माफी….

आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद, की अपने टाइम निकल कर मेरे ब्लॉग्स को पढ़ा और उस पर आपने कॉमेंट्स दिए … पिछले दो हफ़्तों से मैं थोड़ा बिज़ी होता जा  रहा हूँ, कुछ आफीसियल काम के कारण, मेरा ERP सॉफ्टवेयर लाइव होने जा रहा है, तो यूज़र ट्रैनिंग्स, मीटिंग्स के दौर चल रहे हैं, इस लिए मैं iLand पर टाइम कम ही दे पा रहा हूँ … आप लोग मुझे माफ कीजिएगा की आपके सुंदर ब्लॉग्स पर मैं कॉमेंट नहीं दे पा रहा हूँ…. अभी ये व्यस्तता अगले दो तीन महीनो तक चलेगी हाँ बीच बीच में जितना हो सका मैं जरूर आपके ब्लॉग्स को पढूंगा और कॉमेंट्स भी दूंगा… अभी मैं अपना चिन्तन सीरीस स्थगित कर रहा हूँ …. अगर बीच  में मौका मिला  तो उसे जरूर पब्लिश करूंगा… टाइम नहीं दे पाने के कारण  माफी चाहता हूँ, ये अप्रैल फूल नहीं है….. वास्तविकता है…

आप लोगों के सहयोग का आकांक्षी

 


स्वस्थिति

शिव भगवानुवाच

“स्वस्थिति के आगे परिस्थिति ठहर नहीं सकती”


Recession?

(source internet)

What is Recession?

This story is about a man who once upon a time was selling Hotdogs by the roadside. He was illiterate, so he never read newspapers. He was hard of hearing, so he never listened to the radio. His eyes were weak, so he never watched television. But enthusiastically, he sold lots of hotdogs.

He was smart enough to offer some attractive schemes to increase his sales. His sales and profit went up. He ordered more a more raw material and buns and sold more. He recruited more supporting staff to serve more customers. He started offering home deliveries. Eventually he got himself a bigger and better stove. As his business was growing, the son, who had recently graduated from college, joined his father.

Then something strange happened.

The son asked, “Dad, aren’t you aware of the great recession that is coming our way?” The father replied, “No, but tell me about it.” The son said, “The international situation is terrible. The domestic situation is even worse. We should be prepared for the coming bad times.”

The man thought that since his son had been to college, read the papers, listened to the radio and watched TV. He ought to know and his advice should not be taken lightly. So the next day onwards, the father cut down the his raw material order and buns, took down the colorful signboard, removed all the special schemes he was offering to the customers and was no longer as enthusiastic. He reduced his staff strength by giving layoffs. Very soon, fewer and fewer people bothered to stop at his Hotdog stand. And his sales started coming down rapidly and so did the profit. The father said to his son, “Son, you were right”. “We are in the middle of a recession and crisis. I am glad you warned me ahead of time.”

Moral of the Story: It’s all in your MIND! And we actually FUEL this recession much more than we think.


Chintan VIII

अब आगे ……

आइए अब भगवान शिव को सामने रखते हैं … हम क्या कहते हैं शिव ज्योतिर्लिन्गम ( भगवान शिव के बारह (द्वादश ज्योतिर्लिन्गम) मत मशहूर हैं).

अब ध्यान से शब्दों को देखिए ज्योतिर्लिन्गम …. अर्थात ज्योति की तरह के लिंग वाला. लिंग का एक अर्थ होता है पहचान. अब शिव लिंगो के देखिए उनका आकार ज्योति की तरह का ही होता है (जैसे दीये या मोमबत्ती की लौ) … इस लौ की तुलना शिव लिंगो ने करें तो दोनो का स्वरूप समान ही है. शिव ज्योतिर्लिंग को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाने के लिए इन लिंगो का रूप बनाया गया. किसी भी शिवलिंग का नाक कान नहीं होता या आकारी देवता का रूप नहीं बनाया जाता है.

उत्तर दक्षिण पूरब पश्चिम शिवलिंगो का स्वरूप समान होता है, आकार भले ही छोटा बड़ा बनाया जाता है, लेकिन स्वरूप एक ही जैसा होता है …

रामचन्द्र जी ने रमेश्वरम में शिवलिंग की ही पूजा और स्थापना की थी, रामेश्वर के नाम से अर्थात राम के भी ईश्वर (राम विष्णु के अवतार माने जाते हैं यानी शिव उनसे (विष्णु) भी ऊँचे हैं). कृष्ण ने गोपेश्वर में शिवलिंग की स्थापन की. शंकराचार्य ने भारत के चारो कोनो (दिशाओं) में शिवलिंगो की स्थापना की थी (शंकर की मूर्तियों की नहीं).

अगर आप पूरे भारत के मंदिरों का अध्ययन करें तो हर एक गावों में आपको, शिव मंदिर मिल जाएंगे. पूरे भारत में सबसे ज्यादा शिव मंदिर ही हैं.

परमात्मा सदा एकरस, शांति का सागर, प्रेम का सागर, गुणों का सागर, आनंद का सागर, है, अब तुलना करे शंकर से तो शंकर जी को क्रोध भी आता हैं वो दुखी भी होते हैं (पार्वती के जल कर भस्म हो जाने पर) , वो तपस्या रत भी हैं, अगर वो भगवान हैं तो उन्हे तपस्या करने की क्या जरूरत? और किसकी तपस्या करते हैं? इसका अर्थ है कोई उनसे बड़ा है तभी तो उसकी तपस्या करते हैं. अगर आप शंकर की प्रतिमा या फोटो को देखें तो उसके आगे भी एक शिव लिंग रखा है. ठीक इसी तरह ब्रह्मा के हाथों में माला है, अगर वो भगवान हैं? तो वो किसकी माला फेर रहे हैं, यानी कोई उनसे भी ऊँचा है ……


अगर विभिन्न मंदिरों की स्थिति को देखें तो देवताओ की मूर्तियाँ शिवलिंग के अगल बगल ही मिलेगी और शिवलिंग बीच में स्थापित होगा …. जैसा की हम पढ़ते आए हैं की “शिव लिंग”, शंकर का अंग विशेष है … तो एक बात का ध्यान रखें की जिस अंग की बात हम सार्वजनिक रूप से नहीं करते हैं उसकी हम पूजा क्यों करेंगे? ये एक तरह से भगवान की ग्लानि ही हुई.

”शिवलिंग” ज्योति स्वरूप निराकार परम आत्मा का यादगार (प्रतीक) है, और हम सभी उसी की ही पूजा करते हैं. निराकार का अर्थ ये नहीं है की उसका आकार नहीं है, हाँ एक आकार (साकार मनुष्य रूप) की तुलना में वो निराकार है.

सारे विश्व की आत्माएं एक शिव की ही संतान हैं, हमारे (आत्मा का) रूप भी ज्योति का है और उसी तरह हमारे पिता परम पिता परमात्मा का भी स्वरूप ज्योति की तरह का है हम आत्मा हैं और वो परम आत्मा , है वो भी आत्मा परंतु परम अर्थात ऊँचे से ऊँचा. भगवान शब्द की व्याख्या करते हैं भ - भूमि, ग- गगन, व- वायु, आ- अग्नि, न-नीर अर्थात पाँचो तत्वो से परे रहने वाला

हम कहते हैं हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई आपस में हैं भाई भाई, परंतु हम एक पिता की संतान हैं ये ना जान ने के कारण हम विभिन्न, धर्म भेद में पड़े रहते हैं और धर्म के नाम पर आपस में एक दूसरे के दुश्मन बने रहते हैं और लड़ते रहते हैं, और एक दूसरे को मिटाने की बाते करते रहते हैं …

अगर सही रूप में अपनी (आत्मा) और परमात्माकी खोज करें तो पाएंगे की हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई आत्मा रूप में भाई भाई और हमारे पिता ज्योति स्वरूप शिव. आप उसे परम पिता परमात्मा कह लें या शिव पिता या भगवान या खुदा या अल्लाह या कुछ और, परंतु इस बात का ध्यान रखें हम सभी आपस में भाई भाई ही हैं कोई अलग शख्शियत नहीं …

इति शुभं ….

सभी धर्म समान रूप से परमात्मा का स्वरूप ज्योति का ही मानते हैं और शिव हैं उनकी सही पहचान..

आगे विभिन्न धर्मो में शिव का स्थान …. रहस्य और भी हैं शिव के बारे में ….


Hans Lo

if engineers start making films the name will be:-
current ho na ho
aa ab B.Tech karen
kabhi AC kabhi DC
Hamari IC Apke pass hai
fuse laga ke dekho
engineers no 1
fuse lagaya to darna kya
engineering koi khel nahi
input wale output le jayenge
salam-e-risk
Asut jal
had kar di Newton ne
internal-external sath sath
chain churaye exam
electrical !!! a confusing story
maine engineering kyon ki

engineering rocks (”-”)


Chintan VII


अब आगे ……

सबके कॉमेंट्स से एक बात तो सिद्ध हो ही गई की भगवान एक ही है ….. अब अलग अलग धर्मो के अनुसार भगवान को पहचानते है ………

1- सिक्ख - गुरु नानक देव जी के अनुसार - ” अवल अल्लाह नूर उपाया कुद रत के सब बंदे एक नूर से सब जग उपजया” , और ” सत् श्री अकाल ” कह कर उन्होने परमात्मा के अकाल रूप अर्थात् जिसे काल भी नही खा सकता है के रूप की महिमा की.

यहाँ नूर का अर्थ लाइट ( ज्योति ) से है.

2- मुस्लिम - कुरान के अनुसार भी अल्लाह नूर है, कुरान का एक पूरा चॅप्टर लाइट पर है. ( अल-शोरा:10) & (अल-नूर:35)
3- ईसाई - God is light, ये ईसा का कथन है


अगर इन की बात माने तो भगवान का या परम सत्ता का स्वरूप ज्योति (लाइट) का है.

गीता अध्याय 8 श्लोक 8 & 9 में भगवान के स्वरूप का वर्णन बहुत साफ लिखा है और वो भी ज्योति का ही है.

अब बात आती है हमारी अर्थात हिन्दू धर्म की हमारे यहाँ ऐसा (ज्योति स्वरूप) कौन है ????

आगे और भी ……


Chintan VI

अब आगे ……

(मेरे विचार के अनुसार)

भगवान को परखने के लिए 5 कसौटियाँ

1- वो सर्वोच्च होगा - अर्थात् उसके ऊपर कोई नही होगा ना माता पिता, ना ही गुरु.
2- वो जन्मा मरण से न्यारा होगा - अर्थात देहधारी नही होगा, देहधारी का शरीर एक निश्चित समय के बाद नष्ट होना ही है ये प्रकृति का नियम है, और हम हिंदुओ को छोड़, दूसरे धर्म वाले शरीर धारी को भगवान नही मानते हैं
3- वो सर्व का दाता होगा - अर्थात वो सदा देने वाला होगा ना की लेने वाला, जैसे अगर शरीर धारी है तो ऊसे पढ़ने लिखने गुरु के पास जाना होगा, और वहाँ पर शिक्षा ग्रहण करेगा तो उसने कुछ ग्रहण किया, ना की दिया.
4- वो सर्व मान्य होगा - अर्थात सभी धर्म उसे मान्यता देंगे और उस एक को ही सर्वोच्च परमात्मा अर्थात भगवान मानेंगे.
5- वो सर्वग्य होगा - अर्थात् सब कुछ जान-ने वाला होगा सब कुछ का अर्थ तीनो कालों को, श्रीस्टी के आदि, मध्य और अंत को भी.


हम हिंदुओ का एक ही माननीय ग्रंथ है “सर्वा शास्त्रमय शिरोमणि गीता” और कहा जाता है की गीता पढ़ने के बाद और कुछ पढ़ना शेष नही रह जाता है …… बीच बीच में मैं गीता ग्रंथ का सहयोग लूँगा

…..आगे अलग अलग धर्मो के में भगवान की व्याख्या …..

(लिखा बहुत कुछ जा सकता है परंतु मैं संक्षिप्त में ही लिख रहा हूँ)


Chintan V

किम जी के कॉमेंट से शुरुआत करता हूँ ” एक नूर से सब जग उपजया ”


क्या भगवान एक है या बहुत सारे हैं, हर एक धर्म के अनुसार अलग अलग?
अगर हाँ तो क्या अलग अलग ढेर सारे भगवान हैं ??? अगर नही तो एक वो है कौन ??

हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई मुख्या धर्मो के अनुसार? हम चारो एक बहुत छोटी सी बात पर लड़ते हैं.

इस बार आप लोग उत्तर दीजिए फिर चिंतन को आगे बढाऊंगा …….


Solution

The only solution to most difficult problem today in the society, the country and the world, is character. If character is lost, no prestige remains.


Suraj

अरे सूरज क्या हाल है भाई, मुरझाए हुए सूरज को देख कर मैने कहा, वो क्षितिज से थोड़ी दूर खड़ा था….. हाँ ठीक ही हूँ, उसका मुरझाया सा जवाब आया, सुबह तो तुम्हारा मूड ठीक था लेकिन दोपहर को तो बहुत गरम हो थे, मैने उस से कहा, क्या किया जाए गरम होना ही पड़ता है, उसका जवाब आया, अब शाम को देख रहा था बेचारा एकदम् निस्तेज हुआ पड़ा था. वो मेरे साथ ही चलने लगा, ठंड के दिन थे और शाम का वक्त हो चला था मैं आफ़िस से घर की तरफ चल पड़ा, आफ़िस से मुझे निकलता देख वो भी मेरे साथ हो लिया, हम दोनो आपस में एक दूसरे से बातें किए जा रहे थे, साथ ही साथ रास्ते भी कट रहा था, नही तो अकेले रास्ता काटना बहुत बुरा लगता था. बीच बीच में तुम गायब कहाँ हो जाते थे, मैने उस से पूछा, वो बादल मिल जाता था तो उसी के साथ थोड़ी गप बाज़ी में लग जाता था, तो समय का पता ही नही चलता था…उस का जवाब आया, चलो कहीं घूम के आते हैं
चाय शाय पीते हैं और बैठ कर गप्पे मारेंगे, इधर कई दिनो बाद मिले हो, मैने कहा, नही आज नही फिर कभी आज तो बहुत थक गया हूँ, उसका जवाब आया, थोड़ी देर बाद मैने महसूस किया वो मुझसे थोड़ी दूरी बनाता जा रहा है और क्षितिज के निकट होता जा रहा है, मैने उसे टोक दिया, उधर कहाँ भाई???? वो बस मुस्कुरा के रह गया, उसकी मुस्कुराहट बड़ी जबरदस्त थी, जैसे थकावट के बाद बिस्तरा नसीब होता है ठीक वैसे ही, लेकिन उस से बातें करना बहुत अच्छा लग रहा था, मै चाह रहा था वो मेरे साथ रहे मगर वो क्षितिज के करीब रहना चाह रहा था…धीरे धीरे मुख्य सड़क छोड़ मैं घर की तरह दूसरी रोड पर आ गया मैने उस से कहा आओ भाई घर तक तो चलो मगर वो बोला अभी कहीँ और जाना है दूसरी तरफ़, अच्छा राम राम …मैने भी राम राम कहते उस से विदाई ली, अब उसका साथ छोड़ मैं अपने घर की तरफ चल पड़ा, दिमाग में असंख्य विचार उठ रहे थे हम भी सुबह पूरे उत्साह से जिंदगी की शुरुआत करते हैं सूरज की तरह, दोपहर होते होते दिमाग को काम के बोझ से गर्मी होने लगती है और शाम होते होते थक कर चूर हो जाते हैं और फिर दो पल सुकून के बिताने के लिए अपने नीड़ की तरह बढ़ चलते हैं अनवरत…


आज कल फरवरी में दिन थोड़े बड़े होने लगे हैं, हमारी छुट्टी शाम को 5.30 पर हो जाती है, ड्रॉपिंग वैन घर जाते समय मेरी बाई तरफ डूबता हुआ सूरज था, ये उसी के साथ की बात चीत है….

(सोनीपत हरियाणा का एक छोटा सा कस्बा है दिल्ली से लगा हुआ, पिछले एक साल से मैं यहीं पर सर्विस कर रहा हूँ, 10-12 साल गुड़गाव में बिताने के बाद अब यहाँ बहुत सुकून सा लगता है, ना भीड़ भाड़ ना वाहनो की चिल्ल पों, एक दम शांत और स्थिर जिंदगी, लोग आपको आराम से बैठे ताश खेलते दिख जाएंगे, चारों तरफ़ हरियाली से भरे हुए खेत
रात होते ही आपको तारो भरा आकाश दिख जाएगा, गुड़गाव की भागती शोर मचाती जिंदगी से यहाँ का माहौल बिल्कुल अलग, मुझे बहुत भाता है….)