पना पना तसरा मोर्चा
मलेन्ु उपाèयाय
चौहवं लोकसभा के नारे को े'कर यह कयास नहं ल?ाया ा सकता था कि पं्रहवं लोकसभा के लिए होने वाले चुनाव में तसरा मोर्चा कोई मूर्त रूप ले पाए?ा। लेकिन कर्नाटक के तुमकुर में पूर्व प्रèाानमंत्र एच.ड.ेव?ौा के बुलावे पर िस प्रकार 4 वामपंथ लों समेत 8 क्षेत्रय ल एक मंच पर आए "र एकता का ऐलान किया उसने एक टके में यूपए "र एनडए क नं हराम कर है। परमाणु करार पर यूपए सरकार को आर-पार क चुनौत ेने वाले माकपा महासचिव प्रकाश कारत क मेहनत ने सर ि'ाना शुरू कर िया है।
तुमकुर में भले ह बसपा प्रमु' मायावत "र न्ना्रमुक प्रमु' यललिता न पहुंच हाें, परंतु उनके प्रतिनिधि के रूप में सतशचं्र मिश्रा "र मैत्रेयन पहुंचे। हरियाणा के पूर्व मु'्यमंत्र भनलाल के पुत्र कुलप बिश्नोई क हरियाणा नहित कां?्रेस के नुमाइंे क उपस्थिति भ भापा "र कां?्रेस ोनों के लिए बैचेन पैा करने वाल है। लेकिन चुनाव परिणाम आने के बा भ इन सभ को एक ुट र'ना टे 'र है। ल?ता है प्रकाश कारत ने मेंढकों को एक तराू में तौलने का ुष्कर कार्य हाथ में ले लिया है।
फिलहाल, तसरे मोर्चे का ो स्वरूप उभर रहा है वह चुनाव बा भ बरकरार रहे?ा, कहना मुश्किल है। तसरा मोर्चा किस करवट बै े?ा यह पं्रहवं लोकसभा के चुनाव परिणाम तय करें?े
आ?ाम लोकसभा चुनाव के परिणाम के विषय में ?र कोई भविष्यवाण क ा सकत है तो सिर्फ यह कि कें्र में सत्ताारू यूपए "र प्रमु' विपक्ष ? बंधन एनडए में से किस को भ चुनाव में स्पष्ट नाेश क प्राप्ति नहं हो? "र सत्ताा का मु'्य नियंत्रण क्षेत्रय लों या तसरे मोर्चे के हाथ में हो?ा। चुनाव से पहले बने ? बंधन चुनाव बा टूटें?े "र नए सिरे से नए ? बंधन बनें?े। ऐसे में ितने ल हैं उनसे ्याा मोर्चे हैं।
फिलहाल, वामपंथ ल पूर ताकत के साथ भापा "र कां?्रेस के विकल्प के रूप में तसरा मोर्चा बनाने क कवाय में ुटे हैं। लेकिन यह कवाय कितन सफल हो?, भविष्य ह बताए?ा। परमाणु करार के मुíे पर कां?्रेस से ?लबहियां करने क पूर्व संèया तक समावा पार्ट तसरे मोर्चे क मु'्य पैरोकार थ "र उसके èयक्ष मुलायम सिंह याव उत्तार प्रेश में यूएनपए क रैलियां कराकर यललिता, चं्रबाबू नायडू "र वृंावन ?ोस्वाम के हिं भाषणों ्वारा तसरा मोर्चा मबूत कर रहे थे।
लेकिन ैसे ह मर सिंह क मेरिका यात्रा के बा सपा ने परमाणु करार पर मनमोहन सिंह के ब?ल?र होने का ऐलान किया तो रात ह रात में सपा के लिए तसरा मोर्चा बेकार क बात हो ?ई।
सपा ्वारा रिक्त क ?ई ?ह को उसक धुर विरोध बसपा ने पूरा किया "र वाम लों ने बसपा को तसरे मोर्चे का ?ुआ बना िया। लेकिन पन आतों से लाचार बसपा प्रमु' मायावत इस मोर्चे क कब तक 'ेवनहार रहें?, यह तो स्वयं मायावत को भ नहं पता है। उत्तार प्रेश में तसरे मोर्चे क टां? तोने का काम मायावत ने प्रेश क सभ 80 सटों पर चुनाव लने क ोषणा के साथ किया। ब उत्तार प्रेश में एक तसरा मोर्चा मायावत का है तो ूसरा वामपंथ लों का "र तसरा नेशनल लोकतांत्रिक पार्ट, भारतय समा पार्ट ैसे छोटे-छोटे ातय लों का। वहां चौथा तसरा मोर्चा ‘मिल्ल महा’ बन ?या है, िसने प्रेश क सभ 80 सटों पर चुनाव लने का ऐलान किया है। े'ना यह है कि चुनाव बा इन मोचो का क्या हश्र होता है।
उत्तार प्रेश क तरह ह बिहार में भ कई तसरे मोर्चे रो बन-बि? रहे हैं। यूं तो रामविलास पासवान क लोपा "र लालू प्रसा याव क रा कें्र क यूपए का हिस्सा हैं, लेकिन आ तक के ो हालात हैं, उनमें लोपा "र रा में से एक कां?्रेस के साथ रहे?ा "र एक तसरा मोर्चा बनाए?ा। बिहार में भाकपा माले "र भाकपा ने एक साथ मिलकर लने का ऐलान किया है "र संभावना है कि माकपा भ इस मोर्चे में शामिल हो?। उधर चर्चा है कि बिहार के उपमु'्यमंत्र "र भापा नेता सुशल मो, बिहार के कल्याण सिंह बनने वाले हैं "र उनका भ पना तसरा मोर्चा हो?ा।
बिहार के पोस रा्य ार'ंड में भ तसरे मोर्चे ने कमर कस ल है। यहां कमान रा्य के पूर्व मु'्यमंत्र "र भापा के वि्रोह नेता बाबूलाल मरांड के हाथों में है। यूं तो ?ुरू के नाम से प्रसिध् शिबू सोरेन का ार'ंड मुक्ति मोर्चा यूपए का हिस्सा है, लेकिन कब वह तसरे मोर्चे में तब्ल हो ाए कहा नहं ा सकता है।
उधर ताा टनाक्रम में उसा में एनडए बि'र ?या है "र ?्यारह वषो के बा चानक बू पटनायक के पुत्र "र रा्य के मु'्यमंत्र नवन पटनायक को धर्मनिरपेक्षता या आ ?ई है। बिना कोई ेर किए ेड ,ल नेता हरनहल्ल डोड्डे?ौा ेव?ौा ने ब को तसरे मोर्चे में ?ो लेने का नेह निमंत्रण भे िया है "र माकपा नेता सताराम येचुर का ावा है कि वामलों के साथ ब का सटों पर तालमेल हो ?या है। सो, ब उसा में भ तसरा मोर्चा हुंकार भर रहा है। उसा में ार'ंड मुक्ति मोर्चा हाल तक क सूचना के नुसार तसरे मोर्चे का हिस्सा हो?ा।
कर्नाटक में भापा के साथ मिलकर सरकार बना चुके "र कें्र में कां?्रेस के सहयो? से प्रधानमंत्र रह चुके एच.ड. ेव?ौा तसरे मोर्चे क नैया के 'िवैया हैं। विधानसभा चुनाव में बुर तरह मात 'ाए ेव?ौा क्या ?ुल 'िलाते हैं यह तो भविष्य ह बताए?ा, लेकिन किसान नेता क छवि र'ने वाले "र हिं न ानने वाले ेव?ौा चमत्कार नेता हैं, ो रामकृष्ण हे?े "र एस.आर. बोम्मई ैसे ि?्? कन्न नेता"ं को पट'न ेकर उरू तक पहुंचे। फिलहाल, ेव?ौा को आशा है कि कर्नाटक क नता उन्हें प्रधानमंत्र बनाने के लिए िताए?, "र कां?्रेस भापा को रोकने के लिए, तो बसपा मुलायम सिंह को रोकने के लिए "र भाकपा वाम-नतांत्रिक ? बंèान के लिए उन्हें प्रधानमंत्र बनाए?; "र ऐसा नहं हुआ तो ेव?ौा किस करवट बै ें?े यह समय तय करे?ा। फिलवक्त तो वे तसर करवट बै े हैं।
क्षिण भारत तो तसरे मोर्चे क उर्वरा भूमि "र प्रयो?शाला रहा है। सात लों के सात ोों के रथ ‘राष्ट य मोर्चा’ क ल?ाम एक समय में तेलु?ु फिल्मों के स्टार नंमूरि तारक रामाराव के हाथ में रह थ। बा में रामाराव का नाश करने वाले उनके ामा चं्रबाबू नायडू के हाथों में संयुक्त मोर्चे क कमान रह। यह ?र बात है कि बा में यह नायडू रा? बनाने वाले प्रमु' आम थे। लेकिन भापा के साथ ाने के कारण मुस्लिम मताता"ं ्वारा ुरियाए ?ए तेेपा प्रमु' ब तसरे मोर्चे के ंडे तले हैं। पहले नायडू क मुसबत बने तेलं?ाना राष्ट समिति टआरएस नेता चं्रशे'र राव तो उनके तसरे मोर्चे में आ ?ए हैं, लेकिन एक न्य फिल्म स्टार चिरंव क नवात पार्ट ‘प्रारा्यम’ ने उनक नं हराम कर है। माकपा "र भाकपा स्ट ेट के तहत ोनों तसरे मोर्चों के साथ हैं। हैराबा शहर में सलाहउíन "बेस के पुत्र सबाहउíन "बेस क एमआईएम का पना ल? तसरा मोर्चा है।
समंर किनारे के एक न्य रा्य तमिलनाडु में भ तसरा मोर्चा तैर रहा है। न्ना्रमुक के नेतृत्व में यहां तसरे मोर्चे क कमान यललिता के हाथों में है। एनडए ? बंधन में रहकर भापा नेतृत्व को 'ून के ूंट पिलाने वाल म्मा तसरे मोर्चे को कितना रुलाएं?, पता नहं। उधर म्मा के ुश्मन नंबर-वन ्रमुक का भ श्रलंका मसले को लेकर यूपए के साथ संबंध ोस्ताना नहं है। सो, हो सकता है कि चुनाव से ऐन पहले ्रमुक का भ पना तसरा मोर्चा हो।
?र समंर के क विपरत सरह म्मू कश्मर क बात क ाए तो वहां तसरा मोर्चा बि'र चुका है। उमर ब्ुल्ला के नेतृत्व वाल नेशनल कांफ्रेंस यूएनपए का हिस्सा थ, लेकिन परमाणु मसले पर कां?्रेस के साथ ाने के बा उसने यूपए का हिस्सा बनना स्वकार किया है। लेकिन ाट में कां?्रेस के साथ ?र सटों का तालमेल नहं हुआ तो उमर ब्ुल्ला का भ तसरा मोर्चा हो?ा।
महाराष्ट में यों तो शर पवार के नेतृत्व वाल एनसप, यूपए का हिस्सा है, लेकिन सट बंटवारे पर कां?्रेस से 'टपट के चलते हो सकता है कि एनसप का सपा "र रिपब्लिकन पार्ट 'फ इंडिया के साथ तसरा मोर्चा बन ह ाए।
भ तक मèयप्रेश साधारणत: ्विध्रुवय रानति क ड?र पर चलता रहा है, लेकिन भापा क वि्रोह नेता उमा भारत क भारतय नशक्ति पार्ट मèय प्रेश में तसर ताकत बन रह है। पार्ट मèयप्रेश क सभ सटों के साथ ेश भर में ल?भ? 150 सटों पर चुनाव ले?।
तसरे मोर्चे के मु'्य पैरोकार वामलों क रणनति येन केन प्रकारेण कां?्रेस "र भापा को ्याा से ्याा नुकसान पहुंचाने क है, ताकि क्षेत्रय ल मबूत के साथ उभरें "र फिर चुनाव बा तसरा मोर्चा मूर्त रूप ले। फिलहाल, तसरे मोर्चे का ो स्वरूप उभर रहा है वह चुनाव बा भ बरकरार रहे?ा, कहना मुश्किल है। तसरा मोर्चा किस करवट बै े?ा यह पं्रहवं लोकसभा के चुनाव परिणाम तय करें?े।
[ यह रिपोर्ट "प्रथम प्रवक्ता" पाक्षिक में प्रकाशित हुय ] तसरे मोर्चे के मु'्य पैरोकार वामलों क रणनति येन केन प्रकारेण कां?्रेस "र भापा को ्याा से ्याा नुकसान पहुंचाने क है, ताकि क्षेत्रय ल मबूत के साथ उभरें "र फिर चुनाव बा तसरा मोर्चा मूर्त रूप ले। फिलहाल, तसरे मोर्चे का ो स्वरूप उभर रहा है वह चुनाव बा भ बरकरार रहे?ा, कहना मुश्किल
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– March 18, 2009
कल्याण का रास्ता िल्ल नहं ना?पुर ाता है
- मलेन्ु उपाध्याय : 03/02/09
मेरे छात्र रानति के ौर के एक मित्र हैं ो मुलायम सिंह के उत्तर प्रेश के प्रमु' 25 मैनेरों में से एक हैं "र 2 ून 1995 के ल'नऊ के स्टेट ?ेस्ट हाउस कांड के प्रमु' भियुक्तों में से भ एक हैं। 2007 के विधानसभा चुनाव के ौरान सपा के एक कर्णधार कुंवर नटवर सिंह का बयान आया िसका लब्बो लुबाव था कि सरकार तो सपा क ह बने? भले ह भापा के सहयो? से बने। हालांकि न नौ मन तेल हुआ "र न राधा नाचं। न मुलायम सिंह सौ से ऊपर पहुंचे "र न भापा के समर्थन से सरकार बनने क नौबत आई। मैंने पने उक्त मित्र महोय से ये पूछा कि नटवर सिंह ने यह क्या कह िया? मेरे मित्र नि बातचत में भ बहुत सोच समकर बोलते हैं, पर ो बोलते हैं उससे ंाा ल?ाया ा सकता है कि 5, विक्रमाित्य मार्? ल'नऊ में यह क्या चल रहा है। ( हालांकि इस नि बातचत का िक्र करना सै्धांतिक रूप से ?लत है, परंतु ो बात हम आ?े कहना चाह रहे हैं उसके लिए रूर भ है।)
मित्र ने बाव िया कि सह है, मायावत को रोकने के लिए ?र भापा से समौता करना पे तो किया ाए। इन ा वालों ( मुसलमानों ) क फिक्र नहं करन चाहिए। फिर एक भ् स ?ाल ेकर कहा कि मायावत, नरें्र मो का प्रचार करत है फिर भ ये उसे वोट ेते हैं "र ब पिटें?े तो ाएं?े कहां लौटकर नेता क शरण में आएं?े।
मेरे मित्र के वक्तव्य से मुलायम सिंह याव "र उनक मंडल क सोच सम ा सकत है। कमोबेश वि?त 5-6 वर्षों में सपा नेतृत्व क यह सोच बन ?ई है कि मुसलमान ब तक पिटे?ा नह तब तक उन्हें ( सपा को ) मिले?ा नहं । इसलिए सपा नेतृत्व कोई भ ऐसा वसर छोता नहं िसके चलते मुसलमान पिटे नहं ।
फिलवक्त छह िसम्बर 1992 के बाबर मस्ि के कातिल "र भापा के बा? कल्याण सिंह सपा के ंडाबरार हो ?ए हैं। लेकिन ल?ता है कि मुलायम सिंह मायावत के 'ौफ में ल्बा कर ?ए हैं "र -' चौबे छब्बे बनने ?ए, ुबे बनकर लौटे' वाल कहावत उन पर फिट बै ?ई है। सपा के मुस्लिम नेता कल्याण को पचा नहं पा रहे हैं "र सपा में एक ब ब?ावत होने वाल है ो मुलायम सिंह का रानतिक कैरियर चौपट कर े?। हालांकि सपा ने सोचा था कि ?र कल्याण सिंह साथ आ ाएं?े तो लोध वोटों से उन्हें फाया हो ाए?ा "र लोकसभा चुनाव में पन ताकत बाकर वह केन््र में बनने वाल नई सरकार से मायावत को ेल भिवाने के लिए सौेबा कर लें?े। लेकिन ल?ता है यह ांव उल्टा प ?या है।
परमाणु करार पर मरका क लाल करने से सपा मु'िया से नारा चल रहे फायरब्रांड सपा नेता मौ0 आम 'ां कल्याण सिंह क भर्त से फट पे हैं "र 'ुलकर उन्होंने कल्याण सिंह को पार्ट में लेने का विरोध किया है। आम 'ां उन लो?ों में शुमार किए ाते हैं, ो उसूलो क हिफात के लिए किस भ ह तक ा सकते हैं। या र'ना चाहिए कि आम 'ां ने उस बुरे ौर में भ मुलायम का ामन नहं छोा था ब मुलायम सिंह का साया भ उनका साथ छो ?या था। 1991 का वह ौर भ मुलायम सिंह को शाय आ बा लवुड चकाचौंध "र लालों क रोशन में या न हो ब बहैसियत मु'्यमंत्र मुलायम सिंह हैलका प्टर से उतरते थे "र उन्हे े'ने "र सुनने के लिए 100 लो? भ नहं होते थे। ऐसे समय भ आम 'ां मुलायम सिंह के लिए ?ला फा रहे थे कि मुलायम सिंह मुाहि है, बाबर मस्ि का र'वाला है, िसने मस्ि क हिफात के लिए सरकार कुर्बान कर । लेकिन आम को यह कहां पता था कि वह मुलायम सिंह एक लित महिला से बराकर उस बाबर मस्ि के कातिल से समौता कर ले?ा?
आम 'ां कल तक मुसलमानों से कह रहे थे कि छह िसम्बर 1992 तुम्हारे माथे पर कलंक ?ोा ?या है, ब ान ेना तो बच्चों के ूसरे कान में छह िसम्बर क िल्लत क या भ िलाना। आम भाई िस िल्ल्त को छह िसम्बर 1992 से ेलते आ रहे थे उस िल्लत का वाइस ( िम्मेार) तो ब उनक छात पर 'ा है। बताया ाता है कि आम 'ां ने कल्याण सिंह को लेकर पन नारा? का सार्वनिक इहार कर भ िया है "र मुलायम सिंह ्वारा कल्याण सिंह को बाबर मस्ि के कत्ल के इल्ाम से बर करने पर त'ा प्रतिरोध र् कराया है। आम के बाव में सपा के प्रेश प्रवक्ता राेन््र चौधर ने बयान े िया कि कल्याण सिंह तो पहले भ सपा सरकार को समर्थन े चुके हैं। ो लो? सपा क ंरून ?णित से वाकिफ हैं वे च्छ तरह ानते हैं कि ब तक मुलायम सिंह क रामं न हो राेन््र चौधर क "कात आम 'ां के 'िलाफ बयान ेने क नहं है।
कल्याण सिंह के मसले पर सपा सांस शाफिकुर्रहमन वर्क "र सलम शेरवान ने भ बहत ?ं?ा में हाथ धो लिया। हालांकि ोनों इसलिए नारा हैं कि उनके टिकट काटे ?ए हैं वरना तो परमाणु करार पर मरका के ुमछल्ले तो वर्क "र शेरवान ोनों ह थे। लेकिन नता में संेश तो ?लत ा ह रहा है। हालांकि शेरवान को तो उनके क्षेत्र बायू का मुसलमान, उन्हें मुसलमान मानने को तैयार ह नहं है, चूंकि शेरवान तो छह िसम्बर 1992 को नरसिंहाराव के साथ बाबर मस्ि शह होते हुए े'ते रहे थे "र उस समय से लेकर आ तक वे इस मसले पर एक शब् भ नहं बोले हैं।
तमाशा यह है कि बाबर मस्ि के सारे कातिल आ मुलायम सिंह क ब?ल में 'े हैं "र मुलायम सिंह एक लाल से उन्हें धर्मनिरपेक्ष होने का प्रमाणपत्र भ िलवा रहे हैं। ब्रभूषणशरण सिंह, डवाण क रथयात्रा के सारथ थे आ मर सिंह के पायलट हैं। उमा भारत छह िसम्बर 1992 को 'एक धक्का "र ो/बाबर मस्ि तो ो' का नारा ल?ाकर मुरल मनोहर ोश के ?ले में ूल रह थं, ब मर सिंह को बचाने के लिए सड लि' रह हैं। कल्याण सिंह को छह िसम्बर 1992 को बाबर मस्ि का कत्ल करने के लिए ?र्व है लेकिन मुलायम ने उन्हें इस इल्ाम से बर कर िया है , ब ?र उच्चतम न्यायालय ने कल्याण को इस ुर्म में सा तो इसमें मुलायम क्या करें?
ब परमाणु करार पर मुलायम सिंह ने पने चालस वर्ष पुराने उन वामपंथ मित्रों को ?ाल ेते हुए , ( िन्होंने न केवल मुलायम के रानतिक कैरियर क हिफात क थ बल्कि नेक बार उनका वन भ बचाया था) कां?्रेस का ामन थामा था, उस िन तय हो ?या था कि मुलायम सिंह ने ो रास्ता पका है वह एक िन ना?पुर ( सं मु'्यालय ) तक ाए?ा। "र कल्याण सिंह क भर्त से यह शक यकन में बल ?या है।
सं के विषय में एक कहावत मशहूर है कि वह िसे हरा नहं पाता उससे ोस्त कर लेता है। 90 के शक में स्थिति यह थ कि सं मुलायम को हरा नहं पा रहा था। इसलिए उसने एक लाल मुलायम के पछे ल?ाया। बताया ाता है कि इस लाल के पिता पक्के स्वयंसेवक थे "र मरते म तक 'ाक नेकर पहने रहे थे। लाल क मेहनत धरे-धरे रं? लाई। एक एक करके उसने मुलायम के सारे शुभचिंतक "र नंव के पत्थर चुन-चुनकर किनारे ल?ाए। नेश्वर मिश्रा निष्क्रिय होकर बुापा काट रहे हैं। रा बब्बर "र बेन प्रसा वर्मा को बाहर का रास्ता ि'ाया ा चुका है। मोहन सिंह को ण्डा किया ा चुका है। केवल आम 'ां रोा थे सो कल्याण सिंह को लाकर ऐस परिस्थितियां पैा कर ?ई हैं कि या तो िल्लत के साथ रहें या ूर हो ाएं।
लेकिन मुलायम सिंह यह बात भूल ?ए कि 1992 के बा महाराष्ट्र में शिवसेना क सरकार मुसलमान के वोट से बन थ। चूंकि मुसलमान ने े'ा कि कां?्रेस भ उसे मार रह थ "र शिवसेना भ इसलिए उसने प में 'ंर भोंकने वालों के साथ न ाकर सने पर वार करने वालों के साथ ाना पसं किया। क्या उ0प्र0 में भ मुसलमान यह रु' नहं पना सकता? िल्ल में आम? मुसलमानों के प्रर्शन में कां?्रेस "र भापा के साथ मुलायम "र मर सिंह का िस तरह से कोसा ?या उससे भविष्य क तस्वर को पा ा सकता है।
हो सकता है मुलायम सिंह ने कल्याण सिंह का छह िसम्बर 1992 का ?ुनाह माफ कर िया हो। लेकिन मुलायम सिंह को या हो या न हो लेकिन मुे भल भांति या है कि कल्याण सिंह उत्तर प्रेश के मु'्यमंत्र थे "र भोह में पुलिस ने एक फर् एन्काउन्टर में समावा पार्ट के चार पाधिकारियों को माफिया सर?ना धनंय सिंह ( ब विधायक ) बताकर मार िया था। मुलायम सिंह ने पूरे एक िन संस में हं?ामा मचाया था "र कल्याण सिंह को सपा कार्यकत्र्ता"ं का हत्यारा बताया था। स्व0 चं्रशे'र को उस समय 'े होकर सरकार से कहना पा था कि कल्याण सिंह कम से कम मुलायम से इस मसले पर बात करें "र संवाहनता टूटे। मुलायम सिंह का धर्मनिरपेक्षता का प्रमाणपत्र तो कल्याण को मिल ?या है। क्या पने कार्यकर्ता"ं के हत्यारे को भ बर करें?े मुलायम? मुलायम को या र'ना चाहिए कि उनक तरकत कोई लाल या नच'इया नहं बल्कि उनके कार्यकर्त्ता हैं, ो इस वसरवा रानति से त्रस्त हैं। उ0प्र0 का मुसलमान बस मुलायम सिंह से एक शेर में पने र् को बयां कर रहा है-'' ब भ पूछा किस ने मेर बर्बाियों का हाल / बेसा'्तां ुबां पे तेरा नाम आ ?या।''
(ले'क रानतिक समक्षक हैं "र एक पाक्षिक पत्रिका से ुे हुए हैं।)
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– February 4, 2009
चीर हरण करते बहन जी के माननीय
चीर हरण करते बहन जी के माननीय
जब मायावती ने मुलायम सिंह सरकार को अपदस्थ कर प्रदेश में स्पष्ट बहुमत हासिल किया था तब प्रदेश की जनता ने इस उम्मीद के साथ बसपा सुप्रीमो का स्वागत किया था कि अब बहन जी अपना वायदा निभायेंगी और गुंडों और अपराधियों पर लगाम कसेंगीं, लेकिन स्थिति ‘चूल्हे से निकले, भाड़ मेें गिरे’ वाली हो गई है।
एक टीवी एंकर ने अति उत्साह में मायावती के आगमन को सन् 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से बड़ी घटना करार दिया था और तमाम तथाकथित बड़े राजनीतिक समीक्षकों ने इसे अपराध के खिलाफ वोट कहा था। लेकिन डेढ़ वर्ष के शासनकाल में न तो अपराध घटे न अपराधियों का मनोबल।बल्कि सारे अपराधी बहन जी के कारवां की शोभा बढ़ा रहे हैं।
इस डेढ़ वर्ष का अगर लेखा जोखा रखा जाए तो प्रदेश में महिलाएं ही सर्वाधिक असुरक्षित हैं। रोजाना कहीं न कहीं से बलात्कार और महिलाओं के अपहरण की खबरें आती रहती हैं। और तो और राष्ट्रीय राजधानी से सटे और मायावती के गृह जनपद नौएडा में 72 घंटे में बदमाशों ने तीन लड़कियों के अपहरण व बलात्कार किए। इस सबसे इतर चिंता का विषय यह है कि बसपा के माननीय विधायकगण कई सैक्स स्कैंडल्स के मुख्य आरोपी निकल रहे हैं और ‘सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय’ का नारा देकर सत्ता हथियाने वाली बहन जी की सरकार पूरी ईमानदारी के साथ इन अपराधियों को बचाने का प्रयास भी करती है।
ऐसा क्या है कि जब जब बहन जी जी सत्तारूढ़ होती हैं तब तब बहन जी के माननीय कर्णधार सैक्स अपराधों में जुट जाते हैं। बहुचर्चित मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में सजायाफ्ता माननीय अमरमणि त्रिपाठी आज भले ही समाजवादी पार्टी के विधायक हैं, परंतु जब उन्होंने इस अपराध को अंजाम दिया था उस समय वे बहन जी की सरकार में मंत्री थे ओर प्रदेश के उन गिने चुने लोगों में शामिल थे जो बहन जी के कुर्क अमीन समझे जाते थे।
ज्ञात रहे कि 9 मई 2003 को लखनऊ के निशातगंज इलाके की पेपर मिल कालोनी स्थित अपने निवास में कवियित्री मधुमिता शुक्ला मृत पाई गई थी और पोस्ट मार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि वह गर्भवती थीं। मामला उस समय खूब उछला और मधुमिता के परिजनों ने इस हत्या के लिए सीधे सीधे अमरमणि को जिम्मेवार ठहराया था। लेकिन आरोप है कि सरकार की तरफ से भुक्तभोगी परिवार को जमकर डराया धमकाया गया। परिणाम स्वरूप 15 मई 2003 को मधुमिता के परिवार ने अमरमणि को क्लीन चिट देते हुए बयान जारी कर दिया। बाद में विपक्षी दलों के दबाव में मायावती ने मधुमिता की माँ शांति देवी की अर्जी पर केस की सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी। इस बात का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि सीबीआई जांच के आदेश के बाद मधुमिता के परिवार के साथ क्या सुलूक हुआ होगा कि अगली सुबह ही शांति देवी ने मायावती से सीबीसीआईडी जांच की मांग की जबकि सीबीसीआईडी अमरमणि को बचाने का प्रयास कर रही थी।
विपक्षी दलों के बवाल मचाने के बाद अंतत: मायावती ने अमरमणि को मंत्रिमंडल से हटाया और एक प्रेस कांर्फेंस में कहा कि अगर मधुमिता की मां अमरमणि को मंत्रिमंडल में शामिल करने को राजी हो जाएं तो तो वे अमरमणि को पुन: शामिल कर लेंगीं। बताया जाता है कि बहन जी की इस घोषणा के थोड़ी देर में ही शांति देवी ने इस आशय का पत्र सौंप दिया कि उन्हें अमरमणि को पुन: मंत्रिमंडल में शामिल करने में कोई ऐतराज नहीं है। बाद में अमरमणि को इस कांड में सजा हुई। अमरमणि पर 33 मुकदमें हैं।
अमरमणि के बाद बहन जी के नवरत्नों में शामिल राज्यमंत्री आनंद सेन यादव ने भी बहन जी का नाम रोशन किया। जब मंत्रिमंडल का गठन हुआ तो आनंद सेन जेल में थे। विधिवेत्ताओं ने सवाल उठाया कि जेल में बंद आनंद सेन की संवैधानिक स्थिति क्या है?
31 अक्टूबर 2007 को एक दलित छात्रा शशि के पिता जो डीएस-4 के नेता भी हैं, ने फैजाबाद के मंडलायुक्त को प्रार्थनापत्र देकर आनंदसेन पर अपनी पुत्री के अपहरण का आरोप लगाया। बताया जाता है कि 24 वर्षीय शशि फैजाबाद के साकेत महाविद्यालय में विधि की छात्रा थी और 22 अक्टूबर को घर से कालेज गई तो वापिस नहीं लौटी। शशि के पिता ने आरोप लगाया था कि उनकी बेटी को आनंद सेन ने बहाने से ड्राइवर विजयसेन से बुलवाया था और तब से वह गायब थी। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि सरकार आनंद सेन को बचा रही है। बहरहाल बहन जी के नवरत्न फिलहाल इस कांड में मुल्जिम हैं।
कभी टायर पंक्चर जोड़ने का काम करने वाले और अमरमणि के ड्राइवर रहे बहन जी के एक और नवरत्न ‘माननीय’ श्री भगवान शर्मा उर्फ गुड्डू पंडित भला कहां पीछे रहने वाले थे। पं0 जी पर आगरा विश्वविद्यालय की शोध छात्रा और आगरा कालेज में केमिस्ट्री की प्रवक्ता शीतल बिरला ने प्यार में फंसाने, शादी न करने और उसके साथ बलात्कार करने का आरोप लगाते हुए जिला कांशीरामनगर के कासगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। गुड्डू पंडित को बहन जी की सरकार ने जेड श्रेणी की सुरक्षा से नवाजा है और यह आम चर्चा है कि नौएडा और गाजियाबाद में जमीन के धंधों में सरकार वही करती है जो गुड्डू पंडित कहते हैं।
गुड्डू पर मुकदमा दर्ज कराने वाली शीतल का आरोप है कि माननीय महोदय ने उसके साथ कई जगह ले जाकर बलात्कार किया। शीतल के आरोप पर कासगंज थाने में मुकदमा अपराध सं. 200/8 में धारा 376, 420, 497, 342, 323, 504, 506, 120-बी के तहत मामला दर्ज किया गया। चर्चा है कि गुड्डू को बहन जी के दिल्ली स्थित निवास से पुलिस को ससम्मान सुपुर्द किया गया और उन्हें कोई तकलीफ न होने देने की हिदायत भी पुलिस को दी गई।
कभी भाजपा के बैनर तले मायावती के खिलाफ बिल्सी सुरक्षित सीट से ताल ठोंक चुके बसपा विधायक योगेंद्र सागर का मामला भी बहन जी के अपराधमुक्त प्रदेश और सोशल इंजीनियरिंग का बढ़िया नमूना है। सागर पर एक ब्राह्मण छात्रा का अपहरण करने और कई दिनों तक बंधक बनाकर रखने का आरोप है। पीड़ित छात्रा के परिजनों ने मामले की सीबीआई जांच की मांग की लेकिन बहन जी ने सीबीसीआईडी जांच का आदेश जारी कर दिया। बताया जाता है कि छात्रा ने शपथपत्र देकर सागर के विरूध्द आरोप लगाए लेकिन सीबीसीआईडी ने सागर को दोषमुक्त करार देते हुए अंतिम रिपोर्ट लगा दी।
कभी मुलायम सिंह की नाक का बाल रहे अरूणशंकर शुक्ल अन्ना’ पर हालांकि सीधे तो इस तरह का कोई आरोप नहीं है। लेकिन बताया जाता है कि उनके भतीजे पर एक मुस्लिम नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार का आरोप है। अन्ना मायावती पर 2 जून 1995 को हुए स्टेट गेस्ट हाउस कांड में भी आरोपी हैं।
बस्ती जिले की रामनगर सीट से बसपा विधायक राजेंद्र चौधरी भी ऐसे ही आरोपों से घिरे बताए जाते हैं। सूत्रों का कहना है कि बसपा की बस्ती जिले की महिला विंग की एक पदाधिकारी ने यौन शोषण का आरोप लगाया था। लेकिन बाद में अपने इस आरोप को वापिस ले लिया।
जब माननीय ऐसे अपराधों में व्यस्त हैं तो जो माननीय होने से वंचित रह गए भला वे क्यों न अपने दल का नाम रोशन करें । सो मेरठ में बसपा के कैंट विधानसभा क्षेत्र के अध्यक्ष रामकुमार असनाबड़े भी एक यौन अपराध में फंसे हैं। बताया जाता है कि बसपा की ही महिला कार्यकत्री बीना ने कैंट थाने में रपट दर्ज करवा कर आरोप लगाया कि वह तीन अक्टूबर को रामकुमार से उसके सरधना रोड स्थित कार्यालय पर मिलने गई थी जहां उसके साथ रामकुमार ने अश्लील हरकतें की और संबंध बनाने का प्रयास किया। सो अध्यक्ष जी के विरूध्द धारा 34, 294 और 506 में मुकदमा दर्ज किया गया।
ताजा मामला बसपा के एक और बड़े नेता राममोहन गर्ग का है। गर्ग उ.प्र. मत्स्य पालन निगम के अघ्यक्ष पद पर विराजमान हैं। उन पर एक लड़की ने यौन शोषण का आरोप लगाया है। हालांकि बसपा ने गर्ग से अपना पल्ला झाड़ने का प्रयास किया लेकिन सुबूत तो बसपा के ही खिलाफ हैं।
उत्तर प्रदेश महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं रह गया है और अगर कोई नीले झंडे वाला माननीय दिखे तो महिलाओं के लिए दूरी ही भली। इन सारे वाकयों पर एक शायर के लफजों में बस इतना ही-” जितने हरामखोर थे कुर्ब-ओ-जबार में / सब परधान बनकर आ गए अगली कतार में ।”
– अमलेन्दु उपाध्याय [ yअह रिपोर्ट प्रथम प्रवक्ता में प्रकाशित हुयी ]
Posted in Technical.
– January 30, 2009
रामशरण ास ब नहं रहे।
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पन बेला? "र मुंहफट टिप्पणियों के लिए पहचाने ाने वाले 'ांट समावा नेता रामशरण ास ब नहं रहे। वि?त तन वर्ष में ल'नऊ प्रवास के ौरान उनसे ल?भ? रो ह मुलाकात रहत थ। इधर ल?भ? एक वर्ष से वे स्वस्थ थे "र आ'िर में तो सं्ञा शून्य से हो ?ए थे। स्व. रानारायण "र रामशरण ास के साथ एक लंबा वक्ता ?ुारने वाले समावा नेता उमाशंकर चौधर ने काफ पहले बताया था कि धयक्ष का मस्तिष्क सिकु ?या है।
रामशरण ास उस सियास मात के आ'र लो?ों में थे िन्होंने ेश "र समा क बेलौस 'िमत क लेकिन पने लिए एक आशियाना भ न बना सके। उनका निधन केवल समावा पार्ट क क्षति नहं है बल्कि मूल्यों क रानति करने वाले आंोलन क पूर्णय क्षति है। रामशरण ास, रफ हम किवई, यप्रकाश नारायण, आचार्य नरें्र ेव, रानारायण, सताराम केसर ैसे नेता"ं क क में थे िनका नाम लेकर तो तमाम लो? सत्ताा "र ौलत के शि'र पर पहुंच ?ए, परंतु ो स्वयं पने या पने परिवार के लिए कुछ नहं कर पाए।
2006 में ब विधान परिष सस्यों का चुनाव होना था, किस ने धयक्ष से कह िया कि बलराम याव (पूर्वांचल के मिन मुलायम) ने सुाव िया है कि धयक्ष ब बुुर्? हो ?ए हैं "र इस बार उनके पुत्र ?पाल को विधान परिष भे िया ाए ताकि धयक्ष के सामने ह उनका पुत्र स्थापित हो ाए। कोई "र रानेता होता तो बलराम के सुाव पर मकर ?ोटें बिछाता लेकिन धयक्ष तो धयक्ष थे सो उ' ?ए "र कहने ल?े कि बलराम तो मेरा ुश्मन निकला। मेर िं? भर क रानति पर पान फेरना चाहता है। ?पाल को सन में ाना है तो काम करे, चुनाव ले, रामशरण ास का लका होने क वह से विधान परिष में नहं ाएं?े। ऐसा चरित्र कितने सियास लो?ों में है?
धयक्ष का ल'नऊ का र समावा आंोलन के पूर्णकालिक कार्यकर्ता"ं का स्थाय रैन बसेरा था। िसे कहं ?ह नहं उसका सहारा धयक्ष । समावा पार्ट के स्थापना के िन से ह प्रेश धयक्ष बने लेकिन मरते म तक ?ा तो ूर साइकिल भ न 'र पाए। सरकार में हुए तो सरकार ?ा, नहं हुए तो पार्ट ने ?ा े वरना पने किस एक सेवक को साथ लिया "र रिक्शे पर चल िए। कोई बनावट नहं, कोई ि'ावा नहं। ैसे हैं सामने हैं। कब किसे क्या कह ें भरोसा नहं। लेकिन ो कहें?े सो सोलह आना सच। एक िन पने र पर टिकटार्थ्ाियों "र कार्यकर्ता"ं से िरे बै े थे। एक कार्यकर्ता बोला- ‘ धयक्ष आप े'िए न कार्यकर्ता"ं के साथ टिकट में नाइंसाफ हो रह है, आप 'ल िए ना।‘ एक मिनट चुप रहे फिर बोले तो बेसुरा लेकिन कवा सच। बोले-‘े'ो किस क नहं चल रह है। सब मर सिंह के यहां से तय हो रहा है। शिवपाल सबसे ्याा काम करते हैं, लेकिन उनके कंधे पर र'कर बंूक चलाई ा रह है।‘ फिर समाने ल?े- ”हमारे ेहात में ‘टपका‘ कहलाता है, पका हुआ आम ो पे से टपक ाता है। ये ‘टपका‘ साबित हों?े "र बा में बनाम शिवपाल को करें?े।”
चुनाव बा धयक्ष का कहा सच साबित हुआ। सपा ‘टपका‘ साबित हुई "र हार का करा सबने शिवपाल के ऊपर ह फोा।
धयक्ष िसके 'िलाफ हो ाएं, उसे कहं न ब'्शें। विधाान परिष में नेता प्रतिपक्ष हम हसन से मह इसलिए नारा क्योंकि हसन पुलिस फसर रहे थे "र धयक्ष ब मंत्र होते थे तब कहं हसन ने बतौर पुलिस फसर उन्हें सैल्यूट किया था। सो ब मौका ल?े तो कहें हमारा नेता पॉलिटिकल नहं है पुलिस वाला है।
पर धयक्ष िसे चाहें िलोान से चाहें। विधान भवन में पने फ्तर पहुंचें तो सबसे पहले लल्लन प्रसा याव "र नरेश उत्ताम (ोनों एमएलस) को या करें।
विधान परिष क बै क चल रह थ। धयक्ष पने कमरे में आए तो राकेश सिंह राना पर 'ासे नारा। कहें कि ये ो पना वि्यार्थ नेता है एमएलस राकेश राना इसे कल नहं है। मालूम पा कि शिक्षा पर कोई बहस चल रह थ "र भापा नेता नेपाल सिंह "र राकेश राना बहस कर रहे थे। "र धयक्ष राना से कह रहे थे कि इनसे उर्ू पर इनके विचार पूछो। राना ने कहा कि धयक्ष बहस तो ूसरे विषय पर थ। पर धयक्ष क लल े'ें, बोले- ‘तुम उसे उर्ू पर ेरते उसका सं िमा? ूम ाता "र बहस क िशा बल ात।‘ ब बताइए कितन लंब सोच!
धयक्ष आरएसएस के नोर विरोध थे लेकिन शाय ह कोई िन ऐसा ाता हो ब वरिष् पत्रकार े.प. शुक्ला (ो सं क विचारधारा से प्रभावित बताए ाते हैं) से पने िल का हाल न बताते हों। व्यक्ति?त वन में धयक्ष ने कभ रानैतिक विचारधारा को संबंधों के बच वार नहं बनने िया। पूर्व मंत्र 'िलेश ास के लिए उनके मन में हमेशा एक सॉफ्ट कार्नर रहा चूंकि श्र ास बनारस ास के बेटे हैं।
धयक्ष 'ांट समावा थे सो सारे समावाियों वाले व?ुण भ मौू थे। िं? भर व्यवस्था के 'िलाफ संर्ष "र ब किस के 'िलाफ संर्ष न हो तो पनों के 'िलाफ ह संर्ष। कभ मधुकर िे निशाने पर तो कभ रनकांत वर्मा निशाने पर। पिछले वर्ष ह मेर में सपा का प्राेशिक सम्मेलन था। लो? सोच रहे थे कि धयक्ष बमार हैं सो नया धयक्ष बने?ा। धयक्ष ने मडिया के लो?ों से कह िया कि कुछ लो?ों ने नए कुर्ते सिलवा लिए हैं। सम्मेलन के बा ल?े बताने कि नेश्वर मिश्रा ने भ?वत सिंह के लिए नया कुर्ता सिलवाया था। ब धयक्ष क बात का मतलब आप स्वयं सम लें।
महिला"ं से ?ब का प्रेम र'ते थे धयक्ष । कितन ?ंभर चर्चा चल रह हो, आप कितने ह महत्तवपूर्ण "र नाम वाले व्यक्ति हों लेकिन ?र कोई महिला धयक्ष से मिलने आ ाए तो तुरंत धयक्ष का हुक्म होता था- ‘आप चलें फिर बात करें?े।‘
बलवर सिंह ‘रं?‘ ने कभ कहा था- ‘िनको ोहराए? महफिल/ऐसे फसाने हैं हम।‘ रामशरण ास ऐसा ह फसाना थे िन्हें समावा आंोलन बार-बार ोहराए?ा। मुलायम सिंह याव के इस कथन में कोई तिशयोक्ति नहं है कि रामशरण ास ैसा ईमानार, निष् ावान "र कर्म नेता ब कहां मिले?ा िसने के लिए पना सारा वन ल?ा िया।
Posted in Politics.
– December 11, 2008
रार से नहं बुश से मां?ो मसू हर
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रार से नहं बुश से मां?ो मसू हर
– मलेन्ु उपाध्याय
सुषमा स्वरा भापा क कोर ?्रुप क सस्या हैं। यूं तो उनक पृष् भूमि समावा है, पर उन्होंने सं क शा'ा भले ह ्वाइन न क हो पर ू को सच ि'ाकर बोलने का सं प्रशिक्षण उन्होंने रूर ?्रहण किया है। लेकिन उनक समावा पृष् भूमि उनके सं प्रशिक्षण पर या का हाव हो ह ात है 'ासतौर पर तब वह ू बोलकर पन कुटिल मुस्कान से ू को सच ि'ाने का प्रयास करत हैं।
?? यपुर, बें?लुरू "र सूरत- हमाबा क टना"ं के बा सुषमा ने कुटिल मुस्कान बि'रते हुए ो कहा था उसका लब्बो लुबाव था कि तनों भापा शासित रा्यों में क्रमवार बम विस्फोटों के पछे कां?्रेस हाथ था। सुषमा रा? सरकार क महत्वपूर्ण नति निर्धारकों में रह हैं "र वे भल भांति ानत हैं कि सत्ता के 'ेल कैसे 'ेले ाते हैं। लिहाा ो उनके पन सरकार के समय के नुभव थे, वे उन्हं के आधार पर ह बोल रह थं। परंतु ब सुषमा क्या कहें? कि िल्ल, फिर सम "र ब मुंबई तनों कां?्रेस शासित रा्य हैं, हां आतंक हमले हुए हैं "र उनका रानतिक लाभ भापा को मिला है। ?र सुषमा का पहले िया ?या वक्तव्य सह था तो निश्चित रूप से िलल, सम "र मुंबई क टना"ं के पछे कौन है, सह ह ंाा ल?ाया ा सकता है।
?सुषमा स्वरा हों या आडवाण , ये सियास वाचाल लो? हैं। लेकिन मनमोहन सिंह तो धर ?ंभर धिकार हैं ( माफ करें मनमोहन के लिए नेता शब् प्रयो? नहं किया ा सकता चूंकि नेता पने फॉलो र्स के कारण्ा बनता है भले ह वो शाहबु्न हो या फिर पप्पू याव लेकिन मनमोहन सिंह किसके नेता हैं ?) ?र वे चाहते तो इस समस्या का हमेशा के लिए 'ात्मा कर सकते थे चूंकि उनका कुछ भ ांव पर नहं ल?ा था। ?र मान लिया ाए कि आम चुनाव के बा कां?्रेस क सत्ता में वापस हो ाए? तो भ कां?्रेस उन्हें ोबारा प्रधानमंत्र तो बनाने से रह! "र ?र कां?्रेस क लुटिया डूब ात है तो वैसे ह -सरार प्रधानमंत्र का बिस्तरा ?ोल है। सो मनमोहन सिंह ?र चाहते तो इस समस्या का निान कर सकते थे लेकिन वे हरे मुनम सो विेश मोर्चे पर मरका क क पुतल बन ?ए "र रेलू मोर्चे पर भापा के चक्रव्यूह में फंस ?ए ।
?मनमोहन सिंह क मरका "र बुश से ोस्त से फाया यह हुआ कि ैसे ह मुंबई में शूट आउट रुका वैसे ह मरक 'ुयिा एेंस एफबआई "र इसराइल 'ुयिा एेंसियों के धिकार मुंबई पहुंच ?ए। लेकिन इसराइल 'ुफिया धिकारियों ने पहुंचते ह ो बयान िया उसमें हमारे सैन्य बलों को नाकारा साबित कर िया आर पूरे शूट आउट को विफल ोषित कर िया।
ब ?र पूछा ाए कि मरका "र इसराइल भारत के इतने ह हमर् थे तो इनक सेनाएं फ?ानिस्तान "र इराक में डेरा डाले बै हैं, उन्हे तुरंत मुंबई क्यों नहं भे िया? कोंडालिा राइ तुरंत भारत आ ?ईं लेकिन पाकिस्तान को ा रह मरक आर्थिक सहायता आ तक बं नहं क ?ई है। ऐसा क्यों? ?र पाकिस्तान को? मरक आर्थिक सहायता "र मरक हथियार मिलना बं हो ाएं तो पाकिस्तान क कल तो 24 ंटे में ुरूस्त हो ाए।
?ो सूचनाएं मिल रह हें, उनके नुसार हमलावर आतंकवाियों ने ता होटल "र नरमन हाउस में चुनचुनकर मरक "र इराइल ना?रिकों को मारा। इसके ?ू र्थ हैं। 9/11 के बा मरका में ुसना इन आतंकवाियों के लिए आसान नहं रहा, लेकिन मरका के नए ोस्त मनमोहन के उस भारत पर हमला तो आसान है, िसक सेना में कर्नल पुरोहित ैसे लो? हैं। मुंबई पर हमला भारत सरकार क मरकापरस्त नई विेश नति "र इराइल मरका के साथ संयुक्त नौसैनिक भ्यास को? चुनात है।
तमाशा यह है कि मरका, डवाण "र मनमोहन सिंह तनों कह रहे हैं कि आई एस आई ने हमला कराया, लेकिन तनों में से कोई भ यह बताने? को रा नहं है कि आई.एस.आई को प्रशिक्षण हथियार, पैसा "र माक ्रव्य सआईए से मिल रहे हैं। क्यों नहं मनमोहन सिंह "र डवाण सआईए के 'िलाफ बोलते?
रेलू रानति में भ मनमोहन सिंह भापा के चक्रव्यूह में फंस ?ए हैं। मनमोहन सिंह, मनमोहन से कक सिंह बनने के चक्कर में युध्ोन्मा भाषा बोल रहे हैं। उन्हें ल? रहा है कि चुनाव से पहले ?र पाकिस्तान से ं?-ं? 'ेल लिया ाए तो? कां?्रेस को वैसा ह फाया हो?ा ैसा कार?िल के बा भापा को हुआ था। यह आत्मात सोच है। डवाण भ मनमोहन के मन क बात ता ?ए हैं, सो पहले सरकार को नाकारा तो कह रहे थे लेकिन नेकर वाले पिछले 61 वर्षों से ो भाषा ‘नक्शे में से नाम मिटा ो पाप पाकिस्तान का‘ बोलते रहे हैं, ब उसे बोलने से परहे कर रहे हैं।
?मनमोहन सिंह पाकिस्तान से मसू हर "र ाउ को मां? रहे हैं, पाकिस्तान बले में? भारत से बाल ाकरे मां? रहा है। ये एक्सचें बुरा तो नहं है? ?र एक बाल ाकरे पाकिस्तान को सौंपकर भारत में शांति आ ाए तो बुरा क्या है? वैसे भ ाकरे को भारत में वोट का धिकार समाप्त है। ?र चन भारत से लाई लामा, श्रलंका प्रभाकरण "र नेपाल यो? आित्यनाथ मां?े तो भारत े े?ा? फिर पाकिस्तान से हम किस आधार पर उम्म कर रहे हैं कि वह उन आतंकवाियों को हमें सौंप े?ा िन्हें सवंत सिंह सरकार ामा बनाकर कंधार छोकर आए थे।
परंतु मनमोहन क समस्या यह है कि वह हमला तो पाकिस्तान पर कर रहे होते हैं "र िमा? में उनके डवाण ुसे होते हैं। लेकिन मनमोहन यह क्यों भूल ाते हैं कि वो िस पाकिस्तान से मसू हर मां? रहे हैं वह ब रार का है िसक बब काें इन्हं आतंकवाियों ने मारा है "र उसमें आईएसआई का हाथ है। रार के सामने नई मुश्किलें ' करके मनमोहन सिंह, डवाण के बाव में? ऐसा काम कर रहे हैं ो भारत के लिए हमेशा के लिए नासूर बन ाए?ा। हम यह बात क्यों नहं सम पा रहे हैं कि सुरक्षित "र शांत भारत के लिए पोस में लोकतांत्रिक पाकिस्तान का होना बहुत रूर है।ब तक वहां सैन्य सरकार या सेना का हस्तक्षेप रहे?ा तब तक भारत में शांति बहाल नहं हो सकत।
भारत को ?र बाव बनाना है तो रार के बाए उस ॉर् बुश पर बनाए िसे मनमोहन सिंह भ थोे समय पहले ह आई लव यू बोल कर आए है। "र िसके पिता सनियर बुश ने माफिया"ं "र तस्करों को ोकर सआईए बनाई थ। वैसे डवाण "र मनमोहन के मत बुश साहब भ तक पाकिस्तान में मौू "सामा, वाहिर "र बैतुल्ला को ना मार पाए हैं "र न पक पाए हैं, फिर मनमोहन को कैसे मिले?ा मसू हर? मां?ा तो पाकिस्तान से बुश ने भ ाउ को था, पर मिला तो नहं ! मतलब ो काम 'ु नहं कर पाए उसे मनमोहन से कराना चाहते हैं बुश??????
( ले'क रानतिक समक्षक हैं "र एक पाक्षिक पत्रिका से ुे हैं।)
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– December 9, 2008
रार से नहं बुश से मां?ो मसू हर
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रार से नहं बुश से मां?ो मसू हर
– मलेन्ु उपाध्याय
सुषमा स्वरा भापा क कोर ?्रुप क सस्या हैं। यूं तो उनक पृष् भूमि समावा है, पर उन्होंने सं क शा'ा भले ह ्वाइन न क हो पर ू को सच ि'ाकर बोलने का सं प्रशिक्षण उन्होंने रूर ?्रहण किया है। लेकिन उनक समावा पृष् भूमि उनके सं प्रशिक्षण पर या का हाव हो ह ात है 'ासतौर पर तब वह ू बोलकर पन कुटिल मुस्कान से ू को सच ि'ाने का प्रयास करत हैं।
यपुर, बें?लुरू "र सूरत- हमाबा क टना"ं के बा सुषमा ने कुटिल मुस्कान बि'रते हुए ो कहा था उसका लब्बो लुबाव था कि तनों भापा शासित रा्यों में क्रमवार बम विस्फोटों के पछे कां?्रेस हाथ था। सुषमा रा? सरकार क महत्वपूर्ण नति निर्धारकों में रह हैं "र वे भल भांति ानत हैं कि सत्ता के 'ेल कैसे 'ेले ाते हैं। लिहाा ो उनके पन सरकार के समय के नुभव थे, वे उन्हं के आधार पर ह बोल रह थं। परंतु ब सुषमा क्या कहें? कि िल्ल, फिर सम "र ब मुंबई तनों कां?्रेस शासित रा्य हैं, हां आतंक हमले हुए हैं "र उनका रानतिक लाभ भापा को मिला है। ?र सुषमा का पहले िया ?या वक्तव्य सह था तो निश्चित रूप से िलल, सम "र मुंबई क टना"ं के पछे कौन है, सह ह ंाा ल?ाया ा सकता है।
सुषमा स्वरा हों या आडवाण , ये सियास वाचाल लो? हैं। लेकिन मनमोहन सिंह तो धर ?ंभर धिकार हैं ( माफ करें मनमोहन के लिए नेता शब् प्रयो? नहं किया ा सकता चूंकि नेता पने फॉलो र्स के कारण्ा बनता है भले ह वो शाहबु्न हो या फिर पप्पू याव लेकिन मनमोहन सिंह किसके नेता हैं ?) ?र वे चाहते तो इस समस्या का हमेशा के लिए 'ात्मा कर सकते थे चूंकि उनका कुछ भ ांव पर नहं ल?ा था। ?र मान लिया ाए कि आम चुनाव के बा कां?्रेस क सत्ता में वापस हो ाए? तो भ कां?्रेस उन्हें ोबारा प्रधानमंत्र तो बनाने से रह! "र ?र कां?्रेस क लुटिया डूब ात है तो वैसे ह -सरार प्रधानमंत्र का बिस्तरा ?ोल है। सो मनमोहन सिंह ?र चाहते तो इस समस्या का निान कर सकते थे लेकिन वे हरे मुनम सो विेश मोर्चे पर मरका क क पुतल बन ?ए "र रेलू मोर्चे पर भापा के चक्रव्यूह में फंस ?ए ।
मनमोहन सिंह क मरका "र बुश से ोस्त से फाया यह हुआ कि ैसे ह मुंबई में शूट आउट रुका वैसे ह मरक 'ुयिा एेंस एफबआई "र इसराइल 'ुयिा एेंसियों के धिकार मुंबई पहुंच ?ए। लेकिन इसराइल 'ुफिया धिकारियों ने पहुंचते ह ो बयान िया उसमें हमारे सैन्य बलों को नाकारा साबित कर िया आर पूरे शूट आउट को विफल ोषित कर िया।
ब ?र पूछा ाए कि मरका "र इसराइल भारत के इतने ह हमर् थे तो इनक सेनाएं फ?ानिस्तान "र इराक में डेरा डाले बै हैं, उन्हे तुरंत मुंबई क्यों नहं भे िया? कोंडालिा राइ तुरंत भारत आ ?ईं लेकिन पाकिस्तान को ा रह मरक आर्थिक सहायता आ तक बं नहं क ?ई है। ऐसा क्यों? ?र पाकिस्तान को मरक आर्थिक सहायता "र मरक हथियार मिलना बं हो ाएं तो पाकिस्तान क कल तो 24 ंटे में ुरूस्त हो ाए।
ो सूचनाएं मिल रह हें, उनके नुसार हमलावर आतंकवाियों ने ता होटल "र नरमन हाउस में चुनचुनकर मरक "र इराइल ना?रिकों को मारा। इसके ?ू र्थ हैं। 9/11 के बा मरका में ुसना इन आतंकवाियों के लिए आसान नहं रहा, लेकिन मरका के नए ोस्त मनमोहन के उस भारत पर हमला तो आसान है, िसक सेना में कर्नल पुरोहित ैसे लो? हैं। मुंबई पर हमला भारत सरकार क मरकापरस्त नई विेश नति "र इराइल मरका के साथ संयुक्त नौसैनिक भ्यास को चुनात है।
तमाशा यह है कि मरका, डवाण "र मनमोहन सिंह तनों कह रहे हैं कि आई एस आई ने हमला कराया, लेकिन तनों में से कोई भ यह बताने को रा नहं है कि आई.एस.आई को प्रशिक्षण हथियार, पैसा "र माक ्रव्य सआईए से मिल रहे हैं। क्यों नहं मनमोहन सिंह "र डवाण सआईए के 'िलाफ बोलते?
रेलू रानति में भ मनमोहन सिंह भापा के चक्रव्यूह में फंस ?ए हैं। मनमोहन सिंह, मनमोहन से कक सिंह बनने के चक्कर में युध्ोन्मा भाषा बोल रहे हैं। उन्हें ल? रहा है कि चुनाव से पहले ?र पाकिस्तान से ं?-ं? 'ेल लिया ाए तो कां?्रेस को वैसा ह फाया हो?ा ैसा कार?िल के बा भापा को हुआ था। यह आत्मात सोच है। डवाण भ मनमोहन के मन क बात ता ?ए हैं, सो पहले सरकार को नाकारा तो कह रहे थे लेकिन नेकर वाले पिछले 61 वर्षों से ो भाषा ‘नक्शे में से नाम मिटा ो पाप पाकिस्तान का‘ बोलते रहे हैं, ब उसे बोलने से परहे कर रहे हैं।
मनमोहन सिंह पाकिस्तान से मसू हर "र ाउ को मां? रहे हैं, पाकिस्तान बले में भारत से बाल ाकरे मां? रहा है। ये एक्सचें बुरा तो नहं है? ?र एक बाल ाकरे पाकिस्तान को सौंपकर भारत में शांति आ ाए तो बुरा क्या है? वैसे भ ाकरे को भारत में वोट का धिकार समाप्त है। ?र चन भारत से लाई लामा, श्रलंका प्रभाकरण "र नेपाल यो? आित्यनाथ मां?े तो भारत े े?ा? फिर पाकिस्तान से हम किस आधार पर उम्म कर रहे हैं कि वह उन आतंकवाियों को हमें सौंप े?ा िन्हें सवंत सिंह सरकार ामा बनाकर कंधार छोकर आए थे।
परंतु मनमोहन क समस्या यह है कि वह हमला तो पाकिस्तान पर कर रहे होते हैं "र िमा? में उनके डवाण ुसे होते हैं। लेकिन मनमोहन यह क्यों भूल ाते हैं कि वो िस पाकिस्तान से मसू हर मां? रहे हैं वह ब रार का है िसक बब काें इन्हं आतंकवाियों ने मारा है "र उसमें आईएसआई का हाथ है। रार के सामने नई मुश्किलें ' करके मनमोहन सिंह, डवाण के बाव में ऐसा काम कर रहे हैं ो भारत के लिए हमेशा के लिए नासूर बन ाए?ा। हम यह बात क्यों नहं सम पा रहे हैं कि सुरक्षित "र शांत भारत के लिए पोस में लोकतांत्रिक पाकिस्तान का होना बहुत रूर है।ब तक वहां सैन्य सरकार या सेना का हस्तक्षेप रहे?ा तब तक भारत में शांति बहाल नहं हो सकत।
भारत को ?र बाव बनाना है तो रार के बाए उस ॉर् बुश पर बनाए िसे मनमोहन सिंह भ थोे समय पहले ह आई लव यू बोल कर आए है। "र िसके पिता सनियर बुश ने माफिया"ं "र तस्करों को ोकर सआईए बनाई थ। वैसे डवाण "र मनमोहन के मत बुश साहब भ तक पाकिस्तान में मौू "सामा, वाहिर "र बैतुल्ला को ना मार पाए हैं "र न पक पाए हैं, फिर मनमोहन को कैसे मिले?ा मसू हर? मां?ा तो पाकिस्तान से बुश ने भ ाउ को था, पर मिला तो नहं ! मतलब ो काम 'ु नहं कर पाए उसे मनमोहन से कराना चाहते हैं बुश??????
( ले'क रानतिक समक्षक हैं "र एक पाक्षिक पत्रिका से ुे हैं।)
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– December 9, 2008
करकरे तुे सलाम
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करकरे तुे सलाम
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ब ब मुंबई हासे "र करकरे का िक्र आ रहा है तो बार बार ब्लैक नवंबर से मह ो या तन िन पहले करकरे का वह वक्तव्य या आ ाता है, िसमें उन्होंने कहा था कि माले?ांव बमकांड में पके ?ए आतंकवाियों के पाक 'ुफिया एेंस आईएसआई से संबंध हैं। करकरे के इस बयान के बा ह भ?वा ?िरोह के कई बे ?ारों के बयान आए थे कि ‘एटएस क सक्रियता संि?्ध है’। े'ने में आया कि करकरे के इस बयान के तुरंत बा ह मुंबई पर हमला हो ?या।
क्या करकरे क शहात एटएस को चुनौत है कि ?र करकरे क बताई लाइन पर चले तो ंाम सम लो? करकरे क बात ब सह ल? रह है , क्योंकि हमलावर आतंकवा मोिस्तान ?ुरात के कच्छ के रास्ते ह बेरोक टोक "र बे'ौफ मुंबई तक पहुंचे थे। इससे पहले भ कई बार 'ुलासे हो चुके हैं कि ेश में आरडएक्स "र विस्फोटकों क 'ेप ?ुरात के रास्ते ह ेश भर में पहुंच। भ?वा ?िरोह ?ुरात को पना रोल मॉडल मानता है "र परम-पू्य हिंू हृय समा्रट रणबांकुरे मो महारा ोषणाएं कर चुके हैं कि ?ुरात में आतंकचा को कुचल ें?े।ष्लेकिन तमाशा यह है कि ो लो? 26 नवंबर क शाम तक करकरे को 'लनायक साबित करने पर आमाा थे चानक 27 नवंबर को उनका हृय परिवर्तन हो ?या "र उन्हें पने कर्मों पर इतना धिक पराधबोध होने ल?ा कि वो करकरे क विधवा को एक करो रुपए क म ेने पहुंच ?ए। लेकिन ितन ईमानार "र बहाुर का परिचय करकरे ने िया उससे ो हाथ आ?े बकर उनक विधवा पत्नष्ने एक करो रुपए को लात मारकर करकरे क ईमानार "र बहाुर क मिसाल को कायम र'कर ऐसे लो?ों के मुंह पर करारा तमाचा मारकर संेश े िया कि ते िस बहाुर को 'र नहं पाए उसक शहात को भ एक करो रुपए में 'र नहं सकते हो ?ुरात में मंिर ?िराने वाले भ?वा तालिबानों!
ब्लैक नवंबर से रतन टाटा को 4000 करो रुपए का नुकसान हो सकता है, ेश क आर्थिक राधान मुंबई को कई हार करो रुपए "र सौ से धिक ानों का नुकसान हो सकता है। करकरे समेत 20 ाबां सिपाहियों क शहात से सैन्य बलों को नुकसान हो सकता है, लेकिन इसका फाया सिर्फ "र केवल सिर्फ भ?वा ?िरोह को हुआ है "र उसने यह फाया उ ाने का भरपूर प्रयास भ किया है। करकरे क शहात के बा ब लंबे समय तक माले?ांव क ांच ंडे बस्ते में चल ाए? "र ?िरफ्तार भ?वा आतंकवा ( कृपया हिंू आतंकवा न पें चूंकि हिंू आतंकवा हो ह नहं सकता! ) न्यायिक प्रक्रिया में सेंध ल?ाकर बाहर भ आ ाएं?े "र ो रा ,करकरे 'ोलने वाले थे, वह हमेशा के लिए फन भ हो ाएं?े।
हमारे पएम इन वेटिं? का ल लाशों क रानति करने में कितना माहिर है, इसका नमूना 27 नवंबर को ह मिल ?या। 27 नवंबर को ब मुंबई बंधक थ, सैंकों ाने ा चुक थं "र एनकाउंटर चल रहा था, क उस समय टव चैनलों पर एक रास्थान हसन चेहरा ( ो रैंप पर पने लवे बि'रने के कारण भ सुर्'ियों में रहा है ) आतंकवा पर विफल रहने के लिए कां?्रेस "र कें्र सरकार को कोस रहा था "र ‘ भापा को वोट / आतंक को चोट ‘ का नारा े रहा था। ?र आतंक पर चोट के लिए भापा को वोट ेना रुर है तो 26 नवंबर क रात से लेकर 29 नवंबर तक आतंक को कुचल ेने वाले मो महारा, पएम इन वेटिं?, ुनिया के नशे में से पाप पाकिस्तान का नामो निशान मिटा ेने क हुकार भरने वाले हिंू हृय सम्राट बाला साहेब ाकरे किस बे में छिपे थे? ये वर योध्ा कमांडो के साथ क्यों लाई में शामिल नहं थे? भ?वा ?िरोह कहता है कि कें्र सरकार नपुंसक है, हम भ मान लेते हैं कि कें्र सरकार नपुंसक है। लेकिन 6 िसंबर 1992 को बाबर मस्ि शह करने वाले "र मुंबई, सूरत, हमाबा क सकों पर कांच क बोतलों पर स्त्रियों को न?्न नचाने "र सामूहिक बलात्कार करने वाले वो बहाुर भ?वा शूरवर किस 'ोह में छिपे थे? मुंबई के पुलिस महानिेशक को, वर् उतारकर आने पर यह बताने कि मुबई किसके बाप क है ,चुनौत ेने वाले मरा ा वर रा ाकरे कहां ुबक ?ए थे ? पाक आतंक तो वर् उतार कर आए थे। िल्ल विश्ववि्यालय में प्रो0 ?िलान पर थूकने वाले वर मुंबई में थूकने क्यों नहं ?ए?
या हो?ा कि बाटला हाउस एनकाउंटर के बा भापा ने कां?्रेस से पूछा था कि वह इंसपैक्टर शर्मा को श्शह मानत है या नहं ? क यह सवाल आ हम डवाण "र परम प्रताप मो से पूछना चाहते हैं कि वे करकरे को शह मानते हैं कि नहं ? ?र नहं तो मो करकरे क विधवा को एक करो रुपए ेने क्यों ?ए थे ? यि इसलिए ?ए थे कि करकरे शह हैं तो स्वकार करो कि करकरे ने ो कहा था कि माले?ांव के आतंकवाियों के आईएसआई से संबंध हैं, सह है "र मुंबई हमला आईएसआई ने इस सत्य पर पर्ा पर डालने के लिए कराया है।
मुंबई हासा एनडए सरकार ्वारा ेश के साथ किए ?ए उस विश्वासात का परिणाम है, ब भापा सरकार ने आतंकवा के मु'्य सा्रेत 'ूु'ार आतंकवाियों को सरकार मेहमान बनाकर कंधार तक पहुचाया था "र आ तक उस विश्वासात के लिए भापा ने ेश से माफ नहं मां? है, िसके चलते आतंक टना"ं से बारबार भारत का सना चाक होता है "र करकरे ैसे बहाुर ांबा सिपाह शह होते हैं। आ'िर वह कौन सा कारण है कि मोहनचं शर्मा क ंत्येटि में पहुंचने वाले लो? करकरे को आ'र सलाम करने नहं पहुंचते हैं "र 20 सैनिकों क शहात के बा भ उन्हें ये ेश नपुंसक नर आता है ???????
करकरे भले ह आ नहं है, लेकिन करकरे क शहात आतंकवा विरोध लाई को हमेशा ्योतिपुं बनकर रास्ता ि'ात रहे? "र उनका यह मंत्र कि ‘आतंकवा का कोई धर्म नहं होता है’ आतंकविरोध मिशन को पूरा करने का हौसला ेता रहे?ा। करकरे तुे ला' ला' सलाम।
( ले'क रानतिक समक्षक हैं।)
मलेन्ु उपाध्याय
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– December 6, 2008
मडिया "र मर के बच बाटला
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ल्ल के ामियान?र में सपा नेता मर सिंह "र तृणमूल कां?्रेस नेता ममता बनर् क एक सभा के तत्काल बा मर सिंह क बाइट लेने का प्रयास कर रहे पत्रकारों के ऊपर उ?्र लो?ों क एक भड ने हमला कर िया। यह हमला मर सिंह के उस भाषण का त्वरित फल था, िसमें उन्होंने बाटला हाउस एनकाउंटर को फर् बताते हुए ामियान?र में उत्तेना फैलाने का प्रयास किया था।
मर सिंह बडबोले "र बिना नाधार के नेता हैं। ?र सोल सोराब के शब्ों को उधार ले लिया ाए तो वे फर् नेता ह। फिलहाल, सत्यव्रत चतुर्वे क सलाह मानने क रूरत नहं है। यहां मर सिंह से एक सवाल तो पूछा ा सकता है कि वे एनकाउंटर को फर् बताने में इतन ेर कैसे कर ?ए? ो तर्क वे आ े रहे हैं उसे तो एनकाउंटर के ?ले िन भ िया ा सकता था। लेकिन पहल बार एनकाउंटर पर उन्होंने सवाल तब उ ाया ब ?ृहमंत्र शिवरा पाटिल से उनका वाकयु्ध हो ?या "र सपा ने यह महसूस कर लिया कि कां?्रेस उसे भाव नहं े रह है। "र ?र मर सिंह मु भेड क न्यायिक च के मसले पर रानतिक रोटियां नहं सेंक रहे थे तो उसके लिए उन्हें ामियान?र नहं, बल्कि ७-रेसकोर्स ाना चाहिए था।
सन रहे कि मायावत के ऊल-लूल बयान के वाब में सपा के उत्तर प्रेश के कार्यवाहक ध्यक्ष "र मुलायम सिंह के नु शिवपाल सिंह याव का ो प्रथम बयान आया, उसमें उन्होंने बाटला हाउस एनकाउंटर पर कोई सवाल नहं उ ाया था, बल्कि पने ल का बचाव करते हुए आम?ढ में आतंकवाियों क उपस्थिति के लिए बसपा सांस कबर हम डंप के उस बयान को िम्मेार हराया था, िसमें डंप ने कहा था कि एसटएफ वाले आएं तो उन्हें मारना।
सपा के बडबोले महासचिव यह कहने क हिम्मत क्यों नहं ुटा पा रहे कि ?र एनकाउंटर फर् है, तो हत्यारे पुलिसकर्मियों को प्रधानमंत्र मनमोहन सिंह का आशर्वा प्राप्त है। मर सिंह शब्ों के तर ान-बूकर निशाने पर नहं चला रहे हैं। ान-बूकर वे निशाने से बचाकर तर चला रहे हैं, ताकि परमाणु करार पर कां?्रेस का समर्थन करके उनके ल क इराइल "र मरकापरस्त ो छवि बन ?ई है, उससे किस प्रकार छुटकारा भ मिल ाए "र प्रधानमंत्र का वरहस्त भ हासिल रहे। ?र एनकाउंटर फर् है, ैसा कि मर सिंह का मानना है "र मुे भ संेह है, तो क्या मर सिंह इस बात का वाब े पाएं?े कि िस िल्ल पुलिस क स्पेशल सेल ने एनकाउंटर को ंाम िया वह िल्ल पुलिस मनमोहन सिंह के धन है "र मनमोहन सिंह क कुर्स आ मर सिंह "र मुलायम सिंह के कारण सुरक्षित है। तो क्या इस कथित फर् एनकाउंटर ( ?र ऐसा है) के लिए केले वाई. एस. डडवाल "र शिवरा पाटिल ह िम्मेार हैं? मर सिंह, मुलायम सिंह या मनमोहन सिंह क कोई िम्मेार नहं है?
?र वाकई में मर सिंह को इस एनकाउंटर पर कोई ?ुस्सा है तो उन्हें तत्काल सोनिया ?ांध "र मनमोहन सिंह से पने सारे रिश्ते समाप्त कर लेने चाहिए। न्यथा, उनके म?रमच्छ आंसु"ं पर आम?ढ के लो? एक शेर में पने र् को बयां करें?े - 'हमारे कत्ल क सािश में तुम हिस्सा न लो वरना/ माना पने ौर का तुम्हें कातिल बताए?ा।'
रह बात ामिया के एक ?ुट ्वारा पत्रकारों पर हमला, तो यह टना निंनय है। लेकिन क्या मडिया "र 'ासतौर पर इलेक्ट्रा निक मडिया ने इस प्रकरण पर पना काम क ढं? से ंाम िया है? मडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है। वह नता का, आम आम का प्रतिनिधि है। क्या मडिया ने आम?ढ क छवि बि?ाडने में पुलिस के प्रवक्ता क भूमिका नहं निभाई? क्या आम?ढ के सारे मुसलमान आतंकवा "र ाऊ इब्राहिम के चेले हैं? माफ करें, िस िन आम?ढ के सारे मुसलमान आतंकवा हो ?ए, उस िन मुल्क में हाहाकार मच ाए?ा। ल?भ? पांच ला' क आबा आम?ढ में मुसलमानों क है। एक या ो र्न आतंकवाियों ने सारे ेश क सांसें रोक थं। तसव्वुर किए कि हमारे मडिया के साथ ५ ला' लो?ों को ?र आतंकवा बना ें?े तो इस मुल्क का क्या हाल हो?ा?
भ कानपुर में एक विस्फोट हुआ। विस्फोट के तुरंत बा हमारे टव चैनल चिल्लाने ल?े कि आतंकवाियों ने नया मॉड्यूल पना लिया है। ब सिरिं का प्रयो? बम बनाने में होने ल?ा है। एक टव चैनल ने ्ञान बि'ेरा कि सिरिं साइकिल के ?ले टायर में र'ा ?या था। लेकिन शाम तक उत्तर प्रेश के पर पुलिस महानिेशक (कानून व्यवस्था) का बयान आ ?या कि यह आतंकवा टना नहं थ "र इसमें सुतल बम का प्रयो? किया ?या था, ो मूमन कानपुर के पराध करते हैं। बा में मालूम पडा कि यह ेस बम, ो वस्तुतः भार पटा'े थे, एक हिंू ुकानार क ुकान पर बिक्र के लिए ो मुस्लिम युवक ेने आए थे "र साइकिल 'ड करके पान पने चले ?ए। इतने में साइकिल ?िर ?ई "र विस्फोट हो ?या। इस तथ्य क ानकार समाचार पत्रों में तो आई, लेकिन हमारे न्यू चैनल ने न तो यह ानकार "र न पन करतूत पर माफ के ो शब् कहे।
हमारे धिकांश मडिया के साथ 'ेहा तत्त्व' शब् का प्रयो? बार-बार कर रहे हैं। लेकिन इनमें से कितने लो? 'ेहा' क वधारणा से परिचित हैं? बिल्कुल नहं, "र वे तथाकथित बडे पत्रकार तो बिल्कुल नहं, ो एनडए सरकार के कार्यकाल में प्रसार भारत को एक करोड रुपये सालाना क चपत ल?ा रहे थे। उन्हें आडवाण ने बता िया 'ेहा तत्त्व' "र वे ?ाने ल?े ेहा-ेहा।
ेहा का फतवा तो हर मुसलमान भ नहं े सकता है तो ?ैर मुसलमान कैसे े सकता है? "र आडवाण को ेहा का फतवा ेने का धिकार बिल्कुल नहं है।
भ उत्तर प्रेश में एक टना हुई। एक ंपत बाइक पर सवार होकर पटा'ों से भरा ोला लेकर ा रहा था। रास्ते में रेलवे फाटक पर बाइक टकरा ?ई "र ोनों पति-पत्न के पर'च्चे उड ?ए। इत्तेफाक से मरने वाले ंपत ?ुप्ता थे। ?र कहं बनसब से यह टना ाढ-टोप वाले ट'नों से ऊंचे पायचे का पाामा पहनने वाले किस श'्स के साथ हुई होत, तो तत्काल थैले में आरडएक्स ढूंढा ाने ल?ता "र उसके आम?ढ से संफ तलाशे ाते।
ाऊ इब्राहिम आतंकवा माफिया डॉन है, क है, लेकिन ाऊ का एक ायां हाथ रोमेश शर्मा भ तो है। क्या किस ने रोमेश शर्मा को भ आतंकवा कहा? यह ोहरा चरित्र मडिया के लिए क नहं, रानेता"ं के लिए तो क है।
इस सबके बावू ामिया के क्रु्ध लो?ों का पत्रकारों पर हमला कतई ाय नहं था। इसका कारण है कि फिर तो वह साबित हो ाए?ा, ो हमारे भ्रन साबित करना चाहते हैं। ूसरे, रिपोर्टिं? करने फल्ड में ो पत्रकार ाते हैं वे पने चैनल या पने मडिया समूह क नति तय करने क स्थिति में नहं होते हैं। उनके कुछ नि विचार हो सकते हैं, कोई रानतिक विचारधारा हो सकत है, ो रिपोर्टिं? में भ लक सकत है। लेकिन वे वह करते हैं, ो प्रोड्यूसर कहता है "र प्रोड्यूसर वह कहता है ो चैनल का मालिक हुक्म ेता है। मालिक के पने व्यापारिक व रानतिक हित हैं। उनमें से कई ेकेार "र बिल्डर ह "र कुछ रानेता। इसलिए इनमें से कुछ वह करते हैं ो सरकार कहत है, कुछ वह करते हैं ो भापा कहत है "र कुछ वह करते हैं ो मर सिंह कहते हैं। लेकिन वे ऐसा कुछ भ नहं करते, ो आम आम कहता "र चाहता है, ब तक कि उससे टआरप न बढे। इसलिए मडिया (इलेक्ट्रा निक) क हरकतों से क्षुब्ध लो?ों को इन निरह रिपोर्टरों पर ?ुस्सा नहं उतारना चाहिए। मर सिंह को भ चाहिए कि वे इन रिपोर्टरों को पिटवाने के स्थान पर उन चैनल मालिकों से संयम बरतने को कहें, ो उनके भिन्न मित्र भ हैं "र उत्तर प्रेश में सपा शासनकाल में िनमें से कई उफत भ हुए हैं।
ऐसे नाुक समय में हमें यह नहं भूलना चाहिए कि इन आतंक टना"ं में मरने वाले न हिंू थे "र न मुसलमान। वे सिर्फ "र सिर्फ एक बे?ुनाह हिंुस्तान थे, िन्होंने पने हिंुस्तान होने क कमत ा क है।
इस समय मडिया से ुडे हमारे मित्रों क हम िम्मेार है कि पुलिस क बताई कहान को ंतिम निष्कर्ष बनाकर न ि'ाएं। यह वह पुलिस है ो आरुषि केस में मां-बाप को ुश्चरित्र होने का 'िताब े सकत है "र मो व उनके हनुमान वंारा से प्रेरणा लेकर शह-ए-आम सरार भ?त सिंह पर एक र्न से धिक शोध?्रंथ लि'ने वाले प्र'्यात साहित्यकार सुधर वि्यार्थ "र मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉ. विनायक सेन को मा"वा बताकर प्रताडत कर सकत है। ऐसे नाुक ौर में टआरप क चिंता छोड कर वस्तुस्थिति ह बतान चाहिए "र ऐस रिपोर्टिं? से बचना चाहिए ो िलों को तोडत हो, क्योंकि ब िल टूटते हैं तो ेश टूटता है "र निस्संेह ेश क कमत हमार नौकर, हमारे व्यवसाय, हमारे रानतिक हित "र टआरप से बहुत ्याा है।
– मलेन्ु उपाध्याय ( ले'क रानतिक समक्षक "र स्वतंत्र पत्रकार हैं।)
यह ले' 'बर एक्सप्रेस डॉट कॉम, हिन् मडिया डॉट इन, डेल न्यू़ आक्टिविस्ट-समाचरपत्र ल'ना", िव्य हिमाचल -समाचारपत्र शिमला ्वारा प्रकाशित हुया
Posted in Politics.
– November 5, 2008
कैफ का आम?ढ ह क्यों है आतंक का निशाना??
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The article written by me on the Azamgarh and terrorism was published www.khabarexpress.com and www.newswing.com . you may visit theese sites to view the original articles.
कैफ का आम?ढ ह क्यों है आतंक का निशाना??
?मन्िर मस्ि ?ुरु्वारों में बॉट लिया भ?वान को / धरत बॉट , सा?र बॉटा मत बॉटो इन्सान को? "र ?क्या करे?ा प्यार वो राम से क्या करे?ा प्यार वो कुरान से / न्म लेकर ?ो में इंसान क कर ना पाया प्यार ो इंसान से? ? ैसे कवितामय नारे ेने वाले हिन्ुस्तान तहब के म शायर मरहूम कैफ आम "र??वोल्?ा से ?ं?ा? ैस कालय कृति लि'कर हिन्ुस्तान सभ्यता "र संस्कृति को एक नई सोच ेने वाले महापण्डित राहुल सॉकृत्यायन क सरमन ब बम पैा कर रह है।
िल्ल पुलिस क स्पेशल सेल के एक एन्काउन्टर में मारे ?ये "र ?िरफतार किये ?ये तथाकथित आतंकवाियों के कारण आम?ढ ब ुनिया के नक्शे पर हशत के पर्याय के रुप में उभर कर आया है। ैसा कि िल्ल पुलिस "र ?ुरात पुलिस का ावा है ( ो ?लत भ हो सकता है ) कि िल्ल हमाबा "र वाराणस समेत हिन्ुस्तान के विभिन शहरो में हुए सिलसिलेवार बम विस्फोटों के मु'्य सािशकर्ता "र कर्ता-धर्ता यह तालमयाफता नौवान थे। हालॉकि पुलिस ्वारा ?ढ ?ई कहान में इतने ्याा उले हुए पेंच हैं कि किस विवेकशल प्राण को इस कहान पर भरोसा करने में भ काफ वक्त ल?े?ा।
ो पहला सवाल ेहन में कौंधता है वो इस पूरे शूट आउट पर सवालिया निशान ल?ाने के लिये पर्याप्त है। िल्ल पुलिस का ावा है कि उसे मु'बिरों से ह सूचना मिल थ कि बटला हाउस में आतंकवा रह रहे हैं। ?र पुलिस का मु'बिर तन्त्र इतना स? "र सटक था तो मु'बिर यह सूचना ेने में नाकाम क्यो रहा कि िल्ल में बम फटने वाले हैं "र वो किन स्थानों पर फटें?े ? ूसरा "र हम सवाल है कि ?ुब्बारे बेचने वाले िस बच्च्ेा को चश्म ?वाह बताया ा रहा है उसे कई िनों तक कहॉ छुपाकर र'ा ?या "र क्यो ? तसरा हम सवाल यह है कि क्या एन्काउन्टर में मरने वाले "र ?िरफतार किये ?ये तथाकथित आतंकवाियों के चेहरे पुलिस ्वारा ार किये ?ये स्केच से मिलते हैं ? "र चौथा हम सवाल कि क्या मृतक आतंकियों "र ?िरफतार आतंकियों क शिना'्त परेड चश्म ?वाह से कराई ?ई ? न्तिम "र पॉचवा सवाल कि ब तो कहं बम नहं फटें?े ? चकि पुलिस का ावा है कि उसने मास्टरमाइण्ड आतंकियों का पर्ाफाश कर िया है। ब तक इन सवालों के वाब िल्ल पुलिस के पास नहं होते तब तक उसक शूट आउट कहान ?र सह है तो सह होते हुए भ सन्ेह के ेरे में रहे?।
या हो?ा कि ब हमाबा बम विस्फोट काण्ड के भियुक्त के रुप में बू बशर पकडा ?या था तब भ ावा किया ?या था कि सिम "र इण्डियन मुाहिन का मास्टरमाइण्ड पकडा ?या है । लेकिन इस मास्टरमाइण्ड के ?ुरात पुलिस क सेवा में होने के बा भ िल्ल में धमाके हो ?ये। इसका क्या मतलब निकाला ाये ? क्या बू बशर इन धमाकों में शामिल नहं था ? "र ?र धमाकों का मु'्य कमाण्डर बशर ह था तो ?ुरात पुलिस ो महने तक उसके साथ क्या करत रह ? या फिर िल्ल क पुलिस लापरवाह साबित हुई िसने ?ुरात पुलिस क सूचना पर कोई ध्यान नहं िया ? इन सारे सवालों के पछे ो उत्तर निकल कर आये?ा वो या तो इन तथाकथित आतंकवाियों को बे?ुनाह साबित करे?ा न्यथा ?ुरात पुलिस को नाकारा "र िल्ल पुलिस को लापरवाह। बहरहाल यह सह प्रश्न िल्ल "र ?ुरात ोनों क पुलिस को परेशान करते रहें?े।
?र िल्ल पुलिस का यह ावा सह मान लिया ाये कि इन विस्फोटों के पछे इन आम?ढवास नौवानों का ह हाथ था ( ऐसा यकन ना करने के लावा भ चारा ह क्या है?) तो हमें मौूा आम?ढ के आर्थिक "र सामािक माहौल को समना पडे?ा। वर्ष २२ के विधानसभा चुनावों के ौरान मुे आम?ढ क फूलपुर "र सरायमर विधानसभा क्षेत्रों का ौरा करने का वसर मिला। मैं यह े'कर चौंक ?या कि वहॉ पेरो, सफार, क्वालिस ैस ल?्र ?ाडियॉ बहुत बड सं'्या में नर आ रह थं। इन ?ाडियों पर नम्बर एम एच सर के थे। एक बार? ल?ा कि संभवतः किस प्रत्याश ने इन ?ाडियों को किराये पर लिया है। लेकिन स्थानय लो?ों से तहककात करने पर मालूम हुआ कि यह ?ाडिया स्थानय लो?ों क हैं "र ९ फस मुसलमानों क हैं।
कारण बहुत साफ था कि सरायमर इलाके के धिकॉश परिवारों के लो? मुम्बई "र महाराष्ट्र के विभिन्न शहरो में यूप के भैये बन कर बरसों पहले ?ये थे "र पन हेकड "र लडाकू प्रवृत्ति के कारण मुम्बई क र्थव्यवस्था पर हाव हो ?ये। आम?ढ में मुे कई मरसे े'ने को मिले िनमें एक सरकार इन्टर काले से ्याा छात्र शिक्षा प्राप्त कर रहे थे । मालूम हुआ कि ये सारे मरसे इन्हं भैयों के आर्थिक सहयो? से चलते हैं।
इस तरह २७ के विधान सभा चुनाव में मैं ?ोर'पुर से आम?ढ के रास्ते से ?ुरा तो एक ?ॉवनुमा कस्बे में भारतय स्टेट बैंक क विेश मु्रा विनिमय सुविधा प्रत्त शा'ा े'कर आश्चर्य हुआ। मालूम पडा कि उस ?ॉव व आस पास के ?ॉवों से बड ताात में लो? ुबई "र 'ाड ेशों में नौकर करते हैं "र वहॉ से र पर रियाल "र नार भेते हैं। इस समृ्धि का न्ाा उस ?ॉव में सं?मरमर के फर्श वाले र "र चमचमात हुई मस्िें े'कर हुआ।
आम?ढ के लो?ों क यह समृ्धि ह उनक ुश्मन बन बै । महाराष्ट्र "र ?ुरात के लो?ों को यह पुरबिये भैये पने ुश्मन नर आने ल?े "र यह व्यावसायिक प्रति्वन्िता शनैः शनैः साम्प्रायिक तनाव में बल ?ई। आम?ढ में ो समृ्धि आई उसके परिणामस्वरुप ब ऊ चे पायचे का पाामा पहनने वाले मौलवियों के र में इन्नियर, डॉक्टर, मैनेर "र कम्प्यूटर प्रोफेशनल्स क एक नई तालमयाफता पढ तैयार होने ल?।
यह उच्च शिक्षा इन आर्थिक सम्पन्न रों के लिये नासूर बन ाये? इसका न्ाा ल?ाना क िन था। यह उच्च शिक्षित कम उम्र नौवानों का तबका ल?ाववाियों के लिये भ सॉफट टार?ेट था "र उनके आर्थिक प्रति्वन्ियों के लिये भ। ?ौर तलब यह है कि िन भ नौवानों पर इल्ाम ल?े हैं उनक उम्र बमुश्किल १७ बरस से लेकर २५ बरस के बच है। यि ?ौर किया ाये तो ६ िसम्बर १९९२ को ब बाबर मस्ि को कुछ ला' ?ुण्डों ने ?िराया "र उसके बा मुम्बई, सूरत हमाबा क सडकों पर िस तरके से हैवानियत "र वहशपन का ो 'ेल 'ेला ?या उन टना"ं के ये बालमन मूक साक्ष थे। सडकों पर लते टायरों में िन्ा लाये ाते लो?, कॉच क बोतलों पर नं? नचाई ात "रतों "र बलात्कार क वडियो रिकॉर्डिं? क टनाऍ इन िलों में बरसों बरस सुल?त रहं।
१९८६ में ल'नऊ में सम्पन्न वि्ञान कॉ?्रेस में यह तथ्य रे'ांकित किया ?या था कि ४ से ५ साल का बच्चा धर्म से बे'बर होता है "र ५ से ८ साल तक का बच्चा धर्म को समने ल?ता है "र किशोरावस्था तक आते आते वो धर्म के प्रति कट्टर हो ाता है। ६ िसम्बर १९९२ को मा"ं के कलेों से चिफ हुए यह मासूम चेहरे इस कर बहश "र रक्तपिपासु हो ायें?े, इस बात का न्ाा ना तो बाबर मस्ि ?िराने वाले ?ुण्डों को रहा हो?ा "र ना मुम्बई सूरत हमाबा क सडकों पर बलात्कार "र हत्याऍ करते कट्टर शूरवरों को।
वि्ञान का नियम है कि हर कि्रया क प्रतिकि्रया होत है। लेकिन यह प्रतिक्रिया इतन वभत्स "र बहशियाना हो? इसका न्ाा ल?ाना क िन था। ो समार "र सच्चे हिन्ुस्तान हैं उनक नर में न कि्रया सह थ "र ना प्रतिक्रिया को ाय हराया ा सकता है।
यह आ? भ ण्ड भ ना होने पाई थ कि इसके ऊपर सियास रोटियॉ सेंकने का काम प्रारम्भ हो ?या है। शुरुआत हुई उप्र क मु'्यमन्त्र मायावत के ऊललूल "र बेह बेहूा बयान से। सुश्र मायावत को हिन्ुस्तान क हर बमार का वायरस मुलायम सिंह ह ि'ाई ेते हैं। परमाणु करार के मसले पर मुसलमानों क पहले से नारा? ेल रहे मुलायम सिंह को एक बार "र ेरने का इससे बेहतर "र सुनहरा मौका भला मायावत को कहॉ मिलता?
यह शूट आउट समावा पार्ट के लिये भ ?ले क फॉस बन ?या है। एक तो सपा के एक नेता के पुत्र का नाम इस काण्ड में आया है। ूसरे कॉ?्रेस के साथ सपा का हनमून भ शुरु भ नहं हो पाया था कि उसे नर ल? ?ई है। सपा क िक्कत यह है कि परमाणु करार पर कॉ?्रेस के पाले में ाकर उसने पहले ह मुस्लिम मताता"ं को पने 'िलाफ कर लिया है "र रह सह कसर इस शूट आउट ने पूर कर है। आम?ढ मुसलमानों के िल में यह फॉस ?ढ ?ई है कि मुलायम सिंह शिवरा पाटिल "र डडवाल के सहयो? हैं। सपा क समस्या यह है कि ?र वो इस शूट आउट के विरोध में उतरत है तो उसका मनमोहन सिंह से रिश्ता 'राब हो ाये?ा, ो वो कतई नहं चाहत। चकि तब उसक नम्बर एक ुश्मन मायावत सपा नेता"ं को सताने ल?ें?।
उधर सपा यह चाहत थ कि आम?ढ के मुसलमानों को सबक सि'ाये। चकि हाल ह के लोकसभा उपचुनाव में वहॉ मुसलमानों ने बसपा प्रत्याश कबर हम डम्प को वोट ेकर िता िया था िसके चलते एक समय म िले क सभ विधानसभाई सटें तने वाल सपा के प्रत्याश "र पूर्वान्चल में ?? मिन मुलायम ?? के रुप में मशहूर बलराम सिंह याव बुर तरह हारे । ब सपा नेतृत्व ब -?ब ्वन् में है कि आम?ढियों को सबक सि'ाये कि पने समकरण क करे।
मौूा हालात में ?र यह शूट आउट ू ा है, ैसा कि धिकॉश आम भाइयों का मानना है तो यह बेह चिन्ता नक है चकि तब हमार पुलिस पन नाकाम छिपाने के लिये ेश के होनहार भविष्य को बर्स्त आतंकवा के रास्ते पर डाल रह है। इसके विपरत ?र पुलिस का ावा सह है तो यह "र भ ्याा चिन्तानक है। ोनों ह परिस्थितियों में यह कहना समचन हो?ा कि एक भस्मासुर को पैा किया ा रहा है। एक पुरान कहावत है कि ो ूसरों के लिये ?ड्ढा 'ोता है एक िन उस में ?िरता है। पाकिस्तान "र मरका के साथ हम इस कहावत को चरितार्थ होते े' रहे हैं। ो फिायन "र मुाहिन पाकिस्तान ने भारत के लिये तैयार किये थे वो आ उसके लिये बवाल-ए-ान बने हुए हैं "र साम्यवा सोवियत सं के 'ात्मे के लिये मरका ्वारा तैयार किये ?ये मुल्ला उमर "र "सामा बिन लाेन आ उस के सिरर् साबित हो रहे है। एक शायर के लफों में बस इतना ह–?? वक्त हर ुल्म तुम्हारे तुम्हें लौटा े?ा / वक्त के पास कहॉ रहम-"-करम होता है ???
– मलेन्ु उपाध्याय ( ले'क रानतिक समक्षक "र स्वतंत्र पत्रकार हैं।)
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– September 26, 2008
सोमा के बहाने हमारे बु्धिव, पत्रकार "र नैतिकता के सवाल
सोमनाथ चटर् ” के मु्े पर?prativad.com, ?हिन् मडिया डॉट इन पर मेरा ३ ?स्त को "र emsindia.com पर २९ ?स्त को प्रकाशित ले' “सोमा के बहाने हमारे बु्धिव, पत्रकार "र नैतिकता के सवाल ” पढ़ें "र पन बहुमूल्य प्रतिक्रिया से भ व?त कराने का कष्ट करें साभार
मलेंु उपाध्याय
सोमा के बहाने हमारे बु्धिव, पत्रकार "र नैतिकता के सवाल
मलेन्ु उपाध्याय
भारत क मार्क्सवा कम्युनिस्ट पार्ट ने पने लोकसभा सस्य "र लोकसभा ध्यक्ष सोमनाथ चटर् को पार्ट से निष्कासित क्या किया ेश के बड़े बु्धिव "र वरिष् पत्रकार बेचैन हो ?ये। इनमें से धिकांश को कोई आश्चर्य इसलिये नह हुआ, चूँकि उनका मानना था कि माकपा एक कट्टर ल है "र वहॉ तानाशाह का बोलबाला है।
हमारे ेश में एक चलन रहा है कि स्वयं को ्ञानवान साबित करने के लिये "र ेशभक्त साबित करने के लिये वामपंथियों को ?ाल ो। इस प्रवृत्ति का शिकार हमारा तथाकथित राष्ट्रय मडिया भ रहा है। एक समाचार पत्र ो कभ ेश के सबसे बडे पूंपति रहे राने का है "र उसक सम्पािका एक बड़ साहित्यकार है "र चूँकि एक बड़ साहित्यकार क पुत्र हैं इसलिये भ बड़ साहित्यकार है, ने एक पूर मुहिम सरकार के पक्ष में चलाई "र वामपंथियों को पान प पकर कोसा। इन सम्पािका का ब इन्टरनेट पर ब्यौरा ' ?ाला ?या तो उसमें उनक वन में उनका र 'ण्डवा र् था लेकिन, ब उनका 'बार ेहराून से पना संस्करण प्रारम्भ करता है तो उन्हें उत्तरा'ण्ड का ?ौरव बताता है। 'बार उन्हें उन ो लो?ों में शुमार करता है ो उत्तरा'ण्ड को नई पहचान े रहे हैं। है न काबिले तारफ! ब सुन्रलाल बहु?ुणा, नारायणत्त तिवार ैसे लो? उत्तरा'ण्ड क पहचान नहं रहे। यह समूह एक समय में आपातकाल का भ समर्थक रहा है। इस समाचारपत्र में एक वरिष् पत्रकार क व्यथा थ कि चूँकि माकपा कट्टर है इसलिये सोम ा को उसने निकालकर बाहर कर िया।यह बड़े पत्रकार बता रहे थे कि माकपा क सस्य सं'्या सत्ता में आने के बा तन ?ुन हो ?य है। इसलिये माकपा के कैडर में प्रतिब्धता क कम है। तर्क कुछ माकूल सा ल? सकता है, लेकिन फिर तो कॉ?्रेस के कैडर में प्रतिब्धता बच ह नहं हो? चूँकि वो तो छ: शक से सत्ता में है। यहॉ ो टना"ं का उल्ले' किया ा सकता है। पिछले बं?ाल विधानसभा चुनाव से एक व्रष पहले माकपा ने पने ७ विधायकों के टिकिट काटने क ोषणा कर , इसके बा रा्यसभा के चुनाव हुए किस भ माकपा विधायक ने क्रास वोटिं? नहं क बकि क उस समय उत्तर प्रेश में ”डिफरेन्ट वि र्स“ का ावा करने वाल पार्ट के विधायकों ने लालबहाुर शास्त्र के बेटे को वोट न ेकर क्रास वोटिं? करके शराब व्यवसाय को बोट करके िता िया। बकि भ सपा के ६ सॉसों ने पना टिकिट पक्का न मानकर क्रॉस वोटिं? क। क्या माकपा का यह कैरेक्टर किस ल में है?यहॉ एक बात तो इन तथाकथित बडे बु्धिवियों "र बडे पत्रकारों से पूछ ा सकत है कि भारतय संविधान क वो कौन स धारा है िसमें यह प्रावधान है कि लोकसभा ध्यक्ष पार्ट का सस्य नहं माना ाये?ा? यह भ्रम फैलाने का एक प्रयास है कि व्यक्ति संस्था से बड़ा होता है ताकि मनमोहन सिंह को ेश से भ बड़ा साबित किया ा सके। आ'िरकार सोमा थे तो माकपा के ह सस्य। "र ?र सोमा इसलिये स्वकार्य थे कि उन्होंने पूर निष्पक्षता से सन चलाया। तो ो यह तर्क े रहे हैं कि, ?र राष्ट्रपति माकपा कार्यकर्ता होता तो माकपा उससे भ इस्तफा ेने के लिये कहत, उन लो?ों से यह भ तो कहा ा सकता है कि ?र सोमा इतने ह पसन् हैं तो ?ला राष्ट्रपति सोमा को ह बना ें?
इन वरिष् पत्रकार महोय को सोमा के निष्कासन का र् है। लेकिन उन्हें ८४ वर्ष में साम्प्रायिक ताकतों से संर्ष करते सताराम केसर के पमान पर कोई मलाल नहं है। सोमा के निष्कासन पर स्यापा करने वाले रा यह भ तो बतायें कि क्या सोनिया क सात पढि़यों में यह म था कि वो नरसिंहाराव से सधे पार्ट क कमान ले सके? क्या कॉ?्रेस का स्व. केसर से वो बर्ताव उचित था? या किये केसर को एक तरके से धक्के मारकर २४ कबर रोड से बे'ल किया ?या था।
ब संसय मर्याा के पालन "र लोकतांत्रिक परम्परा"ं के ऊपर भाषण वो लो? े रहे हैं िन्होंने राष्ट्रपति ैसे सर्वोच्च संवैधानिक प को २६ ून १९७५ को रबर स्टाम्प बनाकर आपातकाल थोपा था। ?र हमारे इन तथाकथित वरिष् पत्रकारों क स्मृतिलोप नहं हुई है तो ब संयुक्त मोर्चा क सरकार बन थ तब शपथ?्रहण समारोह में तत्कालन राष्ट्रपति स्व शंकरयाल शर्मा से रामविलास पासवान क शिष्टता का भ िक्र कर लिया होता। हाल ह में ब प्रतिभा ताई पाटिल राष्ट्रपति निर्वाचित हुईं तब एक क्लिपिं? बार बार ि'ाई ?ई कि सोनिया उनके कन्धे पर हाथ र'कर सधे 'डे होने का इशारा कर रह हैं। यह संवैधानिक पों के प्रति संसय आचरण है? इस ेश में लो?ों ने ल'नऊ में” राभवन “ेरो“ कार्यक्रम होते े'ा "र बिहार के एक रा्यपाल के लिये -इसक ूसर टॉ? भ तोड़ ो- का एक मु'्यमंत्र का उ्ोष भ "र संसय आचरण पर भा।ण भ उन्हं का?
एक "र बडे स्तम्भकार हैं, ो ल?भ? १ वर्ष के होने वाले हैं। "र यह साहब पाकिस्तान को पना वतन मानते है "र चर्चा है कि इनके पिता ने शह-ए-आम सरार भ?त सिंह के 'िलाफ ?वाह ेकर उन्हें फॉस के फन्े तक पहुँचवाया था "र बले में कनाट प्लेस पाया था। पता नहं यह कितना सच है? ये बड़े स्तम्भकार ब बता रहे हैं कि चुनाव के बा कारत हाशिये पर पहुँच ायें?े। ब यह तो समय तय करे?ा कि कौन हाशिये पर रहे?ा "र फ्रंटफुट पर। लेकिन प्रकाश कारत को इस बात का श्रेय िया ा सकता है (इन बु्धिवियों क नर से लेकिन मेर ृष्टि में इसके लिये माकपा को श्रेय िया ाना चाहिये) कि इकस साला लोकतंत्र में पहल बार किस सरकार को एक राष्ट्रय मुे पर विश्वासमत पेश करने के लिये विवश होना पड़ा, वर्ना तो पहले कभ हरियाणा का एक मामूल सा पुलिस का सिपाह या किस हत्याकाण्ड से ुड़े किस एक न्यायिक आयो? क न्तरिम रिपोर्ट भ सरकारों के विश्वासमत "र विश्वासमत का कारण बनत थ, भले ह ६ बरस बा ह उन्हं से समौता हो ाये िन पर हत्या का आरोप ल?ाया ?या था।
वैसे इस मसले पर एक से बढकर एक तर्क आ रहे हैं। एक विश्लेषक बता रहे थे कि माकपा में सोमा के मसले पर बर्स्त वैचारिक र्न्त्वन् हैं। ब रानतिशास्त्र क प्रथम कक्षा का छात्र भ यह सम सकता है कि वैचारिक र्न्त्वन् वहं हो?ा हॉ विचार हो?ा। ब इसमें माकपा का क्या ोष है कि वहाँ विचार है वर्ना हॉ विचार नहं होता है वहाँ एक टिया किस्म का लाल भ किस व्यक्ति क चालस साल क रानति क र्थ निकाल सकता है। इस मुे पर माकपा को ?ाल ेने से बेहतर होता हमारे बु्धिव इन लों से कहते कि वो भ पने यहॉ विचार को प्राथमिकता ें व्यक्ति को नहं।
ेश के बडे़ बु्धिव हैं मु्राराक्षस । पिछले ो शक से धिक से मैं उनके ले' पढकर बहुत कुछ स'ता रहा हूँ। लेकिन, बलिहार ाऊँ कॉमरेड कारत क कि कुल मा १ िनों में उन्होंने मु्राराक्षस क भ ुबॉ बल । १३ ुलाई को मु्राराक्षस ने लि'ा-” ेश के लित आन्ोलन से उच्चवर्?य वामपंथ इतना ्याा चिढ़ता रहा है कि ब बहुन समा पार्ट ने एटम करार को लेकर कॉ?्रेस पार्ट का विरोध किया तो वामपंथ क बान तालू से चिपक ?ई है……….समूचे ेश के लित -पिछडे वर्? क सबसे सशक्त नेता मायावत ने िस वक्त एटम करार के विरोध में बयान िया , वामपंथ ने उनके इस निर्णय का स्वा?त भ नहं किया।……….“ लेकिन कारत का कारक मु्राराक्षस पर इतना भार पड़ा कि क ो हफ्ते बा ह उन्होंने वामपंथ के लिये लि'ा– ” उन्हें इस बात पर कोई शर्मिन्? नहं होत कि वे ?ुरात नरसंहार को सह हराने "र उसके पक्ष में चुनाव करने वाल ताकतों के ब?ल?र होकर रानति करते हैं।………यह वह है कि ब रुढि़वा मौका े'ता है तो ?ुरात नरसंहार कराने वाले "र उसके पक्ष में चुनाव प्रचार करने वाले तत्वों के साथ आराम से पने सै्धांतिक तैयार कर लेता है।……वामपंथ चतुराई ि'ाता रहा कि साम्प्रायिकता के विरु्ध सल लड़ाई मुलायम सिंह लडें "र वामपंथ लड़ने का नाटक करता रहे….“
आपने े'ा प्रकाश कारत का प्रभाव कि वो मु्राराक्षस ो मायावत को लितों "र पिछड़ों का एकमात्र प्रतिनिधि बता रहे थे, कुल मा १ िन में ह मायावत को मो का हमराह बताने ल?े। लेकिन मु्राराक्षस उस उमर ब्ुल्ला को सेक्यूलर साबित करें?े ो मो क आका वापेय सरकार में बै कर मो के कारनामों का समर्थन कर रहे थे "र करार पर मुलायम सिंह के ब?ल में 'ड़े थे? उन्हें उस महबूबा मुफ्त से भ कोई ऐतरा नहं है ो िल्ल में कां?्रेस के समर्थन में 'ड थं "र ाट में ” मुफफराबा चलो“ का नारा ल?ा रह हैं? उन्हें ब बाबर मस्ि क कातिल "र ” एक धक्का "र ो बाबर मस्ि तोड़ ो“ का नारा ल?ा कर मुरलमनोहर ोश के कन्धों पर ूलने वाल उमा भारत भ सेक्यूलर नर आ रह हों? चूँकि ब वो मर सिंह से स ड राइटिं? क कला का पा पढ़ आईं है ?
?र कारत "र वर््धन कुछ ?लत कर रहे हैं तो वो यह कि मायावत को प्रोेक्ट कर रहे हैं। भारतय वामपंथ क ुर्शा का कारण ह यह है कि वो कभ मुलायम "र लालू के पछे चल ेता है "र कभ सोनिया के। मुलायम सिंह के विश्वासमत से सबक लेकर वामपंथियों को ब तसरे मोर्चे क ल?ाम "र कमान स्वयं लेन हो?। रह बात सोम ा क, तो निसंेह सोमा ब तक के सबसे श्रेष् लोकसभाध्यक्ष साबित हुए हैं "र संस क पारर्शिता साबित करने के लिये उनके प्रयास भुलाये नहं भुलाये ा सकते हैं। "र ?र वो कुछ नैतिक कम उ ाने "र संवैधानिक मर्याा कायम र'ने में कामयाब रहे हैं तो निश्चित रुप से इसलिये कि उन्होंने नैतिकता क शिक्षा कम्युनिस्ट पा शाला में पाई है।
यह विवा से परे है कि सोमा एक च्छे स्पकर साबित हुए है लेकिन ?र वो एक च्छे कार्यकर्ता भ इस वक्त… साबित होते तो एक नई नर बनत िसका वसर उन्होंने स्वयं 'ोया है। हमने े'ा है कि ब व्यक्ति, ल पर भार पड़ ाता है तो वो इन्िरा ?ॉध िन्होंने पन हत्या से तन िन पहले ोषणा क थ कि उनके लहू का क़तरा-क़तरा इस मुल्क के काम आये?ा, इस इन्िरा ?ाँध क तसर पढ़ का वारिस ोषणा करता है कि सरकार रहे या ाये करार हो?ा?
( ले'क रानतिक समक्षक "र स्वतंत्र पत्रकार हैं।)
Posted in Politics.
– September 2, 2008