रोज एक माला का, टूट कर बिखर जाना
ज़िन्दगी का मतलब है, धीरे - धीरे मर जाना
पटरियों पर यादों की, इस तरह से गुजरा वो
जैसे रेल गाड़ी का, जिस्म से गुजर जाना
सोच कितना मुश्किल है, अपनी खुश्ख आँखों से,
ज़िन्दगी की झीलों को, पानियों से भर जाना
जान ले गया मेरी, पास आके मंजिल के
ज़िन्दगी की गाड़ी, से उसका यूँ उतर जाना
तेरा घर भी जिसपे है, सोच कितना मुश्किल है
रोज उस ही रास्ते से, मेरा अपने घर जाना
रोज एक माला का टूट कर बिखर जाना
0 Responses
Stay in touch with the conversation, subscribe to the RSS feed for comments on this post.