Archive for October, 2009

TUUFAAN ………..!!!!!!!!!!!!!

समंदर में आता ज्वार और

उसकी सीमा लाँघ जाने का तूफ़ान

सर्वस्व खोकर प्यारमें प्रिय को

सबकूछ समर्पित कर देने का तूफ़ान

बरसोंकी अनावृष्टि के बाद

बारिश का अनाराधर बरसने का तूफ़ान

सुशूप्त नीशा के अन्धकार में

बिजली के चमकने का तूफ़ान

हजारो मिल दूर होते हुए भी

तनमन से पास होने का तूफ़ान

ज़ज्बातों को काबू मे न रख कर

बहुत कूछ कह जाने का तूफ़ान

स्पर्श की अनुभूति को महसूस कर

ऊनकी बाहों में खो जाने का तूफ़ान

कूछ न करते हुए भी,

बेखबर प्रिय को दिल की हकीकत से

खबर करने का तूफ़ान

इस तूफ़ान मे उनके साथ बहक

जाने का तूफान

और

इस तूफ़ान को शांत करता हुआ

ऊनका प्यार…………………..
आमीन

Samandar main aata jwaar aur

Usaki seema laangh jaane ka tuufaan

Sarvaswa khokar pyar main priya ko

Sabkuuchch samarpit kar dene ka tuufaan

Barasonki anavrushti ke baad

Bearish ka anaraadhar barasney ka tuufaan

Sushuupt niisha ke andhakaar main

Bijali ke chamak ney ka tuufaan

Hazaro mil duur hotey hue bhi

Tannmann sey paas hone ka tuufaan

Zazbaaton ko kaabu may na rakh kar

Bahuut kuuchch kah jaaney ka tuufaan

Sparsh ki anubhuti ko mahsuus kar

Uunki baahon main kho jaaney ka tuufaan

Kuuchch na kartey hue bhi,

Bekhabar priya ko dil ki haqeeqat sey

Khabar karaney ka tuufaan

Iss tuufaan may unkey saath bahaq

Jaaney ka tuufan

aur

Iss tuufaan ko shaant karata hua

Uunka pyaar

………………………………….aameen

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PREM ……….MERI NAZAR SEY !!!

वह प्रेम नहीं जो दूसरों की स्वतन्त्रता का अपहरण करता है. प्रेम तो दो स्वतंत्र ह्रीदयों की स्वेच्छा-मिलन से ही होता है. बेबस होकर कीसीके कदमों में गिरना गूलामी है, प्रेम नहीं. प्रेम गिरना नहीं, ऊठाना सीखाता है, बंधना नहीं आजाद होना सीखाता है.

दो पक्षी साथ-साथ प्रेम की डोर में बंधे, आकाश में उड़ते है. प्रेम उनके पंख नहीं काटता, केवल साथ-साथ उड़ने की प्रेरणा देता है. कभी आपने सोचा है, की इतने बड़े आकाश में दोनों पंखी साथ-साथ कीस्लीये उड़ते है? .. केवल इसलिये की आकाश का भारी सूनापन ऊनके पंख को भारी न कर दे और वे थककर गीर ना जाए. इक दूसरे को देखते हुए वे इतने सूनसान आकाश की दूरी को तय कर जाते है.

मनुष्य की जीवन यात्रा भी अकेले नहीं कटती. उसे भी कीसीका सहारा चाहीये. पूरूष को प्रेमार्त स्त्री और स्त्री को प्रेमार्त पूरूष के सहारे से बड़ा सहारा और कोई नहीं हो सकता.

मगर जीवन की इस कठीण यात्रा को हम अपना अनूकूल साथी पाकर ही आसान बना सकते है. साथी तो संसार में बहूत मिलते है. लेकीन वे, प्रायः अपने स्वार्थ के साथी होते है. वे कीसी विशेष अभी-प्राय से ही हमारे साथ कूछ देर चलते है , और अभिप्राय पूरा होने के बाद वे अपने मार्ग पर चले जाते है . ऐसे क्षणिक साथीयों से हम एकाकी चलना अधीक पसंद करते है, क्यों की वे साथी कूछ लेने के अभिप्राय से आते है. उनका साथ केवल कूछ देर की शारीरीक निकटता होती है. हमारी आत्मा उनके संपर्क में नहीं आती, उसके द्वार बंद ही रहते है.

सच्चा साथी वही है, जिसके लिये हमारी आत्मा के द्वार अपने आप ही खूल जाए. जो कूछ लेने के लिये नहीं, बल्की केवल साथ चलानेके लिये ही चले; जिसके साथ चलने का मूल्य ना चूकाना पड़े; जिसके साथ हमारे कदम खूद मील जाए; मिलाने kee कोशीश न करनी पड़े. ऐसा साथी ही सचा साथी होगा.

चमकते चहेरे ही देखनेवालों को मूग्ध करते है, अथवा, स्वस्थ या सूडोल शरीर में ही सम्मोहन की शक्ती होती है, यह समज़ना बेवकूफी है. सून्दरता का माप प्रायः, कीसी वस्तू में नहीं, देखनेवालों की नज़र से होता है. सौंदर्य की परिभाषा आजतक नहीं हो सकी. जीन आँखों को जैसा रूप पसंद आता है, उसके लिये वही सूंदर बन जाता है. इस प्रथम दर्शन को ही हम प्रेम का आधार नहीं मान सकते, यहाँ यह कह सकते है की, यह आकर्षण ही प्रेम की पहली सीधी है.

प्रेम कोई बीजली नहीं है, जो इक बार चमक कर बादलों में ओझल हो जाए. यह तो वह दीपक है , जीसे बड़ी लगन से जलाया जाता है, ह्रिदय के स्नेह से भरा जाता है और आत्मा के प्रकाश से उसकी लौ को प्रदीप्त कीया जाता है. संसार के झोंके उसे बूझाने आते है तो बड़े साधनाओं से उसकी हिफाज़त की जाती है.

……………………………….. aameen

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KI……MUJHAKO NIND AATI HAI !!!

आज की रात अब न छेडो मुझे तुम्हारे सिनेपर

सर रखकर सोने दो मुझे

की मुझे नींद आती है

तुम्हारी खुशबू से

जन्नत मे होने का एहसास होता है

इस महक से मदहोश होने दो मुझे

की मुझको नींद आती है

बस अब कोई और बात न करो

तुम्हारी धड़कनों का संगीत सुनने दो मुझे

की मुझको नींद आती है

चाँद की चांदनी भी चुभती है आज की रात

अपनी जिस्म के ओट में छुपालो मुझे

की मुझको नींद आती है

जुल्फें गर बिखरी है मेरी

हौले से इन्हें दूर करते करते चूमलो मुझे

की मुझको नींद आती है

न मेरी चूडियों को खनकाओ

न मेरे आंचल से खेलो

बस सुभाह तक हर पल प्यार करते रहो
की मुझको नींद आती है

हवाओं की ठंडक से

कुछ सिहरता है जिस्म मेरा

अपने बदन की आंच का लिहाफ उढाओ मुझे

की मुझको नींद आती है

इक बंदगी की तरह

जिस्म-ओ-जान और जिंदगी सौप दी है तुमको

अपने स्पर्श से मेरा यकीं बढाते रहो

की मुझको नींद आती है

अध् खुली आँखों से

जी भरके देखलूं मैं तुम्हे

तुम्हारी आँखों से झरते

प्यार के अमृत को पिने दो मुझे

की मुझको नींद आती है ……………

………………………………………aameen

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DIL KI BAAT

जब भी आहट किसीकी सुनता हूँ

या सुनता हूँ पत्तों की सरसराहट

या परदों का आपस में टकराना

पल भर के लिये, एहसास होता है

तुम्हारे आसपास होने का

जब की मुजे पता है,

बहूत दूर हो तुम मुज़से

चाह कर भी आ नहीं सकती

लेकीन दिल है की इसे नहीं मानता

दीमाग को हमेशा उलझन में है डालता

और मजबूर करता की, कहो ..

तुम मेरे आसपास हो,

और दीमाग ?????
बेचारा दिल के बहकावे में आकर

मुजे यह एहसास हमेशा दिलाता है की तुम

यही हो, मेरे आसपास, मेरे करीब .

……………………………………..aameen

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ISHQ

कहा खुदा ने मजनू से : क्या रखा था तेरी लयला में.
अगर इससे आधा भी प्यार तू करता मुजसे तो
पंहुचा देता तुझे जन्नत में.
सुनकर बात खुदा की
कहा मजनू ने :
अय मेरे यार, मेरे प्यार की मेरे परवर दिगार
तू चाहता है की में करू तेरी आधी इबादत,
या करू तुजसे आधा इश्क या आधा प्यार
तो बनकर आना था लयला ……………………
वोह खूदा थी मेरे लिए…
……………………………………………aameen

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VOH !!!!!!

जब भी हम उस रास्ते से गुज़रते है

तब हमारी आंखे उन्हे ढूँदती है

और हम उनकी इक झलक पाने को तरसते है

गम हमे इस बात का नहीं की वोह हमे

देखकर खिड़की बंद कर देते है .

मगर इस बात की खूशी है हमे की ..

वोह दूर से ही हमे पहचान तो लेते है.

………………………………………………aameen

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TERI NAZAR SEY MERI NAZAR

तूम्हारी इन हसीन नज़रों से

कूछ बाते कर रही है मेरी नज़र

दूर हो बहुत मुजसे मगर

फीर भी मूलाकात कर रही है मेरी नज़र

नशीला सा है यह आलम

बन गया है आवारा मौसम

पागल है यह बदलिया

मस्ती के लगे है मेले

हम तुम अकेले . मगर

उफ़ यह तनहाईया

धडके है यह आवारा दिल

इक नयी अदा से

सूनाता है यह दिल की कहानी

तुमको अपनी नज़रों की जुबा से

और

तुम्हारी नज़र से मेरी यह नज़र

कूछ हँसी बाते कर रही है …………..

……………………………..aameen

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ZEEDD

हम तो बच्चो जैसी जिद्द कर बैठे

तुमसे प्यार की मांग कर बैठे

कैसी है यह वीतंबाना की

हम तूम्हारी आफत बन बैठे

जिसे समजते थे प्रणय का इलाज़

वही आज नासूर बन बैठा

ऐसा नहीं है की तुम्हारी वेदना नहीं समजते

मगर हम तो हमारी ही जान दाव पर लगा बैठे…………

……………………………………………aameen

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VOH KAUN HAI????????

दिल की बात आँखों की जुबानी कह गया वोह कौन हैं ?

रातों की नींद, दिल का चैन चूर गया वोह कौन है ?

ढूँड रही थी आँखे मेरी जिसको बरसों से

यूं अचानक सामने गए वोह कौन है ?

आंखे मिली मिली और यूँही झूक गयी

हर अदा से दिल बहला गयी वोह कौन है ?

वही उमंग वही अदा, ऐसा सलोना रूप है

दिल मे प्रेम की लहर जगा गया वोह कौन है ?

था चारो और घनघोर अँधियारा

फलक पर बिजली की तरह चमक गया वोह कौन है?………………

…………………………………………………….aameen

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TUUMHAARE LIYE

कुछ इस तरह यह ग़ज़ल लिखी है मैने

की तूम्हे ही इस में ऊतारा है मैने

हाज़िर हो तुम फीर क्या काम है गूल-ए-गुलिस्तान का

की तूम्हारे ही रूप -सौंदर्य की मौसम लिखी है मैने

वादियाँ यूं ही नहीं महक रही

तूम्हारे संदली देह की खूशबू लिखी है मैने

इस छलकाते सागर से क्या फर्क होगा

यहाँ रेत के कण कण में तूम्हारी प्यास लिखी है मैने

तुम हो तो अस्तित्व है मेरा, मेरी ग़ज़ल का

बाक़ी लफ्जों से ज्यादा कहा कोई बात लिखी है मैने.

…………………………………………………………….aameen

THIS IS FOR THOSE WHO CAN’T READ HINDI……

Kuuchch iss tarah yeh gazal likhi hai mainey

Ki tuumhey hi iss main uutaara hai mainey

Haazir ho tuum pheer kya kaam hai guul-e-gulistan ka

Ki tuumharey hi ruup-saundarya ki mausam likhi hai mainey

Vaadiyaan yuun hi nahi mahak rahi

Tuumharey sandali deh ki khuushbu likhi hai mainey

Iss chchalkaatey saagar sey kya fark hoga

Yahaan ret ke har-ek kann main tuumhari pyaas likhi hai mainey

Tuum ho to astitva hai mera, meri gazal ka

Baaqi lafjon sey jyaada kaha koyi baat likhi hai mainey.

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