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Archive for the ‘Religion’ Category

Surya Puja

October 23rd, 2009

सूर्या षष्ठी की शुभकामनाएँ. भगवान आदित्य हम सबके जीवन को आलोकित करें. हमारी कृषि को उर्जा प्रदान करें
सूर्या षष्ठी बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, झारखंड आदि पूर्वी भारत के प्रदेशों में मनाया जाने वाला एक मुख्य पर्व है. सूर्या हमारी उर्जा का केंद्रा बिंदु है.
जब से देवों कि परिकल्पना कि गयी है तब से सूर्या एकमात्र प्रकट और जाग्रत देव के रूप मे हमेशा उपस्थित रहे हैं.

सूर्या कि रश्मियाँ हमे और हमारी कृषि को जीवंतता प्रदान करती हैं. इस पर्व के माध्यम से हम भगवान सूर्या से प्रार्थना करते हैं
कि आने वाले जड़े मे भी आप अपनी रश्मियों से हमे जीवन प्रदान करें.

कुंडली मे सूर्या को पिता का दर्जा प्राप्त है. यदि कुंडली मे सूर्या खराब स्थानो पर है, या पिता को तकलीफ है, या पिता के कारण कोई तकलीफ
हो रही है, या पेट मे कोई परेशानी है तो सूर्या उपासना करें. गायती मन्त्रा का जाप करें. ओम घृणी सूर्याय नमः का जाप करें.
सूर्या को अर्घ्या प्रदान करने के लिए,तांबे के लोटे मे जल भर कर, उसमे रोली और कनेर का लाल पुष्प डालकर् उपरोक्त मंत्रो के साथ
अर्घ्या प्रदान करें. और जल सिर के उपर से गिराते हुए उसमे से सूर्या का प्रकाश देखने का प्रयास करें.

वैग्यानिक रूप से, ऐसा करते समय सूर्या कि किरणे पूरे शरीर मे पड़ती हैं. जो लाभदायक है

हमारे पुराना ब्लॉग सूर्या षष्ठी विशेष जानकारी के लिए देखें

Happy Deepawali

October 15th, 2009

असतो मा सद्गमाया, तमसो मा ज्योतिर्गमाया दीपमालिका का यह पर्व आप सबके जीवन को खुशियों से भर दे. विघवीनाशक भगवान गणेश कि हम पर कृपा हो, मा लक्ष्मी, मा काली, मा सरस्वती का आशीर्वाद बना रहे..
दीपावली का दीप पर्व हमे संदेश देता है कि अच्छाई कि जोत से जोत जलाते चलो, बुराई का विनाश तो होना ही है.
पाँच दिवसीय पूजन अर्चन का महोत्सव धनतेरस से शुरू होकर नरकचतुर्दशी वा हनुमान जयंती और दीपावली उसके बाद अन्नकूट और भाई दूज तक चलने वाला भारतिया संस्कृति का यह महाप्राण पर्व शुरू हो गया है.
भारत एक कृषि प्रधान देश है. यहाँ का हर पर्व कृषि पर आधारित है, धान कि फसल तैयार होकर बाज़ार जा रही हो तो धनवर्षा तो होगी ही. जब मेहनत का फल मीठा है तो दीपों से घर को सजना ही है. समस्त कार्यों को निर्विघ्न पूर्ण करने के लिए विघ्नविनाशक भगवान गणेश के प्रति कृतयग्यता प्रकट करनी होगी.
धनतेरस के दिन धातु (स्वर्ण & चांदी) का सामान अवश्या खरीदें. आजकल स्टील के बर्तन खरीदने का रिवाज़ है, लेकिन यह लोहा खरीदना है और भगवती लक्ष्मी का पूजन लोहे के बर्तन से नही करना चाहिए,
अतः सामर्थ्या के अनुसार पूजन सामग्री के लिए तांबे का बर्तन, आभूषण लेना उत्तम होगा.
यदि धनतेरस के दीन गणेश लक्ष्मी कि प्रतिमा घर लाएँ तो यह अधिक शुभ है. मा लक्ष्मी कि प्रतिमा बैठी हुई हो, मा ने लाल वस्त्रा धारण किए हों तथा मा ने नाक मे नथुनी पहनी हुई हो
ऐसी प्रतिमा का चयन करना चाहिए.
यम के लिए द्वार पर सरसों या तिल के तेल का दिया गोधूली बेला में जलाएँ.
नरकासुर का वध भगवान श्री कृशण ने किया था, और हज़ारों लोगों को कष्ट मुक्त किया था. इसी दिन हनुमान जयंती भी मनाई जाती है.
अतः यह च्छोटी दीवाली के नाम से प्रसिद्ध है. इस दिन भी घरों मे दिए जलाए जातें हैं.
दीपावली के दीन गणेश लक्ष्मी का पूजन करें. भोग मे गुड धनिया का भोग अवश्या लगाएं, मा लक्ष्मी कि प्रसन्नता के लिए केमल पुष्प अवश्या चढ़ाए. यदि हो सके तो केमल गत्ते और पलाश कि लकड़ी से हवन करें. गणेश जी और मा लक्ष्मी की आरती करेके गुड धनिया का प्रसाद लें.
दीपावली को पटाके फाइयर क्रॅकर भी अवश्या चलाएँ लेकिन प्रदूषण कि समस्या को देखते हुए एक सीमा तक ही ध्वनि प्रदूषण करें. भगवान के चित्रोँ वाले पटाखे बिल्कुल नही बजाएँ.
दीपावली पर सफाई अभियान के अंतर्गत चूहों को घर के बाहर ना निकालें.
मा काली और मा सरस्वती का पूजन भी दीपावली पर गणेश लक्ष्मी के साथ किया जाता है. विद्यार्थी अपनी किताब, कॉपी, लेखनी का पूजन करें और मा से प्रार्थना करें कि मा उनकी विद्या के साथ बुद्धि दें,
उनकी लेखनी मे शक्ति और ओज का संचार करें. सातमार्ग से प्राप्त धन को वो सही दिशा मे लगा सकें. इसलिए अपनी लेखनी आदि को एक दिन के लिए विश्राम दें.
भगवान विष्णु वैकुंठ लोक मे दानवेंद्रा बालि का संघार करके बस लौटे ही हैं तो मा लक्ष्मी से अधिक प्रसन्न और कौन होगा. अतः प्रसन्न वदना मा लक्ष्मी कि आराधना करके उनसे मनचाहा वरदान प्राप्त करने का
सुअवसर आ गया है. मा लक्ष्मी कि आराधान कीजिए. श्री सूक्त का पाठ करें. मा लक्ष्मी का नाम जप करे और ओम श्री कमले कमलालये की विधि पूर्वक आराधना करें.
अन्नकूट पर मा आनपूर्णा कि पूजा कि जाती है और यह कामना कि जाती है कि मा हमारे अन्ना भंडार सदा भरें रखें. भगवान श्री कृशण ने गोवर्धन पर्वत उठा कार समस्त ग्राम वासियों कि रक्षा किया था और इंद्रा का मान मर्दां किया था. अतः गोबर का पर्वत बना कार उसे सजाएँ और भगवान श्री कृशण को खीर, कढ़ी, पूड़ी, मिठाई आदि से भोग लगाएं और स्वा निर्मित गोबर्धन पर्वत कि सात बार परिक्रमा करें. गाय हमारी माता है उसकी रक्षा का संकल्प करें.
भाई दूज के दिन बहने आपने भाइयों को टीका , तिलक करती हैं, बहनो का उचित सत्कार करते हुए उन्हे भेंट आवश्या दें. इसमे विलंब ना करें.
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अमावस कि रात पति पत्नी के साथ के लिए वर्जित होती है लेकिन दीपावली कि रात पति पत्नी के लिए वर्जित नहीं है. धन, वैभव और खुशी के साथ गृह लक्ष्मी का सत्कार कीजिए.

Dussehra

September 28th, 2009

इलाहाबाद का दशहरा
विजयादशमी - विजय पर्व है. महाप्रतापी महापंडित रावण के अहंकार पर ज़न नायक लोकरक्षक मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की विजय है. यह ग्यान की अग्यान पर और प्रकाश की अंधकार पर विजय का पर्व है.
बुराई का विनाश और अच्छाई की प्रतिष्ठा का पर्व है. नव दिनो तक महा काली, महा लक्ष्मी और महा सरस्वती की आराधना का पर्व महिषासुरमर्दिनि मया दुर्गा की आराधना का पर्व है
जो शक्ति स्वरूप में हमें बल, बुद्धि और धन के सही उपयोग का मार्ग दिखती हैं.

दशहरा हराने का नाम है. चंचल, भागते मन की, इन्द्रियाओ की विभिन्न लालसाओं को नियंत्रित करने का नाम दशरथ है, जिसकी लगाम हमारे हाथ है.
और दशानंन जिसका प्रखर मस्तिष्क सामान्य जन के दिमाग से दस गुना तेज़ गति से चलता है , सोचता है, विश्लेषण करता है,
वह भी लालसाओं में फंस जाए तो सब कुछ मिट जाता है यही सीख देता है.

लक्ष्मी का हाथ हो,सरस्वती का साथ हो,गणेश का निवास हो, और मा दुर्गा का हो आशीर्वाद सब अंधियारा मिट जय. जीवन मे हो ऐसा सबके प्रकाश ..शुभ विजया दशमी.

अध्यात्मिक, संस्कृतिक, धार्मिक और साहित्यिक नगरी प्रयाग मे दशहेरा पर्व पर आप सबका स्वागत है, अभिनंदन है ..
राम भक्ति और मा दुर्गा, काली और सरस्वती के पंडालों से सजा इलाहाबाद आप सबका स्वागत करता है. और निमंत्रण देता है कि बस एक बार
इस संगम नगरी मे तो आइए , हम सब आपका स्वागत करने को तैयार हैं.

इलाहाबाद के दो मुख्य पर्व हैं. 1- माघ मेला, 2- दशहरा,

इलाहाबाद मे दशहरा रामलीला मंचन के साथ दस दिनो तक मनाया जाने वाला पर्व है. शहर मे विभिन्न रामलीला कमेटियाँ हैं, जिनमे हातीराम पाजावा और पत्त्थर च थी राम लीला कमेटी प्रमुख हैं,
नवमी और दशमी को इन्हीं दोनो कमेटियों का राम दल निकलता है. इसके अतिरिक्त सिविल लाइन्स, दारागंज और कटरा का राम दल भी अपने पूर्ण शान ओ शौकत के साथ निकलता है. राम दल मे रामायण और महाभारत के प्रसंगों के आधार पर चौकियाँ निकाली जाती हैं.

लाखों की संख्या मे भक्तजन, बालक और जवान , लड़के और लड़कियों, महिलाओं और पुरुषों को संस्कृति के तार से जोड़ने वाला यह अद्भुत पर्व दशहरा है.

प्रतेएक दिन प्रातः कालीन सजावट की चौकियाँ भी निकाली जाती हैं. जिसमे कलाकार की सृजनशीलता और उसकी कल्पना के रंग भरे होते हैं.
प्रत्येक दिन इन चौकियों मे अलग अलग सजावट होती है. कभी फूलों का शृंगार, कभी अनाज से सजावट, किसी दिन सब्जियों से चोकियाँ सजाई जाती हैं. इनमे विभिन्न आकृति,
और कल्पनाएँ संजोए जाती है. चांदी का रथ, पुष्पक विमान, कमल रथ, आदि चौकियाँ सॅंजो कर रखी गयीं हैं.
हर
चौराहे पर बड़े बड़े कट आउट लगे हैं . बिजली से सड़क इस तरह झिलमिला रही कि रात का आभास भी नही होता. लाउडस्पिकर पर राम धुन और भगवान राम चंद्र की जय,
लखन लाल की जय, माता जानकी की जय पवनपुत्र हनुमान की जय . की गूंज से सारा वातावरण गुंजायमान है
इलाहाबाद के राम दल मे कलाकार और उनकी कल्पना सभी स्वान्तः सुखाय है. इस भौतिकतावादी युग मे बहुत से कलाकार बिना परिश्रमिक अपनी सेवाएं भगवान राम को समर्पित करते हैं.
दर्शकों द्वारा सराहना ही उनका पुरुस्कार है. सृजनशीलता का गुण ही उनको प्रेरित करता है.

लीडरशिप के गुण विकसित होतें हैं. सामंजस्य, और सहनशीलता, उदारता, और कला की कद्र करने जैसे गुण यहाँ के लोगों मे विकसित होते हैं जो जीवन के हर शेत्र मे काम आते हैं.

अपार जान समूह जब कला की प्रशंसा कर दे और “एक बार फिर” की रुट लगा दे तो समझिए की कला और कलाकार दोनो का सम्मान हो गया.
जगह जगह पारितोषिक , रुपय , गिफ़्ट चौकियों को मिलतें हैं. पात्रों की हौसला अफजाई होती है. खाने के पॅकेट, मिठाई, कोल्ड ड्रिंक, जगह जगह बाटें जातें हैं. बहुत सी कंपनियाँ अपने उत्पादों का प्रचार करती हैं.

लाखों की भीड़ मे चलने की जगह नहीं होती, अगर बाजुओं मे दम है , और पैरो मे ताकत तो राम दल की भीड़ मे एकबार आयेई शरीर की सारी थकावट तुरंत दूर हो जाएगी.
यह अलग बात है की दर्द की खुमारी काई दिन तक दिखे.

लेकिन डरिये नहीं अलग खड़े हो कर, और बैठ कार भी आप ईलाहाबाद के दशहेरा का आनंद उठा सकते हैं. महिलों और बच्चों के लिए भी व्यवस्था मुफ्त की जाती है.

जोर से बोलिये जय श्री राम …

Om NamashChandikaie

September 18th, 2009

जय मा चंडिका जय मा चामुंडा हम आपकी शरण मे आए है हमारा कल्याण करो आप की शोभा अद्वितीय है, आप की वीरता अतुलनीय है. हे तीन नेत्रों वाली माता आपकी सदा ही जय हो. हे शुंभ निशुंभ मर्दिनि, हे महिषासुर मर्दिनि आप की सदा ही जय हो

शारदीय नवरात्रि में महिषासुरमर्दिनि मा दुर्गा का पूजन पूर्ण श्रद्धा भाव से करें.
मा के पूजन मे आप की जैसी श्रद्धा और भक्ति होगी वैसा ही फल प्राप्त होगा. मा दुर्गा के पूजन मे मा के गुणो का बखान है.
मा की वीरता का सस्वर वर्णन ही उनके प्रति सच्ची पूजा है. अतः मा दुर्गा का पूजन बोल कर करना चाहिए.

यम यम चिन्तयते कामं तां तां प्राप्नोति निश्चितम्
परमेश्वर्यम् मतुलुम प्राप्स्यते भूतले पुमान.
पूजा के समय शांत भाव से मा की आराधना करें — किसी प्रकार का व्यवधान शोर होने की संभावना हो तो उसे पहले ही दूर कर ले.

या देवी सर्वभूतेषु मातृ रूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

मा से माँगने मे शरम कैसी… मा तो अपने बच्चो का, भक्तों का मनोरथ हँसते हुए एक मुस्कान मे पूर्णा करः देती है.
एक बार अपनी मा से माँग कर तो देखिए.
एक बच्चा कैसे अपनी मा को मनाता है बस वैसे ही हमे भी मनाना है.

नवरात्रि मे मा के नव रूपों की पूजा की जाती है फिरभी मा के तीन रूपों का, विधिवत पूजन किया जाता है जो तीन तीन दिन काली, लक्ष्मी और सरस्वती. को समर्पित है. मा का पूजन शक्ति व साहस, धन धन्या और बुद्धि के विकास के लिए किया जाता है. हम मा काली के पूजन द्वारा शक्ति, मा लक्ष्मी से धन और
मा सरस्वती से बुद्धि की कामना करते हैं. ( मसल पवर, मनी पवर, माइंड पवर)

विद्यार्थियों को अच्छे नंबर लाने के लिए अपनी कलम दावात, कापी किताब की पूजा सप्तमी, अष्टमी और नवमी को करना चाहिए जिससे
उनका ध्यान और बुद्धि आने वाली परिच्छाओ मे लगे.

संतान प्राप्त करने के लिए नवरात्रि की पंचमी को मा स्कंदमाता की पूजा अवश्या करें.

सिद्धि और सौभाग्या की प्राप्ति के लिए, परिवार के कल्याण के लिए महिलाओं को मा के सिद्धिदात्री स्वरूप का पूजन करना चाहिए.

महिषासुरमर्दिनि मा दुर्गा को लाल पुष्प (कनेर), लाल वस्त्रा, शृंगार सामग्री, ईत्र और नैवेद्या तथा पैसे अवश्या चढ़ाएं.
सप्तमी, अष्टमी और नवमी के दिन कुमारी कन्याओं को खिलाएँ और वस्त्रा तथा लाल चूड़ी, लाल बिंदिया और नया बर्तन देने का प्रयास करें.
हो सके तो नये बर्तन मे ही खिलाएँ. यदि यह संभव ना हो तो कम से कम एक कन्या को देवी स्वरूप मान कर केवल उसे ही लाल सामग्री दें
क्योंकि मा को लाल रंग अत्यंत प्रिया है.

इस मंत्र का जाप करने से मा दुर्गा की पूजा का संपूर्ण फल प्राप्त होता है.

Om ain Hrim Klim Chamundai vichchai. Om Glaum hum klim jum sah jwalaya jwalaya jwal jwal prajwal prajwal aim hrim klim chamundai vichche Jwal ham sam lam chram phat swaha.

दुर्गा दुर्गतिशमनी दुर्गापड़नीवारिणि
दुर्गांचेदिनी दुर्गसाधिनी दुरगनशिनी
दुर्गत्ोधरिणी दुरगनिहांत्री दुर्गमपहा
दुर्गंग्यांदा दुर्ग्दैत्यलोक्दवनल
दुर्गामा दुर्गमलोका दुर्गामात्मस्वरूपिणी
दुर्गमरगपरा, दुर्गांविद्या दुर्गमशरिता
दुर्गंग्यांसंस्थाना दुर्गमध्यंभसिनी
दुर्गमोहा दुर्गंगा दुर्गमरतस्वरूपिणी
दुर्गमसुरसंहन्त्री दुर्गमयुध्ढारिणी
दुर्गामांगी दुर्गमता दुरगाम्या दुर्गमेश्वरी
दुर्गभिम दुर्गभमा दुर्गभ दुर्गदरिणी
नामावलिमीमं यस्तु दुर्गया मां मानवः
पठेत सर्वभयन्मुक्तो भवश्वती ना संशयहः

माता दुर्गा के इन बत्तीस नामो के उच्चारण करने मात्र से सभी प्रकार के भया का विनाश होता है.

Rudro Nar Uma Nari - Tasmai Namo Namah

July 20th, 2009

भगवान शंकर मृत्यु के भय को छुड़ाने वाले देव हैं. संसार में सबसे बड़ा भय मृत्यु का है. महामृत्युञ्जाया मन्त्र में यही प्रार्थना है कि ब्रह्मा विष्णु महेश के स्वरूप में आप सुगंधी और पुष्टि प्रदान करें. जब यह जीवन समाप्त हो जाए तो कोई कष्ट ना हो और बड़े आनंद के साथ इस जीवन यात्रा को छोड सकें जैसे उर्वारूक फल अपने वृक्ष से अनायास ही अलग हो जाता है.

इस बार सावन में भगवान को बिल्व पत्र इसी भाव से चढ़ाएँ कि मेरे पास चड़ाने के लिए और कुछ भी नही है हे आशुतोष हे भोले शंकर आप इसी से प्रसन्न होइए. भगवान शंकर पार्थिव हैं. अतः उनकी पूजा में भोग्य पदार्थों की आओॉष्यकता नहीं है. शिव की पूजा तो मानस पूजा भी की जा सकती है, और केवल जप पूजा भी.

भगवान शंकर की पूजा उनकी अकेले नाही होती है बल्कि उनके साथ पार्वती अर्थात उमा की भी पूजा होती क्योंकि भोलेनाथ तो अर्धनारीश्वर हैं. भगवान गणेश की भी पूजा और नंदी कि भी साथ मे होनी चाहिए.

उमामहेश्वर्ाभ्यं नमः. रुद्राभिषेक करते हुए प्रार्थन करें की .

बिलवा पत्रा के मध्यम से हम ट्रिताप ' दैहिक, दैविक और भौतिक तीनो तापों का संहार करने की प्रार्थना करते हैं. बिल्वा पत्र के तीन पत्तों के द्वारा हम भगवान शंकर से प्रार्थना करते हैं कि हमारे द्वारा जाग्रत, स्वप्न और सुषुप्त तीनो अवस्थाओं मे किए गये पापों का संहार करें.

Shiv Shankar

July 13th, 2009

श्री गणेशाय नमः
ओम नमः शिवाय, ओम नमः शिवाय, ओम नमः शिवाय

प्रभु से प्रार्थना
इतनी शक्ति हमें देना दाता मन का विश्वास कमजोर हो ना
हम चलें नेक रास्ते पे भूलकर भी हमसे कोई भूल हो ना

शान्ताकारम शिखर शयनम् नीलकंठम सुरेशम
विश्वधारम स्फटिक सदृशम शुभ्रा वर्णं शुभंगम
ग़ौरिकान्ताम त्ररित नयनम् योगिभीर्धयनगम्यम
वंदे शंभू भवभयहरम सर्वलोकैकणाथम.

भगवान शंकर को समर्पित इस श्रावण के महीने मे सभी शिव भक्तों का कैलाश्वसी जटाधारी दिगंबर गंगाधर भगवान पशुपत महेश्वर , सबका ¬कल्याण करें.
Maha Mrityunjay Mantra se Shiv Pujan Karen.

त्रयंबकम यजामहे सुगन्धिं पुष्टीवर्धनम उर्वारुकमिव बंधनांन मृत्योरमुक्षीय मा मृतात.
Rudro Nar Uma Nari Tasmai Tasyai Namo Namah

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काफी समय के बाद मैं पुनः वापस आने की कोशिश कर रहा हूँ.

Maghi Purnima

February 9th, 2009

Jai Ganga Maiya, Har Har Gangey,

Yes, This is Grand Finale of one month long Religious festival in Allahabad at the banks of Ganga, Yamuna and Sangam.Today is the last Bathing day of Kalpvaasis during one month stay. During this long month of Magh they performed Bathing and rituals, Ganga Aarti, Kirtan, Bhajan, RaasLila, Chanting of Mantra, Jap, Tap, Yagya. It looks easy to us but in fact it is an uphill task. It is really very hard to live under the open sky at the river side during winter and perform daily activities.  Though there was no rain this year yet many could not bear severe cold and departed.

Ganga Sindhushch Kaveri Yamuna ch Saraswati

Rewa Mahanadi Godavari Brahmputra Punatu Mam.

Kalpvaasis increases their intensity towards the ParmBrahm Parmatma & have been charged themselves for the rest of the year or to the rest of life for many. Sadhu - Sant, Akhara, Film stars, Tv Stars, Foreigners and common people all are benefited. Crores of ShivLingam is prepared and immeresed in Ganges. When water is sold in pouches and bottles, Lakhs of pilgrims took “Ganga Jal” to perform year long puja and offering at their home. They will took a drop of “Ganga Jal” to sanctify a large amount of water. That is the Power of “Ganga Maiya”.

Business man opened their shop and sold Ram Nami Duptta, Kurta, Shirts, daily usage items, clothes, blankets, shawl. Children enjoyed picnic many times during this month. Young boys and girls, couple, old aged all enjoyed biking, driving, boating. Khadi Fashion show,  Large and small Jhula, Jaadu - magic, Exhibitions, Snacks, Paanipuri etc. etc. attracted peple of Allahabad not only for bathing but also for these too.

Kalpvasis will bow, salute and bathe today one more time as Chandra Grahan is being observed tonight. “Grahan ka Daan karo”, “Daan karo” So most of kalpvaasis will donate money and grains leftover. Anna  Daan is Mahadan to the needy. Pandas, Ghatias & Beggers benefited with lots of money and food for their hard times. This Magh Mela brings success in the form of spiritual knowledge and worldly material to many.

This City of Religion will now be dismantled and reunite to meet in the coming years again and again. Allahabad is ready to accept and greet their guests every time. That is Allahabad, The Prayag, The Tirth Raj. The Kumbh Nagari.

Thanks to the Govt. Officials - who arranged all the civil amenites; Police Personnel, Military Personnel - who kept vigil and safety & security;  Railways, Transport- who bring pilgrims from all the corners of the country; Hospital - Doctors who served. Lalu ji Tent House - who arranged tent houses & ”Kutia”, Asha & Co. - who manages loudspeaker service sigle handedly since independence, Fire Fighters, Rescue personnel, Social organisations & all those unsung heroes whose dedication and hard work (Rickshaw wala, Boatman, Tempo & Taxi Drivers, Labours, Workman) made it grand success.

Gangey Tav Darshnat Mukti.

 

Vasant Panchami

January 30th, 2009

वसंत पंचमी हमारे देश में धूमधाम और पूर्ण उल्लास से मनाया जाने वाला एक ऐसा पर्व है जो मा सरस्वती को समर्पित है. यद्यपि प्रयाग में माघ मास का प्रमुख स्नान पर्व है जिसमें लाखों श्रढालु गंगा में स्नान करते हैं- माघ शुक्ल पंचमी पूरे देश में वसंतोत्सव और विद्या की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती की पूजा अर्चना को समर्पित है.
भगवती सरस्वती की आराधना मा शारदा के रूप में भी बड़े उत्साह से किया जाता है. इस दिन मा सरस्वती की पूजा अर्चना करने से विद्या और ग्यान की वृद्धि होती है.

अतः छोटे बच्चों को अक्षर आरम्भ करवाया जाना चाहिए. परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए मा सरस्वती की कृपा चाहिए- अतः विद्यार्थियों को मा सरस्वती की पूजा वसंत पर अवश्य करना चाहिए.

भगवान गणेश बुद्धि के देवता हैं अतः उनकी पूजा सर्व प्रथम करें क्योंकि मा सरस्वती से प्राप्त ग्यान का प्रयोग हम बुध्दिमत्ता पूर्वक कर सकें. मा सरस्वती की पूजा के लिए पीले पुष्प, पीला चंदन का विशेष महत्व है- पीले चावल , केसर, दूध, पीले पकवान आदि का प्रयोग पूजा में अवश्य करें. वसंत के दिन पीला वस्त्र धारण करें.
सबसे पहले गणेश जी का आवाहन करें. आसन् प्रदान करे, और उनकी स्तुति करते हुए ध्यान करें. भगवान गणेश के द्वादश नामों का पाठ करें-

पुनः
मा सरस्वती का आवाहन करें, उन्हे आसन् प्रदान करें और मा का ध्यान करते हुए पूजा करें

या कुन्देंदु तुषार हार धवला या शुभ्रा वस्त्रा वृता
या वीणा वर दंड मंडित करा या श्वेत पद्मासना
या ब्रह्मा च्युत शंकर प्रभृतिभिदेर्वै सदावंदिता
सां मां पातु सरस्वती भगवती निःशेष जड़यापहा

पुनः —
शारदा शारदांभोज वदना वदनांबुजे .
सर्वदा सर्वदा स्माकं सान्निधिं सान्निधिं क्रियात

पुनः —
शुक्लां ब्रहम विचार सार परमामाद्याम जग्द्व्यापिनि
वीणा पुस्तक धारिणीमभयदां जाड्यांडकारापहामम्
हस्ते स्फटिक मालिकम च दधतीं पद्मासने संस्थिताम्
वंदे तां परमेश्वरी भगवतीं बुद्धीप्रदां शारदां

पुनः —
लेखनी अर्थात कलम - दावात की पूजा करें- पुस्तक की पूजा करें - क्योंकि मा ग्यान दायिनी हैं -

संगीत के देवी मा सरस्वती से गीत संगीत वाद्य में पूर्ण सफलता की कामना करते हुए अपने वाद्यों की भी पूजा अर्चना करें-

मा सरस्वती वीणा और पुस्तक धारिणी हैं- सांसारिक ग्यान, विग्यान और कला की अधिष्ठात्री देवी हैं. मा शारदा के स्वरूप में बुध्दि प्रदायिनी हैं. जो ग्यान-विग्यान का सही ढंग से प्रयोग करना सिखाती हैं.
हे कमल पर विराजमान पद्मासना मा ! ए हंस वाहिनी मा सरस्वती हमे विवेक प्रदान करो जैसे कि आपका हंस पानी में से दूध को निकल कर उसका पान करने की सामर्थ्य रखता है-
वकील , डॉक्टर, इंजिनियर, लेखक, पत्रकार, विद्यार्थी सभी मा से प्रार्थना करें की मा हमारी कलम में वह ताकत भर दो जिससे पूरी दुनिया में हमारी पताका फ़हराए. क्योंकि
A king is respected in his own state whereas a learned man is respected in the whole world.
बोर्ड की परीक्षा या प्रतियोगी परीक्षा में बैठने वाले च्छात्र अपने नाम रोल नंबर लिख कर मा के चरणों के पास रखें और मा से सफलता की कामना करें.

इलाहाबाद मे ….. इस पर्व कि विशेषता अनूठी है —-

इलाहाबाद में वसंत पंचमी स्नान के साथ पतंग उड़ाने का भी दिन है और बच्चो और बड़ों में मी समान रूप से पतंग उड़ाने का पर्व है- पूरे दिन रंग बिरंगी पतंगें आसमान मे उड़ती रहती हैं - लाल, पीली, मत्तेदार, चाँद तारा, छुरिदार आदि के संबोधनो से पुकार होती है
वह काटा, वाह काटा !! का शोर सुनाई पड़ता है. महिलाएँ और लड़कियाँ भी इसमें खूब हिस्सा लेती है- छत पर पूरा परिवार का जमावड़ा रहता है

वसंत पंचमी के ही दिन महामना मदन मोहन मालवीय ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालया की स्थापना की थी. जिनका जन्म इलाहाबाद के आहियापुर मोहल्ले में हुआ था.

वसंत पंचमी के दिन महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी “निराला” जी का जन्म हुआ था. और आपका निवास इलाहाबाद के दारागंज मोहल्ले में था जो माघ मेला क्षेत्र में गंगा जी के तट पर है.

विशिष्ट –

वसंत का यह पर्व हमारे देश में इसलिए और भी महत्व पूर्ण है क्योंकि यह वसंतोत्सव का पर्व है- अर्थात प्रेम का, अनुराग का, उल्लास का पर्व- और वह भी पति व पत्नी के बीच के पवित्र संबंधों का, जो सभी संबंधों में सबसे बढ़कर विश्वास का, जन्म जन्मान्तर का संबंध है. यह धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष में काम का संबंध है- इस के देवता हैं भगवान कामदेव और रति. पीले-पीले रंगों में सजे स्त्री-पुरुष इस मदनोत्सव का भी भरपूर आनंद लेते है-

पश्चिम का वॅलिंटाइन डे तो अब शुरू हुआ है जबकि मदनोत्सव भारत की संस्कृति में घुला हुआ एक पवित्र पर्व है
भारत में मदनोत्सव का यह पर्व अपने पूर्ण खुमार में होली तक विराजमान रहता है क्योंकि होली एक ऐसा पर्व है जब बाबा भी लागे देवर होली में.

विशेष –

जिन कन्याओं का विवाह में विलंब हो रहा हो, और शीघ्र विवाह चाहते हैं या जिन दंपत्ति को संतति की चाह हो वो इस मंत्र का जप कर सकते है-

सिन्धूरपत्रम रतिकाम देहम् .
दिव्यांबरं सिंधु सामिहीतागम .
सांध्यरूणाम् धनु पंकजपुशप बानं .
पंचायुधं भुवन मोहनमोक्षणार्थम् .
‘Flain’ मन्मथाय . महाविष्णुस्वरूपाय.
महाविष्णुपुत्राय . महापुरशाय् .
पतिसुखम मे देहि देहि .

Mauni Amavsya Somvati Amavas

January 25th, 2009

Har Har Gangey 

 

During Magh Mela at Allahabad Mauni Amavasya is the day when number of devotees increases in many folds; to take a holi dip in Ganga, Yamuna and Sangam at Prayag. Magh is one of the most sacred months among the devotee Hindus. The uniqueness of this festival is apparent since it is the only sacred day on which the holy men and devotee remain silent. Silence has great power to recoup one’s concentration and observation, if not complete silence but try to less talkative.

 

The Merit of Mauni Amavsya : Once a family of brahman was tested the devotion by God. A begger told brahmin that his daughter would be widow. And this course will be changed only if any one observe Mauni Amavsya Snan and Vrat and gives punya to the deceased. After the marriage his daugher widowed. So her parents gave Mauni Amavsya punnya to her husband. After doing so Husband of their daughter got life.

 

This year Manuni Amavsya falls on Monday, 26 January 2009, making it Somvati Amavsya. Surya Grahan is also conciding this day so its significance infinitely multiplied. Bathing on this day in the holy waters like river Ganges, eating selective food items like fruits or kootu-flour-made items etc, visiting temples and religious shrines and listening to the discourses of the holy men is said to be greatly merit-bestowing.

 

Bhishma Pitamah in Mahabharat narrated the significance of Somvati Amavasya as Who takes a bath in the sacred rivers on this day would be prosperous, free of diseases and would be free from grief and sorrow. There is also a popular belief the soul of ancestors will rest in peace if children and relatives taking a holy dip in the sacred rivers in their names.

 

Married women take the holy dip for a happy married life and for the long life of their husbands. They also worship the pipal tree on this day.

 

Taking bath on Mauni Amavasya day is said to give great religious merit. Aspirants come here and stay for a full mouth of Magh and practice prescribed rituals and ceremonial sacrifices. This stay is termed as “Kalpvaas”. Throughout the whole month religious discourses, kirtan bhajan and ’satsanga’ keep on taking place to the great advantage of the devotees. They stay there taking only frugal diet of fruits etc. and drinking some milk. Brahmans and other deserving persons are given Daan, as in Kaliyug “Daan” is highly auspicious.

 

Gangay Tav Darshnat Mukti.

 

Happy Republic Day

 

Surya Puja va Chandra Darshan Karen

January 13th, 2009

14 जनवरी 2009 : आज दो मुख्य पर्व हैं. 1- मकर संक्रांति और 2- गणेश चतुर्थी : दोनो ही पर्वों का बहुत ही महत्व है. जहाँ दिन में मकर संक्रांति में सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेगा और स्नान व तिल दान का महत्व है.
वहीं रात्रि में चंद्र दर्शन और गणेश पूजन का महत्व है . जो माता अपने पुत्रों के लिए आज व्रत रख रहीं हैं वो खीचिडी आदि का दान तो कर सकतीं हैं किन्तु गणेश चौथ का व्रत होने के कारण खीचिडी नहीं खा सकती हैं. क्योंकि उन्हें रात्रि तक व्रत रखना है-

माता पार्वती ने भी भगवान शंकर के कहने पर माघ कृष्ण चतुर्थी को संकष्ट हरण श्री गणेश जी का व्रत रखा था. फलस्वरूप उन्हें गणेश जी पुत्रस्वरूप में प्राप्त हुए. भगवान शंकर के मस्तक पर सुशोभित होने वाला चंद्रमा आज के दिन श्री गणेश भगवान के मस्तक पर विराजमान होता है. इसलिए आज चंद्रा दर्शन का अर्थ है श्री गणेश भगवान के दर्शन होना.

माघ कृष्ण चतुर्थी को पुत्रवती माताएँ अपने पुत्रों की रक्षा एवं मंगल कामना के लिए गणेश चौथ का व्रत रखतीं हैं. जातरी मे चंद्रोदय होने पर मिट्टी की गणेश भगवान की मूर्ति बनाकर उसे पीढे पर स्थापित करें. गणेश जी के साथ उनके आयुध और वाहन भी होने चाहिए-
चंद्रोदय होने के उपरांत —
Aum Gam Ganpataye sayaudh savahan Eiha aagach Eih Tisth

से आवाहन करके गणेश भगवान को प्रतिष्टित करें. पुनः मन्त्र से स्तुति करें.

गणेशाय नमस्तुभ्यं सर्वसिद्दिप्रदायकम.
संकष्ठ हरणं मे देव गृहानार्घः नमोस्तुते -
कृष्ण पक्षे चतुर्थ याँ तू सम्पुजितिम विधुदये.
क्षिप्रं प्रसीद देवेश गृहानार्घः नमोस्तुते -

इसके साथ ही गणेश भगवान को अतिप्रिय चतुर्थी तिथि का भी पूजन अर्चन करना चाहिए

तिथिनामुत्तमे देवी गणेश प्रियेवाल्लभे-
सर्वसंकट नाशाय गृहण अर्घ्य नमोस्तुते .
“चतुर्थ येई नमः ” इदम् अर्घ समर्पयामि

मोदक तथा गुड मे बने तिल (सफेद) के लड्डू और मगदल का नैवेद्या अर्पित करें- चावल के लड्डू भी चढ़ाएं.
चंद्र दर्शण करें और चंद्रमा को भी अर्घ्या प्रदान करें. क्योंकि इस दिन भगवान गणेश चंद्रमा को अपने मस्तक पर धारण करतें हैं.

भाद्रपद शुक्ला पक्ष की चतुर्थी को जिसने भी चंद्रा दर्शन किया हो उसे कलंक अवश्य लगता है- इस कलंक से बचने के लिए माघ कृशन पक्ष की चतुर्थी को जो भी गणेश भगवान का पूजन और चंद्रा दर्शन करता है , दूर्वा और गुड मिश्रित जल गणेश भगवान पर चढ़ता है , संकष्ट नाशन गणेश स्तोत्र का पाठ करता है उसे इस कलंक से छुटकारा मिल जाता है -

स्यमन्तक मन्नि वाली कथा भी पढ़नी चाहिए
—- (Dekhiye —– “Aaj Chand ko mat dekhna” - 3 Sep 2008 ” My post “)

श्लोक इस प्रकार है –

सिंह प्रसेन्मवधीत' सिंहो जांबवता हतः:

सुकुमार्क मया ऱोदिस्तव, हयेश स्यमन्तकः: