि वो कहीं ब्लड प्रेशर की बीमारी का शिकार तो नहीं हो गया है। पहले मैच में बारिश ने भारतीय टीम की इज्जत बचा ली थी। उसके बाद भी भारतीय टीम के खिलाड़ियों को असली विश्व विजेता ऑस्ट्रेलिया की ताकत का अहसास नहीं हो सका। दरअसल ये कुछ ऐसी ही बात हो गई कि काबिलियत से ज्यादा सम्मान मिल जाने पर कोई मानसिक तौर पर गड़बड़ हो जाए। फटाफट क्रिकेट में विश्व विजेता बनने के बाद भारत में मिले सम्मान के बाद शायद भारतीय टीम की हालत कुछ ऐसी ही है। अब भारतीय टीम को अपनी और देश की जरा सी भी इज्जत बचानी है तो, मैदान पर गुस्सा और मीडिया में भड़काऊ बयान देने के बजाए मैदान पर अपना खेल ऑस्ट्रेलिया से बेहतर करे। क्योंकि, पोंटिंग ने भड़काऊ बयान दिया, साथ ही मैदान पर भी उसे साबित कर दिया।

Tags Categories: Sports Posted By: harshvardhan tripathi
Last Edit: 03 Oct 2007 @ 05 51 AM

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मैं चक दे इंडिया फिल्म देखने के बाद से ही लगातार ये सोच रहा था कि ये कबीर खान कहां मिलेगाजो, हमारी क्रिकेट, हॉकी या दूसरी टीमों को टीम की तरह खेलना सिखा सकेबहुत दिमाग लगाने पर भी समझ में नहीं रहा थालेकिन, अब समझ में आया कि हमें कबीर खान की जरूरत ही नहीं हैक्योंकि, जिस बात के लिए कबीर खान की जरूरत थी वो तो, टीम इंडिया ने सीख लिया हैआज के जमाने की फटाफट क्रिकेट यानी 20-20 में भारत विश्वविजेता हो गया है
फाइनल मैच से पहले तक धोनी की धाकड़ धुरंधरों की टीम कमाल दिखाती रहीलेकिन, हम यही समझते रहे कि शायद तुक्का लग रहा हैइंग्लैंड के मैच में युवराज के छक्कों को छोड़ इस बात की चर्चा कम ही हुई कि टीम इंडिया खेलीसहवाग-गंभीर की सलामी जोड़ी की तेज-ताकतवर पारी लोगों के जेहन से गायब हो गईदरअसल हम भारतीयों की आदत ही कुछ ऐसी हैहमारे लिए हर जगह एक नेता चाहिए और नेता भी ऐसा जो, अपने पूरे साथियों के बराबर काम खुद करेयानी हर जीत का सेहरा नेता के ही सिर बंधेवो, नेता चाहे कभी कपिल बने, गावस्कर बने, सौरभ गांगुली बने, सचिन तेंदुलकर बने या फिर युवराज, सहवाग या टीम इंडिया का कोई और खिलाड़ी
और, चूक यहीं से होनी शुरू होती हैफिर टीम इंडिया रह ही नहीं जाती हैकिसी एक सचिन या सौरभ के आउट होने पर टीवी बंद कर दी जाती हैसहवाग, युवराज के बोल्ड होते ही गालियां मिलने लगती हैंक्योंकि, टीम इंडिया के लोगों को टीम पर नहीं सिर्फ 1, 2, 3, 4 नंबर के नेताओं पर ही भरोसा होता हैऔर, यही वजह रही कि वर्ल्ड कप में दुनिया के सबसे मजबूत खिलाड़ियों को ले जाकर भी हम कुछ खास नहीं कर सके
खैर, वो बीती बात हैये धोनी वाली नई टीम में ना सब नेता हैंपहला मैच खेलने वाले रोहित शर्मा भी और सिर्फ फाइनल खेलने वाले इरफान पठान के भाई यूसुफ पठान भीअब हम विश्वचैंपियन हैंहमने पाकिस्तान को हराया हैउससे पहले हम दुनिया की सबसे प्रोफेशनल टीम ऑस्ट्रेलिया को भी धूल चटा चुके हैंइंग्लैंड हमारे सामने टिक नहीं पायाअब जरा याद करके बताइए, इन मैंचों में कौन सा एक खिलाड़ी था जो, हर मैच में चला होशायद कोई नहींलेकिन, हर मैच में कोई कोई चलाहर मैच में एक नया नेता थासब अपने जवान नेता धोनी के साथ थेफाइनल में जब सहवाग की जगह यूसुफ पठान आए तो, कई लोग इससे भी मायूस थेलेकिन, अब टीम इंडिया खेल रही थी, इसलिए सहवाग स्टैंड में बैठे भी टीम की ताकत बन रहे थेदेश में हर न्यूज चैनल पूरे भरोसे के साथ कप हमारा है, चक दे कप जैसे नारों के साथ सुबह से ही डटा हुआ था
टीम इंडिया खेल रही थीकोई हरियाणा, चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश, झारखंड, महाराष्ट्र के लिए नहीं खेल रहा थासब टीम इंडिया के लिए खेल रहे थेकिसी का अपना रिकॉर्ड बने बनेटीम जीत रही थीसब रिकॉर्ड के साझीदार बन रहे थेफटाफट क्रिकेट में भी सिर्फ 158 रनों के स्कोर पर भी पूरे देश को जीत का भरोसा थाऐसा नहीं है कि सिर्फ क्रिकेट में ही देश का भरोसा बढ़ा होभारतीय हॉकी टीम ने एशिया कप जीतासब कबीर खान के नुस्खे का कमाल है
पहले देश के लिए खेलोफिर टीम के लिए खेलोफिर जान बचे तो, अपने लिए खेलो और लगाओ छक्के पे छक्के कौन रोकता हैवैसे मैच खत्म होते ही एक और फ्लैश आया कि टीम इंडिया को बीसीसीआई 8 करोड़ रुपए देगा। सिर्फ युवराज को ही एक करोड़ मिलेंगे। भई अब तो पैसे के लिए भी सिर्फ अपने लिए खेलने की जरूरत नहींतो, याद रहेगा ना ये टीम इंडिया वाला नुस्खा

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Last Edit: 24 Sep 2007 @ 10 01 PM

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