हद इंतजार की हमें यहां तक लाई,
हर आहट पे दिल में लौ सी जले.
ढूंढा हर कदमों के निशां में,पर
हर कदमों पे एक नई राह सी दीखे.
हर रात है जैसे उलझनों का समंदर,पर
हर रात में एक सुबह सी पले.
हो चूके बेजुबान सारे शब्द,पर
तेरी हर नझर में एक जुबां सी खुले.
तन्हाई में भी कहां तन्हा हम थे,
तेरी यादें पल पल काफिले सी चले
-मनीषा
Updates from June, 2009
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हदे इंतजार....
manisha