Archive for December, 2009

NAYA SAAL

http://datastore.rediff.com/briefcase/58656664585B5C6962636D/wr9bdmko87zzmhzs.D.0.np002.jpgDastak de raha hai naya saal
Jashn ki puri taiyaar hai
Tanki bhar li hai car ki
Disco book karney ki baari hai
 
Duusari or kisaan aaye hai bankar diwaaney
Magar diwaanagi na naye saal ki hai
Baithey hai raaston par
Diwaangi aazaadi pane ki hai
Yaa to phir sarkaar se bheed jaane ki hai
Zindagi ko hi daav par laga rahe hai
Aur hamm
Iss naye saal main aazaadi mana rahe hai
 
Idhar TV par
Naye saal ki puri taiyaari hai
Sabkuuchh bechane ke baad
Ab antarang sambandho ki baari hai

 
Abhishek apani maa se kitana pyaar kartey hai
Iska live telecast kiya jaayega
Mahilaaon ko naye ruup main dikhaaya jaayega
Iskey maadhyam se paarivaarik sambandh may
Giraavat ki nayi sambhaavanaon ko
Talaasha jaayega.

Pheer bhi hamm naya saal manaayenge
Aur ek suur main gaayengey …..

Saarey jahaan se achcha
Hindustaan hamaara……..hammaara
…………………………………………..aameen

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TUMHARE SHAHAR MAIN

Sheetal hawa ke zonkey                                                  Tumharey mandd-mandd muskaan ki baat karatey hai


 


Aasmaan par chchayi kaali ghataayen


Tuumhare ghaney julphon ki baat karati hai


 


Baadalon ke aad mey chchupata nikalata chaand


Tuumharey julfon kee aad se nikharatey huusn ki baat karata hai


 


Titaliyon ki athakheliya


Tuumharee nazaakat ki baat karati hai


 


Guulab ki pankhuudiya


Tuumharey ontho ki baat karati hai


 


Kaali balakhaati naagin


Qamar par balkhaati choti baat kahati hai


 


Chalo aaj tuumharey shahar main thahar jaayen


Tuumhey dekh ley, tuumsey milkar chaley…..


 


Ham terey shahar main aaye hai muusafir ki tarah


Sirf ek baar muulaqaat ka mauka dedo……………..
………………………………………………………..aameen

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dosti………………. prem

Kuuchch na kuuchch kahati rahati hai voh hai dosti                 


Hamesha chuup chuup rahata hai voh hai prem


 


Hamesha aap ka saath dey, voh hai dosti


Juudaayi main dil ko sataaye voh hai prem


 


Dil ko suukuun dey voh hai dosti


Dil ki dhadkan badhaaye voh hai prem


 


Ontho par muuskaan laati hai voh hai dosti


Aankhon main aansuu laati hai voh hai prem


 


Haath pakad kar chalana hai dosti……….. pheer bhi


Kyon duuniya main sabhi log dosti ko chchodkar


Prem karatey hai.??????????

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AYE…….. MERI ZINDAGI

नज़रों  से  देखा  है  तूम्हे

आँखों में  बसाया  है  तूम्हे

काजल  लगाकर  छूपाया है तूम्हे

 

प्रेमभरी यादों  में  सवारा है  तूम्हे

सपनो  के  रथ पर बैठाया है  तूम्हे

पलकों  की नमी में  छूपाया  है  तूम्हे 

आंसुओं की  वेदनाओं  में  अपनाया  है  तूम्हे

ओठो  की  मूस्कूराहट से  सजाया है  तूम्हे

हर साँस मे, दिल की हर धड्कन में जाना है तूम्हे

 

जिन्दगी के हर-एक क्षण  मे; सूख में दूख में

साथ् रहोगी मेरे यही सब मान कर, अए मेरी  जिन्दगी,

मैने इस  तरह  से  सजाया  है  तूम्हे………….
………………………………………aameen

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JAWAAB LENE AAYA HUUN

मैं शायर, ईस  दूनिया  में                                            

प्यार  धुन्ड़ने आया  हूँ

नही  पता  मूज़े  क्या  है  प्रेम

सिर्फ ऊसका नाम  लेकर  आया  हूँ

 

प्रेम नाम से बहुत लगाव है मूज़े

मगर  बेवफाओं का  नाम धुन्ड़ने आया हूँ

प्यार कीसका सफल हुआ है,

ऊसका जवाब लेने आया हूँ  

 

प्यार का पहला शब्द  ही  क्यों  अधूरा  है

ये सवाल  लेकर  आया  हूँ  

क्या  है  जिन्दगी; ये मूज़े नही पता

पर मौत की खबर लेने आया हूँ

 

नसीबवालों को  प्रेम  मीलता  है;

ऊन खूशनासिबो को  धुन्ड़ने आया हूँ…………….

…………………………………………….aameen

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KSHAN…………….

क्षणमें याद आती हो

क्षण में चली जाती हो

हर एक क्षण मे व्याप्त हो तुम

पता नही की तुम मे क्षण है

या तुम क्षण मे बस गई हो.

याद आता है वोह क्षण जब

रखा था तुम्हारे सामने अपना मन

और वोह भी याद है तुम्हारी

ना . ना . करने का क्षण

और फीर ना .ना से हाँ .हाँ

वोह भी एक मनभावक क्षण

कभी कभी तुम्हारा रुठना

हमारा मनाने का वोह क्षण

मेरे कान्धोपर अपना सर राख कर

दो बूँद आँसु गिराने का वोह क्षण

याद है अब भी मूजे

वोह पोंछे हुए आंसुओं के क्षण

यही तो है जिन्दगी अए मेरे दोस्त

इसके जैसी मस्तानी ज़िन्दादिली की क्षण

आवो सब रंजोगम भूला कर

जी ले येह पल दो पल .

येह जिन्दगी के सूनहरे क्षण ..

……………………………………aameen

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GIRIDHAR - VIDYADHAR

घड़ी मे डंके बजाते ही वक़्त की आवाज़ मेरे कानों मे गूंजने लगती है.
ओह, आज भी स्कूल जाने मे देरी होगी. मम्मी……
मम्मी मेरा यूनिफॉर्म कहा है? आज पीटी का पीरियड है;
मेरे व्हाइट शूज निकाल दो. मम्मी, मेरे सॉक्स नही मील रहे है.
और हाँ….. रीसेस मे ज़ोरो की भूक लगती है, नाश्ता जरा ज्यादा देना.
अरे हाँ ……… वाटर बेग भर लू, नही तो पानी की लाइन मे ही रीसेस खत्म हो जाएगी.

आज शनिवार………
पीटी, गणित, सायन्स, हिन्दी, इंग्लीश और हिस्ट्री……….. ओह….गॉड…..हिस्ट्री का तो home work अभी बाकी है. मूगल वंश; शिवाजी; संभाजी; हूमायूं और अकबर…………
ह्म्म्ममम….. मम्मी मूज़े खाना नही है, देर हो रही है, बस छूट जाएगी.

मेरा दिल करता है की घड़ी को तोड़ दूँ. दूनियाकी सारी घड़ियाँ तोड़ दूँ.
अलार्म …… मेरी मीठी मीठी नींद का दूष्मन. सवेरे ऊठकर खेलने को,
जॉगिंग करने को दिल करता है, पर स्कूल पहोचने की फिक्र………….
फिर उपरसे टाइम टेबल, दोपहर को कंपलसरी एक घंटा सो जाना,
शामको ट्यूशन और रात को टीवी…………..

मेरा दिल जब सोने को करता है, तब जागना पड़ता है और
जब खेलने को करता है, तब ज़बरदस्ती सोना पड़ता है…….
क्यों?????? ऐसा क्यों??? जो मूज़े अच्छा नही लगता वही क्यों
करना पड़ता है?…… मैं छोटा हूँ इसीलिए???

ओह हो………….. मैं कब बड़ा बनूँगा? अपनी मर्जी का मालिक…..
इच्छा हुई तो ऊठे, य्ही तो देर ताक़ बिस्तर पर मीठी मीठी नींद लेते रहे.
सवेरे जॉगिंग करना, पापा की तरह चाय पीते पीते अखबार पढ़ना…..
बाथरूम मे गाने गाते गाते देर तक़ नहाते रहना और हाथ मे बेग
लेकर शान के ऑफीस जाना……….. नो होम वर्क नो रिडिंग, नो स्कूल,
नो हरी एंड नो वरी ……….

टीन…टीन……. अरे अरे…….. बस रोको …… मेरी स्कूल आ गयी.
यह पहाड़ जितना बड़ा स्कूल बेग…… इसे ऊठकार चलने से सांस
फूल जाती है……. अरे हा…… याद आया, एक बार हिन्दी के टीचर
ने कहा था की “बाल श्री कृष्ण ने पूरा के पूरा गोवर्धन परबत उठाया
था, इसीलिए उनको गोवर्धन ना से जाना जाता है.”
तब…..तब………तो मेरा नाम………नही…नही….. हम सभी का नाम
…….”विद्याधर” होना चाहिए…… क्यों? हैना????………..
क्योंकि पहाड़ की तरह इस बेग को हम एक दिंन नही….. हर रोज़ जो उठाते है.

YES…………. MY NAME………….
NO……NO……..OUR NAME IS GIRIDHAR…….VIDYADHAR………

टन….टन…..टन……भागो…….विद्याधर…… स्कूल की लॉंग बेल हुई,
भागो….. इस घड़ी की तरह यह स्कूल बेल भी मेरा एक नंबर का
दूष्मन है. बेल बजाते ही ………किताब, टीचर, इंग्लिश, हिन्दी, ग्रामर…….
रट्टा मारो, थोक बंद कापिया, हिदायते……और home work…….

मेरी आँखे छोटी लगाने लगी इन सबके लिए, और मूज़े
दूसरी दो आँखे मिल गयी, गिफ़्ट मे….. नही समझे?????
दोस्तो….. मेरी छोटी छोटी आँखों पर बड़े से चश्मे फिट हो गये………..

मेरी चार आंखो वाली दुनिया…….. घड़ी की सुईओं पर चलता
हुआ हमारा परिवार…….. मम्मी, पापा की नौकरी, दीदी और
मेरा स्कूल, ट्यूशन …….कभी भाग रहे है…..सभी जल्दी मे है……
इसीलिए कुछ चूक जाते है……और इस वजहसे मम्मी,
पापा का गुस्सा कभी मुझपर निकलता है………बेचारा
…..मैं………. सबसे छोटा हूँ………..

मम्मी चाहती है मैं क्रिकेटर बनू और पापा की इच्छा है की डॉक्टर….
लेकिन कोई भी मुझ से नही पूछता की मुझे क्या बनना है.
मुझे क्या अछा लगता है…… सच बताऊ….. मन तो करता है,
झूले पर बैठ कर झूलू, रात मे आकाश सा तारे देखू, उससे दोस्ती करू,
तितलियों के पीछे भागू…………

पक्षियों को समय का बंधन नही होता, हवा के गले मे कोई स्कूल
की घंटी नही लटकाता, जब की मैं???? घरवालों की इचाओं मे जकड़ा
हुआ हूँ…………… नही, मुझे डॉक्टर नही बनना, क्रिकेटर बनकर
शेखी नही मारनी…… मुझे तो बनना है….मेरी इच्छाओंका, अकांशाओंका बादशाह………….

बस!!!!! मुझे बड़ा होना है, अपने मनमर्जी से जीने मिले, इतना
बड़ा……… मुझे सबसे छोटा, नासमझ, “बिचारे” बचपन का बोझ
लगता है….. मुझे तो चाहिए बोझ बगैर का ग्यान, मुक्त आनंद
और छोटे हो फिर भी अपनी मनमर्जी से जी सके ऐसा मनमोहक
सूंदर जीवन…. जिसे देखकर बड़े भी कह ऊठे……………………..

यह दौलत भी लेलो; यह शोहरत भी लेलो
भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी
मगर मुझको लौटा दो, बचपन का सावन

वो काग़ज़ की कश्ती; वो बारिश का पानी………..

……………………………..aameen

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TUMHARA SAATH HONE SEY !!!!!!

हो विषाद चाहे जितना भी जीवन में

मगर क्या मैं तूम्हे भूल जाऊ?

छोटी छोटी बातों को लेकर

क्या मैं तूमको रूसवा करु?

दूसरों को हसाने की आदत है हमे

कभी मौका मिले तो चूपके से रो लेता हूँ

अगर पूच्चा किसीने, “क्या हुआ?” तो

आँख मैं तिनका गीरा, कह देता हूँ

अब तो दुख भी मूजे खूब पहचानाने लगे है

जब भी मिलते है; कैसे हो कह्कर निकल जाते है.

खूदा भी हर कदम पर इम्ताहान लेता है

तुम्हारे साथ् होने से हमेशा पास होता हूँ …………….

……………………………………………….aameen

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TAMANNA !!!!!!

प्रिये ना ही तुम

धवल मोगारा; ना ही लाल गुलाब

ना चम्पा ना चमेली

नाही रसभरी पारिजात

ना ही खूश्बुदार जूही तुम

ना ही महकती रजनीगन्धा

चन्द्रमुखी नही; नाही सूर्यमुखी

नाही तुम उषा-सन्ध्या समान

कण्ठ नही कोयल का; ना मोरनी का रूप

ना ही नशिली आँखे की छलके जिनसे जाम

जो भी धूँड़ना चाहा तुम मे

वोह ना देख पाया मे

फीर भी आरजु तुम्हारी

दिल से भूला ना पाया मे

चाहू तुम्हे इसी जन्म मे

और अगले सात जन्म तक…………..

…………………………………………….aameen

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