Archive for November, 2009
JAB MILEY HAMM AUR TUM !!!!
Posted by Aameen Khan in Fantasy on November 27th, 2009
चलो ये अच्छा हुआ की शब्दों का साथ् मिल गया
और खूद से ही खूद को प्यार हो गया
वर्ना इस दुनिया की अथाह भीड में
न जाने कहाँ गुम हो जाता
गज़ल, नज़्म या कविता की नही पहचान मुजे
आए कूछ दिल में जो लिखा मैने
वही आपके लिए गज़ल, नज़्म, कविता बन जाता.
गज़ल को मिले जब सूर तो महफिल सज जाती है
दिल को मिले दिल तो रब्ब से प्यार हो जाता है
और जब हमसे मिलते हो तुम
तो ये दूनिया रंगीन हो जाती है.
…………………………………..आमीन
INN AANKHON MAIN !!!!!!
Posted by Aameen Khan in Fantasy on November 26th, 2009
अदभूत सौन्दर्य है इन आखों में
गज़ब की खूमारी है इन आखों में
लज्जा से झूकी नशिली ये आँखे
एक नया सपना चमके इन आखों मे
मूहब्बत की हर ताबिर और मौन इशारा
चमके हर वक्त इन आखों में
धिर गम्भीर, चूलबूली तबस्सुम
कातिल शरारत चमके इन आखों में
चूपके से आकार चमके इन आखों में
खुदा के लिए ना ऐसे निहारो इन मदभारी आखों से
……………………………………….aameen
YEH VAADA RAHA
Posted by Aameen Khan in Fantasy on November 24th, 2009
चलो साथ दीलबर, ऐसी वादियों में
जहां आसमान ज़मीन को चूमता हो,
पहाड़ का पर्दा हो, की कहीं ज़मीन शर्मा न जाये
और हो हम और तूम, एक दूसरे की बाँहों में
एक दूसरे को सम्हाले, चले जा रहे
अगर ठोकर लगे तो मुजे सम्हालना तूम
अगर थक जाओ तुम बाहों में उठा लेंगे हम
और हम पार कर लेंगे यह सफ़र ज़िंदगी का
हो साथ साथ अगर तुम और हम
मत बिछड़ना बीच रास्ते में कहीं तूम
मत छोड़ना हाथ कहीं बीच रास्ते में तूम
ऐसा कूछ होनेसे पहले ही गूम हो जायेंगे हम
और अपनी नयी दूनीया में खो जायेंगे हम
मैं बन जाऊँगा आसमान और ज़मीन तूम …….
…………………………………………aameen
SIRF TUUMHARE LIYE
Posted by Aameen Khan in Fantasy on November 23rd, 2009
(THIS POEM IS FOR MY LOVELY WIFE ON HER
BIRTHDAY)
सामने जब तूम रहती हो प्रियवर
तो चाँद की चाँदनी का पता नहीं
खूशबू तूम्हारे तन की फैलती है
तो फूलों की सूवासिकता की खबर नहीं
नाजूक स्पर्श तूम्हारे हाथ का; और
चन्दन की शीतलता याद नहीं
तनमन का सौंदर्य है समीप तो
और कोई सूँदरता याद नहीं
प्रेम का भण्डार है करीब
और कोई खज़ाना याद नहीं
सूनता हूँ जब तूम्हारे पायल की रूणझुन
तो सात सूरों की याद नहीं
मीठी मधूर तूम्हारी बातें
और दूसरी मधूरता याद नहीं
बरसता है प्यार तूम्हारा मूझपर
और बरसात की मूज़े याद नहीं
आस हो मेरे जीवन की तूम
और कोई चाह मूज़े याद नहीं
…………………………………aameen
USKA MAUN!!!!!!!!!!!
Posted by Aameen Khan in Fantasy on November 21st, 2009
वोह इसलिए मौन है
क्योंकि वोह इकरार से डरती है
प्रेम नहीं है मुजसे तो
नफरत भी कहाँ करती है
मगर इसी बात के इकरार से भी डरती है
मिलती है वोह सबसे महफ़िल में
मगर नज़र मुजपर रखती है
फिर भी वोह इकरार से डरती है
लाख कोशिशों के बावजूद
अंत में सरिता तो सागर में ही समां जाती है
इसी के इकरार से भी वोह कतराती है
ना कोई जान पाता है
मगर मन मे छवि हमारी ही है
यह इकरार करेने से भी वोह लजाती है
इसीलिए वोह मौन रहती है
और उसके मौन की भाषा हमें
समझनी पड़ती है.
TUMHAREY AANESEY
Posted by Aameen Khan in Fantasy on November 20th, 2009
सफ़र मे था अकेला मैं
तूम मिले और साथ हो लिए
और पलभर की मुलाकात में
तूम बहुत कूछ कह गए
काँटों से भरी इस बगीया में
ना थी आस फूलों की
आकर बगीया मे तूम
इक मीठी खूशबू दे गए
दिल की बस्ती खाली थी
ना था कोई महेमान
पर तूम अचानक आकर
हमारी बस्ती में बस गए
सपने नहीं थे कोई भी
आप को देखकर जग गए
सपना बनकर आप
इन आँखों में बस गए
वैसे तो हमारी ज़िन्दगी
दूखों से भरी पड़ी थी
आप मिले जिस दिन से सफ़र में
दुःख की नदिया बह गयी
सुख का समंदर फ़ैल गया चारो ओर
OFF-BEAT INTERVIEW - EK INSAAN KA
Posted by Aameen Khan in Blogs on November 18th, 2009
(THIS BLOG IS ONES INNER FIGHT WITH HIS/HER SOUL)
नाम : इंसान
काम : स्वार्थ
शौक : कपट
अनुभव : इंसानियत को मारना
इच्छा ? महत्वाकांक्षा : पता नही
समस्त वातावरण शोकातुर. एक घटना घट गयी है,यहा. एक इंसान ने इंसान का खून किया है. बाकी सब इंसान स्तब्ध है. इंसान मर गया. मगर ऊसे मारनेवाला इंसान कौन?
ग़मगीन नीरवता को चीरती हुई एक राजकीय आवाज़ : चलो, हटो, दूर हटो, मंत्री जी आ रहे है.
जाँच करने के लीये दिया वचन, आश्वासन, क्रूत्रिम वातावरण और नीरवता को छोड़कर अपनी दिन चर्या मे बिखरे हुए इंसान.
समाचार का वक्त और इंसान मौन. इंसान के समाचार :……….. ज़ख्मी, मरे, लड़े, कटे, गीरे. बहरे कानो को छूती हुई एक सहानूभूति की लहर और फिर चाय की चूसकिया.
मैं, मौन क्यों हूँ?…………क्यों???????
क्यों……..मूझे कूछ नही होता?
मेरा खून किस लिए जम गया है?
मैं क्यों फ्रीज कोल्ड हो गया हूँ?
मेरी दादी माँ की कहानियों के इंसानो की तरह क्यों मैं घोड़े पर सवार होकर सात समंदर पार के राक्षस के पंजे मैं फसी राजकुमारी को बचा नही सकता?……………..क्यों?
मेरे आसपास के इंसानों के साथ मैं कैसी बनावट कर रहा हूँ?
दीवार की तरह, सीमेंट की तरह, पत्थर की तरह कठोर बन गया हूँ.
मूझपर क्यो कोई असर नही होता? मेरा किसी सा कोई लेनदेन नही.
ऊन इतिहास के पन्नो पर अंकित शूरवीर सच होंगे? प्रजापालक राजा
रात को भेस बदलकर प्रजा के सूख दूख के समाचार जानता है.
क्यों विश्वास नही होता ऐसी बातों का?
बिना ताले के मकान, विश्वास का सिंचन, समूनदर की गहराई जैसे
उदार और भोले भाले इंसान. मुफ्त खाना नही और अतिथि देवो भाव:. ओह माय गोड्ड. आय कांट बिलीव दिस.
भगवान का श्रेष्ठ सर्जन …………. इंसान !!!!
मानवता के लिए मर मिटनेवाला और इंसानियत के लिए जान छीदकने वाला इंसान आज कहाँ है?
इंसान !!!!!
आज धरती पर गंदगी की परत फैलाकर, समंदर को मैला कर के, आकाश पर अधिपत्य जमाने की धूंन मे अपनी इंसानियत को सम्हाल ना सका.
श…….शा……………….श………………. सावधान, विश्वास घात, दगा…………..
बी अलर्ट !!!! इंसान कन्फ्यूज हो गया है. वह सो नही सकता, मजे लूट नही सकता, क्योंकि इंसान डरा हुआ है, इंसान का नाम इंसान के हिट लिस्ट मैं है. इंसान अशांत है और शांति के लिए युध्ध की तैयारिया कर रहा है.
डर से घिरा हुआ, मानसिक विक्रूती से पीड़ित और फटे हुए चरित्र से गुनाहित ज़िंदगी को छुपाने का व्यर्थ प्रयत्न करता हुआ, …इंसान!!
इंसान खो गया है. …………………
फला उम्र का, फला प्रदेश का, फला धर्म का, फला कौम का………..
इंसान गुम हो गया है. यदि किसी को इंसान मील जाए तो उसे गूज़रिश है की इंसान को इंसान के पते पर जानकारी दे……..मुझे……
एक इंसान को ख्वाब आया……… सभी इंसान पक्षियों की तरह निस्वार्थ, मूक्त, …… मोर की तरह चहकते और तारों की तरह टिमटिमाते इंसान……….आआआआआआ हा हहहहहहहहहा!!!!!…..श्वान की तरह्व वफादार और विश्वसनीय…..इंसान…..अश्व की तरह शक्तिशाली, इंसान. हिरण और हंस की तरह सज्जन इंसान…….चिड़िया, गिलहरी की तरह निर्दोष और भोले भाले इंसान…!!!!!!!!!!!!
सरकती हुई रात के साथ ख्वाबो की यादे मीठी लगाने लगी और एक पल तो लगा की ईश्वर से प्रार्थना करे की इंसान की अदाकारी मैं निष्फल जाने के बदले मैं हमे पशु जन्म दे.
लेकिन यदि भगवान इंसान को पशू जन्मा देगा तो सत्य भड़क उठेगा और कहेगा की गूनाह गारों को इनाम?????????
नही………नही…… प्रभू!!! हमे इंसानियत को लज्जित नही करना है. मानवता का खून नही करना.
गूनाहों की रातो से, हरे भरे ख्वाबो से खिलती हुई इंसानियत की सुबह ले आ … प्रभू!!!
हमारे प्रायस्चित के लिए हमे इंसानियत के प्लेट फार्म पर एक बार फिर….. फिर एक बार इंसानियत का नाटक करने दे… प्रभू!! हम अपनी भूमिका निभाएंगे . हम आपके दिग्दर्शन मे बेस्ट एक्टिंग का एवार्ड जीत जाएंगे………………..
…………………………………………….आमीन
PADABHRASHTA !!!!!!!
Posted by Aameen Khan in Blogs on November 17th, 2009
(TO THIS ….. PLEASE GIVE YOUR TRUE FEELINGS, AS TO WHAT YOU FEEL)
संसार ने कहा : पथीक ! तूम कूमार्ग पर हो
पथीक ने नहीं सूना!
संसार ने फीर कहा : पथीक!! तूम पदभ्रष्ट हो
पथीक ने इस बार भी दूर्लक्ष कीया!
संसार ने फीर कहा :
पथीक ..अरे ओ पथीक !!!
तूम गलत रास्ते पर जा रहे हो, और अपने पद-चीन्हों से ऐसा रास्ता बना रहे हो, जो एक दिन तूम्हे सर्वनाश की और ले जायेगा.
मैं कूमार्ग पर हूँ, और समाज के लिये ऐसा पथ बना रहा हूँ, जो उसे सर्वनाश की और ले जाएगा.
परंतू तूमने तो एक दिन कहा था .. की मनूष्य जो भी करता है, कीसी अद्रृश्य की प्रेरणा से प्रेरित होकर ही.
तब
तूम्हारा उत्तर था : "इश्वर, सत्य, शिव, सूंदर.
फीर मैं भी तो स्वयं नहीं चल रहा हूँ .. चल रहा हूँ, केवल इसलिये की विवश हूँ; मनूष्य हूँ; जीवन हूँ .
और जीवन नाम ही है, चलने का.
फीर भी कीसी दूसरी और नहीं; उधर ही जा रहा हूँ —-जिधर पाँव लिये जा रहे है और बेचारे पाँव, मांस के दो टूकडे, क्या चलेंगे स्वयं???? वेह चल रहे है चलित होकर कीसी के प्रेरणा से ही
और उसका प्रेरक भी है कोई अद्रूश; जीसे
परंतू ..
हाँ !!!! तूम उसे कहते हो इश्वर, सत्य, शिव, सूंदर ..
फीर मेरे पाँव कूमार्ग पर कैसे??????? .
Sansaar ne kahaa : Patheek ! tuum kuumaarg par ho
Patheek ne nahee suunaa!
Sansaar ne pheer kahaa : Patheek! Tuum pada-bhrastha ho
Patheek ne ees baar bhee duurlaksha keeyaa!
Sansaar ne pheer kahaa :
Pathee ..areee O patheek !!!
Tuum galat raaste par jaa rahe ho, aur apane pad-chiinhon se aisaa raastaa banaa rahe ho, jo ek deen tuumhe sarvnaash kee aur lejaayegaa.
Patheek ne suunaa; vah muuskuuraayaa, aur kahane lagaa :
Main kuumaarg par hoon, aur samaaj ke leeye aisaa path banaa rahaa hoon, jo oose sarvanaash kee aur le jaayegaa.
Parantoo tuumne to ek deen kahaa thaa ..kee manuushya jo bhee karataa hai, keesee adruusha kee preranaa se prereet hokar hee.
Tab
Tuumhaaraa uuttar thaa : "Ishwar, SATYA, SHIV, SUUNDER.
Pheer main bhee to swayam nahee chal rahaa hoon .. chal rahaa hoon, keval eesleeye kee veevash hoon; manuushya hoon; jeewan hoon .
Aur jeewan naam hee hai, chalane kaa.
Pheer bhee keesee duusaree aur nahee; oodhar hee jaa rahaa hoon —-jeedhar paav leeye jaa rahe hai aur bechaare paav, maans ke do tuukade, kyaa challenge swayam???? Veh chal rahe hai chalet hokar keesee ke preranaa se hee
Aur ooskaa prerak bhee hai koyee adruush; jeese
PARANTOO ..
Haan!!!! Tuum oose kahate ho Ishwar, SATYA, SHIV, SUUNDAR ..
Pheer Mere paav kuumaarg par kaise .
SAMBANDHON KE TAANE BAANEY
Posted by Aameen Khan in Fantasy on November 10th, 2009
खूब लिखी काव्य रचनाएँ
मगर शब्द-भण्डार अधूरे रहे
सम्बन्ध बनते गए नए नए
मगर "प्रेम पथ" सूने रहे
देखे संबंधों के ताने-बाने
और समझ आया मूल्य आंसुओं का
घाव ताजा होते रहे पूराने
और दर्द-ए-जिगर दिल में बस्ते रहे
याद वोह कराते रहे और हमें
पूराने रिश्ते याद आते रहे
सीख लो जिंदगी के मायने अब भी तुम
नहीं तो बरसों बाद भी कहते फिरोगे
प्यार की राह पर हम अकेले रहे.
EK ULZAN……… PYAR KI…
Posted by Aameen Khan in Fantasy on November 9th, 2009
इक खूबसूरत सुबह के इंतज़ार में
मृगजल पाने की चाह में
प्यास को ज़िन्दगी समझ बैठे
दुनिया के इस भ्रामक माया जाल में
प्यार को ही ज़िन्दगी समाज बैठे
मिले है दर्द ऊजालों से
इसीलिए अंधेरों से प्यार कर बैठे
ऊगते सूर्य का तो सभी स्वागत करते है
प्रेम है या फीर इस दिल की लाचारी
इक ढाई अक्षर के शब्द के लिए
सारा जीवन दाव पर लगा बैठे.
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