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चल
दिए छोड के हमे यादो के काफ़िले के सहारे,
जाएँ कहाँ खडे है दिशाहीन से
आप ही राह थे मेरी,आप ही थे हमराह,
आप ही थे रूह की तृप्ति मेरी,आप ही से थी प्यास.
लग रहे सब रास्ते अजनबी से
जाएँ कहाँ खडे है दिशाहीन से

-मनीषा