इलाहाबाद का दशहरा
विजयादशमी - विजय पर्व है. महाप्रतापी महापंडित रावण के अहंकार पर ज़न नायक लोकरक्षक मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की विजय है. यह ग्यान की अग्यान पर और प्रकाश की अंधकार पर विजय का पर्व है.
बुराई का विनाश और अच्छाई की प्रतिष्ठा का पर्व है. नव दिनो तक महा काली, महा लक्ष्मी और महा सरस्वती की आराधना का पर्व महिषासुरमर्दिनि मया दुर्गा की आराधना का पर्व है
जो शक्ति स्वरूप में हमें बल, बुद्धि और धन के सही उपयोग का मार्ग दिखती हैं.
दशहरा हराने का नाम है. चंचल, भागते मन की, इन्द्रियाओ की विभिन्न लालसाओं को नियंत्रित करने का नाम दशरथ है, जिसकी लगाम हमारे हाथ है.
और दशानंन जिसका प्रखर मस्तिष्क सामान्य जन के दिमाग से दस गुना तेज़ गति से चलता है , सोचता है, विश्लेषण करता है,
वह भी लालसाओं में फंस जाए तो सब कुछ मिट जाता है यही सीख देता है.
लक्ष्मी का हाथ हो,सरस्वती का साथ हो,गणेश का निवास हो, और मा दुर्गा का हो आशीर्वाद सब अंधियारा मिट जय. जीवन मे हो ऐसा सबके प्रकाश ..शुभ विजया दशमी.
अध्यात्मिक, संस्कृतिक, धार्मिक और साहित्यिक नगरी प्रयाग मे दशहेरा पर्व पर आप सबका स्वागत है, अभिनंदन है ..
राम भक्ति और मा दुर्गा, काली और सरस्वती के पंडालों से सजा इलाहाबाद आप सबका स्वागत करता है. और निमंत्रण देता है कि बस एक बार
इस संगम नगरी मे तो आइए , हम सब आपका स्वागत करने को तैयार हैं.
इलाहाबाद के दो मुख्य पर्व हैं. 1- माघ मेला, 2- दशहरा,
इलाहाबाद मे दशहरा रामलीला मंचन के साथ दस दिनो तक मनाया जाने वाला पर्व है. शहर मे विभिन्न रामलीला कमेटियाँ हैं, जिनमे हातीराम पाजावा और पत्त्थर च थी राम लीला कमेटी प्रमुख हैं,
नवमी और दशमी को इन्हीं दोनो कमेटियों का राम दल निकलता है. इसके अतिरिक्त सिविल लाइन्स, दारागंज और कटरा का राम दल भी अपने पूर्ण शान ओ शौकत के साथ निकलता है. राम दल मे रामायण और महाभारत के प्रसंगों के आधार पर चौकियाँ निकाली जाती हैं.
लाखों की संख्या मे भक्तजन, बालक और जवान , लड़के और लड़कियों, महिलाओं और पुरुषों को संस्कृति के तार से जोड़ने वाला यह अद्भुत पर्व दशहरा है.
प्रतेएक दिन प्रातः कालीन सजावट की चौकियाँ भी निकाली जाती हैं. जिसमे कलाकार की सृजनशीलता और उसकी कल्पना के रंग भरे होते हैं.
प्रत्येक दिन इन चौकियों मे अलग अलग सजावट होती है. कभी फूलों का शृंगार, कभी अनाज से सजावट, किसी दिन सब्जियों से चोकियाँ सजाई जाती हैं. इनमे विभिन्न आकृति,
और कल्पनाएँ संजोए जाती है. चांदी का रथ, पुष्पक विमान, कमल रथ, आदि चौकियाँ सॅंजो कर रखी गयीं हैं.
हर
चौराहे पर बड़े बड़े कट आउट लगे हैं . बिजली से सड़क इस तरह झिलमिला रही कि रात का आभास भी नही होता. लाउडस्पिकर पर राम धुन और भगवान राम चंद्र की जय,
लखन लाल की जय, माता जानकी की जय पवनपुत्र हनुमान की जय . की गूंज से सारा वातावरण गुंजायमान है
इलाहाबाद के राम दल मे कलाकार और उनकी कल्पना सभी स्वान्तः सुखाय है. इस भौतिकतावादी युग मे बहुत से कलाकार बिना परिश्रमिक अपनी सेवाएं भगवान राम को समर्पित करते हैं.
दर्शकों द्वारा सराहना ही उनका पुरुस्कार है. सृजनशीलता का गुण ही उनको प्रेरित करता है.
लीडरशिप के गुण विकसित होतें हैं. सामंजस्य, और सहनशीलता, उदारता, और कला की कद्र करने जैसे गुण यहाँ के लोगों मे विकसित होते हैं जो जीवन के हर शेत्र मे काम आते हैं.
अपार जान समूह जब कला की प्रशंसा कर दे और “एक बार फिर” की रुट लगा दे तो समझिए की कला और कलाकार दोनो का सम्मान हो गया.
जगह जगह पारितोषिक , रुपय , गिफ़्ट चौकियों को मिलतें हैं. पात्रों की हौसला अफजाई होती है. खाने के पॅकेट, मिठाई, कोल्ड ड्रिंक, जगह जगह बाटें जातें हैं. बहुत सी कंपनियाँ अपने उत्पादों का प्रचार करती हैं.
लाखों की भीड़ मे चलने की जगह नहीं होती, अगर बाजुओं मे दम है , और पैरो मे ताकत तो राम दल की भीड़ मे एकबार आयेई शरीर की सारी थकावट तुरंत दूर हो जाएगी.
यह अलग बात है की दर्द की खुमारी काई दिन तक दिखे.
लेकिन डरिये नहीं अलग खड़े हो कर, और बैठ कार भी आप ईलाहाबाद के दशहेरा का आनंद उठा सकते हैं. महिलों और बच्चों के लिए भी व्यवस्था मुफ्त की जाती है.
जोर से बोलिये जय श्री राम …