Archive for October, 2009
TUUFAAN ………..!!!!!!!!!!!!!
Posted by Aameen Khan in Fantasy on October 30th, 2009
समंदर में आता ज्वार और
उसकी सीमा लाँघ जाने का तूफ़ान
सबकूछ समर्पित कर देने का तूफ़ान
बरसोंकी अनावृष्टि के बाद
बारिश का अनाराधर बरसने का तूफ़ान
सुशूप्त नीशा के अन्धकार में
बिजली के चमकने का तूफ़ान
हजारो मिल दूर होते हुए भी
तनमन से पास होने का तूफ़ान
ज़ज्बातों को काबू मे न रख कर
स्पर्श की अनुभूति को महसूस कर
ऊनकी बाहों में खो जाने का तूफ़ान
कूछ न करते हुए भी,
बेखबर प्रिय को दिल की हकीकत से
खबर करने का तूफ़ान
इस तूफ़ान मे उनके साथ बहक
जाने का तूफान
और
इस तूफ़ान को शांत करता हुआ
Samandar main aata jwaar aur
Usaki seema laangh jaane ka tuufaan
Sarvaswa khokar pyar main priya ko
Sabkuuchch samarpit kar dene ka tuufaan
Barasonki anavrushti ke baad
Bearish ka anaraadhar barasney ka tuufaan
Sushuupt niisha ke andhakaar main
Bijali ke chamak ney ka tuufaan
Hazaro mil duur hotey hue bhi
Tannmann sey paas hone ka tuufaan
Zazbaaton ko kaabu may na rakh kar
Bahuut kuuchch kah jaaney ka tuufaan
Sparsh ki anubhuti ko mahsuus kar
Uunki baahon main kho jaaney ka tuufaan
Kuuchch na kartey hue bhi,
Bekhabar priya ko dil ki haqeeqat sey
Khabar karaney ka tuufaan
Iss tuufaan may unkey saath bahaq
Jaaney ka tuufan
aur
Iss tuufaan ko shaant karata hua
Uunka pyaar
PREM ……….MERI NAZAR SEY !!!
Posted by Aameen Khan in Blogs on October 29th, 2009
दो पक्षी साथ-साथ प्रेम की डोर में बंधे, आकाश में उड़ते है. प्रेम उनके पंख नहीं काटता, केवल साथ-साथ उड़ने की प्रेरणा देता है. कभी आपने सोचा है, की इतने बड़े आकाश में दोनों पंखी साथ-साथ कीस्लीये उड़ते है? .. केवल इसलिये की आकाश का भारी सूनापन ऊनके पंख को भारी न कर दे और वे थककर गीर ना जाए. इक दूसरे को देखते हुए वे इतने सूनसान आकाश की दूरी को तय कर जाते है.
मनुष्य की जीवन यात्रा भी अकेले नहीं कटती. उसे भी कीसीका सहारा चाहीये. पूरूष को प्रेमार्त स्त्री और स्त्री को प्रेमार्त पूरूष के सहारे से बड़ा सहारा और कोई नहीं हो सकता.
मगर जीवन की इस कठीण यात्रा को हम अपना अनूकूल साथी पाकर ही आसान बना सकते है. साथी तो संसार में बहूत मिलते है. लेकीन वे, प्रायः अपने स्वार्थ के साथी होते है. वे कीसी विशेष अभी-प्राय से ही हमारे साथ कूछ देर चलते है , और अभिप्राय पूरा होने के बाद वे अपने मार्ग पर चले जाते है . ऐसे क्षणिक साथीयों से हम एकाकी चलना अधीक पसंद करते है, क्यों की वे साथी कूछ लेने के अभिप्राय से आते है. उनका साथ केवल कूछ देर की शारीरीक निकटता होती है. हमारी आत्मा उनके संपर्क में नहीं आती, उसके द्वार बंद ही रहते है.
सच्चा साथी वही है, जिसके लिये हमारी आत्मा के द्वार अपने आप ही खूल जाए. जो कूछ लेने के लिये नहीं, बल्की केवल साथ चलानेके लिये ही चले; जिसके साथ चलने का मूल्य ना चूकाना पड़े; जिसके साथ हमारे कदम खूद मील जाए; मिलाने kee कोशीश न करनी पड़े. ऐसा साथी ही सचा साथी होगा.
चमकते चहेरे ही देखनेवालों को मूग्ध करते है, अथवा, स्वस्थ या सूडोल शरीर में ही सम्मोहन की शक्ती होती है, यह समज़ना बेवकूफी है. सून्दरता का माप प्रायः, कीसी वस्तू में नहीं, देखनेवालों की नज़र से होता है. सौंदर्य की परिभाषा आजतक नहीं हो सकी. जीन आँखों को जैसा रूप पसंद आता है, उसके लिये वही सूंदर बन जाता है. इस प्रथम दर्शन को ही हम प्रेम का आधार नहीं मान सकते, यहाँ यह कह सकते है की, यह आकर्षण ही प्रेम की पहली सीधी है.
प्रेम कोई बीजली नहीं है, जो इक बार चमक कर बादलों में ओझल हो जाए. यह तो वह दीपक है , जीसे बड़ी लगन से जलाया जाता है, ह्रिदय के स्नेह से भरा जाता है और आत्मा के प्रकाश से उसकी लौ को प्रदीप्त कीया जाता है. संसार के झोंके उसे बूझाने आते है तो बड़े साधनाओं से उसकी हिफाज़त की जाती है.
……………………………….. aameen
KI……MUJHAKO NIND AATI HAI !!!
Posted by Aameen Khan in Fantasy on October 28th, 2009
आज की रात अब न छेडो मुझे तुम्हारे सिनेपर
सर रखकर सोने दो मुझे
की मुझे नींद आती है
तुम्हारी खुशबू से
जन्नत मे होने का एहसास होता है
इस महक से मदहोश होने दो मुझे
की मुझको नींद आती है
बस अब कोई और बात न करो
तुम्हारी धड़कनों का संगीत सुनने दो मुझे
की मुझको नींद आती है
चाँद की चांदनी भी चुभती है आज की रात
अपनी जिस्म के ओट में छुपालो मुझे
की मुझको नींद आती है
जुल्फें गर बिखरी है मेरी
हौले से इन्हें दूर करते करते चूमलो मुझे
की मुझको नींद आती है
न मेरी चूडियों को खनकाओ
न मेरे आंचल से खेलो
हवाओं की ठंडक से
कुछ सिहरता है जिस्म मेरा
अपने बदन की आंच का लिहाफ उढाओ मुझे
इक बंदगी की तरह
जिस्म-ओ-जान और जिंदगी सौप दी है तुमको
अपने स्पर्श से मेरा यकीं बढाते रहो
की मुझको नींद आती है
अध् खुली आँखों से
जी भरके देखलूं मैं तुम्हे
तुम्हारी आँखों से झरते
प्यार के अमृत को पिने दो मुझे
की मुझको नींद आती है ……………
………………………………………aameen
DIL KI BAAT
Posted by Aameen Khan in Fantasy on October 27th, 2009
जब भी आहट किसीकी सुनता हूँ
या सुनता हूँ पत्तों की सरसराहट
या परदों का आपस में टकराना
पल भर के लिये, एहसास होता है
तुम्हारे आसपास होने का
जब की मुजे पता है,
बहूत दूर हो तुम मुज़से
चाह कर भी आ नहीं सकती
लेकीन दिल है की इसे नहीं मानता
दीमाग को हमेशा उलझन में है डालता
और मजबूर करता की, कहो ..
तुम मेरे आसपास हो,
मुजे यह एहसास हमेशा दिलाता है की तुम
यही हो, मेरे आसपास, मेरे करीब .
……………………………………..aameen
ISHQ
Posted by Aameen Khan in Fantasy on October 26th, 2009
VOH !!!!!!
Posted by Aameen Khan in Fantasy on October 23rd, 2009
जब भी हम उस रास्ते से गुज़रते है
तब हमारी आंखे उन्हे ढूँदती है
और हम उनकी इक झलक पाने को तरसते है
गम हमे इस बात का नहीं की वोह हमे
देखकर खिड़की बंद कर देते है .
मगर इस बात की खूशी है हमे की ..
वोह दूर से ही हमे पहचान तो लेते है.
………………………………………………aameen
TERI NAZAR SEY MERI NAZAR
Posted by Aameen Khan in Fantasy on October 22nd, 2009
तूम्हारी इन हसीन नज़रों से
कूछ बाते कर रही है मेरी नज़र
दूर हो बहुत मुजसे मगर
फीर भी मूलाकात कर रही है मेरी नज़र
नशीला सा है यह आलम
बन गया है आवारा मौसम
पागल है यह बदलिया
मस्ती के लगे है मेले
हम तुम अकेले . मगर
उफ़ यह तनहाईया
धडके है यह आवारा दिल
इक नयी अदा से
सूनाता है यह दिल की कहानी
तुमको अपनी नज़रों की जुबा से
और
तुम्हारी नज़र से मेरी यह नज़र
कूछ हँसी बाते कर रही है …………..
……………………………..aameen
ZEEDD
Posted by Aameen Khan in Fantasy on October 21st, 2009
तुमसे प्यार की मांग कर बैठे
कैसी है यह वीतंबाना की
जिसे समजते थे प्रणय का इलाज़
वही आज नासूर बन बैठा
ऐसा नहीं है की तुम्हारी वेदना नहीं समजते
मगर
……………………………………………aameen
VOH KAUN HAI????????
Posted by Aameen Khan in Fantasy on October 20th, 2009
दिल की बात आँखों की जुबानी कह गया वोह कौन हैं ?
रातों की नींद, दिल का चैन चूर गया वोह कौन है ?
ढूँड रही थी आँखे मेरी जिसको बरसों से
यूं अचानक सामने आ गए वोह कौन है ?
आंखे मिली न मिली और यूँही झूक गयी
हर अदा से दिल बहला गयी वोह कौन है ?
वही उमंग वही अदा, ऐसा सलोना रूप है
दिल मे प्रेम की लहर जगा गया वोह कौन है ?
था चारो और घनघोर अँधियारा
फलक पर बिजली की तरह चमक गया वोह कौन है?………………
…………………………………………………….aameen
TUUMHAARE LIYE
Posted by Aameen Khan in Fantasy on October 16th, 2009
कुछ इस तरह यह ग़ज़ल लिखी है मैने
की तूम्हे ही इस में ऊतारा है मैने
हाज़िर हो तुम फीर क्या काम है गूल-ए-गुलिस्तान का
वादियाँ यूं ही नहीं महक रही
तूम्हारे संदली देह की खूशबू लिखी है मैने
इस छलकाते सागर से क्या फर्क होगा
यहाँ रेत के कण कण में तूम्हारी प्यास लिखी है मैने
तुम हो तो अस्तित्व है मेरा, मेरी ग़ज़ल का
बाक़ी लफ्जों से ज्यादा कहा कोई बात लिखी है मैने.
…………………………………………………………….aameen
THIS IS FOR THOSE WHO CAN’T READ HINDI……
Kuuchch iss tarah yeh gazal likhi hai mainey
Ki tuumhey hi iss main uutaara hai mainey
Haazir ho tuum pheer kya kaam hai guul-e-gulistan ka
Ki tuumharey hi ruup-saundarya ki mausam likhi hai mainey
Vaadiyaan yuun hi nahi mahak rahi
Tuumharey sandali deh ki khuushbu likhi hai mainey
Iss chchalkaatey saagar sey kya fark hoga
Yahaan ret ke har-ek kann main tuumhari pyaas likhi hai mainey
Tuum ho to astitva hai mera, meri gazal ka
Baaqi lafjon sey jyaada kaha koyi baat likhi hai mainey.
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