रात के आँसू
क्या तुम्हें या हैं''''''''''''''''''''''
"स क वो नन्हं बूँें
हर ूब पर बि'र
वो सर् रातों क म म आहें
ो रो सुबह मोत बन बिछ ात थ
स्वा?त में तुम्हारे'
'''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''
क्या तुम्हें या है
कोहरे में लिपट
उन बर्फल हवा"ं का संेश
ो रो सुबह
ध'ुल 'िड़क से
ुसकर तुम्हारे सिरहाने
'ड़ा हो ाता था
"र िस में छुपा होता था
वो मौन'निमंत्रण
उन्हं नन्हं बूंों का
"र फिर चल पड़ते थे
तुम्हारे नं?े पैर
हर ूब क "र
'''
क्या तुम्हें या है
उन नन्हं बूंों क वो न्तिम भेंट
वो सर्ला चुंबन
वो कुछ म , कुछ ंड सिहरन
वो ?ला ?ला हसास
ो तुम्हार नायास बं होत
आँ'ों में ुल ाता था
एक म स कल्पना बन कर

रातें फिर सर् हो चल हैं
"र आ फिर
सिसकत रातों ने
कुछ नन्हं बूँें
मेर हथेलियों में ?िरा हैं
शाय ये रात के आँसू हैं
"र मैने बिछा िया है इन्हें
ूर् ूर् तक
फिर से उस हर ूब में
बस इंतार है तो
सिर्फ तुम्हारे नं?े पैरों का
