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पुत्र का माता के नाम पत्र




डियर मॉम,


मैं यहाँ कुशल पूर्वक हूँ.  फीलिंग बैटर.  रात के २.०० पी एम हो गए हैं.  इस वक्त छायावती जी के राज में ऊ. पी. के  एक आम आदमी के घर पर आम सी खाट पर लेटा हुआ आम खा रहा हूँ.  और यु नो, मोम, यह आम आदमी बड़ा खास है, गरीब भी है और सबसे इंटरेस्टिंग बात यह है कि दलित भी है.  आज इस आम आदमी से मिलकर मैं खुद को आम समझने लगा हूँ. यहाँ ए सी तो नहीं है पर सामने भेंसों के तबेले से निकलने वाली सौंधी सौंधी सी खुशबू लिए जो हवा आ रही है उसके क्या कहने.  वाह! कितना सुखद होता है आम होना. आज ही मैंने  इस खाट पर लेटे-लेटे एक विचित्र प्राणी को देखा जो मेरा रक्त ऐसे पी रहा था जैसे चाय की चुस्की ले रहा हो.  मुझे बताया गया कि यह खटमल है.  कितना फनी  साऊंड करता है न मॉम.  और हाँ,  इर्द-गिर्द मंडराने वाले ये मच्छर सिक्यूरिटी गार्ड्स की तरह घूम रहे हैं …और जब मुझे काटते हैं तो मुझे देश के गरीब की याद आती है.  कैसे पुलिसिया जुल्म का शिकार होकर हमारे नौजवान पढ़े-लिखे किसान बंधु अपनी जमीने सस्ते में बेच  रहे हैं.  मैं इनके लिए लडूंगा…आज ही मैंने इस आम आदमी को  चार एकड़ जमीन खरीद कर दी है ..जब छायावती की  सरकार इस गरीब दलित से यह जमीन अधिग्रहित कर लेगी तो मैं इसे सही मुआवजा दिलाऊंगा. मैंने आज हैण्ड-पम्प चलाने की टेक्नीक भी सीखी..और हाथों से पानी भी पिया….बड़ी मेहनत और दिमाग का काम है मॉम.  आज भाभी जी के हाथों की भिन्डी की सब्जी और रोटी खाई. मैंने इसकी रेसीपी भी कागज़ पर लिख ली है वो भी हिंदी में.  इस आम आदमी के प्यारे प्यारे से आठ बच्चे हैं ….आज दिन-भर मैंने इनके साथ क्रिकेट खेला. मैंने आज गाँव-गाँव घूमकर चौपाल भी लगाईं.  अच्छी खेती के लिए  टिप्स भी दिए जैसे कि यदि तुम्हें हरी मिर्च से ज्यादा लाल मिर्च के दाम मिलते हैं तो हरी को छोड़ कर लाल मिर्च उगाओ. मैंने किसानों से वादा किया है कि जब तक मैं प्रधानमन्त्री नहीं बनता तब तक उनके लिए संघर्ष करूँगा.  आप सुनाइए मॉम आप कैसी हैं …टनमोहन जी पर  ज्यादा गुस्सा मत कीजियेगा ईमानदार छवि वाले प्रधानमंत्री हैं. शेष मिलने पर…


                                                                                         आपका  व्याकुल आंधी

कौन बनेगा करोड़पति

कौन बनेगा करोड़पति समाप्त हो गया. लेकिन बंदे की करोड़पति बनने की तमन्ना जस की तस है. बिग बॉस जारी है …लेकिन बिना गाली-गलौच, लड़ाई झगडे के नीरस हो गया है…खैर एक टेप जारी कर रहा हूँ…आजकल सबकुछ लीक हो रहा है सो अगर में भी एक-आध झूठ लीक कर दूँ…तो क्या फर्क पड़ता है …पर भगवान के लिए इसे सच मत समझ लेना …वैसे भी मान-हानि के ४२० केस मेरे ऊपर पेंडिंग हैं…फोन टेप का टेक्स्ट विवरण इस प्रकार है .
अमिताभ ; नमस्कार देवियों और सज्जनों..कौन बनेगा करोड़पति से मैं यानी अमिताभ बच्चन हेल्लो हेल्लो कर रहा हूँ….
सलमान: हेल्लो, अमित जी कैसे हैं आप …
अमिताभ: आप कौन बोल रहे हैं …
सलमान: बिग बॉस से दबंग यानी सल्ल्मान खान बोल रहा हूँ ..
अमिताभ: अच्छा अच्छा …तो तुम हो…माफ मारना मैंने पहचाना नहीं…मुझे थोड़ी सी यंग वोइस लगी …माय मिस्टेक..खैर तुम्हारा समय शुरू होता है अब
सलमान: कोई बात नहीं सर…अक्सर इस उम्र में कान धोखा दे जाते हैं…और सुनाइये ऐश कैसी है
अमिताभ: मैं बिलकुल ठीक हूँ
सलमान: नहीं..नहीं ऐश कैसी है
अमिताभ: हाँ अभिषेक बिलकुल ठीक है..तुम्हें याद करता है सुबह सुबह आजकल बोक्सिंग सीख रहा है
सलमान: मैं ऐश के बारे में पूछ रहा हूँ
अमिताभ: जया जी भी ठीक हैं….
सलमान: आप अपने कानों का इलाज क्यों नहीं करवाते
अमिताभ: भैया हमारे आँख, कान, नाक बिलकुल दुरस्त हैं …हमसे मुकाबला मत करो ..और वैसे भी तुम खान लोगों को हमारी नक़ल करने के अलावा कुछ आता भी है.?
सलमान: अमित जी,…अब आपका टाइम गया…लेकिन आपने फोन क्यों मिलाया …
अमिताभ: एक्सपर्ट एडवाइस …..दरअसल वो क्या है कि हमारे सामने हॉट सीट पर …ओ भैया क्या नाम है तुम्हारा…..हाँ नादान जी बैठे हैं …दरअसल ये बहुत अच्छा खेल रहे थे …एक जगह आकार फंस गए हैं …लाइफ लाइन इस्तेमाल कर सलमान खान की मदद लेना चाहते हैं.
सलमान: जरुर जरूर …
अमिताभ: तो अगली आवाज होगी नादान जी की?
नादान : सलमान अंकल नमस्ते…
सलमान: अंकल ?
नादान : जी ….मुझे अमितजी ने बोला कि आपको अंकल कहकर पुकारूं….
सलमान: अरे …छोड़ो…अमित जी को …तुम अपना सवाल बोलो
नादान : सलमान जी …सबसे हैण्डसम हीरो कौन है….
सलमान; सलमान खान …पक्का है ताला लगवा लो
नादान: किसको सलमान को ?….पर आप्शन में तो नाम है ही नहीं सलमान खान का…
सलमान: अरे फिर तो सवाल गलत है ….दूसरा पूछो
नादान: दूसरे सवाल में आपका नाम है …सर ….सवाल है चालीस पार के कौन से हीरो के नकली बाल हैं …..
सलमान: क्या……?
नादान: इसका उत्तर हमें मालुम है …अमित जी ताला लगा दीजिए सलमान खान को
अमिताभ : कंप्यूटर महाशय …सलमान जी को ताला लगा दीजिए
सलमान: अमित जी …मैं अभी भी लाइन पर हूँ….ये ठीक नहीं है
अमिताभ: लेकिन ये तो बहुत ही अद्भुत खेल है …सलमान जी
सलमान: खेल गया तेल लेने …आप ऐसे प्रश्न नहीं पूछ सकते …क्या दस के दम में हमने कभी आप के बारे में पूछा था कि …आप के दांत नकली हैं या असली, आपके बाल असली हैं या नकली …आपकी आँख असली है या नकली …आपके कान असली हैं या नकली …आपके …
अमिताभ: अरे सलमान जी …आप तो नाराज हो गए …चलिए हम स्वयम प्रश्न बदल देते हैं …आपके बारे में नहीं पूछेंगे …तो नादान भाई सवाल सलमान भाई के बारे में बिलकुल नहीं है …सलमान जी लाइन पर बने हुए हैं आप एक्सपर्ट एडवाइस ले सकते हैं ….आपका सवाल आपकी कंप्यूटर स्क्रीन पर ये रहा …इनमे से कौन सा सिरियल बेहद घटिया और बेहूदा है….
सलमान : आप बिग बॉस को बीच में ले आये
अमिताभ ; क्यों नादान जी …आप एक्सपर्ट के साथ जायेंगे …बिलकुल सही जवाब..बेहद उम्दा खेल रहे हैं आप
सलमान: हैलो अमित जी …दिस इस टू मच …
अमिताभ : थेंक यू वैरी मच …सलमान जी एक्सपर्ट एडवाइस के लिए शुक्रिया……………..

बुरा न मानो धोनी है !!!!!!!






कप्तान धोनी का धमाका, चट मंगनी और पट शादी. चलो अच्छा हुआ एक और निपट गया. धोनी की शादी से सभी हैरान हैं…मीडिया वाले..बेचारे बड़े अरमान पाले हुए थे ..लेकिन बड़ी ही विचित्र तरीके से स्टूडियो में बैठे बैठे उन्होंने शादी का लाइव टेलेकास्ट किया….दीवानगी का आलम था …बेगानी शादी में सारे टीवी चेन्नल फूटेज के लिए अब्दुल्ला की तरह मारे मारे फिर रहे थे…खैर हमें उनसे किया. हमें तो टीम केसीनियर खिलाडियों के प्रति संवेदना व्यक्त करनी थी ..जिन्हें धोनी ने इस काबिल नहीं समझा कि अपनी शादी का निमंत्रण भेजें सो हमने जले पर नमक फेंकने के लिए फेंकू को सीनियर्स के जले पर नमक छिडकने के लिए भेजा. आगे क्या हुआ …खुद ही देखिये …
फेंकू का प्रवेश
फेंकू- आप सभी धोनी के धुरंदरों को मेरा प्रणाम
(सचिन, सौरभ, सहवाग, द्रविड़, गंभीर, युसूफ, हरभजन, युवराज और इरफ़ान पठान मौजूद हैं, सभी रोनी सूरत लिए हुए )

सचिन-आइला …तुम कौन हो और सीधे ड्रेसिंग रूम में कैसे चले आये …किसी ने रोका नहीं
फेंकू – रोका …मैंने किसी को मौका ही नहीं दिया …सबको बोला धोनी ने भेजा और मैं आपके पास …
सहवाग- आये क्यों हो?
फेंकू- आप लोगों की तरह मैं भी दुखी हूँ …सोचा आपके जले पर नमक…आई मीन …मरहम लगा दूं …थोड़ा आपका गम शेयर करके आपके गम को कम कर दूं.
सचिन- लेकिन तुमसे किस ने कहा कि हम दुखी हैं …आई ऍम वैरी हैप्पी …एंड आई वांट तो कांग्रेचुलेट धोनी फॉर हिज सेक्ससेक्सफुल एंड हेप्पी मेरिड लाइफ.
फेंकू- सर कैमरा नहीं है….
सचिन- क्या कैमरा नहीं है? …हाँ भाई, अब हमारे लिए कैमरा नहीं है …सारे कैमरे तो धोनी के आस-पास घूम रहे हैं
फेंकू-गांगुली जी आप इतना क्यों रो रहे हैं ..बहुत दुखी लग रहे हैं आप को भी नहीं बुलाया
गांगुली- क्या बोलता है तुम…हम दुखी जरुर है …पर हमारा अई दुःख आलोग है …हम दुखी है क्योंकि ओर्जोनोटीना हार गया….हमारा मारोडोना बेनर्जी हार गोया …हमको भिषोण दुख लोगा है ..एई धोनी का शादी से हमको क्या लेना ….शादी कोरे या ना कोरे…
फेंकू-आप तो पूर्व कप्तान हैं …आपको तो बुलाना चाहिए था .

गांगुली-नोई …ऐसा बात नोई है…हम उसको अपना शादी में नोई बुलाया था …इसीलिए वो भी नहीं बुलाया…
फेंकू- युवराज जी …आप तो उनके बहुत क्लोज थे.
युवराज- ओ नहीं यार …मैं अब कहाँ क्लोज रहा …जबसे मैंने छ: बोलों में छ: छक्के मारे .. वो मुझसे नाराज हो गया …वैसे भी आई ऍम थे मोस्ट एलिजिबल बेचेलर इन दी कंट्री…राईट फ्रॉम बंगला देश टू श्री लंका. यु सी युवी इस दी बेस्ट …वैसे भी उसने मुझे इसलिए नहीं बुलाया कि कहीं साक्षी मुझे देखकर अपना इरादा न बदल दे ..यु सी …आई एम दी मोस्ट …
हरभजन; ओए छड यार ….कि फर्क पेंदा है?…सानु थे खुसी होनी चायदी ..ओदा घर बसरा है….साडा ते हूँ नहीं बसरा…
फेंकू-भज्जी जी …आप तो उनके बहुत अच्छे दोस्त थे आप को भी नहीं बुलाया कम से कम डांस करने के लिए ही बुला लिया होता
हरभजन-दोस्त ओए …वो किसी का दोस्त नहीं है …उसका तो एक ही से दोस्ताना है …जान अब्राहम …दोस्ताना नहीं देखी…पर ई गल भी सही है …में होंदा…ते भंगडा जरुर पांदा…
फेंकू- और सहवाग जी …नजफगढ़ के नवाब की इतनी बेइज्जती …कप्तान साहब अपने उपकप्तान को ही भूल गया ..
सहवाग-भूल गया..क्या अरे हाँ …लगता है मुझे बुलाना भूल गया ….पर मैं भी उसे अपनी शादी में नहीं बुलाऊंगा
फेंकू- पर सर, आपकी तो शादी हो चुकी है …
सहवाग-मेरी शादी हो चुकी है? अरे हाँ याद आया ..मेरा तो एक बेटा भी है …
फेंकू – एक नहीं दो ..
सहवाग –हैं??? दो …ये दूसरा कब हुआ
सचिन – वीरू भाई …तुम्हारा हैण्ड आई कोर्डिनेशन बहुत अच्छा है …पर माइंड कोर्डिनेशन में गडबड है
सहवाग- क्या मतलब?
युवराज- ओए…तू नहीं समझेगा.,…पाजी का कहने का मतलब है …तेरे अंदर दिमाग नहीं है …
सचिन- अरे मैंने ..ऐसा कब कहा ?
फेंकू- चलिए छोडिये.. राहुल भाई चुपचाप हैं …टीम इंडिया की दीवार की तो इज्जत रखनी चाहिए थी
द्रविड़- हाँ मैं सचमुच दुखी था …मुझे दुख था …पहले मैं खुश रहता था बहुत खुश …पर अब दीवार गिर गई थी …ऐसा मैंने सुना था …मैं …मैं अब एक एंटीक पीस बन गया था ..मैं उदास था ..सब लोग मेरा मजाक उड़ाते थे …फिर मुझे मिला मेरा एक दोस्त लक्ष्मण …सच कहूँ तो मैं उसे अपना भाई कह सकता हूँ …वो भी मेरी तरह दुखी था …फिर हम दोनों को मिला टेस्ट खेलने का न्योता जो धोनी के न्योते से बड़ा है …हाँ सचमुच बड़ा है ….
फेंकू- ये इंग्लिश तो हिंदी में डब करके बोल रहे हो
द्रविड़—तुम्हें ऐसा लगता होगा …लेकिन मैं बहुत खुश हूँ …मैं चलता हूँ लक्ष्मण भाई के पास केच-केच खेलने …
फेंकू- अरे….ये तो सचमुच गया …वैसे मुझे हैरानी है कि आप सब लोग दुखी तो हैं पर किसी को गुस्सा नहीं आ रहा …
इरफ़ान-गुस्सा ….अरे मुझे आ रहा है गुस्सा …आर पी सिंह, प्रवीण कुमार, रोहित फोहित, रेंना वेना …आज यही धोनी के सब कुछ हो गए …खुदा कसम ..दिल करता है प्रक्टिस सेशन में ऐसा बाऊंसर फेंकूं…कि उसकी नाक…
सचिन-अरे इरफ़ान..ऐसा नहीं कहते हमारा केप्टन है वो ….वैसे मेरी दुआ है कि तुम्हारे बाजुओं में शोएब अख्तर की रफ़्तार आ जाए….
युसूफ पठान- गुस्सा तो मुझे भी भोत आ रिहा है …इन्स्लेट कर दी धोनी ने हमारी…और …तेरी जान कसम मैं तो के रिया हूँ …कि अगर मुझे बुलाता भी तो भी ना जाता …अबे घास-फूस खाने कौन जा रिया था …बिरयानी, सीक कबाब के बगेर भी कोई शादी होती है? …और सुन ले छोटे …तू शादी करेगा न तो सब को बुला लियो जुम्मन हलवाई से लेके मायावती तक …पर धोनी नहीं दिखना चाहिए …समझ रिया है ना… बहुत जला-भुना हूँ …भोत खार का रिया हूँ…
सचिन- हाँ ये बात तो है ….गुस्सा हम सभी को आ रहा है…पर तुम जले पर नमक छिडकने वाले …तुम्हें बुलावा था क्या?
फेंकू – और नहीं तो क्या …मुझे था न्योता
युसूफ-देख रिये हो सचिन पाजी ….ऐसे ऐरे गेरे भी बुलाये थे धोनी ने …
फेंकू – पर मुझे जाने नहीं दिया …दस किलोमीटर पहले रोक दिया …
सहवाग- पर तुम्हें तो धोनी ने न्योता दिया था ना?
फेंकू –धोनी ने नहीं …विश्रान्ति रिसोर्ट में एक बाई है शान्ति ..उसने बुलाया था …
सचिन –तो तुम इसका मतलब कुछ नहीं हो
फेंकू-…पर…मैं तो ऐसे ही आप से मिलने …
युवराज- अबे, ये अंदर कैसे घुसा …बाहर निकालो …
गांगुली- सोही बोलोता है …ऐसा कैसे घूस सोकटा है कोई आम आदमी हमारा बीच मैं …
हरभजन-ओए …एनु तो मैं दसना….किथे है मेरा बल्ला
सहवाग-पुलिस को बुलाओ
युवराज- अरे …इसे मैं भगाता हूँ ….चल बे खिसक ले …बड़ा आया हमारे शोक में शामिल होने…..
(और फिर फेंकू को वहाँ से इस्ज्त के साथ धक्के देकर बाहर निकाला गया)

(उपरोक्त ब्लॉग सत्य घटना पर आधारित है ….लेकिन पात्रों के नाम बदल दिए गए हैं…)
                                                                                                                     फेंकू

Kyaa aapko ungli cricket khelna aata hai

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         क्या आपको ऊँगली क्रिकेट खेलना आता है


 मित्रों, वैसो तो ये जीवन ही क्रिकेट के समान है.  हम सभी अपनी अपनी पारी खेल रहे हैं.  जीवन में तरह तरह के बाऊंसर्स का सामना करते हुए अपनी अपनी क्रीज पर डटे हुए हैं.  समय और किस्मत नाम के  तेज गेंदबाज हैं तो जिंदगी नाम की एक फिरकी गेंदबाज भी है जो  अपनी ऑफ स्पिन, लेग स्पिन और गुगली से हमारी परीक्षा ले रही है.  कब कौन और कैसे अम्पायर के द्वारा आउट करार दिया जाय कोई नहीं जानता.  उसकी ऊँगली उठी और हम सब एक अन्जान पवेलियन की तरफ चल पडेगें.  सभी तरह के बल्लेबाज हैं इस दुनिया में …कुछ दे दनादन चौके-छक्के जड़ने में लगे हुए हैं तो कुछ सिंगल सिंगल ले कर अपनी पारी को आगे बढ़ा रहे हैं ..किस की पारी कितनी लंबी चलेगी कोई नहीं जानता.  लेकिन इतना तय है कि सभी को एक न एक दिन आउट होना है – लेकिन कोशिश तो यही रहनी चाहिए कि हम अपना विकेट सस्ते में न गवाएं और खेल का  पूरा आन्नद उठायें. 


       चलिए छोडिये भी ऐसी सीरियस बातें…बात करते हैं ऊँगली क्रिकेट की.  क्रिकेट यानी जीवन के अंदर कोई यदि ऊँगली करता है तो उसे ऊँगली क्रिकेट कहते हैं और ऐसे खिलाड़ी अक्सर उँगलबाज कहलाते हैं. बहुत ही प्राचीन खेल है-सदियों से खेला जा रहा है-कैकई और मामा शकुनी जैसे महान खिलाडी इस देश ने दिए हैं.  उन्ही की बदलौत आज रामायण और महाभारत जैसे महाकाव्य इस देश को मिले हैं.  हर घर, हर मोहल्ले में खेला जाने वाला ये खेल कितना लोकप्रिय है इसका अंदाजा लगाना मुशिकल है.  आजकल तो टीवी पर दिखाए जाने वाले एकता कपूर ब्रांड सीरियल्स के द्वारा घर-घर में इस ऊँगली क्रिकेट का प्रचार प्रसार हो रहा है.  सास और बहु तो इस ऊँगली क्रिकेट की जान हैं.  ये दो किरदार तो हर घर में अपने-अपने तरीके से ऊँगली कर के इस बात का पूरा-पूरा ध्यान रखते हैं कि कहीं घर में शान्ति न हो जाए. घर, मोहल्ले से लेकर दफ्तरों तक में लोग ऊँगली क्रिकेट के दीवाने हैं. अडंगा डालना, औरों के फटे में टांग अड़ाना, टांग खींचना  या राह में रोड़े डालना, चुगली करना या सीधा सीधा कहें तो ऊँगली करना लोगों का फेवरट टाइम पास है.  इस ऊँगली क्रिकेट का पहला और अंतिम उसूल है -अपना काम है बनता, भाड़ में जाए जनता.  अपना उल्लू सीधा करने के लिए दूसरे के उल्लू की गर्दन मरोड़नी पड़े तो भी चलेगा.  यदि आप खुसर-पुसुर करने, नाक-भौं सिकोड़ने और बात-बात पर रूठने और यहाँ की वहाँ करने में माहिर हैं तो यकीन मानिए आप इस खेल के महारथी साबित हो सकते हो. इस खेल को खेलने से जहाँ आप निंदा रस का पान करके तृप्ति अनुभव करेंगे वहीँ आप किसी का घर तोड़ने मे, किसी का दिल तोड़ने में और यहाँ तक कि किसी के हाथ पांव तोड़ने में एक महत्वपूर्ण रोल अदा करके अपार संतुष्टि का अनुभव करेंगे. बस खेलते जाइए – इस खेल के कुछ नियम कायदे नहीं हैं -ऊँगली कर कर के दूसरे का जीना हराम करना ही एकमात्र ध्येय है इस खेल का.  वैसे,  न्यूज चैनेल्स आज देश के सबसे बड़े उँगलबाज हैं – कोई चाहे न चाहे पर ऊँगली कर कर के दूसरे को भी मजबूर करेंगे कि वो इस ऊंगली क्रिकेट को जबरदस्ती खेले. कभी धर्म के नाम पर, कभी भाषा के नाम पर और कभी बिना बात के ऊँगली कर के हमारे देश के राजनीतिज्ञ इस महान खेल को नयी ऊंचाई पर ले गए हैं.  कुछ तो आदतन ऊंगली करते हैं और कुछ राजनितिक मजबूरियों के चलते ऊँगली करने पर मजबूर हैं.  एक अदद चाचा- भतीजा तो विशेषकर बिहारियों पर मेहरबान हैं. चाचा अखबार के जरिये ऊँगली करता है तो भतीजा नवनिर्माण की बात कर खुले मंच से ऊँगली करता है. एक दीदी हैं, रेल चलाती हैं, पर सरकार ठीक से न चले इसके लिए ऊँगली करने में कोई कसर नहीं छोडती.  एक बहनजी भी हैं – वो आदतन ऊँगलीबाज हैं पर  आजकल कांग्रेस के युवराज से परेशान हैं जो उनके ही इलाके में आकर ऊँगली कर रहा है. दो पुराने उँगलबाज यादव बंधु हैं.  ये भी आदतन या शायद पैदायशी उँगलबाज हैं.  संसद में महिला आरक्षण  विधेयक पारित न हो इसलिए ऊँगली कर के बैठे हैं. बीजेपी वैसे तो अनुशासित पार्टी है – पर इसमें ऊंगलबाजों की भरमार है…कद्दावर नेता हैं..केन्द्रीय सत्ता से दूर हैं  इसलिए आपस में ही एक-दूसरे को ऊँगली कर कर के टाइम पास करते रहते हैं. आर. एस. एस को बीजेपी में ऊँगली करने की आदत है…ऊंगली भी करती है और मुकर भी जाती है. नरेंद्र मोदी ही अकेले ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने तमाम तथाकथित धर्म-निरपेक्ष ताकतों को ऐसी ऊँगली कर रखी है कि सभी दांतों टेल ऊँगली दबाने पर मजबूर हैं.  उधर कांग्रेस में भी थरूर नाम के एक शख्स हैं जिन पर अक्सर ऊँगली उठती रहती है कि उनको ऊँगली करने की बीमारी है और जो ऊँगली करके खुद को बेकसूर बताते फिरते हैं…वो थोड़े से हाई टेक हैं …ट्विटर के जरिये ऊँगली करते हैं, आजकल आई पी एल के खेल में ऊँगली कर रहे हैं.  जहाँ शाहरूख, प्रीटी और शिल्पा जैसी फ़िल्मी हस्तियाँ तीन सालों से ऊंगली करने में लगी हैं…बेचारे क्रिकेटर …पर बेचारे काहे के …पहले देश के लिए खेलते थे अब पैसे के लिए …कहीं भी ऊँगली करने के लिए तैयार हैं.  क्रिकेट वाले टेनिस में ऊँगली कर रहे हैं. एक तो पूरा देश ही है दुनिया का सबसे बड़ा ऊंगलबाज ……डर किस बात का …पकिस्तान नाम है उसका. पिद्दी सा देश है लेकिन इण्डिया से लेकर अफगानिस्तान में ऊँगली करता फिरता है. पाकिस्तान का  मामा यानी ओबामा भी उसकी हरकतों से त्रस्त है पर चीन और भारत की उँगलियों का उसे इतना डर है कि मजबूरी में पाकिस्तान की हर हरकत पर कानों में ऊँगली डाल कर बैठ जाता है.  मामा जो ठहरा.  खैर,  यदि आप भी इस ऊँगली क्रिकेट का आनंद लेना चाहते हैं तो आज से ही शुरू हो जाइये …What an Idea, Sir jee……………………    


Maoist strike and FENKU ka gussa HM par



http://beta.thehindu.com/multimedia/dynamic/00102/CRPF1_102714e.jpg




टीवी चेनल्स ने आखिर शोएब और आयशा का तलाक करा कर छोड़ा.  वैसे आँखें पक गई थी और कान थक गए थे इस खबर को देख देख कर.  इस बीच एक छोटी सी खबर आई है छत्तीस या सेंतीस गढ़ नाम का कोई राज्य है इस देश में जहाँ म्याऊंवादियों का राज चलता है.  कोई सत्तर पिचहत्तर या फिर इससे भी अधिक CRPF के जवान बड़ी बेदर्दी से क़त्ल कर दिए गए हैं और माननीय गृहमंत्री जी इसके लिए खेद व्यक्त कर चुके हैं.  मृत जवानों के परिवार वालों ने सधन्यवाद गृहमंत्री जी के खेद को स्वीकार कर लिया है.  दंतेवाडा में नक्सलियों का ये दांत  कितनी गहराई तक   गृहमंत्री, भला सा नाम है चिंतानअम्बरम की आत्मा में घुसा है ये जानने के लिए फेंकू को उनके आवास पर पाना पड़ा.


 


फेंकू सर, आप इस घटना के बारे में क्या कहना चाहेंगे


 


HMWe are sorry for that , पर तुम यहाँ पर कैसे आई ..


 


फेंकू आई नहीं आया, सर, मेरा आपके साथ appointment fix हुआ है


 


HM- तुम तो मेल है तुमने अपना Gender नहीं लिखाया ठीक से


 


फेंकू- सर मुझे पता नहीं था पर आप मुझे She-male समझ कर ही इंटरव्यू दे दीजिएमैं फेंकती दुनिया  का रिपोर्टर हूँ.  फीमेल अखबार है, सर


 


HM-क्या पूछना चाहिती है तुम


 


फेंकू- सर आप ने वित्त मंत्रालय संभाला तो देश रिसेसन में चला गया अब आप होम देख रहें हो अब देश कहाँ जाएगा


 


HM -देश कहाँ जायेगी उसका पता नहींपर तुम हमारा कपड़ा देखो, हमारा एजुकेशन देखो, क्वालिफिकेशन देखो और हमारा पेर्सोनालिटी देखो अखबार के पन्नों में हमारा interview देखो, हमारा statement देखो.


 


फेंकू -  सर, आपने शहीद हुए जवानों की बॉडी देखी?


HM- तुम कहाँ क्या चाहिती है?


फेंकू- आखिर कहाँ गलती हो गई सुरक्षा की इतनी बड़ी चूक……


 


HM- सुरक्षा में कोई कमी नहीं है ….देश का हर मंत्री और हर नेता सुरक्षित है


 


फेंकू आम जनता?


 


HM-  आम, यू mean mango?


 


फेंकू- सर, सही कहा आपने आम खाना भी आजकल सुरक्षित नहीं है कब आम की शक्ल में आपको कोई बम खिला दे कुछ कहा नहीं जा सकता…. खैर, सर, मैं ये जानना  चाहता हूँ कि इस नक्सलवाद की समस्या के लिए आपके पास क्या कोई ठोस प्लान है ..


 


HM-बिलकुल है, हमने इन्हें surrender करने के लिए बोला है.  अगर हथियारों के साथ surrender करेंगे तो उन्हें पैसा दिया जाएगा….एक लाख, दो लाख, तीन लाखजैसा हथियार वैसा पैसा


 


फेंकू- अगर कोई एटम बम ले आया तो?सॉरी पर सर ये हथियार भी तो उन्होंने पुलिसवालों से लुटे हैं नाइसका मतलब हम उन्हीं हथियारों को खरीदेंगे वो फिर  लूटेंगे हम फिर खरीदेंगे ….


 


HM-कहने का मतलब ये है कि हम उनको mainstream में लाना चाहते हैं…..


 


फेंकू- सर, पर वो mainstream से बाहर कैसे चले गए? ८०००० किसान इस देश में आत्महत्या कर चुके हैं….पेट बुझाने की इस जंग में गरीब ने आखिर लोकतंत्र से विश्वास क्यों खो दिया


 


HM- ये गलत है वो गरीब नहीं हैं तुमने देखा है इण्डिया की इकोनोमिक ग्रोथ जब सारे दुनिया में मंदी है हम हर सेक्टर में प्रोग्रेस कर रहें हैं दुनिया की नामी पत्रिकाओं में अमीरों की लिस्ट में हमारे देश के लोगों ने नाम लिखाया है…. अम्बानी, प्रेमजी, मित्तल, टाटा, और क्या क्या नाम गिनाऊं में


 


फेंकू- सर, आप शायद  ठीक कह रहें हैं पर नक्सलवाद की जड़ भी इन्ही लोगों के कारण फैली हैये तो चार नाम हैं ….इस देश में चालीस करोड़ लोग दो जून रोटी के लिए तरस रहें हैं


 


HM-तुम्हारी भाषा से नक्सलवाद की smell आती है


 


फेंकू- पर सर मैं तो इस समस्या के समाधान की बात कर रहा हूँआप क्यों नहीं नक्सलवादियों के खिलाफ कठोर कार्यवाही करते हैंहिंसा तो हर हाल में नाजायज है


 


HM-तुम ने अखबारों में पढ़ा नहीं मैंने कितना strong statement दिया है


 


फेंकू – आपके statement से मरे हुए जवान जिन्दा हो जायेंगे? सर आपको अपने स्टेटमेंट की पड़ी हुई है …यहाँ महंगाई के डंडे की मार से


 जनता की स्टेटमेंट सूज गई है… क्या होगा जनता का…


 


HM- तुम क्या बकती है ….


 


फेंकू- सर, आपसे पहले वाले गृहमंत्री कपडे बदलते थे ….आप statement बदलते हैं.  तेलंगाना का मुद्दा याद है आपको ..


 


HM-you, just shut up….बहुत हो गई अब तुम यहाँ से जाओ वर्ना encounter कर दिए जाओगे….


 
…..फिर encounter का नाम सुनते ही  फेंकू की नींद खुल गई…..तो क्या ये सब सपना था?



(उपरोक्त ब्लॉग असत्य घटनाओं पर आधारित है..
किसी भी जीवितमृत अथवा घायल व्यकित से समानता मात्र संयोगवश है …
उद्देश्य केवल पाठकों का मनोरंजन है) 


 


 


 


 


 


 

Big B ka Big Gum——–A new post

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मैं अमिताभ बच्चन का बहुत बड़ा प्रशंसक हूँ.  इन दिनों अमित जी संकट में हैं ..विवादों में घिरे हैं.  कांग्रेस कि विशेष अनुकम्पा के कारण वे मिडिया के प्रिय बने हुए हैं..उनके ब्लॉग को चाव से पढ़ा जा रहा है और उनके एक एक कथन को निचोड़ निचोड़ कर उनका विशलेषण किया जा रहा है…शहंशाह के मुंह और ब्लॉग से निकला एक एक शब्द शोध का विषय बन गया है.  कांगेस के लिए वे अघोषित रूप से घोस्ट बन गए हैं..हर कांग्रेसी डरा हुआ है.. कहीं आने जाने से पहले कांग्रेस का हर मंत्री से लेकर संतरी तक गुप्त रूप से जांच करवाता है कि कहीं गलती से भी बिग बी के साथ मंच शेयर तो नहीं करना पड़ेगा.  सभी कांग्रेसियों को हिदायत दे दी गई है ..बिग बी से बचो ..हो सके तो अपने घर के खिड़कियाँ और दरवाजे पूरी तरह से बंद रखें…ये बिग बी कहीं से कभी भी आ सकता है …अँधेरी रातों में ..सुनसान सड़कों पर….डरना जरूरी है और अगर नहीं डरे तो डरने का अभिनय करो ..क्या पता  बिग बी से  तुम्हारी दूर दूर की राम राम भी कहीं पार्टी से तुम्हारा सदा के लिए जय राम न करवा दे….बिग बी का बहिष्कार करो.  इस आंदोलन में जो जितना आगे जाएगा उतना ही आला कमान की नजरों में चढ़ेगा.  एक कांग्रेसी सज्जन ने तो हद कर दी अपनी पुत्री का नाम बबिता से बदल कर पपीता रख दिया…क्यों?  अरे भाई बबिता के अंदर भी बी था ..वो भी दो बार. बिग बी क्या जितने भी तथाकथित बी हैं ..सब से दूर रहो …और अगर गलती से कहीं बिग बी के साथ सामना हो जाए तो ऐसे कन्नी काटना जैसे छिछोरे लड़कों को देख कर मोहल्ले की लड़कियां रास्ता बदल लेती हैं. 


अब ये तो रही कांग्रेस की बात.  पर मेरा मन बहुत  दुखी था ..अमित जी बेचारे कितने परेशान होंगे…कितना अकेला फील कर रहें होंगे …अमर सिंह जी भी तो आजकल उनसे दूरी बनाये हुए हैं …तो मैंने भी सोचा यही मौका है कि अमित जी से उनके गम को शेयर करूँ.  और मौका भी मिल गया एक जलूस की आड़ में हिम्मत कर के मैं जलसा में प्रवेश कर गया.  संयोग से अमित जी अपने आँगन में शहतूत के पेड़ के नीचे कुर्सी पर बैठे बाबूजी की कुछ पंक्तियाँ गुनगुना रहे थे ..उस वक्त अकेले थे ..उनके सामने एक खाली कुर्सी शायद मेरा ही इन्तजार कर रही थी.


-कौन हैं आप – अमित जी ने देखते ही सवाल किया


-मैं फेंकू हूँ …


विराजिए…


मैं तुरंत बैठ गया.


-माफ करना मैं बताना भूल गया..कुर्सी का पेंट गीला है …पर आपकी काली पैंट  पर सफ़ेद पेंट मेरे विचार से खूब फबेगा..अमित जी ने चिर-परिचित अंदाज में ठहाका लगाया जो जाहिर है मुझे अच्छा नहीं लगा.


-वैसे फेंकू जी ..आप से मिलने का सौभाग्य हमें पहले कभी नहीं मिला-आप के आने का प्रयोजन …?


-मैं आपका बहुत बड़ा प्रशंसक हूँ.  इधर आपको कष्ट में देखा तो मातमपुर्सी..म्म्म…मेरा मतलब है कि आप से आपका दुख बांटने आ गया. –आपको बहुत क्रोध आ रहा होगा….?


-क्रोध…नहीं बिलकुल नहीं.  हाँ मैं थोडा दुखित और  खिन्नित अवश्य हूँ …पर क्रोधित नहीं हूँ…बाबूजी कहते थे कि क्रोध मनुष्य से उसका विवेक छीन लेता है.


-पर अमित जी ..आप ये सी लिंक विवाद में कैसे फंस गए ..कि हर कोई आप से डी-लिंक होने की बात कर रहा है …क्या आपको सचमुच आमंत्रित किया गया था वहाँ?


-जी हाँ, विधिवत रूप से आमंत्रित किया गया था ..बिना आमंत्रण के तो हम अपने बेडरूम में भी नहीं जाते हैं…. मैं एक मर्यादित और संस्कारित व्यक्ति हूँ….और मेरा मानना है कि यदि कहीं से मुझे आमंत्रण मिलता है तो मुझे स्वीकार करना चाहिए. 


-पर कांग्रेसी तो इसे नरेंद्र मोदी से जोड़ कर देखते हैं…आपकी उनसे नजदीकियां शायद कांग्रेस को बर्दास्त नहीं हैं.  आप गुजरात के ब्रांड अम्बेस्डर बन गए हैं.


-जी हाँ …लेकिन ऐसा हुआ था कि मेरे पास मोदी जी का फोन आया और मुझ से पुछा गया क्या आप हमारे ब्रांड अम्बेसडर बनेगे ..तो मैंने सोचा शायद मोदी जी कोई  कम्पनी खोल रहें हैं और कोई नया प्रोडक्ट लान्च कर रहें हैं और हमने तुरन्त स्वीकार कर लिया इधर बहुत कम्पीटिशन मिलने लगा है …SRK, MSD और जाने कौन कौन आ गए हैं …कोई तेल बेच रहा है ..कोई क्रीम और कोई बिस्किट ..हाँ दो चार कम्पनी के हम भी ब्रांड अम्बेसडर बन गए हैं…तो सोचा  एक और कम्पनी के ब्रांड अम्बेसडर बनने में क्या हर्ज है …वो तो हमें बाद में पता चला कि मोदी जी गुजरात प्रदेश के बारे में बात कर रहें हैं…खैर वो भी हमने स्वीकार कर लिया …हमें गुजरात से बहुत प्रेम है…हमें तो पूरे भारत से प्रेम है.  और ये ब्रांड अम्बेसडर बनना तो हमारा लेटेस्ट शौक है …हम तो प्रत्येक राज्य के ब्रांड अम्बेसडर बनने के लिए तैयार हैं..राज्य के पत्येक जिले के, प्रत्येक मोहल्ले के और तो और प्रत्येक व्यक्ति के ब्रांड अम्बेसडर बना बनने के लिए तैयार हैं …हम तो आपके भी ब्रांड अम्बेसडर बनने के लिए तैयार हैं…वैसे आप क्या बेचते हैं?


-में क्या बेच सकता हूँ …सर ..मेरी तो खरीदने तक की औकात नहीं है …दालों के दाम देख रहें हैं आप.. आटा, चीनी …सब्जियां क्या खरीदें साहब आज के जमाने में ……


-सुनो..सुनो…तुम यहाँ अपना दुखड़ा रोने आयो हो या मेरा दुखड़ा सुनने?


-माफ कीजियेगा …मैं तो आया था आप का ही दुखड़ा सुनने – मुझे अपने व्यवहार पर लज्जा आने लगी. 


-खैर कुछ पियोगे? अमित जी ने पूछा.


 


-अनार का जूस —-मेरे मुंह से निकला


और कुछ ही  पलों में अनार के जूस से  भरा गिलास मेरे हाथ में था.


-अमित जी,  आप को देख कर कांग्रेसी क्यों डरने लगे हैं.


-हा.हा…हा  दरअसल इसके पीछे किसी और का हाथ है ..


-विदेशी हाथ?


-ऐसा मैंने कब कहा?..पर यदि किसी को हमसे समस्या है तो ये उनकी समस्या है …हमें किसी से कोई समस्या नहीं है …बाबूजी कहते थे …मैं तुम्हें बाबूजी की एक कविता सुनाना चाहता हूँ…अग्निपथ अग्निपथ ..कर शपथ …लथपथ लथपथ…


मुझे अब उबासी आने लगी.


-एक और सुनो….जीवन कि आपाधापी में…..


-अमित जी-मैंने उन्हें टोकते हुए कहा …मैं तो आपका गम शेयर करने आया था ..


-ओह हाँ…पर कविता तो तुम्हीं सुननी पड़ेगी…हाँ ..तुम रुको में मदिरा और हाला  का प्रबंध करता हूँ…..


-ठीक है …मैंने सोचा चलो दो चार पेग के साथ तो कविता झेली जा सकती है…पर मेरा दुर्भाग्य वे बच्चन जी की मधुशाला उठा लाये …


और मैं बड़ी देर तक झेलता रहा …


इस बीच जया जी का आगमन हुआ…


-ये कौन है ?…आजकल हर ऐरा गेरा तुम घर में बुला लेते हो…निकालो इसको यहाँ से ..


-देखिये …देवी जी …ये हमारे प्रशंसक हैं.


-हजारों घुमते हैं …निकालो इसको फ़ौरन…


-पर श्रीमती जी ..ये विशेष हैं…हमारे ही नहीं …ये अमर सिंह जी के भी फैन हैं…क्यों भाई?


मैने सहमति में सिर हिलाया.


-क्या…..फिर तो फौरन निकालो …मुलायम सिंह जी के फैन होते तो दोबारा सोचती भी..मुझे कुछ नहीं सुनना पांच मिनट के अंदर ये व्यक्ति इस गेट के बाहर होना चाहिए…—-यह कह कर जया जी लौट गई.


 


-बंधु..विकट स्थिति है ….अभी मधुशाला आधी भी नहीं सुनाई है….अच्छा…तुम्हारे पास सौ रूपये हैं …


मैंने बिना कुछ सोचे सौ रूपये निकाले जिसे अमित जी ने तुरंत छीन कर अपनी जेब में रख लिए..


 


-ये किसलिए? –मैंने पूछा


-माफ करना …लेकिन शायद तुम भूल गए तुमने अनार का जूस पीया था…अगर जया जी ने हिसाब माँगा तो …


-ओह …-मेरे मुंह से निकला.


-देखो, अब केवल एक मिनट रह गया है…अब तुम जाओगे या में दरबान को आवाज लगाऊँ…


-जी मैं खुद …चला जाऊँगा…


-पर तुम फिर आना ..तुम से मिल कर अच्छा लगा …और हाँ ..संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान आना …जया जी उस वक्त दिल्ली में होंगी…फिर में तुम्हें बाबूजी की कुछ और बेहतरीन रचनाएं सुनाऊँगा …


-जी…..जी…-और मैं चुपचाप इस प्रण के साथ लौट आया कि अब जलसा में कभी नहीं जाऊँगा…

manoranjan kaa baap – a New post



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मनोरंजन का बाप
(IPL) 
इन दिनों खूब देश की सेवा में लगा है.  बल्लेबाजों, गेंदबाजों और सट्टेबाजों के साथ साथ कबूतरबाज, कलाबाज, फंदेबाज, फिल्मबाज, दारूबाज और न जाने कितने बाज नोटों को नोचने (छापने) में लगे हुए हैं और सरकार ये कहने से बाज नहीं आ रही है कि  देश आर्थिक मंदी से जूझ रहा है.  इधर भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान को लगने लगा कि कहीं IPL के कारण टीम के सभी खिलाड़ियों के रिश्ते बिगड़ न जाएँ इसलिए आनन् फानन में एक मीटिंग बुलाने का निर्णय लिया गया.  एक बड़ी सी चोकोर टेबल के इर्द-गिर्द सभी प्रमुख खिलाड़ी अपनी अपनी सुविधा के हिसाब से बैठे हुए हैं.


 


धोनी –    दोस्तों इस राऊंड टेबल कांफेरेंस में अपने सभी धुरंधरों का स्वागत करता हूँ.


सहवाग   …और मैं भी वीरू के वीरों का स्वागत करता हूँ


धोनी   मैं कप्तान हूँ …स्वागत मैं करूँगा…


सहवाग पहले धुरंधर शब्द को वापिस ले ..


धोनी    ठीक है …ठीक है.  दोस्तों इस मीटिंग को बुलाने का उद्देश्य है कि …आज बहुत जरूरी हो गया है कि टीम में एकता हो.


युवराज-      क्यों…एकता क्यों?  प्रीटी जिंटा क्यों नहीं….?


युसूफ पठानमुझे लगता है शिल्पा शेट्टी को टीम में शामिल करना चाहिए


धोनी-        अबे पहले तू खुद को तो शामिल कर ले….मैं  बात कर रहा हूँ आपसी एकता की …unity की…समझे?


सचिन     समझ गए…समझ गए…जल्दी बोलो मुझे अभी एक एड की शूटिंग के लिए जाना है..उसके बाद एक पार्टी अटेंड करनी है …उसके बाद …


धोनी -       तुम सचमुच टायर्ड हो गए हो …सचिन भाई …रिटायरमेंट क्यों नहीं ले लेते


सचिन-             आई..ला ….रिटायरमेंट? पता है आजकल मैं जबरदस्त फॉर्म मैं हूँ …


धोनी-        नंबर वन तो मैं हूँ ना


सचिन     ये तो दुनिया जानती है कि नम्बर वन कौन है …


सहवाग    ओ ..सचिन पाजी आप नम्बर वन हो ..और मैं नंबर टू


गंभीर     मैं नंबर थ्री


युवराज     मैं नंबर फोर


विराट कोहली- मेरा नंबर कब आएगा?


सहवाग -     तेरा तो फिक्स नंबर है …12वाँ ..किसी को इंजरी होगी तो तेरा नंबर आएगा


धोनी-        अब ये तुम नंबर नंबर क्या खेलने लगे …मैं चाहता हूँ हम सब मिल कर रहें…अलग अलग टीमों से खेलते हुए भी हमें साथ साथ विज्ञापन करने चाहिए, साथ साथ पार्टीयों में शिरकत करनी चाहिए…ईश्वर की कृपा से आई पी एल के कारण हमें जो थोड़ी बहुत कमाई करने का मौका मिला है उस पर concentrate करने की जरूरत है …महंगाई का ज़माना है पन्द्रह-बीस करोड़ महीने से घर का खर्चा चलना बहुत मुश्किल है …एक बेंटले जैसी बेकार सी कार भी चार करोड़ मैं आती है ..


सचिन     ये बात तो ठीक है …मैं भी चाहता था अपने मालिक की तरह मैं भी अपनी पत्नी को हवाई जहाज गिफ्ट करूँ…अफ़सोस…ये पीटरसन, फ्लिंटोफ्फ जैसे फ़ालतू विदेशी खिलाड़ी भी हम से महंगे बिक रहें हैं. …


धोनी             हमें चाहिए कि हम इस आई पी एल में अच्छा खेलें ताकि सीजन फोर में हमारी वैल्यु हो मोर …


रैना       वाह.. क्या तुक मिलाई है


धोनी            हाँ.. तो मैं कह रहा था कि हम सबको अपने अपने मालिकों के लिए अच्छा खेलना चाहिए ताकि वो हमें गले लगा सकें …मैं जानता हूँ कि युवराज थोडा परेशान है क्योंकि इस सीजन में प्रीति जिंटा इसके बजाय संगकारा को गले लगा रही है.


युवराज    ओए ..वो झप्पियाँ तो अब भी मुझे पा रही है ..जब मैं जल्दी  आउट होके लौटता हूँ तो वो मुझे दिलासा देती है और अपनी छाती से लगाती है तो मुझे …


सहवाग    …अपनी माँ की याद आ जाती है


युवराज     अबे माँ की याद तुझे आये… और तेरे हाथ में ये कटोरा?
            …क्या है इसमें?


 


सहवाग – इसमें मेरी माँ ने खीर भेजी है …आधी मैं खाऊँगा और आधी गौतम …बाकी जितनी भी बचेगी सचिन पाजी को खिला दूंगा…आफ्टर आल ही इज दी भगवान ऑफ क्रिकेट.


सचिन – तुम दोनों आधी-आधी खा जाओगे तो बचेगा क्या?….इसलिए तो तेरा फुटवर्क सही नहीं है…
सहवाग – क्या मतलब?


युवराज  – मतलब ये कि तेरा दिमाग नहीं चलता है …
घुटनों में हैं ना…..हा…हा….हा….हा नाईस जोक…


सहवाग – ओए मेरा बल्ला चलता है..दिमाग नहीं.  और मैं अपने क्रिकेट को एन्जॉय करता हूँ ..तेरी करतूतों की वजह से आज पंजाब को लंका से कैप्टेन मंगाना पड़ा है ….


गंभीर- सही कहा वीरू भाई …




युवराज    ये दिल्ली के डेविल्स…सब को देख लूँगा


धोनी            अरे छोडो फ़ालतू बात … कहने का मतलब है कि हम सब के मालिक हम से प्रसन्न रहें….यही हमारा मकसद होना चाहिए


इशांत शर्मासही कहा …मुझे भी बहुत खुश होती है जब शाहरुख भाई मेरी पर्फोमेंस पर खुश होकर मुझे किस करते हैं …


हरभजन सिंह – तुझे किस करते हैं …अबे तू इतना लंबा है कि तुझ तक शाहरुख पहुँच ही नहीं पाता होगा फिर किस कहाँ करते हैं ..


इशांत     अरे वो स्टूल पर खड़े हो कर मेरे माथे को चूम कर कहते  हैं…अबकी बार जीतबो …आई विल गिव यू बिग मनी ..और फिर एक रुपया हाथ में पकड़ा देते हैं …देखना इस बार ये आई पी एल हम ही जीतेंगे …


प्रवीण कुमार – नहीं इस बार हम जीतेंगे …रोयल चेलेंज है


रोहित शर्माये कप हमारा है …तुम्हारी टीम तो बुड्ढो की टीम है …


सचिन      नहीं इस बार हम जीतेंगे …पूरी तैय्यारी है अकेला सचिन तुम सब पर भारी है …जय महाराष्ट्रा …    क्यों भज्जी पापे..


भज्जी     जय पंजाब


सचिन             अबे तू तो मुंबई की तरफ से खेलता है …मुंबई का नमक खाया है ..


भज्जी     वो तो ठीक है…पर बचपन से पंजाब की मिट्टी खा रहा हूँ ..उसका क्या? ..जय पंजाब


युवराज-      वैरी गुड …प्रीति से तेरी सिफारिश करूँगा …जय पंजाब


युसूफ पठान – जय राजस्थान


वीरू-गौती –   जय दिल्ली   ..सबकी उड़ा देंगे गिल्ली क्यों नेहरा …


कार्तिक-      अरे जोर से बोल ..ये नेहरा बेहरा है….


नेहरा            जय दिल्ली ….


युवराज –भज्जी- जय पंजाब


इशांत-       जोय कोलकोता…


धोनी-        विसिल पोदु….जय चेन्नई


सचिन –      अब ये बिहारी… मद्रासी कैसे बन गए …


धोनी       माइंड…यौर टंग…सचिन अन्ना ..अमारा हाथ मए बईट .. और तुम्हारा हाथ मए बाल …और  अम् मारेगा सिक्सर …


सहवाग    सिक्सर तो मैं मारूंगा …विस्फोटक बल्लेबाज हूँ


सचिन     दूर हट …सारे विस्फोट तेरे ड्रेसिंग रूम में ही होते हैं…


युसूफ पठान – कसम शेन वार्न की बीयर की…इतने लंबे छकके मारूंगा. कि तुम सब के छ्कके टूट जायेंगे …      जय राजस्थान …


युवराज- अबे …कहाँ है मेरा बल्ला मैं दिखाता हूँ तुम सबको …जय पंजाब


भज्जी -            हुने दसना….में त्वानू …वाहे गुरु दा खालसा …जय पंजाब


सहवाग    यहीं हो जाए फैसला …गौती ..उठा तो भी अपना बल्ला …जय दिल्ली


इशांत     किल्ली उखाड़ दूंगा …जोय कोलकोता


सचिन            आई…ला…जय महाराष्ट्रा


धोनी       अइ..यई..य्यो …जय चेन्नई …किधर है मेरा बल्ला …रैना अन्ना …तू भी उठा अपना बल्ला ..और विसिल पोदु… जय चेन्नई


युसूफ पठान —हल्ला बोल …जय राजस्थान…


सचिन –जय महाराष्ट्रा …


और फिर……….
(उपरोक्त ब्लॉग असत्य घटनाओं पर आधारित है..
किसी भी जीवित, मृत अथवा घायल व्यकित से समानता मात्र संयोगवश है …
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Baba Ramdev aur party ka ticket


http://im.rediff.com/news/2007/jul/02sld1.jpg
योग गुरु बाबा रामदेव आजकल खुजली के संक्रमण के शिकार हो गए हैं. 
राजनीति की खुजली उन्हें कैसे लगी, ये तो पता नहीं पर रोग गंभीर है 
और तमाम तरह के आसन और कसरतें या आयुर्वेदिक दवाइयों के द्वारा
इसका इलाज नहीं किया जा सकता. वास्तविक शवासन की मुद्रा में जाने तक
इस राजनितिक खुजली का संक्रमण मौजूद रहता है.  योग करते कराते बाबा को क्या सूझी कि वे अचानक व्यवस्था परिवर्तन की बात करने लगे. 
गाँव-देहातों के दलितों के बीच उनके एक दो दौरे क्या हुए मायावती को दौरे पड़ने लगे.  दोनों में ठन गई और फिर मैंने सुना कि बाबा रामदेव ने मायावती के सामने मोर्चा खोल दिया.  पहले तो मैं इस मोर्चा शब्द का अर्थ ही नहीं समझ पाया.
खैर ..अब दोनों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है.  इधर बाबजी ने कहा है कि वे अपनी स्वयं की पार्टी बनाने का विचार कर रहे हैं. 
सुनकर अचानक मेरे अंदर बाबजी के प्रति श्रद्धा के भाव जाग उठे और बरसों पुरानी  चुनाव लड़ने की मेरी सुप्त उत्कंठा को जैसे करंट लगाकर बाबाजी ने जगा दिया.  और मैं जा पहुँचा सीधा बाबाजी के योग शिविर में.  दोपहर का वक्त था बाबाजी, बालकृष्ण जी के साथ बगीचे में बैठे
कुछ कागज़ उलट पुलट रहे थे, शायद अपनी अगली प्रेस कांफेरेंस के लिए 
तय्यारी कर रहे थे या यूँ समझिए कि मायावती के सम्मान में 
कुछ शोभनीय टिप्पणियों का ड्राफ्ट तैयार कर रहे थे. 
मैं सीधा जाते ही बाबजी के चरणों में गिर पड़ा.  बाबाजी धन्य हो गए अचानक एक भक्त उनके क़दमों में इस तरह गिरेगा 
शायद उन्होंने कल्पना नहीं की थी. 

कौन हो तुम-कैसे आना हुआ, बाबाजी ने एक आँख मिचमिचाते हुए पूछा.
मैं टिकट के लिए आया हूँ-मैंने हाथ जोड़ कर निवेदन किया. 
…और जो टिकट नहीं मिला तो क्या हिला दोगे…, बाबाजी को मजाक करने कि आदत है. 
जी..नहीं मैं IPL के टिकेट की बात नहीं कर रहा, IPL
 का टिकेट 
भी भला कोई टिकेट होता है…हम तो पार्टी के टिकेट की बात कर रहे थे… 
मैं आपकी पार्टी के टिकेट के लिए आया हूँ…..

अभी तो पार्टी का नामकरण संस्कार नहीं हुआ और तुम बाराती बन कर आ गए- बाबाजी थोड़े क्रोधित नजर आ रहे थे.
लेकिन बाबाजी मैं तो बड़ी उम्मीद लेकर आया हूँ, मैं गिडगिडाते हुए बोला.
बालकृष्ण जी बोले…स्वामी जी पहला व्यक्ति है जो
पार्टी का सदस्य बनना चाहता है…इसका कुछ करना चाहिए …]आपका भक्त लगता है 

ठीक है, फूंक मारो ……… स्वामी जी ने आदेश दिया 
फिर मैंने देखा बाबाजी गमझे से हवा करने लगे. 
मैंने तुम्हें फूंक मारने के लिए कहा है, वायु प्रदुषण फ़ैलाने के लिए नहीं.  फूंक मारने का मतलब है…..सांस बाहर छोडना…]मैं देखना चाहता हूँ कि तुम्हें कपालभांति आता है या नहीं. 
जी…वो तो नहीं आता…
अनुलोम-विलोम?
वो भी नहीं…
तो मैं तुम्हें एक सच्चा योगी कैसे मान लूँ, मेरी पार्टी में
 तुम्हारे जैसे अज्यानी व्यकित के लिए जगह नहीं है…

मैं आपका शिविर ज्वाइन कर लूँगा…
सुना है वहाँ बड़े बड़े चमत्कार होते हैं. 
आप फूंक मरवा के सारे रोग दूर कर देते हैं, 
१५ दिन में १५ किलो वजन कम कर देते हैं …
आप तो चमत्कारी हैं, आप ऐसे चमत्कार आखिर  कैसे कर लेते हैं, 
मैं अपना तन, मन, धन आप जैसे
चमत्कारी महापुरुष के चरणों में अर्पित करता हूँ…मैंने उनके आगे सर झुका दिया.

बालकृष्ण जी फिर बीच में कूदे-स्वामी जी शक्ल से इडियट लगता है…पर इतना तो पक्का है कि 
इसका आमिर खान से कुछ लेना देना नहीं है…इसका कुछ करना चाहिए.

ठीक है पहले तुम्हें शिविर ज्वाइन करना होगा…फिर देखते हैं आगे क्या होता है..
.देखो व्यकित का शिविर एक मंदिर होता है….

शिविर नहीं शरीर स्वामी जी …बालकृष्ण जी ने स्वामी जी को टोका.
हाँ …व्यक्ति का शरीर एक मंदिर होता है…..उसमें ….
“घंटा…..स्वामी जी शिविर का घंटा बज गया है…आपके योग प्रवचन का समय हो गया है ….
बालकृष्ण जी ने अंतिम बार स्वामी जी को टोका. 

स्वामी जी उठ खड़े हुए …और मेरी तरफ मुस्कुरा के बोले 
…देखो आगे का प्रवचन सुनने के लिए शिविर में आ जाओ …और हाँ २१०० रुपए की पर्ची  कटा लेना और रसीद लेना मत भूलना ….हम विचार करेंगे.

मैं भी खिसक लिया.  मुझे भी देर हो रही थी IPL
 का मैच शुरू होने वाला था और 
मैंने बहुत सी टिकेट ब्लैक करने थी …आखिर शिविर की एंट्री फीस का प्रबंध जो करना है………  

 

(उपरोक्त ब्लॉग असत्य घटनाओं पर आधारित है..
किसी भी जीवित, मृत अथवा घायल व्यकित से समानता मात्र संयोगवश है …
उद्देश्य केवल पाठकों का मनोरंजन है) 


FENKU AUR GHAR MEIN AKELI AUNTI SE MULAAKAAT KA KISSA

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धन्यवाद, इस शीर्षक को पढ़ कर जिस उतावलेपन से आपने इस ब्लॉग में प्रवेश किया है उसके लिए आप सचमुच बधाई के पात्र हैं.  दरअसल कसूर आपका नहीं है ..वो कहते हैं न कि दिल तो बच्चा है और बच्चे तो आजकल वैसे ही शरारती होते हैं.  खैर,  ये बात बहुत पुरानी है. मैं यानि की आपका फेंकू उन दिनों बालपन की दीवार फांदकर जवानी की हरियाली में कूदने को बैचेन था …और यदि कोई मुझे उस वक्त बच्चा कहता था तो मेरा खून उबलने लगता था.  ये दिल्ली की गर्मियों के शुरुआती थपेडों से लिपटे हुए दिन थे. मैं छुट्टियों में अपने एक रिश्तेदार के घर की रोटियों तोड़ रहा था.  एक दिन अपने घर की छत पर खड़ा पड़ोस की बालकनी में सूखते कपड़ों को को निहार कर घर के सदस्यों के बारे में अंदाजा लगा रहा था …कि अचानक लू के थपेडों के बीच खुशबूदार हवा के ठन्डे झोंको की तरह एक लीना चंदावरकर टाइप का गोल-मटोल चेहरा मेरे सामने की बाल्कोनी में एक एक कर कपड़ों को सूखते तारों से समेटने लगा और मुझे लगा मेरी धड़कनें अचानक टॉप गियेर में चलने लगी हैं. गुलाबी रंग के ब्लाऊज और गुलाबी ही रंग के पेटीकोट में लिपटी हुई वह पड़ोस की आंटी थी.  इस तरह किसी महिला को उचक उचक कर तार से कपड़े उतारते हुए मैं पहली बार देख रहा था.  उसने अचानक मेरी तरफ देखा और मैं झेंपते हुए दूसरी तरफ देखने लगा.  कुछ क्षणों बाद मैंने वापस अपनी नजरें उस नजारे को अपनी नजरों में समेटने के लिए उस बाल्कानी की तरफ चोरी से उछाली.  अफ़सोस, वो वहाँ नहीं थी.  मैं निराश हो गया.  मैं करीब बीस मिनट तक यूँ ही नजरें गडाये उस बालकनी को बड़ी तनमयता और एकाग्रता से निहारता रहा तब जाके एक बार फिर से लॉटरी लगी.  वो नजर आई …पर गजब! उसने आते ही मुझे इशारे करने चालू कर दिए.  मैंने अपने आँखें मली…वो सचमुच मुझे बुला रही थी.  उसने मुझे इशारे से अपने दरवाजे पर आने के लिए कहा.  कट! अगले ही सीन में फेंकू आंटी के दरवाजे के खुलने का इन्तजार कर रहा था.  दरवाजा खुला और वो रूपवती महिला गुलाबी साड़ी में मेरे सामने हाजिर थी.  वो मुस्कुराई….मैं मुस्कुरा नहीं पाया…मैं स्तब्ध था.  वो सचमुच बहुत सुन्दर थी.  गौर वर्ण और गोल मटोल चेहरा, गदराया बदन और कुछ उलझे-कुछ सुलझे बेतरतीब से घने-लम्बे केश.  उसके मुख मंडल की ख़ूबसूरती से चिपके हुए मेरी आँखों ने उसके गहरे गले वाले गुलाबी ब्लाउज को भी बिलकुल नजरअंदाज कर दिया था.  मैं अभिभूत था.  “अंदर आओ ना….”, उसकी आवाज में मादकता और आत्मीयता का बहुत ही मधुर घोल था.मैं मंत्रमुग्ध कमरे में प्रविष्ट हो गया.

“आंटी, आप घर में अकेली हैं? मैंने फुसुफुसाते हुए पुछा.

“हाँ, अगर कोई दूसरा होता तो तुम्हें बुलाने की जरुरत पड़ती? – दरअसल मेरी गोल्ड रिंग खो गई है, शायद इस अलमारी के पीछे गिर गई होगी, यही सोच कर तुम्हें बुलाया था, थोड़ी मदद कर दो, इसे खिसकाना पड़ेगा” आंटी ने एक बड़ी सी लोहे की अलमारी की और इशारा किया.

“हाँ, हाँ क्यों नहीं …पर आपने सब जगह ढूँढ लिया था”

“हाँ, सब जगह देख लिया, पर …” आंटी ने नहीं में सिर हिलाया.

“इस पलंग के नीचे भी?”

“अरे, हाँ यहाँ तो मैंने देखा ही नहीं”

आंटी तुरंत घूमी और एक झाडू उठा लाई और तुरंत मदमाती हुई घोड़ी की तरह उन्होंने अपना कमर तक का हिस्सा पलंग के अंदर डाल दिया.  अब सोचिये कैसा दृश्य रहा होगा …सोचिये न .. वो झाडू लेकर अंदर घुसी हुई थी और…..आप भी क्या सोचने लगे…छी: …

लेकिन मैं आंटी की गोल्ड रिंग को लेकर बहुत चिन्तित था…फिर एक विजयी मुस्कान लिए ..वो घोड़ी घूमी और मेरे सामने खड़ी हो गई.  आंटी के गुलाबी गालों पर मुस्कुराते ही प्यारे प्यारे दायें बाएं दो मासूम से गड्डे पड़ गए जो आजकल प्रीटी जिंटा के गालों के अलावा शायद ही कहीं मिलते हों. 

“थेंक यू..सो मच” उसके हाथों में गोल्ड रिंग चमक रही थी जिसे उसने एक बार चूमा और अपने सीने से लगा लिया…तब जाकर मेरी नजर आंटी के सीने पर पहली बार पड़ी.  और मैंने तुरंत अपनी नजरें हटा ली.

“क्या देख रहे हो….संतरों पर नजर हैं न तुम्हारी” आंटी ने जैसे ताड़ लिया था.

“जी…..आप ठीक कह रही हैं, में सचमुच संतरे देख रहा था”

“पर तुम्हारे काम के नहीं हैं …खट्टे हैं.  आज सुबह ही लिए थे फेरीवाले से, पर फिर भी तुम्हारा मन कर रहा है तो ये लो…” उन्होंने टेबल पर प्लेट में रखे हुए संतरों में से एक बड़ा सा संतरा मेरी तरफ उछाल दिया.संतरा सचमुच खट्टा था…एक ही फाक खाकर मैंने आंटी को बोल दिया …”ये तो सचमुच खट्टे हैं’

“विमला के घर आये हो न,  शायद फेंकू नाम है तुम्हारा”

“जी…”

“विमला के हसबेंड का तो सुना है शिमला में ट्रान्सफर हो गया है”

“जी…अगले हफ्ते ही शिफ्ट कर जायेंगे”

“तुम..कौन सी क्लास में पढ़ते हो”

“जी..दसवी..के एक्जाम दिए हैं”

“पास हो जाओगे”

“पता नहीं….”

वो जोर से हँसी …..

“खैर..क्या पियोगे- चाय या कुछ ठंडा”

“कुछ भी नहीं …मैं चलता हूँ”

“ऐसे कैसे चले जाओगे”  उन्होंने मेरी कलाई पकड़ ली.

“तुमने मेरा इतना काम किया है..जानते हो ये अंगूठी मुझे बहुत प्यारी थी…तुम्हें कुछ तो लेना होगा”

“ठीक है फिर चाय..” आंटी के छूते ही सरे शरीर में करंट सा दौड़ने लगा था.

वो रसोई की तरफ मुड़ी ही थी कि …उनके मुंह से आऊच ….की आवाज के साथ चीख निकली…शायद उनका पैर मुड गया था.

“क्या हुआ …” मैं लपका.  और बिना पल की देरी किये मैंने उनके आधे-झुके शरीर को अपने हाथों से संभाल लिया.  पहली बार किसी मखमली बदन को छूने का अहसास हुआ पर अपने संस्कारों की वजह से और हनुमान जी का भक्त होने के कारण मेरे भीतर ऐसी कोई भावना नहीं थी जैसी आप सोच रहे हो. उन्हें सचमुच दर्द हो रहा था…और उनके दर्द की वजह से मैं भी द्रवित हो गया.   उन्होंने मेरे गले में अपना हाथ डाल दिया.  जिससे उनके उन्नत उरोजों का स्पर्श मेरे शरीर से जैसे लुका-छिपी खेलने लगा.  लेकिन मैं संयत और चिन्तित था.

“प्लीज, मुझे बिस्तर में ले चलो…बहुत दर्द हो रहा है…”

मैंने उन्हीं धीरे से पलंग पर लिटा दिया ….इस बीच उनकी सिस्कियों और साँसों को करीब से सुनने का मौका मिला.  मैंने उनके दोनों पैर पकड़ कर सीधे करने चाहे तो उनके मुंह से चीख निकली.

“क्या हुआ …”

“बहुत दर्द हो रहा है …सुनो उधर उस शो-केश में बाम के शीशी है …थोड़ा मल दोगे..प्लीज”

अब मेरे हाथ में बाम की शीशी थी…..मैंने झिझकते हुए उनके एड़ी पर बाम मलने की कोशिस की.

“अरे..यहाँ नहीं घुटने में ….” यह कहते हुए उन्होंने अपनी साड़ी को एक झटके में ही जाँघों तक ऊपर कर दिया.

अब उनकी गोरी और बालरहित टाँगे मेरे सामने थी….मैंने झिझकते हुए उनके घुटने पर बाम मलने का उपक्रम शुरू कर दिया.  कुछ ही पलों में शायद उन्हें दर्द में कुछ आराम मिला …

“बस …थेंक यू …” उन्होंने मुस्कुराते हुए साड़ी को वापस नीचे कर दिया.

“तुम बहुत अच्छे लड़के हो …मेरे पास बैठो न, अफ़सोस कि तुम्हें चाय नहीं पिला सकी”  उन्होंने मेरे हाथ को धीरे से थामा और अपने माथे पर रख कर कहा “ थोड़ा सहला दो …थोड़ा सा बाम मेरे माथे पर भी मल दो….सिर भी दर्द कर रहा है …क्या बताऊं कल रात ठीक से सो भी नहीं सकी…तुम्हारे अंकल ने सारी रात सोने नहीं दिया “

‘कैसे…’  मेरे मुंह से अचानक निकला.

“खर्राटे….सारी रात उनके खर्राटों की वजह से मैं सो नहीं पाई”

“ओह…”

“सारा शरीर टूट रहा है…थोड़ा प्लीज मेरी पीठ में भी बाम लगा दोगे….शर्म आ रही है?

“नहीं….”

“तो फिर ..लगाओ ना….”

“और फिर वो उल्टा लेट गई और मैंने बाम आपने हाथों में लगाया और उनकी पीठ पर ब्लाऊज के अंदर हाथ डाल कर मालिश करने लगा….”

“अरे, पहले दरवाजा तो बंद कर दो…कोई आ गया तो “ आंटी ने कहा और मैंने दरवाजा बंद कर दिया. मैंने पुन: उनके ब्लाउज के अंदर हाथ डाल कर मालिश की..जिस से उन्हें सचमुच सुकून मिला. 

“तुम बहुत अच्छे हो फेंकू…तुम्हें देखकर मुझे अपने वो दिन याद आने लगे हैं जब मैं तुम्हारी उम्र की थी….बहुत सुन्दर हुआ करती थी…..”

“सुन्दर तो आप अब भी हैं आंटी” मैंने शरारती अंदाज में कहा.

“सचमुच?”

“हाँ …सचमुच”

वो हँसी ….”उन दिनों में बहुत तीखी मिर्च की तरह हुआ करती थी…सभी लड़के मुझसे डरते थे …हाँ ..एक लड़का था …दुबला पतला मच्छर सा …कुछ कुछ तुम्हारी तरह….मुझे पता चला कि वो मुझसे प्यार करता है…बस एक दिन स्कूल के रास्ते में वो मिल गया …और फिर मैंने उसका कालर पकड़ लिया और अपनी तरफ खींचा….”

आंटी ने वास्तव में मेरा कालर पकड़ लिया था और मुझे अपनी तरफ  खींचना शुरू कर दिया …मेरा मुंह सीधा आंटी की छाती से जा लगा….

“क्यों बे सुना है तू मुझ से प्यार करता है ..?  मेरे साथ सोयेगा तू …मेरी इज्जत लूटेगा….?”  

“आंटी …प्लीज मुझे तो छोड़ दीजिए…”  मेरा दम घुटने लगा था.

उन्होंने मुझे छोड़ दिया.

“सॉरी….हाँ फिर वो लड़का पत्ते की तरह काम्पने लगा ….और नहीं …नहीं कहता हुआ भाग खड़ा हुआ….हा …हा..हा ..” आंटी बहुत देर तक हँसती रही.

“फिर …आगे जब कभी वो  मुझे देखता तो दूम दबा कर भाग खड़ा होता ….”

“फिर क्या हुआ…”

“फिर होना क्या था…..कुछ नहीं वो लड़का कहाँ गया पता ही नहीं चला …पर बहुत सालों बाद मेरे लिए एक रिश्ता आया …एक वकील का रिश्ता …और जानते हो वो कौन निकला …वही मच्छर..” वो फिर हँसी ….बड़ी मुश्किल से उन्होंने अपने हंसी पर काबू पाया.

“आज वही तुम्हारे अंकल हैं …बस आने ही वाले हैं….”

आंटी के इतना कहना ही था …कि दरवाजे की घंटी बजी.

और आंटी ने लपक कर दरवाजा खोल दिया.  अंकल सामने थे.  उन्होंने मेरे बारे में पूछा तो आंटी ने सब बता दिया कैसे …गोल्ड रिंग ढूँढने में मैंने उनकी मदद की और कैसे वो गिर पड़ी और कैसे मैंने उनके बाम लगाया.

“थेंक यू, बेटे …तुम सचमुच बहुत अच्छे लड़के हो …कभी कभी दिन में आ जाया करो ..तुम्हारी आंटी बोर हो जाती है अकेली पड़े पड़े …”

“लेकिन ये तो एक ही हफ्ते है …यहाँ पर …लेकिन बहुत अच्छा लड़का है…सुनो मैं तुम दोनों के लिए अच्छी सी चाय बनाती हूँ” यह कह कर आंटी उठने लगी.

“अरे…तुम्हारे पैर में चोट लगी है …चाय मैं बनाता हूँ…फेंकू तुम अपनी आंटी से बातें करो …मैं किचन में जाता हूँ…”

……….सचमुच बहुत अच्छे थे दोनों ..पर आजकल ऐसे लोग कहाँ मिलते हैं…..और ऐसी अंटियाँ तो बिलकुल भी  नहीं मिलती हैं….

तो कैसी लगी आपको फेंकू की ये मुलाक़ात एक दोपहर में एक अकेली आंटी से ….

…लोग भी जाने क्या क्या सोचने लगते हैं….क्यों ठीक कहा न मैंने?

 

 

 

 

 

 

Noto ki maala

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नोटों की माला 
इन दिनों देश में बड़ा बवाल खड़ा हो गया है. एक प्रतिष्ठित पार्टी की सम्मानीय, महा-माननीया महामहिम जो जीवन में कभी जयमाला तो नहीं पहन पाई नोटों की माला पहन कर भयंकर चर्चा में हैं. 
मायावती जो हमेशा कौए को कौआ ही कहती हैं कोयल नहीं, 
एक जानी-पहचानी मधुरभाषिणी महिला हैं और उत्तरप्रदेश जैसे जटिल प्रदेश की 
सरल, सरस-ह्रदया मुख्यमंत्री भी हैं. उन्होंने देश के तमाम नेताओं को आईना दिखाया है
नोटों की भारी-भरकम माला पहन कर. क्या कांग्रेसी, क्या भाजपाई, क्या सपाई, क्या चारपाई, क्या तिपाई
सबके गले में सांप लोटने लगे हैं. हज़ार हज़ार के इतने सारे नोट? आई…ला….इनका स्त्रोत क्या है…आखिर क्या करोगे बहनजी का नुस्खा जानकर….
और जान भी लिया तो तुमने कौन सी माला बनानी है ..तुम तो स्विश बैंकों में ही जमा करोगे ना …ये तो बहनजी का ही चमत्कार है…और वैसे भी इतनी वजनी माला उनकी जैसी कदकाठी पर ही फब्ती है. 
कोई जले तो जले…लो फिर पहन ली एक और माला. क्या बिगाड़ लोगे. 
उनके यानि मायावती के इस सुकृत्य पर मेरा मन हुआ कि मैं भी उन्हें बधाई दे आता हूँ…सो मैं सीधे जा पहुंचा बसपा के दफ्तर पर. गेट पर खड़ा चोकीदार नोट गिन रहा था…मैंने उससे कहा मुझे माया जी से मिलना है (मैं उन्हें माया जी ही कहता हूँ).
 मेरे हाथ में बैग देखा तो वो बोला ..नोट लायो हो? तो फिर सीधा अंदर जाओ…वो जो माली बगीचे के पास खड़ा नोट गिन रहा है…उससे पूछने कि जरुरत नहीं है…बस इतना बोल देना वो कि माला के लिए नोट लाये हो…मैंने वही किया …माली ने नोट नोट गिनते गिनते इशारा किया और बोला जाके लाइन में खड़े हो जाओ.
 मैंने देखा सभी लाइन में खड़े हुए लोग बैग लिए खड़े थे. 
पर मेरे थैले में तो दो किलो आलू, एक पाँव टमाटर और आधा किलो प्याज
 और एक गोभी का बड़ा सा फूल था…जो मैंने अपने घर के लिए अभी अभी ख़रीदे थे. 
मैं तो मात्र बधाई देने के लिए खड़ा था. अब क्या करूँ…तभी मुझे एक जाना पहचाना चेहरा दिखा…. तिवारी जी….
जो हाथी कि प्रतिमा के पास खड़े हो कर नोट गिन रहे थे. 
मैंने उन्हें नमस्कार किया और अपना प्रयोजन बताया.
 खाली बधाई…अरे! नोट नहीं लाये …उधर देखो उस खिडकी पर कैसे दनादन नोट दीये जा रहे हैं…थैले में क्या है?. 
सब्जी…..मेरे मुंह से पता नहीं क्यों सच निकल गया…. 
ठीक है…ऐसा करो ये थैला यहीं छोड़ दो…मेरे पास…आज मेरे पास खुल्ले पैसे नहीं थे…..समझ गए न…और तुम आओ मेरे साथ और देखो शोर मत करन, मैं तुम्हें बहन जी से मिलाता हूँ …बस अगर कोई पूछे तो कहा देना माला के निर्माण में अपना सहयोग तुमने दे दिया है. 
मैं तिवारी जी के पीछे चल पडा. 
कुछ ही देर बाद में उस हाल मैं पहुँच गया जहाँ मायावती जी भिन्न भिन्न प्रकार की नोटों की मालाओं 
को पहन पहन कर रिहर्सल कर रही थी. 
मैं आपका प्रशंसक हूँ…आपका दास हूँ …मैंने मायावती का अभिवादन किया 
-कौन से जिले के डी.ऍम हो? मायावती का ध्यान अब भी नोटों की माला कि तरफ था. जी…नहीं मैं तो बस यूँ ही चला आया बधाई देने…मैं कोई नहीं हूँ 
क्या मतलब? तो तुम पार्टी -वर्कर हो …माला के निर्माण में सहयोग दिया? 
जी…नहीं…केवल बधाई…देने आया था.. 
बधाई? केवल बधाई?…इसकी तलाशी लो…ये मुझे बाबा रामदेव का गुप्तचर लगता है… 
और फिर…मेरी तलाशी ली गई ….हज़ार हज़ार के पांच नोट जो मैंने माला में से साफ़ कर लिए थे 
और मन ही मन खुश हो रहा था अपनी कलाकारी पर ….
मायावती के हाथों में पहुँच चुके थे …. उसके बाद …उसके बाद मेरी वो खातिरदारी हुई कि मत पूछो…
.अंत में बड़े ही राजकीय सम्मान के साथ मुझे गेट से बाहर धकेला गया…
.इस हिदायत के साथ कि अगली बार पार्टी दफ्तर के आस पास भी मैं नज़र आया तो…….