दोस्तों हम जिस समाज मे रहते है वहाँ पर कुछ ऐसी घटनाएँ होती है जो हमें सोचने को मजबूर कर देते हैं और ये घटनाये सोचनीय इस लिए भी है क्योकि बुदजीवी समाज की यह ज़िम्मेदारी बनती है की वह समाज
मे हो रहे अमानविया क्रत्यों को अपने विचार केंद्र में रखकर उन पर मनन करे और निवारण के प्रयास करे
आज मई एक एसा ही विषय आपके विचारार्थ रख रहा हूँ और उम्मीद करता हूँ की समाज में इससे
जाग्रति की किरण तो जरूर ही आएगी
हमारे समाज मे लिंग भेद एक बरही विकट समस्या है और यह समस्या हर समाज और समुदाय मे व्याप्त
है हुमरे यहाँ लड़कों की अपेच्छा लड़कियों को कम महत्व दिया जाता है मैं कुछ आँख देखी घटनाऔं का
उल्लेख करना चाहूँगा और उम्मीद करता हूँ की प्रबुध समाज ऐसी घटनाओं की पुन्रव्रति रोकने को प्रयासरत
रहेगा
1. हमारे बच्चों मे स्कूल के समय एक नयी माँग की की उनको लंच ज्यादा दिया जय जब उनसे इसकी वज़ह
पूछी गयी तो चौकाने वाली जानकारी मिली उन्होने बताया की उनकी दो क्लास मेट को घर मे खाना नही
दिया जाता है उन दो लड़कियों की मा की म्रत्यु हो गयी थी और उनकी दादी उन्हे बहुत कष्ट देती थी उन्हे
पढ़ने के लिए समय नही दिया जाता था घर मे भी उन्हे तभी खाना मिलता था जब वो घर के सारे कम
कर लेती थी उनका कसूर सिर्फ यही था की उनकी मा ने लड़कियों को जन्म दिया था उनके ननिहाल वालों
ने भी भरण पोषण की ज़िम्मेदारी से इनकार कर दिया था अगर वो लड़के होते तो नजारा कुछ और ही होता
2.मै सेनेमा मे बैठा मूवी देख रहा था मेरे बगल मे एक परिवार था वो अपनी दो बेटियों और एक छोटे बेटे
के साथ थे इंटेर्वल के समय उन्होने एक काफी मागाई और अपने छोटे बेटे को दे दी मझली बेटी लालायित
आँखों से बार बार अपने भाई और काफी की तरफ़ देखती रही लिकिन पेरेंट्स ने उसे नेग्लेक्ट कर दिया
बड़ी बेटी इस भेद भाव की शायद आदी हो चुकी थी उसने एक निगाह उठा कर भी नही देखा शायद वो लोग
ज्यादा खर्चा नही कर सकते हों मगर बच्चों को आपस मे शेयर करने का मॅनर्स सीखाना तो कोई खर्चीला
काम नही है इन सब घटनाओं से बचों के कोमल मॅन पर क्या असर पड़ता है ये शायद कोई नही जानना
चाहता यह संवेदनहीन समाज की बुनयाद बनता जा रहा है
3.
Friends' Update
-
Loading ...Please wait..
बुदजीवी समाज ki budhi ka jeev so gaya hai. woh keval media ke samne hai aata hai. use samsya se kuch lena dena nahi hai..
My dear brother how do you fight this issue, This system was made by so called Budhjive. and you are inviting again few Budhjivi who will made a system that may justify for the time being (Chances are very less apx .00000001%) but it create problem later on. If you nave solutions then please write to me.
sach main sachchai hai ye…… aaj jab betiyan chaand ko choo chuki hai tab bhi logon ke vicharon main sankirnta hai………..ashcharya tab hota hai jab pade likha samaaj is tarah ki soch rakhta hai………
irony of our society n still girls are suffering ………we will have to one to clean all the biased mentality
Yes, You are true, there are many more things happening which we don”t know till somebody tells us. Thanks for the post
sach mai ye hamara durbhagye hai…………good post
aise vyavhar yaha gujarat mai bahut kam hai. logo ko ye soch se bahar nikal na chahiya.
in urban areas slowly-2 socitety is trying to left it, but up to some extent you r right.
sach mein quite true………..great…….it was umeed se dugna……….:)