और दिल में किसी की याद न हो. मेरे दिल की पावन नगरी में, कुछ तेरे बिना आबाद न हो. यह मेरी निगाहें तेरे ही, दीदार को प्रियतम प्यासी हो. तेरी दीद बिना मेरे प्यारे, यह जीवन यूं बरबाद न हो. तेरी याद की मस्ती में खोकर, सुधबुध भूलू तुझे पा जाऊ. तेरा नाम रहे हरदम लब पर, बस और कोई फ़रियाद न हो. हर गीत मेरा तुझको अर्पित, दीवाना कहे सारी दुनिया. न हो धड़कन ऐसे दिल में, जिस दिल में तुम्हारी याद न हो.इक याद तेरी
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इक याद तुम्हारी याद रहे,
इक याद तुम्हारी याद रहे,
Posted in CHAHAT on 05/11/2011 09:07 am by Radha Saxenaइंसान की खुशबू
Posted in CHAHAT on 11/24/2010 09:35 am by Radha Saxenaइंसान की खुशबू रहती है,इंसान बदलते रहते है, दरबार लगा रहता है यहां,दरबान बदलते रहते है. जो हिम्मतवाले मांझी है,तूफानों से टकराते हैं, इन तूफानों का क्या कहना,तूफ़ान बदलते रहते. जो पक्के हैं इकारारो के,इकारारो पर मिट जाते है, जो बातों के बातूनी है,इकरार बदलते रहते है. एक दस्तरखान है ये दुनिया,सब मौत लुकमा बनते है, रहता है दस्तरखान बिछा,मेहमान बदलते रहते है. ये मेला है बस दो दिन का,कुछ कर चलिए,कुछ दे चलिए, इक दिल की हुकूमत रहती यहां,सुलतान बदलते रहते. ओ भोले मन,है पागल तू,क्यों मरता है वरदानो पर, बलिदान ही जिन्दा रहते है,वरदान बदलते रहते है. इंसान की खुशबू रहती है,इंसान बदलते रहते है. दरबार लगा रहता है यहां,दरबान बदलते रहते है.![]()
तेरी साधना ही,मेरी जिन्दगी हो,
Posted in CHAHAT on 11/03/2010 07:02 pm by Radha Saxena. . तेरी साधना ही ,मेरी जिन्दगी हो. तेरी साधना ही,मेरी जिन्दगी हो, रजा हो तेरी जो,वो मेरी ख़ुशी हो. मुझे हर कदम पे हो,तेरा सहारा, मेरी हर नजर में,हो तेरा नजारा . मेरे दिल में हरदम ,तेरी लौ लगी हो. रजा हो जो तेरी,वो मेरी ख़ुशी हो. फिकर हो तो दिल में,अपनी खता का, जिकर हो तो लब पर तेरी वफ़ा का. उठे जो सदा ,वो तेरी बंदगी हो. मै साधक हू,इसके सिवा कुछ नहीं हू, मै तेरी हू,तुझसे जुदा कुछ नहीं हू. यही गीत लब पे ,मेरे हर घड़ी हो, तेरी साधना ही ,मेरी जिन्दगी हो.![]()
KAUN KARTA HAI ?
Posted in CHAHAT on 10/21/2010 09:17 am by Radha Saxenaमोहब्बत के लिए जग में ,मोहब्बत कौन करता है.
पराये दर्द में घुट घुट के,आहें कौन भरता है.
जहां फानी में आकर ,लौट जाते हैं सभी एक दिन,
न आये मौत तो,बिन मौत आये कौन मरता है.
भरे है दिल कुटिलता से,जुबां पे रागे उल्फत है,
हकीकत अपने दिल की,आप जाहिर ,कौन करता है.
सभी को डर गुनाहों का,कहीं पर्दा न खुल जाए,
प्रभु की बात सब करते ,प्रभु से कौन डरता है. ![]()
SUNAA HAI…
Posted in CHAHAT on 06/20/2010 07:50 am by Radha Saxena![]()
अब तुम्हे सावन बहुत भाने लगा है,
कोई कहता था,न जाने रात मुज्ह्से.
यादों का दामन छुडाने सा लगा है,
कोई कहता था,न जाने रात मुज्ह्से.
सुन रहा था सब चमन,चुपचाप जब तुम,
बात कुछ बैठे सुमन से कर रहे थे.
तुम किसी के ध्यान में होकर मगन यूं,
फूल आंखों से उठाकर छू रहे थे.
अब तुम्हे कुछ क्रोध भी आने लगा है,
कोई कहता था ,न जाने रात मुज्ह्से.
बिजलियों की यह शिकायत हो रही है,
बादलों कों तुम बुलाने लग गये हो.
एक हलचल सी पतंगों मे मची है,
तुम बहुत दीपक जलाने लग गये हो.
अब तुम्हारा मन विहग गाने लगा है,
कोई कहता था ,न जाने रात मुज्ह्से.
दूर बजती बांसुरी की रागिनी भी,
उस तरह तुमसे सुनी जाती नही है.
अब तुम्हारी जिन्दगी की नर्म चादर,
आज खुशियों से बुनी जाती नही है.
अब तुम्हारा मौन घबराने लगा है,
कोई कहता था,न जाने रात मुज्ह्से.
रोज भर भर कर उमंगों के घडे यूं,
तुम अजाने रास्ते यूं तोड देते.
एक कोई है कि जिसका ध्यान करके,
गांठ आंचल में लगा कर जोड लेते.
अब तुम्हे संसार समज्हाने लगा है,
कोई कहता था,न जाने रात मुज्ह्से.
अब तुम्हे सावन बहुत भाने लगा है,
कोई कहता थ ,न जाने रात मुज्ह्से.
अब तुम्हारा मौन घबराने लगा है,
कोई कहता था,न जाने रात मुज्ह्से.
रोज भर भर कर उमंगों के घडे यूं,
तुम अजाने रास्ते यूं तोड देते.
एक कोई है कि जिसका ध्यान करके,
गांठ आंचल में लगा कर जोड लेते.
अब तुम्हे संसार समज्हाने लगा है,
कोई कहता था,न जाने रात मुज्ह्से.
अब तुम्हे सावन बहुत भाने लगा है,
कोई कहता थ ,न जाने रात मुज्ह्से.
VARADAAN N MAANGO
Posted in CHAHAT on 05/11/2010 03:17 pm by Radha Saxena![]()
मौन चले जाओ निज पथ पर,युग युग की तुम प्यास छिपाए,
मौन बढे जाओ निज पथ पर,अपनी चिर अभिलाष छिपाए,
शूलों मे ही आह छुपा लो,मिट जाओ, पर दान न मांगो,
यह जीवन है स्नेह समर्पित,तुम सुख का वरदान न मांगो.
दीप की भांति तिल तिल कर,तुम जलते जाओ हंसते जाओ,
दुख जीवन की एक कसौटी,स्वयं आप को कसते जाओ,
अपने पर विशवास करो तुम,इस जग से सम्मान न मांगो,
यह जीवन है स्नेह समर्पित,तुम सुख का वरदान न मांगो.
इच्छाएं विष है जीवन में,इन पर जय ही,तेरी जय है,
आत्मशक्ति से कर ले परिचय,फिर जीवन संघर्ष विजय है,
दुख के आंसू पीकर भी,तुम वैभव की मुस्कान न मांगो,
यह जीवन है स्नेह समर्पित,तुम सुख का वरदान न मांगो.
अपने अन्तः के प्रकाश को,रोक न तू,बाहर आने दे,
तेरे मिटने से जग बनता,तो अपने को मिट जाने दे,
सब कुछ देकर भी बदले में,तुम एश्वर्य महान न मांगो,
यह जीवन है स्नेह समर्पित,तुम सुख का वरदान न मांगो.
अमर साधना उस साधक की,जिसको फल की चाह नही है,
फूल दिये ,पर जग से कांटे,मिलने पर भी आह नही है,
यह जीवन संघर्ष कठिन है,इस दुख का अवसान न मांगो,
यह जीवन है स्नेह समर्पित,तुम सुख का वरदान न मांगो.
शूलों मे ही आह छिपा लो,मिट जाओ,पर दान न मांगो.
SANJH DHALE
Posted in CHAHAT on 04/01/2010 09:26 am by Radha Saxena![]()
बसे साँसों की गहराइयों में है जो ,
एक पल में यूँ ,उनको भुलाना नहीं ।
है हमारा महल,प्यार की नींव पर,
खुश्क तिनकों का ये आशियानां नहीं।
तेरी आँखों ने मुझसे ,किये वायदे,
तेरी बांहों ने,मुझको सहारा दिया।
इस जहां से न अब और कुछ चाहिए,
साथ तेरा है प्यारा,जो इसने दिया।
एक नन्हा सा दीपक ,जला है अभी,
ऐ हवाओं ,अभी सनसनाना नहीं।
है वफाओ की उम्मीद ,उनसे हमें ,
है वफ़ा क्या,जिन्होंने ये जाना नहीं।
अश्क आँखों से गिरकर,बिखर जायेंगें,
इनको दिल में हमें ,अब बसाना यूँ हीँ
मेरी तन्हाइयां होंगी ,मेरी गवाह ,
रस्में उल्फत हमें है निभाना यूँ ही ।
हंसने वालों को मौक़ा न देना कभी ,
अपने गम का तमाशा बनाना नहीं ।
सांझ से दुःख के बादल पलट आये फिर,
दूसरा जैसे इनका ठिकाना नहीं।
चंद अपनों ने जो भी किया छोड़िये,
वरना दुश्मन तो सारा ज़माना नहीं।
KUCH TO HAI….
Posted in CHAHAT on 03/11/2010 11:22 am by Radha Saxena![]()
जाने क्यों वो सपनों की डोर,टूटने नहीं देता,
बस,दो कदम और चलने का वास्ता देकर,मुज्हे रुकने नहीं देता.
बात कहता है मुज्हे,हंस हंस कर जी लेने की,
अजीब शख्स है,मुज्हे चैन से रोने नही देता.
आज हौसला देता है,मुज्हे चन्द सितारों को छू लेने का,
वो प्यारा सा चेहरा,मुज्हे टूट कर बिखरने नही देता.
शायद,जानता है वो भी,कि इन आंखों में आंसुओं का सैलाब है,
जाने क्यों,फिर भी,वो आंसुओं को गिरने नही देता.
मुज्हे कहता है, कि मै तो मर जाऊंगा तेरे बिन,
मैं जिंदा हूं अब तक,क्योंकि वो मुज्हे मरने नही देता.
UMMEED
Posted in CHAHAT, UMMEED on 03/04/2010 11:19 am by Radha Saxena![]()
जिसे हम पा नही सकते,उसे किस्मत समज्हते हैं,
जिसे है कर लिया हासिल,उसे क्यों भूल जाते हैं.
तू चाहे भूल जा मुज्हको,मुज्ह्से ये हो न पायेगा,
तू खुश रह अपनी दुनियां में,वो सुख मुज्ह्को भी भायेगा.
तू हर पल जिंदा है मुज्हमें,मेरी सांसों में,धडकन में,
पराया मैं कहूं कैसे,समाया है तू रग रग में.
तेरी यादों की चिंगारी,सुलगती दिल में है हर पल,
कि अश्कों के यूं रिसने से,शमा भी जा रही है गल.
न करना देर इतनी,लौटकर आना न हो पाये,
तेरी कातिल सी चाहत में,किसी का दम ही घुट जाये.
तेरे आने की उम्मीदों मे,ये जिंद कट ही जायेगी,
मुज्हे मालूम है,बादे सबा ,सिर्फ तेरी याद लायेगी.
TERAA SAATH HAI TO……………..
Posted in CHAHAT on 02/11/2010 09:13 am by Radha Saxena![]()
जीवन की रुलाती घडियों मे,मिलता है तुम्हारा प्यार मुज्हे.
कुछ चाह न बाकी रहती है,प्रिये आके तेरे द्वार मुज्हे.
मेरे दिल के गगन पर आकर् के,जब गम की घटा छा जाती है,
ना जाने कहां से चाह तेरी,तब बन हवा आ जाती है.
तुज्हे रक्षक अपना कहने में,फिर क्यों हो भला इन्कार मुज्हे.
जीवन की तरसती घडियों हो साथ तेरा हर बार मुज्हे.
प्रिय,दर पे तेरे आने वाला,कभी खाली हाथ नही जाता,
मै दिल से तेरे ,अब क्या मांगूं,बिन मांगें मन भर आता है.
जो तेरी इच्छा है प्रियवर,वो हर पल है स्वीकार मुज्हे.
जीवन की निराशा घडियों मे, मिलता है तुम्हारा प्यार मुज्हे.
जब तक मैं इस दुनियां मे रहूं,बस एक यही मेरा काम रहे,
मेरे दिल में सदा तेरी याद रहे,होंठों पे सदा तेरा नाम रहे,
रहे ध्यान तुम्हारे चरणों में,चाहे जन्म मुज्हे सौ बार मिले.
जीवन की रुलाती घडियों मे,मिलता है तुम्हारा प्यार मुज्हे.