चेहरे पे बयां अफसाने हजार दिखे,
तेरी नजरों में लुटे वो जमाने हरबार दिखे.
हर आंसु है जैसे भरा भरा,
हर आंसुओ मे तूटे वो फसाने बार बार दिखे.
हर कदमों मे जैसे कोइ राह सिमटी थी,
तेरे हर कदमों मे खोये वो चौराहे लगातार दिखे.
बुझी बुझी सी हंसी से ना छीपा पाये,
मुस्कुराने की हर कोशिश में उजडे वो लम्हे तारतार दिखे.
-मनीषा