रोज एक माला का, टूट कर बिखर जाना
ज़िन्दगी का मतलब है, धीरे - धीरे मर जाना
पटरियों पर यादों की, इस तरह से गुजरा वो
जैसे रेल गाड़ी का, जिस्म से गुजर जाना
सोच कितना मुश्किल है, अपनी खुश्ख आँखों से,
ज़िन्दगी की झीलों को, पानियों से भर जाना
जान ले गया मेरी, पास आके मंजिल के
ज़िन्दगी की गाड़ी, से उसका यूँ उतर जाना
तेरा घर भी जिसपे है, सोच कितना मुश्किल है
रोज उस ही रास्ते से, मेरा अपने घर जाना
रोज एक माला का टूट कर बिखर जाना
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By jyoti sharma
– November 8, 2011
दिल से तेरा ख़याल न जाये तो क्या करूँ?
तू ही बता तेरी याद आये तो क्या करूँ?
हसरत ये है की तुझे एक नज़र फिर से देख लूँ,
किस्मत वो पल ही न लाये तो क्या करूँ??????????
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By jyoti sharma
– November 2, 2011
रात है और है तुम्हारी चिट्ठियां,
मतलब………………..
है तन्हाई और है तुम्हारी चिट्ठियां,
लिख तो राखी है मगर भेजी नहीं,
मतलब………..
है अभी तक सब कंवारी चिट्ठियां,
हम नज़र आयेंगे इक - इक हर्फ़ में
जब जलाओगे हमारी चिट्ठियां………….
रात है और है तुम्हारी चिट्ठियां
निशी
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By jyoti sharma
– October 28, 2011
काश………………………………….
कभी यूँ भी हो कि दोनो का काम चल जाये…………
हवा भी चलती रहे और द़ीया भी जल जाये…………….
निश़ी
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By jyoti sharma
– August 4, 2011
तुझ से अब कोई वास्ता तो नहीं है, लेकिन ……….
तेरे हिस्से का वक़्त आज भी तन्हा गुजरता है…”

निशी़
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By jyoti sharma
– August 4, 2011
तुमहे किसने कहा था कि तुम मुझे चाहो,
जो दम भरते हो चाहत का, तो फिर उसको निभाओ तो
दिये जाते हो ये धमकी, गया तो फिर ना आॐगा,
कैसे वापस आओगे…………………….,
कि पहले मेरी दुनिया से जाओ तो
तुमहें तो मैं भी पयारी हूँ, और अपना घर भी पयारा है,
निपट लेगें ज़माने से, तुम अपना घर बसाओ तो
तुमहारे सच कि सचचाई पर मैं कुबा॑न हो जाॐ,
पर अपना सच बताने कि तुम हिममत जुटाओ तो
तुमहे किसने कहा था कि तुम मुझे चाहो
जो दम भरते हो चाहत का, तो फिर उसको निभाओ तो
निशी
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By jyoti sharma
– March 24, 2011
सावन मे जो बरसे बदरवा,
छान्ड चले सईया परदेशवा,
सुध ना ली घर आवन् की,
सावन की मन भावन की!
निशी
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By jyoti sharma
– October 5, 2010

Koi kahta hai deewana, koi pagal samajhta hai,
Magar dharti ki bechaini ko bas badal samajhta hai,
Mai tujhse door kaisi hu, tu mujhse door kaisa hai,
Ye tera dil samajhta hai ya mera dil samajhta hai.
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By jyoti sharma
– August 12, 2010

सावन मे जो बरसे बदरवा,छान्ड चले सईया परदेशवा,
सुध ना ली घर आवन् की,सावन की मन भावन की!निशी
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By jyoti sharma
– August 12, 2010

Jab wo mod aaye to paas jara ho jana,
muskarate hue phir hamse juda ho jana,
Ham na tardid karenge, na bura manege,
Ham par ilzaam rakh kar koi, khafa ho jana,
Yu ki phir koi na, duniya me kisi ko chahe,
Chah gar jurm jai, tum iski saza ho jana,
Bandagi SHARTEIN - MOHABBAT thi nibah di hamne,
Tumse ye kisne kaha tha ki KHUDA ho jana,
Jab wo mod aaye to…………….
n the turn is infront of us now………………….
MISS U A LOT……
JYOTI
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By jyoti sharma
– December 16, 2009