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Archive for the ‘From past ...’ Category

Divine morning s

April 22nd, 2009


Good morning …
Have A blessed day ahead…

I wont say that I m very religious type of person .

I think there is one super power which has decided something ,

for all of us… that's why I believe in

"whatever happens, happens for a reason

I am combination of  pessimist and optimistic attitude and

sometime I am Atheist too ..

however I do Pooja regularly .

Often go to temples have  respect for all religions .

But there are something which evoke my spiritual feeling  v much .. or sometimes give peace  to my

soul

And that are Bhajans..

 

A Bhajan is a type of Hindu devotional song, often simple, lyrical and expressing love for the Divine.
The music is sometimes based on classical ragas and talas.

Bhajans by Kabir,
Mirabai,
Surdas,
Tulsidas
and a few others are considered to be classic.

The language of their works is influenced by several of the dialects of Hindi. They are widely enjoyed even among those who do not speak
Hindi.

Few Bhajan which I liked v much are

मैली चादर ओढ़ के कैसे द्वार तुम्हारे आऊँ ।
हे पावन परमेश्वर मेरे मन ही मन शरमाऊं ॥

तूने मुझको जग में भेजा निर्मल देकर काया ।
आकर के संसार में मैंने इसको दाग लगाया ।
जनम जनम की मैली चादर कैसे दाग छुड़ाऊं ॥

निर्मल वाणी पाकर मैने नाम न तेरा गाया ।
नयन मूंद कर हे परमेश्वर कभी न तुझको ध्याया ।
मन वीणा की तारें टूटीं अब क्या गीत सुनाऊं ॥

इन पैरों से चल कर तेरे मन्दिर कभी न आया ।
जहां जहां हो पूजा तेरी कभी न शीश झुकाया ।
हे हरि हर मैं हार के आया अब क्या हार चढ़ाऊं ॥

श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणम् ।
नवकञ्ज लोचन कञ्ज मुख कर कञ्ज पद कञ्जारुणम् ॥ १॥

कंदर्प अगणित अमित छबि नव नील नीरज सुन्दरम् ।
पटपीत मानहुं तड़ित रुचि सुचि नौमि जनक सुतावरम् ॥ २॥

भजु दीन बन्धु दिनेश दानव दैत्यवंशनिकन्दनम् ।
रघुनन्द आनंदकंद कोशल चन्द दशरथ नन्दनम् ॥ ३॥

सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदार अङ्ग विभूषणम् ।

आजानुभुज सर चापधर सङ्ग्राम जित खरदूषणम् ॥ ४॥

इति वदति तुलसीदास शङ्कर शेष मुनि मनरञ्जनम् ।

मम हृदयकञ्ज निवास कुरु कामादिखलदलमञ्जनम् ॥ ५॥

हारिये न हिम्मत बिसारिये न राम ।
तू क्यों सोचे बंदे सब की सोचे राम ॥

दीपक ले के हाथ में सतगुरु राह दिखाये ।
पर मन मूरख बावरा आप अँधेरे जाए ॥

पाप पुण्य और भले बुरे की वो ही करता तोल ।
ये सौदे नहीं जगत हाट के तू क्या जाने मोल ॥

जैसा जिस का काम पाता वैसे दाम ।

तू क्यों सोचे बंदे सब की सोचे राम ॥




कभी राम बनके कभी श्याम बनके चले आना प्रभुजी चले आना….

तुम राम रूप में आना, तुम राम रूप में आना

सीता साथ लेके, धनुष हाथ लेके,

चले आना प्रभुजी चले आना…



तुम श्याम रूप में आना, तुम श्याम रूप में आना,

राधा साथ लेके, मुरली हाथ लेके,

चले आना प्रभुजी चले आना…



तुम शिव के रूप में आना, तुम शिव के रूप में आना..

गौरा साथ लेके , डमरू हाथ लेके,

चले आना प्रभुजी चले आना…



तुम विष्णु रूप में आना, तुम विष्णु रूप में आना,

लक्ष्मी साथ लेके, चक्र हाथ लेके,

चले आना प्रभुजी चले आना…



तुम गणपति रूप में आना, तुम गणपति रूप में आना

रीधी साथ लेके, सीधी साथ लेके ,

चले आना प्रभुजी चले आना….




कभी राम बनके कभी श्याम बनके चले आना प्रभुजी चले आना…





 
Last one is my ALARM  TONE ( कभी राम बनके कभी श्याम बनके)

रहीम

June 9th, 2008

 

 


पोथी पढ़ि - पढ़ि जग मुआ, पंडित हुआ न कोय।
ढाई आखर प्रेम का, पढ़ै सो पण्डित होय।।

 

कस्तुरी कुंडल बसै, मृग ढ़ूढै वन माहिं।
ऐसे घटि - घटि राम है, दुनियां देखे नाहिं।।

 

निन्दक नियरे राखिये, आँगन कुटी छवाय।
बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करै सुभाय।।

 

शब्द सम्हार बोलिये, शब्द के हाथ न पाँव ।
एक शब्द औषधि करे, एक शब्द करे घाव ॥

 

रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय।
टूटे से फिर ना जुड़े़, जुड़े़ गाँठ परि जाय ॥

 

छिमा बड़न को चाहिये, छोटन को उत्पात।
कह रहीम हरि का घट्यौ, जो भृगु मारी लात॥

 

जो रहीम उत्तम प्रकृति,   का करी सकत कुसंग ।
चन्दन विष व्यापत नहीं, लिपटे रहत भुजंग ।।


 

बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय।
जो दिल खोजा आपना, मुझसा बुरा न कोय॥