Friends' Update
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गीरते टूटते बीखरते ख्वाव ,
उम्मीदों के दायरे मे सीमटते ख्वाव !
बोझल पलकों से आखों मे उतरते ख्वाव ,
आखों से फीर दील तक पहुँचते ख्वाव !
दील मे रचते बसते खीलते ख्वाव ,
फीर दील ही दील मे घुटते सीसकते ख्वाव !
हरेक तनहा आँखों मे बसते ख्वाव ,
आँसू बनकर कभी बरसते ख्वाव !
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– August 19, 2007
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– August 19, 2007
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– August 19, 2007
इतनी बड़ी भीड़ में एक अजीब सी घुटन है
जाने क्यों दुनीया यहाँ पैसों के पीछे दौड़ती है
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– August 19, 2007
दूर नज़र आ रही हैं मंजील के सफ़र अब तय होने को ह
ैतू ऐसे ना देख मुझे हमराही के दील अब मेरा रोने को है
बीछडे जो अब हम तो ना जाने फीर कब मीलेंगे
ए मेरे हमराही मुमकींन यही है की अब ख्वावों मे मीलेंगे
मत कहो कुछ होटों से के ये नजरें सब बता रहीं है
दील मे छीपे हैं कीतने ही राज के सभी से परदे उठा रहीं हैं
आप से बीछड्नै का कीतना है गम हमको
की अब ये ऑंखें नम होती ही जा रहीं है
जाते हो तो जाओ पर इतना तो बताते जाओ
क्या अपको भी हमारी याद इतना ही सता रही है !
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– August 19, 2007
चल -चल कर आगे बड़ते हैं , आगे बड़-बड़ कर सफ़र तय करते हैं ,
जी-जी कर मरते जाते हैं , मर-मर कर जीते जाते हैं ,
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– August 19, 2007
वो सुबह फीर आएगी …वो सुबह फीर आएगी
सुबह जीसने हर लीये थे अपने सारे गम ,
सुबह जीसने कर दीं थी परेसानीयां सारी कम।
तू क्यों घबराता है देखकर इस अन्धीयारे को,
की वोह सुबह फीर आकर दीये जला जायेगी।
वो सुबह फीर आएगी …वो सुबह फीर आएगी।
सूरज की पहली कीरन के साथ देगी वो दस्तक,
की खुसीयों की नदीयां लेकर आएगी वो घर तक।
हे अगर वीश्वास तुझे उस सुबह पर,
तो देख वो आकर तुझे जगा जायेगी।
वो सुबह फीर आएगी …वो सुबह फीर आएगी।
अगर कर सकता हे इन्तेजार तो कर,
के उससे दूर नहीं अब तेरा नगर।
तू नींद से उठकर देख सकता हे अगर ,
तो देख वो तेरे नगर खुसीयों के फूल खीला जायेगी।
वो सुबह फीर आएगी …वो सुबह फीर आएगी
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– August 19, 2007
तुम्ही से तो है जीवन तुम्ही से तो हंसी,तुम्ही ने तो भर दी है जींदगी मे कह्क्सी।
तुम जो ना होतीं तो ये जींदगी वीरान होती,
मुस्कुराहटों के पीछे छीपी खामोशी के समान होती।
तुम्हे पाकर ही तो जींदगी मे हरेक चीज पाई हे,
तुम्हे देखकर ही तो मंजीलें खुद- ब -खुद पास आयीं हे।
तुम्हारे आने की आहट से खिल जाती हैं मुर्झाईं कलीयां,
तुम्हारे गुजरजाने से रोशन हो जाती हैं सुनसान गलीयां।
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– August 19, 2007