gopigoswami’s blog

आपसे मिलकर खुशी हुई ……………आते रहना
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Archive for April, 2009

दीदार-ए-यार

April 01, 2009 By: Category: Uncategorized

                                     

कहाँ रोज रोज मिलती है वजह यूँ इस तरह पास हमारे आने की

कुछ देर और ठहरो कि आँखों ने इजाजत नहीं दी है अभी जाने की

क्या जरूरत है शर्म-ओ-हया को, लबों पर इस तरह पहरा बिठाने की

ग़र आँखों की जुबां समझो तो बात नहीं कुछ और तुम्हें बताने की



कैद कर लेंगे इन आँखों में हम उनको जिन्हें आदत थी छुप जाने की

आखिर कुछ तो सजा मिलनी ही चाहिए चुपचाप दिल में उतर आने की



तस्सवुर में खोई रहती थी ये आँखें,

फुरसत कहाँ थी इन्हें छलक जाने की

क्यों फिर अब भर आई हैं, जबसे खबर मिली है

चाँद निकल आने की



तन्हाइयों में तो सुना करते थे हम आवाज़ें

सिर्फ वक्त के करहाने की

पंख से क्यों लग गये हैं उसको,

आहट जब से हुई है उनके आने की



धड़कने खामोश हैं, साँसें थम गई हैं

वजह क्या है जुबां के लड़खड़ाने की

कुछ तो कहो इरादा-ए-कत्ल है

या कि आदत है तुम्हें यूँ ही मुस्कुराने की

 

आहों में तुम्हारी हम

April 01, 2009 By: Category: Uncategorized

 

 

 

माना कि आज नज़रों की ठोकर से गिर पड़े हैं

राहों में तुम्हारी हम

देख लेना, कल बनकर आँसू उतर आएंगे

आँखों में तुम्हारी हम


आज ये भी सही कि खटक रहे हैं

काँटों की तरह निगाहों में तुम्हारी हम

क्या कीजिएगा जब गुलाबों कि तरह महकेंगे

साँसों में तुम्हारी हम



अभी तो सिर्फ जिंदा हैं बनके गुनाहगार

बातों में तुम्हारी हम

नींदों को उड़ा ले जाएंगे ख्याल बनकर

रातों में तुम्हारी हम



जख्म ही सही, यादों को संभाले बैठे हैं

उन मुलाक़ातों में तुम्हारी हम

दिलजले हैं, ज़ख़्मों को शोलों कि तरह बरसाएंगे

बरसातों में तुम्हारी हम



अफसोस ! ये हसरत न होगी पूरी कि मर जाते

 बाहों में तुम्हारी हम

दिल को सुकून इतना मगर है कि जिंदा रहेंगे

आहों में तुम्हारी हम