दिवाली
आओ कुछ इस तरह से
हम तुम दिवाली मनाएँ
ज्योतिर्मय हो अंतर हमारा
प्रेम-दीप एक मन में जलाएँ
झिलमिलाते दीपों की पंक्तियाँ
अपने आँगन में हम यूँ बिछाएं
हो जाए जग ये सारा जगमग
अपनी चौखट को इतना बढ़ाएँ

सौहार्द की आलोकित गंगा को
निज मन में हम सब उतारें
बैर-द्वेष सब मिट जाएँ हृदय से
रूठे चेहरों पर मुस्कानें खिलाएँ
स्नेह वाटिका के पुष्पों से हम
अपने जीवन में रंगोली सजाएँ
अपनी खुशियों को बाँटे सबसे
औरों के गम को हम हर लाएँ
जहाँ भी हो अंधेरे का बसेरा
लक्ष्मी को वो घर हम दिखाएँ
जो हाशिए पर खड़े हैं कब से
गले उनसे मिल दिवाली मनाएँ

……………………..आप सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ
गोपी
