Archive for February 5th, 2010
KITANI HASEEN HO
Posted by Aameen Khan in Fantasy on February 5th, 2010
![]()
कितनी हसीन, किसी ख्वाब सी लगती हो तुम
जिल्द से निकली कोई किताब सी लगती हो तुम
ज़ुल्फ़ों को झटकती हुई, जब आती हो नहाकर
ओस मे भीगे हुए गुलाब सी लगती हो तुम
चहेरे पर गिरी जुल्फों को हाथों से उठाती हो जब
हर किसी को करती हुई….”आदाब” सी लगती हो तुम
जब भी देखे आशिक़ तो, लगे है नया-नया चहेरा
कभी आसान, कभी उलझी, हिसाब सी लगती हो तुम
Recent Comments