Big B ka Big Gum——–A new post
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मैं अमिताभ बच्चन का बहुत बड़ा प्रशंसक हूँ. इन दिनों अमित जी संकट में हैं ..विवादों में घिरे हैं. कांग्रेस कि विशेष अनुकम्पा के कारण वे मिडिया के प्रिय बने हुए हैं..उनके ब्लॉग को चाव से पढ़ा जा रहा है और उनके एक एक कथन को निचोड़ निचोड़ कर उनका विशलेषण किया जा रहा है…शहंशाह के मुंह और ब्लॉग से निकला एक एक शब्द शोध का विषय बन गया है. कांगेस के लिए वे अघोषित रूप से घोस्ट बन गए हैं..हर कांग्रेसी डरा हुआ है.. कहीं आने जाने से पहले कांग्रेस का हर मंत्री से लेकर संतरी तक गुप्त रूप से जांच करवाता है कि कहीं गलती से भी बिग बी के साथ मंच शेयर तो नहीं करना पड़ेगा. सभी कांग्रेसियों को हिदायत दे दी गई है ..बिग बी से बचो ..हो सके तो अपने घर के खिड़कियाँ और दरवाजे पूरी तरह से बंद रखें…ये बिग बी कहीं से कभी भी आ सकता है …अँधेरी रातों में ..सुनसान सड़कों पर….डरना जरूरी है और अगर नहीं डरे तो डरने का अभिनय करो ..क्या पता बिग बी से तुम्हारी दूर दूर की राम राम भी कहीं पार्टी से तुम्हारा सदा के लिए जय राम न करवा दे….बिग बी का बहिष्कार करो. इस आंदोलन में जो जितना आगे जाएगा उतना ही आला कमान की नजरों में चढ़ेगा. एक कांग्रेसी सज्जन ने तो हद कर दी अपनी पुत्री का नाम बबिता से बदल कर पपीता रख दिया…क्यों? अरे भाई बबिता के अंदर भी बी था ..वो भी दो बार. बिग बी क्या जितने भी तथाकथित बी हैं ..सब से दूर रहो …और अगर गलती से कहीं बिग बी के साथ सामना हो जाए तो ऐसे कन्नी काटना जैसे छिछोरे लड़कों को देख कर मोहल्ले की लड़कियां रास्ता बदल लेती हैं.
अब ये तो रही कांग्रेस की बात. पर मेरा मन बहुत दुखी था ..अमित जी बेचारे कितने परेशान होंगे…कितना अकेला फील कर रहें होंगे …अमर सिंह जी भी तो आजकल उनसे दूरी बनाये हुए हैं …तो मैंने भी सोचा यही मौका है कि अमित जी से उनके गम को शेयर करूँ. और मौका भी मिल गया एक जलूस की आड़ में हिम्मत कर के मैं जलसा में प्रवेश कर गया. संयोग से अमित जी अपने आँगन में शहतूत के पेड़ के नीचे कुर्सी पर बैठे बाबूजी की कुछ पंक्तियाँ गुनगुना रहे थे ..उस वक्त अकेले थे ..उनके सामने एक खाली कुर्सी शायद मेरा ही इन्तजार कर रही थी.
-कौन हैं आप – अमित जी ने देखते ही सवाल किया
-मैं फेंकू हूँ …
विराजिए…
मैं तुरंत बैठ गया.
-माफ करना मैं बताना भूल गया..कुर्सी का पेंट गीला है …पर आपकी काली पैंट पर सफ़ेद पेंट मेरे विचार से खूब फबेगा..अमित जी ने चिर-परिचित अंदाज में ठहाका लगाया जो जाहिर है मुझे अच्छा नहीं लगा.
-वैसे फेंकू जी ..आप से मिलने का सौभाग्य हमें पहले कभी नहीं मिला-आप के आने का प्रयोजन …?
-मैं आपका बहुत बड़ा प्रशंसक हूँ. इधर आपको कष्ट में देखा तो मातमपुर्सी..म्म्म…मेरा मतलब है कि आप से आपका दुख बांटने आ गया. –आपको बहुत क्रोध आ रहा होगा….?
-क्रोध…नहीं बिलकुल नहीं. हाँ मैं थोडा दुखित और खिन्नित अवश्य हूँ …पर क्रोधित नहीं हूँ…बाबूजी कहते थे कि क्रोध मनुष्य से उसका विवेक छीन लेता है.
-पर अमित जी ..आप ये सी लिंक विवाद में कैसे फंस गए ..कि हर कोई आप से डी-लिंक होने की बात कर रहा है …क्या आपको सचमुच आमंत्रित किया गया था वहाँ?
-जी हाँ, विधिवत रूप से आमंत्रित किया गया था ..बिना आमंत्रण के तो हम अपने बेडरूम में भी नहीं जाते हैं…. मैं एक मर्यादित और संस्कारित व्यक्ति हूँ….और मेरा मानना है कि यदि कहीं से मुझे आमंत्रण मिलता है तो मुझे स्वीकार करना चाहिए.
-पर कांग्रेसी तो इसे नरेंद्र मोदी से जोड़ कर देखते हैं…आपकी उनसे नजदीकियां शायद कांग्रेस को बर्दास्त नहीं हैं. आप गुजरात के ब्रांड अम्बेस्डर बन गए हैं.
-जी हाँ …लेकिन ऐसा हुआ था कि मेरे पास मोदी जी का फोन आया और मुझ से पुछा गया क्या आप हमारे ब्रांड अम्बेसडर बनेगे ..तो मैंने सोचा शायद मोदी जी कोई कम्पनी खोल रहें हैं और कोई नया प्रोडक्ट लान्च कर रहें हैं और हमने तुरन्त स्वीकार कर लिया इधर बहुत कम्पीटिशन मिलने लगा है …SRK, MSD और जाने कौन कौन आ गए हैं …कोई तेल बेच रहा है ..कोई क्रीम और कोई बिस्किट ..हाँ दो चार कम्पनी के हम भी ब्रांड अम्बेसडर बन गए हैं…तो सोचा एक और कम्पनी के ब्रांड अम्बेसडर बनने में क्या हर्ज है …वो तो हमें बाद में पता चला कि मोदी जी गुजरात प्रदेश के बारे में बात कर रहें हैं…खैर वो भी हमने स्वीकार कर लिया …हमें गुजरात से बहुत प्रेम है…हमें तो पूरे भारत से प्रेम है. और ये ब्रांड अम्बेसडर बनना तो हमारा लेटेस्ट शौक है …हम तो प्रत्येक राज्य के ब्रांड अम्बेसडर बनने के लिए तैयार हैं..राज्य के पत्येक जिले के, प्रत्येक मोहल्ले के और तो और प्रत्येक व्यक्ति के ब्रांड अम्बेसडर बना बनने के लिए तैयार हैं …हम तो आपके भी ब्रांड अम्बेसडर बनने के लिए तैयार हैं…वैसे आप क्या बेचते हैं?
-में क्या बेच सकता हूँ …सर ..मेरी तो खरीदने तक की औकात नहीं है …दालों के दाम देख रहें हैं आप.. आटा, चीनी …सब्जियां क्या खरीदें साहब आज के जमाने में ……
-सुनो..सुनो…तुम यहाँ अपना दुखड़ा रोने आयो हो या मेरा दुखड़ा सुनने?
-माफ कीजियेगा …मैं तो आया था आप का ही दुखड़ा सुनने – मुझे अपने व्यवहार पर लज्जा आने लगी.
-खैर कुछ पियोगे? अमित जी ने पूछा.
-अनार का जूस —-मेरे मुंह से निकला
और कुछ ही पलों में अनार के जूस से भरा गिलास मेरे हाथ में था.
-अमित जी, आप को देख कर कांग्रेसी क्यों डरने लगे हैं.
-हा.हा…हा दरअसल इसके पीछे किसी और का हाथ है ..
-विदेशी हाथ?
-ऐसा मैंने कब कहा?..पर यदि किसी को हमसे समस्या है तो ये उनकी समस्या है …हमें किसी से कोई समस्या नहीं है …बाबूजी कहते थे …मैं तुम्हें बाबूजी की एक कविता सुनाना चाहता हूँ…अग्निपथ अग्निपथ ..कर शपथ …लथपथ लथपथ…
मुझे अब उबासी आने लगी.
-एक और सुनो….जीवन कि आपाधापी में…..
-अमित जी-मैंने उन्हें टोकते हुए कहा …मैं तो आपका गम शेयर करने आया था ..
-ओह हाँ…पर कविता तो तुम्हीं सुननी पड़ेगी…हाँ ..तुम रुको में मदिरा और हाला का प्रबंध करता हूँ…..
-ठीक है …मैंने सोचा चलो दो चार पेग के साथ तो कविता झेली जा सकती है…पर मेरा दुर्भाग्य वे बच्चन जी की मधुशाला उठा लाये …
और मैं बड़ी देर तक झेलता रहा …
इस बीच जया जी का आगमन हुआ…
-ये कौन है ?…आजकल हर ऐरा गेरा तुम घर में बुला लेते हो…निकालो इसको यहाँ से ..
-देखिये …देवी जी …ये हमारे प्रशंसक हैं.
-हजारों घुमते हैं …निकालो इसको फ़ौरन…
-पर श्रीमती जी ..ये विशेष हैं…हमारे ही नहीं …ये अमर सिंह जी के भी फैन हैं…क्यों भाई?
मैने सहमति में सिर हिलाया.
-क्या…..फिर तो फौरन निकालो …मुलायम सिंह जी के फैन होते तो दोबारा सोचती भी..मुझे कुछ नहीं सुनना पांच मिनट के अंदर ये व्यक्ति इस गेट के बाहर होना चाहिए…—-यह कह कर जया जी लौट गई.
-बंधु..विकट स्थिति है ….अभी मधुशाला आधी भी नहीं सुनाई है….अच्छा…तुम्हारे पास सौ रूपये हैं …
मैंने बिना कुछ सोचे सौ रूपये निकाले जिसे अमित जी ने तुरंत छीन कर अपनी जेब में रख लिए..
-ये किसलिए? –मैंने पूछा
-माफ करना …लेकिन शायद तुम भूल गए तुमने अनार का जूस पीया था…अगर जया जी ने हिसाब माँगा तो …
-ओह …-मेरे मुंह से निकला.
-देखो, अब केवल एक मिनट रह गया है…अब तुम जाओगे या में दरबान को आवाज लगाऊँ…
-जी मैं खुद …चला जाऊँगा…
-पर तुम फिर आना ..तुम से मिल कर अच्छा लगा …और हाँ ..संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान आना …जया जी उस वक्त दिल्ली में होंगी…फिर में तुम्हें बाबूजी की कुछ और बेहतरीन रचनाएं सुनाऊँगा …
-जी…..जी…-और मैं चुपचाप इस प्रण के साथ लौट आया कि अब जलसा में कभी नहीं जाऊँगा…

behtreen ………………..shabd vinyaas ,gajab ki pakad shabdo per…………..hats off……………
Fenkuji….. behad sunder rachna hai……..aap jis tarah se kisi stithi vyaktitva aur paristhithi ko apne lekhan pratibha se alankrit karte hai wo sach main bejod hai……..shukriya.
superb yaar. quite different writing. i liked it. bechare bacchan ji and bechare u too.. hahahah
BRILIANT
Bahut hi behtreen aalekh hai yeh, Fenku ji. Vaise Amit ji apne pita ki kavitayen bahut khoobsoorat tareeke se padte hain. Aap kyon bore hue, pata nahin! Bachchan ji ki katia (meri manpasand) - Jeevan ki aapadhapi mein kab vakt mila, kuchh der kahin par baith kabhi yeh soch sakun, jo kiya kaha, maana, usmein kya bura bhala - jeevan ke yatharth ko pragat karti hai.