आज कल यह एक आम द्रश्य बनता जा रहा है जो इन दिनो उत्तर प्रदेश असेंबली मे दिखा .हलाकी इसके लिए किसी एक दल को दोष देना शायद जायज नही होगा क्योकि ये लगभग आम राजनैतिक द्रष्टिकोण बन गया है आज उत्तर प्रदेश कल कही और ये वास्तव मे लोकतंत्र के सविंधान मे विपच्छ की जो परिभाषा लिखित या सैधांतिक रूप से इंगित है वह लागत आज के भ्रष्ट राजनैतिक माहोल मे नक्कर खाने की तूती बन गयी है ये परंपरा बन गयी है की अपनी बात कहने के लिए आप कितने भी निचले स्तर पर चले जाइये क्योकि शायद इस तरह से आप हाइलाइटेड होगे . ये परंपरा आम जनता मे भी कायम होती जा रही है क्योकि जब पथप्रदर्शक ही जैसे होगे वैसे ही उनके अनुगामी होगे आए दीं
हो रहे उग्रआंदोलन इसका स्पष्ट प्रमाण है यह एक गलत परंपरा है इस तरह से हम अपने समाज को एक अशांत माहोल विरासत मे दे रहे है
मर्यादा परंपार अपने अस्तित्वा खोती जा रही है .लोकतंत्र का मतलब मनमानी नही बल्कि सर्वमत होना चाहिए . ये इन राजनाताओ की कोई
समझा दे ताकि हम इस देश के समाज को सही दिशा दे सकें
u said very well Dev that as the leaders do so the followers will do.but who can stop it?i think, nobody can do it because today’’s world is like an atomic zone where once an incident starts,it never ends.so just watch.no way……….