डियर मॉम,
मैं यहाँ कुशल पूर्वक हूँ. फीलिंग बैटर. रात के २.०० पी एम हो गए हैं. इस वक्त छायावती जी के राज में ऊ. पी. के एक आम आदमी के घर पर आम सी खाट पर लेटा हुआ आम खा रहा हूँ. और यु नो, मोम, यह आम आदमी बड़ा खास है, गरीब भी है [...]
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डियर मॉम, कौन बनेगा करोड़पति समाप्त हो गया. लेकिन बंदे की करोड़पति बनने की तमन्ना जस की तस है. बिग बॉस जारी है …लेकिन बिना गाली-गलौच, लड़ाई झगडे के नीरस हो गया है…खैर एक टेप जारी कर रहा हूँ…आजकल सबकुछ लीक हो रहा है सो अगर में भी एक-आध झूठ लीक कर दूँ…तो क्या फर्क [...] कप्तान धोनी का धमाका, चट मंगनी और पट शादी. चलो अच्छा हुआ एक और निपट गया. धोनी की शादी से सभी हैरान हैं…मीडिया वाले..बेचारे बड़े अरमान पाले हुए थे ..लेकिन बड़ी ही विचित्र तरीके से स्टूडियो में बैठे बैठे उन्होंने शादी का लाइव टेलेकास्ट किया….दीवानगी का आलम था …बेगानी शादी में सारे टीवी चेन्नल फूटेज [...] धन्यवाद, इस शीर्षक को पढ़ कर जिस उतावलेपन से आपने इस ब्लॉग में प्रवेश किया है उसके लिए आप सचमुच बधाई के पात्र हैं. दरअसल कसूर आपका नहीं है ..वो कहते हैं न कि दिल तो बच्चा है और बच्चे तो आजकल वैसे ही शरारती होते हैं. खैर, ये बात बहुत पुरानी है. मैं यानि [...] क्या आपको ऊँगली क्रिकेट खेलना आता है टीवी चेनल्स ने आखिर शोएब और आयशा का तलाक करा कर छोड़ा. वैसे आँखें पक गई थी और कान थक गए थे इस खबर को देख देख कर. इस बीच एक छोटी सी खबर आई है छत्तीस या सेंतीस गढ़ नाम का कोई राज्य है इस देश में जहाँ म्याऊंवादियों का राज चलता है. कोई सत्तर [...] मैं अमिताभ बच्चन का बहुत बड़ा प्रशंसक हूँ. इन दिनों अमित जी संकट में हैं ..विवादों में घिरे हैं. कांग्रेस कि विशेष अनुकम्पा के कारण वे मिडिया के प्रिय बने हुए हैं..उनके ब्लॉग को चाव से पढ़ा जा रहा है और उनके एक एक कथन को निचोड़ निचोड़ कर उनका विशलेषण किया जा रहा है…शहंशाह [...] मनोरंजन का बाप (IPL) इन दिनों खूब देश की सेवा में लगा है. बल्लेबाजों, गेंदबाजों और सट्टेबाजों के साथ साथ कबूतरबाज, कलाबाज, फंदेबाज, फिल्मबाज, दारूबाज और न जाने कितने बाज नोटों को नोचने (छापने) में लगे हुए हैं और सरकार ये कहने से बाज नहीं आ रही है कि देश आर्थिक मंदी से जूझ रहा [...] योग गुरु बाबा रामदेव आजकल खुजली के संक्रमण के शिकार हो गए हैं. राजनीति की खुजली उन्हें कैसे लगी, ये तो पता नहीं पर रोग गंभीर है और तमाम तरह के आसन और कसरतें या आयुर्वेदिक दवाइयों के द्वाराइसका इलाज नहीं किया जा सकता. वास्तविक शवासन की मुद्रा में जाने तकइस राजनितिक खुजली का संक्रमण मौजूद रहता है. योग करते कराते बाबा को क्या सूझी कि वे अचानक व्यवस्था परिवर्तन की बात करने लगे. गाँव-देहातों के दलितों के बीच उनके एक दो दौरे क्या हुए मायावती को दौरे पड़ने लगे. दोनों में ठन गई और फिर मैंने सुना कि बाबा रामदेव ने मायावती के सामने मोर्चा खोल दिया. पहले तो मैं इस मोर्चा शब्द का अर्थ ही नहीं समझ पाया.खैर ..अब दोनों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है. इधर बाबजी ने कहा है कि वे अपनी स्वयं की पार्टी बनाने का विचार कर रहे हैं. सुनकर अचानक मेरे अंदर बाबजी के प्रति श्रद्धा के भाव जाग उठे और बरसों पुरानी चुनाव लड़ने की मेरी सुप्त उत्कंठा को जैसे करंट लगाकर बाबाजी ने जगा दिया. और मैं जा पहुँचा सीधा बाबाजी के योग शिविर में. दोपहर का वक्त था बाबाजी, बालकृष्ण जी के साथ बगीचे में बैठेकुछ कागज़ उलट पुलट रहे थे, शायद अपनी अगली प्रेस कांफेरेंस के लिए तय्यारी कर रहे थे या यूँ समझिए कि मायावती के सम्मान में कुछ शोभनीय टिप्पणियों का ड्राफ्ट तैयार कर रहे थे. मैं सीधा जाते ही बाबजी के चरणों में गिर पड़ा. बाबाजी धन्य हो गए अचानक एक भक्त उनके क़दमों में इस तरह गिरेगा शायद उन्होंने कल्पना नहीं की थी. कौन हो तुम-कैसे आना हुआ, बाबाजी ने एक आँख मिचमिचाते हुए पूछा. मैं टिकट के लिए आया हूँ-मैंने हाथ जोड़ कर निवेदन किया. …और जो टिकट नहीं मिला तो क्या हिला दोगे…, बाबाजी को मजाक करने कि आदत है. जी..नहीं मैं IPL के टिकेट की बात नहीं कर रहा, IPL का टिकेट भी भला कोई टिकेट होता है…हम तो पार्टी के टिकेट की बात कर रहे थे… मैं आपकी पार्टी के टिकेट के लिए आया हूँ….. अभी तो पार्टी का नामकरण संस्कार नहीं हुआ और तुम बाराती बन कर आ गए- बाबाजी थोड़े क्रोधित नजर आ रहे थे. लेकिन बाबाजी मैं तो बड़ी उम्मीद लेकर आया हूँ, मैं गिडगिडाते हुए बोला. बालकृष्ण जी बोले…स्वामी जी पहला व्यक्ति है जोपार्टी का सदस्य बनना चाहता है…इसका कुछ करना चाहिए …]आपका भक्त लगता है ठीक है, फूंक मारो ……… स्वामी जी ने आदेश दिया फिर मैंने देखा बाबाजी गमझे से हवा करने लगे. मैंने तुम्हें फूंक मारने के लिए कहा है, वायु प्रदुषण फ़ैलाने के लिए नहीं. फूंक मारने का मतलब है…..सांस बाहर छोडना…]मैं देखना चाहता हूँ कि तुम्हें कपालभांति आता है या नहीं. जी…वो तो नहीं आता… अनुलोम-विलोम? वो भी नहीं… तो मैं तुम्हें एक सच्चा योगी कैसे मान लूँ, मेरी पार्टी में तुम्हारे जैसे अज्यानी व्यकित के लिए जगह नहीं है… मैं आपका शिविर ज्वाइन कर लूँगा…सुना है वहाँ बड़े बड़े चमत्कार होते हैं. आप फूंक मरवा के सारे रोग दूर कर देते हैं, १५ दिन में १५ किलो वजन कम कर देते हैं …आप तो चमत्कारी हैं, आप ऐसे चमत्कार आखिर कैसे कर लेते हैं, मैं अपना तन, मन, धन आप जैसेचमत्कारी महापुरुष के चरणों में अर्पित करता हूँ…मैंने उनके आगे सर झुका दिया. बालकृष्ण जी फिर बीच में कूदे-स्वामी जी शक्ल से इडियट लगता है…पर इतना तो पक्का है कि इसका आमिर खान से कुछ लेना देना नहीं है…इसका कुछ करना चाहिए. ठीक है पहले तुम्हें शिविर ज्वाइन करना होगा…फिर देखते हैं आगे क्या होता है…देखो व्यकित का शिविर एक मंदिर होता है…. शिविर नहीं शरीर स्वामी जी …बालकृष्ण जी ने स्वामी जी को टोका. हाँ …व्यक्ति का शरीर एक मंदिर होता है…..उसमें …. “घंटा…..स्वामी जी शिविर का घंटा बज गया है…आपके योग प्रवचन का समय हो गया है ….बालकृष्ण जी ने अंतिम बार स्वामी जी को टोका. स्वामी जी उठ खड़े हुए …और मेरी तरफ मुस्कुरा के बोले …देखो आगे का प्रवचन सुनने के लिए शिविर में आ जाओ …और हाँ २१०० रुपए की पर्ची कटा लेना और रसीद लेना मत भूलना ….हम विचार करेंगे. मैं भी खिसक लिया. मुझे भी देर हो रही थी IPL का मैच शुरू होने वाला था और मैंने बहुत सी टिकेट ब्लैक करने थी …आखिर शिविर की एंट्री फीस का प्रबंध जो करना है……… (उपरोक्त ब्लॉग असत्य घटनाओं पर आधारित है..किसी भी जीवित, मृत अथवा घायल व्यकित से समानता मात्र संयोगवश है …उद्देश्य केवल पाठकों का मनोरंजन है) नोटों की माला इन दिनों देश में बड़ा बवाल खड़ा हो गया है. एक प्रतिष्ठित पार्टी की सम्मानीय, महा-माननीया महामहिम जो जीवन में कभी जयमाला तो नहीं पहन पाई नोटों की माला पहन कर भयंकर चर्चा में हैं. मायावती जो हमेशा कौए को कौआ ही कहती हैं कोयल नहीं, एक जानी-पहचानी मधुरभाषिणी महिला हैं और उत्तरप्रदेश जैसे जटिल प्रदेश की सरल, सरस-ह्रदया मुख्यमंत्री भी हैं. उन्होंने देश के तमाम नेताओं को आईना दिखाया हैनोटों की भारी-भरकम माला पहन कर. क्या कांग्रेसी, क्या भाजपाई, क्या सपाई, क्या चारपाई, क्या तिपाईसबके गले में सांप लोटने लगे हैं. हज़ार हज़ार के इतने सारे नोट? आई…ला….इनका स्त्रोत क्या है…आखिर क्या करोगे बहनजी का नुस्खा जानकर….और जान भी लिया तो तुमने कौन सी माला बनानी है ..तुम तो स्विश बैंकों में ही जमा करोगे ना …ये तो बहनजी का ही चमत्कार है…और वैसे भी इतनी वजनी माला उनकी जैसी कदकाठी पर ही फब्ती है. कोई जले तो जले…लो फिर पहन ली एक और माला. क्या बिगाड़ लोगे. उनके यानि मायावती के इस सुकृत्य पर मेरा मन हुआ कि मैं भी उन्हें बधाई दे आता हूँ…सो मैं सीधे जा पहुंचा बसपा के दफ्तर पर. गेट पर खड़ा चोकीदार नोट गिन रहा था…मैंने उससे कहा मुझे माया जी से मिलना है (मैं उन्हें माया जी ही कहता हूँ). मेरे हाथ में बैग देखा तो वो बोला ..नोट लायो हो? तो फिर सीधा अंदर जाओ…वो जो माली बगीचे के पास खड़ा नोट गिन रहा है…उससे पूछने कि जरुरत नहीं है…बस इतना बोल देना वो कि माला के लिए नोट लाये हो…मैंने वही किया …माली ने नोट नोट गिनते गिनते इशारा किया और बोला जाके लाइन में खड़े हो जाओ. मैंने देखा सभी लाइन में खड़े हुए लोग बैग लिए खड़े थे. पर मेरे थैले में तो दो किलो आलू, एक पाँव टमाटर और आधा किलो प्याज और एक गोभी का बड़ा सा फूल था…जो मैंने अपने घर के लिए अभी अभी ख़रीदे थे. मैं तो मात्र बधाई देने के लिए खड़ा था. अब क्या करूँ…तभी मुझे एक जाना पहचाना चेहरा दिखा…. तिवारी जी….जो हाथी कि प्रतिमा के पास खड़े हो कर नोट गिन रहे थे. मैंने उन्हें नमस्कार किया और अपना प्रयोजन बताया. खाली बधाई…अरे! नोट नहीं लाये …उधर देखो उस खिडकी पर कैसे दनादन नोट दीये जा रहे हैं…थैले में क्या है?. सब्जी…..मेरे मुंह से पता नहीं क्यों सच निकल गया…. ठीक है…ऐसा करो ये थैला यहीं छोड़ दो…मेरे पास…आज मेरे पास खुल्ले पैसे नहीं थे…..समझ गए न…और तुम आओ मेरे साथ और देखो शोर मत करन, मैं तुम्हें बहन जी से मिलाता हूँ …बस अगर कोई पूछे तो कहा देना माला के निर्माण में अपना सहयोग तुमने दे दिया है. मैं तिवारी जी के पीछे चल पडा. कुछ ही देर बाद में उस हाल मैं पहुँच गया जहाँ मायावती जी भिन्न भिन्न प्रकार की नोटों की मालाओं को पहन पहन कर रिहर्सल कर रही थी. मैं आपका प्रशंसक हूँ…आपका दास हूँ …मैंने मायावती का अभिवादन किया -कौन से जिले के डी.ऍम हो? मायावती का ध्यान अब भी नोटों की माला कि तरफ था. जी…नहीं मैं तो बस यूँ ही चला आया बधाई देने…मैं कोई नहीं हूँ क्या मतलब? तो तुम पार्टी -वर्कर हो …माला के निर्माण में सहयोग दिया? जी…नहीं…केवल बधाई…देने आया था.. बधाई? केवल बधाई?…इसकी तलाशी लो…ये मुझे बाबा रामदेव का गुप्तचर लगता है… और फिर…मेरी तलाशी ली गई ….हज़ार हज़ार के पांच नोट जो मैंने माला में से साफ़ कर लिए थे और मन ही मन खुश हो रहा था अपनी कलाकारी पर ….मायावती के हाथों में पहुँच चुके थे …. उसके बाद …उसके बाद मेरी वो खातिरदारी हुई कि मत पूछो….अंत में बड़े ही राजकीय सम्मान के साथ मुझे गेट से बाहर धकेला गया….इस हिदायत के साथ कि अगली बार पार्टी दफ्तर के आस पास भी मैं नज़र आया तो……. |
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