
हुं जींदगी की बेटी मैं,
हर एक पल को जिती जाती मैं.
हर खुशी को गले लगाया,
हर एक गम को पिती जाती मैं.
राह चलते मिला एक गुमसुम सा बीता पल,
मैं ने कहा कहां बीत गया तुं,
किसी की यादॊं में है टिक गया तुं.
हर एक पल को यादों में संजोये चली जाती मैं.
एक राह बडी अकेली,
बडी चूपचाप सी चली जा रही थी.
मैंने कहा कहां है तुं अकेली,
किसी की मंझिल बनके साथ चली तुं.
हर एक कदम पे मंझिल को गले लगाती चली मैं.
मैं जींदगी की बेटी…..
-गुंज
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– December 15, 2008

शुभ रात्री…
सभी आईलेन्डर दोस्तो को शुभ रात्री….:)
हमने आज से ही अपना आइलेन्ड का सफर शुरू किया है.
निश्चित ही आप सभी दोस्तो का साथ निराला होगा.
-गुंज
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– December 12, 2008

हर घडी है मुझपे छाइ;
तेरी चाहत आसमां सी.
हर लम्हा जुड रहा है लम्हों से;
तेरी यादों को पिरोके,
हर कडी ऐसे जुडी
तेरी चाहत केहकशां सी.
हर लम्हा अब नया सा,
हर सफ़र है निराला,
तेरी चाहत से लगा कि,
जींदगी है मेहरबां सी..
-गुंज
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– December 12, 2008