gopigoswami’s blog

आपसे मिलकर खुशी हुई ……………आते रहना
Subscribe

Archive for July, 2010

ओ री महंगाई !!!

July 14, 2010 By: Category: Uncategorized

                           ओ री महंगाई !!!


 


ओ री महंगाई! अब तू ही बता कहाँ जाऊं मैं


टॉक टाइम खाऊं या फिर मोबाईल चबाऊं मैं


 


तनख्वाह मेरी नाटी रह गई, खूब बड़ी तेरी हाईट


जेबें सारी ढीली हो गई, हालत मेरी फिर भी टाईट


तू मारे है चांटे दनादन, कब तक गाल सहलाऊँ मैं


ओ री महंगाई! अब तू ही बता कहाँ जाऊं मैं


 


 आटा कर गया टाटा मुझको, दालें मारें खूब उछालें


घी-तेल ने बजट बिगाड़ा, मुँह जलाये हैं सारे मसाले


पगार हुई छू-मंतर मेरी, अब खाली पेट बजाऊँ मैं


ओ री महंगाई! अब तू ही बता कहाँ जाऊं मैं


 


 चीनी लागे कड़वी मुझको और दूध-ब्रेड दिखाएँ ठेंगा 


सूनी रसोई अब देती ताने, बिजली महंगी, पानी महंगा


खाली गैस सिलेंडर धमकाता, चूल्हा कहाँ से जलाऊँ मैं


ओ री महंगाई! अब तू ही बता कहाँ जाऊं मैं


 


 आलू-बेंगन, घीया, भिन्डी और तोरी, खूब करे हैं सीनाजोरी


भाव प्याज-टमाटर का सुन के अब हिम्मत मेरी न हो री


तू अकड़ी खड़ी है सब्जी-मंडी में, उलटे पाँव घर आऊँ मैं


ओ री महंगाई! अब तू ही बता कहाँ जाऊं मैं


 


 शिक्षा महंगी, भिक्षा महंगी, महंगा हुआ घर का किराया


बड़े दाम पेट्रोल के लेके, तेरा सारा धुँआ आँखों में आया


दवा-दारू भी न मेरे बस की, जो बीमार भी पड़ जाऊं मैं


ओ री महंगाई अब तू ही बता कहाँ जाऊं मैं


 


टेक्स-बिलों से घिरा मैं, चढ़े हैं कर्जे मुझ पर बहुत सारे


तू महंगाई! छोड़ दे गर्दन मेरी, क्यों गरीब को और मारे


इतनी तो न फाड़ तू जेब मेरी, जो सिल भी न पाऊँ मैं


ओ री महंगाई! अब तू ही बता कहाँ जाऊं मैं


 


कमर तोड़ के तू मेरी, क्यों आसमान मैं जा बैठी


मैं गुहार लगाता नीचे से, तू मगर है ऐंठी की ऐंठी 


बोल तू नीचे आती है या कि फिर ऊपर जाऊं मैं


 


ओ री महंगाई! अब तू ही बता कहाँ जाऊं मैं


टॉक टाइम खाऊं या फिर मोबाईल चबाऊं मैं


 


                                                       (By Gopi Goswami)


monsoon

July 06, 2010 By: Category: Uncategorized

http://datastore.rediff.com/h5000-w5000/thumb/5C65676160696E735E6B68/m4354kfxpuitcnd3.D.0._______p01(1).jpg