ओ री महंगाई !!!
ओ री महंगाई !!!
ओ री महंगाई! अब तू ही बता कहाँ जाऊं मैं
टॉक टाइम खाऊं या फिर मोबाईल चबाऊं मैं
तनख्वाह मेरी नाटी रह गई, खूब बड़ी तेरी हाईट
जेबें सारी ढीली हो गई, हालत मेरी फिर भी टाईट
तू मारे है चांटे दनादन, कब तक गाल सहलाऊँ मैं
ओ री महंगाई! अब तू ही बता कहाँ जाऊं मैं
घी-तेल ने बजट बिगाड़ा, मुँह जलाये हैं सारे मसाले
पगार हुई छू-मंतर मेरी, अब खाली पेट बजाऊँ मैं
ओ री महंगाई! अब तू ही बता कहाँ जाऊं मैं
सूनी रसोई अब देती ताने, बिजली महंगी, पानी महंगा
खाली गैस सिलेंडर धमकाता, चूल्हा कहाँ से जलाऊँ मैं
ओ री महंगाई! अब तू ही बता कहाँ जाऊं मैं
भाव प्याज-टमाटर का सुन के अब हिम्मत मेरी न हो री
तू अकड़ी खड़ी है सब्जी-मंडी में, उलटे पाँव घर आऊँ मैं
ओ री महंगाई! अब तू ही बता कहाँ जाऊं मैं
बड़े दाम पेट्रोल के लेके, तेरा सारा धुँआ आँखों में आया
दवा-दारू भी न मेरे बस की, जो बीमार भी पड़ जाऊं मैं
ओ री महंगाई अब तू ही बता कहाँ जाऊं मैं
टेक्स-बिलों से घिरा मैं, चढ़े हैं कर्जे मुझ पर बहुत सारे
तू महंगाई! छोड़ दे गर्दन मेरी, क्यों गरीब को और मारे
इतनी तो न फाड़ तू जेब मेरी, जो सिल भी न पाऊँ मैं
ओ री महंगाई! अब तू ही बता कहाँ जाऊं मैं
कमर तोड़ के तू मेरी, क्यों आसमान मैं जा बैठी
मैं गुहार लगाता नीचे से, तू मगर है ऐंठी की ऐंठी
बोल तू नीचे आती है या कि फिर ऊपर जाऊं मैं
ओ री महंगाई! अब तू ही बता कहाँ जाऊं मैं
टॉक टाइम खाऊं या फिर मोबाईल चबाऊं मैं
(By Gopi Goswami)
