कुछ सौगातें
कुछ मुस्कुराहटें
इन आँसुओं ने भी बाँटी हैं
वो चैन से सोते होंगे
हमने रातें जागते हुए काटी हैं
कुछ मुरादें
इस दिल ने भी बाँटी हैं
बन कर टूटता हुआ तारा
गुजरते हैं हम अक्सर
उनकी छत के ऊपर से
और वो दौड़ कर आती हैं
कुछ सौगातें
इस नाकाम इश्क ने भी बाँटी हैं
बेशक कहती होंगी जख्म उनको
तन्हाइयों में अपने आँसुओं
से अब भी सहलाती हैं
कुछ हसरतें
इस खाक-ए-दिल ने भी बाँटी हैं
हम चूम के उन पलकों
को दे आए थे दुआएँ
अब ये उनकी बात है
किस रक़ीब को वो कब
आजमाती हैं
कुछ बरसातें
इस आसमां ने भी बाँटी हैं
उधर बरसता है
पानी झम झम
इधर आँखें हमारी
डबडबाती हैं

